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भारत-पाक संघर्ष में चीन की भूमिका पर बड़ा खुलासा, पहली बार तकनीकी सहायता देने की पुष्टि
भारत-पाक संघर्ष में चीन की भूमिका पर बड़ा खुलासा, पहली बार तकनीकी सहायता देने की पुष्टि
भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को लेकर चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने पाकिस्तान को ऑन-साइट तकनीकी सहायता प्रदान की थी। यह खुलासा चीन के सरकारी प्रसारक CCTV पर प्रसारित एक इंटरव्यू के बाद सामने आया, जिसकी पुष्टि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सरकारी रक्षा कंपनी Aviation Industry Corporation of China (AVIC) से जुड़े इंजीनियर झांग हेंग ने स्वीकार किया कि वे मई 2025 में भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में मौजूद थे और वहां तकनीकी सहयोग दे रहे थे। झांग, AVIC के Chengdu Aircraft Design and Research Institute से जुड़े हैं, जो चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक के विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा था तनाव:
यह संघर्ष अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। भारतीय पक्ष के अनुसार इस कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए थे।
इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तीव्र सैन्य तनाव बना रहा। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इसे हाल के दशकों की सबसे बड़ी हवाई मुठभेड़ों में से एक बताया गया।
चीनी लड़ाकू विमानों की भी चर्चा:
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान ने इस संघर्ष में चीन निर्मित J-10CE लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। कुछ विदेशी रिपोर्टों में दावा किया गया कि चीनी तकनीक से लैस विमानों ने भारतीय विमानों को निशाना बनाया, हालांकि इन दावों पर भारत की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चीन के इंजीनियर झांग हेंग ने CCTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि संघर्ष के दौरान वे ऐसे सैन्य बेस पर तैनात थे जहां लगातार लड़ाकू विमानों की आवाज और एयर-रेड सायरन सुनाई देते थे। उन्होंने इसे मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ सकती है चिंता:
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस सार्वजनिक स्वीकारोक्ति से दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति पर असर पड़ सकता है। अब तक चीन आधिकारिक तौर पर केवल कूटनीतिक समर्थन तक सीमित दिखाई देता था, लेकिन तकनीकी सहायता की पुष्टि से भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोणीय समीकरण पर नई बहस शुरू हो सकती है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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