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जलगांव जिला परिषद में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का खुलासा: दो कर्मचारियों पर CEO का लोहा, निलंबन की बिजली सीधी चोट

जलगांव। राज्यव्यापी दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग की जांच मोहिम ने जलगांव जिला परिषद (ZP) के वित्त विभाग में भ्रष्टाचार का पिटारा खोल दिया! फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हथियाने वाले दो कर्मचारियों पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिनल करनवाल ने शुक्रवार (9 जनवरी) को बिजली की स्पीड से निलंबन की कार्रवाई की। यह मामला जिला परिषद में कोटे के दुरुपयोग का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो रहा है, जिससे शासन और दिव्यांग भाइयों-बहनों में रोष फैल गया है।पाचोरा पंचायत समिति में तैनात वरिष्ठ सहायक लेखा विक्रम पाटील और धरणगाव पंचायत समिति के कनिष्ठ सहायक लेखा संतोष पाटील को दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी मिली थी। लेकिन UDID कार्ड और वास्तविक जांच के बीच आसमान-जमीन का फर्क निकला! विक्रम का कार्ड 70% अल्पदृष्टि दिव्यांगता का था, मगर जलगांव के सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालय की जांच में महज 10% ही पाई गई। वहीं, संतोष का कार्ड 40% क्षीण दृष्टि का दावा करता था, लेकिन रिपोर्ट में शून्य प्रतिशत (0%) आया—पूर्णतः फिट व्यक्ति साबित हुए!CEO मिनल करनवाल ने इसे शासन को दिशा भूल कराने वाला अपराध ठहराते हुए तत्काल निलंबन आदेश जारी किया। जिला परिषद सूत्रों के अनुसार, यह जांच मोहिम अभी जारी है और और भी मामलों का खुलासा होने की संभावना है। अब सवाल उठ रहा है—कितने और फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरियां बिकीं? जिला परिषद ने जांच समिति गठित की है, जिसकी रिपोर्ट से बड़ा धमाका हो सकता है।दिव्यांग संगठनों ने CEO के कदम का स्वागत किया है, लेकिन मांग की है कि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। यह घटना महाराष्ट्रभर में कोटा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

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