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धनबाद में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
धनबाद में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
निजी अस्पताल, क्लिनिक और नर्सिंग होम के शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन व नियमों के अनुपालन पर जोर
धनबाद | 21 मई 2026:-जिले के सभी निजी अस्पतालों, क्लिनिकों और नर्सिंग होम का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन के निर्देश पर आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, एमओआईसी और पुलिस पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में रांची से आए क्लिनिकल कंसलटेंट श्री मुकेश कुमार ने पंजीकरण प्रक्रिया, कानूनी प्रावधान, निरीक्षण व्यवस्था और नियमों के अनुपालन से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर अनुमंडल दंडाधिकारी श्री लोकेश बारंगे ने कहा कि जिले के सभी अस्पतालों, क्लिनिकों और नर्सिंग होम में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से पहले संबंधित संस्थानों को सूचना दी जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सा संस्थान में प्रमुख स्थान पर पंजीकरण प्रमाण पत्र, फायर सेफ्टी उपकरण, डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की सूची, सेवाओं और प्रक्रियाओं की दर सूची, उपलब्ध सुविधाएं, बेड की संख्या, नागरिक चार्टर, रोगी अधिकार, शिकायत निवारण संपर्क, आपातकालीन नंबर, दवाओं की सूची और बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए।
एसडीएम ने नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को नोटिस जारी करने तथा लगातार अनियमितता पाए जाने पर जुर्माना और गंभीर मामलों में संस्थान को सील करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से मेडिकल स्टोर के आसपास संचालित क्लिनिकों के लाइसेंस की जांच करने और प्रखंड स्तर पर भी नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा।
प्रशिक्षण में सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. इंदर सिंह नामधारी, डीआरसीएचओ डॉ. रोहित गौतम, डीपीएम श्रीमती प्रतिमा कुमारी सहित स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के कई अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन का यह कदम जिले में स्वास्थ्य संस्थानों की पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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