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एनटीपीसी रिहंद में गैस का ‘खेल’! को-ऑपरेटिव एजेंसी पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप, हफ्तों से उपभोक्ता परेशान ।।
एनटीपीसी रिहंद में गैस का ‘खेल’! को-ऑपरेटिव एजेंसी पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप, हफ्तों से उपभोक्ता परेशान ।।
एनटीपीसी रिहंद में गैस का ‘खेल’! को-ऑपरेटिव एजेंसी पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप, हफ्तों से उपभोक्ता परेशान ।।
बीजपुर (सोनभद्र) स्थानीय एनटीपीसी रिहंद परियोजना परिसर में संचालित को-ऑपरेटिव इण्डेन गैस एजेंसी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। क्षेत्रीय उपभोक्ताओं और व्यवसायियों ने एजेंसी संचालक पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए गैस सिलेंडरों की भारी कालाबाजारी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि बुकिंग और डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) जारी होने के बावजूद हफ्तों तक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जबकि पर्दे के पीछे ऊंचे दामों पर सिलेंडरों की बिक्री की जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीजपुर क्षेत्र में भारत गैस और बभनी स्थित इंडेन गैस एजेंसी द्वारा नियमित और पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है, लेकिन एनटीपीसी को-ऑपरेटिव गैस गोदाम में लगातार “गैस नहीं है” का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं को टरकाया जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने 1 अप्रैल को ही गैस बुक कराई थी और उन्हें डीएसी नंबर भी प्राप्त हो चुका है, बावजूद इसके आज तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हुई।
व्यवसायियों का कहना है कि रोजमर्रा के कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। छोटे होटल, ढाबा और अन्य व्यवसाय गैस की कमी के चलते प्रभावित हो रहे हैं। एजेंसी संचालक द्वारा बार-बार “गाड़ी नहीं आ रही है” का हवाला दिया जा रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दबी जुबान से कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ एनटीपीसी कर्मियों की भी शह मिली हुई है। बताया जाता है कि को-ऑपरेटिव के तहत बड़ी संख्या में गैस कनेक्शन एनटीपीसी कर्मचारियों के नाम पर हैं। परियोजना परिसर में 24 घंटे बिजली उपलब्ध रहने के कारण इन कर्मचारियों द्वारा गैस की खपत अपेक्षाकृत कम होती है। इसी का फायदा उठाते हुए एजेंसी संचालक कथित रूप से कर्मचारियों के नाम पर खुद ही बुकिंग कराता है और बाद में गैस की कृत्रिम किल्लत दिखाकर उन्हीं सिलेंडरों को बाजार में दोगुने-तिगुने दामों पर बेच देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आसपास की अन्य एजेंसियों में गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, तो केवल रिहंद को-ऑपरेटिव में ही आपूर्ति बाधित क्यों है? क्या यह महज संयोग है या फिर सुनियोजित कालाबाजारी का हिस्सा?
आक्रोशित उपभोक्ताओं ने एनटीपीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में गैस संकट और गहराता जाएगा तथा आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वाकई उपभोक्ताओं को राहत मिल पाती है या नहीं।
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