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रिपोर्टर: अमित दीक्षित पीलीभीत उत्तर प्रदेश



पीलीभीत। जनपद में पुलिस ने एक बड़े स्वास्थ्य घोटाले और अवैध नशीली दवाओं के कारोबार का पर्दाफाश किया है। थाना घुंघचाई पुलिस ने छापेमारी कर घर के भीतर चल रही नकली कफ सिरप बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में तैयार सिरप, खाली बोतलें और उपकरण बरामद करते हुए एक झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार किया है, जो यूट्यूब के जरिए जहर बनाने की विधि सीखकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा था।
छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस द्वारा अभियुक्त सुरेश कुमार (निवासी लाह, थाना पूरनपुर) के घर दी गई दबिश में निम्नलिखित सामग्री बरामद हुई है:
तैयार सिरप: 340 शीशी Topex Gold और 35 शीशी Coyorex-T।
रॉ मटेरियल: 488 नई खाली शीशियाँ, 110 रैपर, 1939 ढक्कन और स्प्रिट।
उपकरण: पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला छोटा गैस सिलेंडर और एक मोटरसाइकिल।
कम्पाउंडर से 'जहर' का सौदागर बनने तक का सफर
पूछताछ में सामने आया कि सुरेश कुमार ने साल 2003 में पीलीभीत के एक अस्पताल में कम्पाउंडरी सीखी थी। इसके बाद उसने अपने गांव और शाहजहाँपुर के मझगंवा में क्लिनिक खोलकर लोगों का इलाज करना शुरू किया। करीब 2 साल पहले उसने यूट्यूब पर नकली कफ सिरप बनाने का तरीका सीखा। उसने चीनी के शीरे, स्प्रिट, ऑरेंज फ्लेवर और DX सिरप के घोल से नकली दवा तैयार करना शुरू कर दिया।
मुनाफे का गंदा खेल: ₹80 की लागत, ₹800 में बिक्री
अभियुक्त ने खुलासा किया कि नकली सिरप का धंधा बेहद मुनाफे वाला था:
लागत: 10 शीशियाँ तैयार करने में मात्र 75-80 रुपये खर्च होते थे।
कमाई: वही 10 शीशियाँ बाजार में 600 से 800 रुपये में बिकती थीं।
टारगेट: वह इसे नशेड़ियों को 80 से 100 रुपये प्रति शीशी के हिसाब से बेचता था। असली जैसा स्वाद देने के लिए वह इसमें थोड़ी मात्रा में असली सिरप और स्प्रिट मिला देता था।
मेडिकल स्टोरों का नेटवर्क और पुलिस की कार्रवाई
अभियुक्त यह नकली माल पूरनपुर के साई मेडिकल स्टोर, गिरिराज मेडिकल स्टोर और उमापति मंडल को सप्लाई करता था। पुलिस अब इन मेडिकल स्टोरों के खिलाफ भी विधिक कार्यवाही कर रही है। आरोपी के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं और ट्रेड मार्क एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
जनता के लिए चेतावनी
पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि दवा खरीदते समय हमेशा बारकोड और उसकी प्रामाणिकता की जाँच करें। साथ ही मेडिकल स्टोर संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे बिना पक्के बिल के किसी भी वेंडर से दवा न खरीदें।

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भारत सरकारने जुन्या 'आयकर कायदा १९६१' च्या जागी आता 'आयकर कायदा, २०२५' (Income-tax Act, 2025) आणला आहे. या नवीन कायद्याचा मुख्य उद्देश कर प्रणाली अधिक सुलभ आणि पारदर्शक करणे हा आहे. या अंतर्गत, TDS (Tax Deducted at Source) आणि TCS (Tax Collected at Source) च्या अनेक कलमांचे एकत्रिकरण करण्यात आले आहे.
१ एप्रिल २०२६ पासून लागू होणारे हे महत्त्वाचे बदल खालीलप्रमाणे आहेत:
नवीन संरचना आणि बदललेली कलमे (New Framework)
जुन्या कायद्यातील विखुरलेली कलमे आता मुख्यत्वे तीन विभागांत विभागली गेली आहेत:
नवीन कलम व्याप्ती आणि तपशील जुनी कलमे (ज्यांच्या जागी नवीन आले) कलम ३९२ | पगारावर होणारी TDS कपात (Salary) कलम १९२, १९२A (EPF मधून पैसे काढणे)
कलम ३९३ पगाराव्यतिरिक्त इतर सर्व देणी (Interest, Rent, Fees) कलम १९४A (व्याज), १९४I (भाडे), १९४J (व्यावसायिक फी), १९४C (कंत्राट) इ. कलम ३९४ TCS संबंधित सर्व तरतुदी (Consolidated TCS) कलम २०६C (मोटार वाहन विक्री, परदेश प्रवास, LRS इ.)
महत्त्वाचे बदल आणि त्यांचे परिणाम
१. कलम ३९३ अंतर्गत एकत्रिकरण
व्यावसायिक आणि उद्योजकांसाठी हा सर्वात मोठा बदल आहे. आता व्याज, भाडे, कमिशन किंवा व्यावसायिक फीसाठी वेगवेगळ्या कलमांचा अभ्यास करण्याची गरज नाही. हे सर्व कलम ३९३ अंतर्गत समाविष्ट करण्यात आले आहे.
२. टॅक्स कपातीची मर्यादा (Threshold Limits) वाढवली
सामान्यांना दिलासा देण्यासाठी टॅक्स कापण्याच्या किमान मर्यादेत वाढ करण्यात आली आहे:
भाडे (Rent): भाड्यावर TDS कापण्याची मर्यादा वार्षिक ₹२.४ लाखांवरून वाढवून ₹६ लाख करण्यात आली आहे.
ज्येष्ठ नागरिक: ज्येष्ठ नागरिकांसाठी व्याजावरील TDS मर्यादा ₹५०,००० वरून ₹१ लाख करण्यात आली आहे.
लाभांश (Dividend): लाभांशावरील TDS मर्यादा ₹५,००० वरून ₹१०,००० करण्यात आली आहे.
३. TCS मध्ये सुसूत्रता (कलम ३९४)
परदेशी व्यवहार (LRS): परदेशात पैसे पाठवताना (LRS) आता ₹१० लाखांपर्यंत कोणत्याही प्रकारचा TCS लागणार नाही (याआधी ही मर्यादा ₹७ लाख होती).
वाहनांची खरेदी: महागड्या गाड्यांच्या खरेदीवर लागणाऱ्या TCS नियमांचे सुलभीकरण करण्यात आले आहे.
४. अनुपालन (Compliance) सुलभता
आयटीआर (ITR) न भरणाऱ्या व्यक्तींकडून दुप्पट दराने टॅक्स कापण्याचे जाचक नियम (पूर्वीचे २०६AB) आता शिथिल करण्यात आले आहेत, ज्यामुळे कंपन्यांवरील पेपरवर्कचा ताण कमी होईल.
करदात्यांवर होणारा परिणाम
नोकरदार वर्ग: पगार आणि पीएफ काढण्यावर होणारी टॅक्स कपात आता एकाच कलमांतर्गत (३९२) येईल, ज्यामुळे प्रक्रिया सोपी होईल.
व्यापारी वर्ग: व्यापाऱ्यांना आता शेकडो कलमांऐवजी केवळ कलम ३९३ नुसार हिशोब ठेवावा लागेल.
सामान्य नागरिक: टॅक्स कपातीची मर्यादा वाढल्यामुळे हातातील रोख रक्कम (Cash Flow) वाढण्यास मदत होईल.
हे सर्व बदल 'आर्थिक वर्ष २०२६-२७' पासून लागू होतील. करदात्यांना त्यांच्या सॉफ्टवेअर आणि हिशोबाच्या पद्धतींमध्ये त्यानुसार बदल करावे लागतील.

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रिपोर्टर: अमित दीक्षित

चंडीगढ़ | विश्व हिंदू परिषद, चंडीगढ़ (पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने पंजाब सरकार के समक्ष एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर अपील की है कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व को सरकारी स्तर पर राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाए।
सनातन संस्कृति और एकता का प्रतीक
महंत मनोज शर्मा ने अपने पत्र में तर्क दिया कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और संतों की धरती है, जहाँ हर धर्म का सम्मान होता है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देने जैसा होगा।
अन्य राज्यों का दिया हवाला
महंत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
जब अन्य राज्यों में बड़े धार्मिक पर्वों को सरकारी संरक्षण प्राप्त होता है, तो पंजाब में महाशिवरात्रि को लेकर परहेज क्यों?
सरकारी आयोजन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का संचार होगा।
हिंदू समाज की आस्था और परंपराओं की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं की मांग
महंत मनोज शर्मा ने मांग की है कि राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर सरकार की ओर से:
विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का प्रबंध हो।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
उन्होंने आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इस विषय की गंभीरता को समझेंगे और जल्द ही एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर हिंदू समाज को हर्षित करेंगे।

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