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NEET पेपर लीक के सदमे में छात्रा की मौत! डॉक्टर बनने का सपना अधूरा, कर्ज में डूबे पिता की बेटी ने लगाई फांसी
NEET पेपर लीक के सदमे में छात्रा की मौत! डॉक्टर बनने का सपना अधूरा, कर्ज में डूबे पिता की बेटी ने लगाई फांसी
रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र कुमार पाण्डेय
मऊगंज (मध्य प्रदेश)। मऊगंज जिले के देवतालाब विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नईगढ़ी थाना क्षेत्र की पूर्वा पंचायत के मगनिया गांव की 18 वर्षीय होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना संजोए आकांक्षा ने कथित तौर पर NEET परीक्षा से जुड़ी घटनाओं और पारिवारिक परिस्थितियों से आहत होकर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
घटना के बाद विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों और मीडिया टीम ने मृतिका के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। घर का माहौल बेहद गमगीन था। पिता सदमे में थे, मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और परिजन बेटी की याद में बिलख रहे थे।
डॉक्टर बनने का सपना, पिता का संघर्ष
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी मूल रूप से किसान परिवार से हैं। बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए वे नागपुर जाकर कुक का काम करने लगे। परिवार ने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए जमीन गिरवी रखी, बैंक से ऋण लिया और हर संभव त्याग किया।
परिजनों के अनुसार आकांक्षा पढ़ाई में बेहद मेधावी थी और NEET परीक्षा को लेकर आत्मविश्वास से भरी हुई थी। परीक्षा देकर बाहर निकली तो उसके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उसे विश्वास था कि वह अच्छे अंकों से सफल होगी और डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेगी।
पेपर लीक की खबर के बाद टूटी उम्मीद
परिवार का कहना है कि परीक्षा के बाद जब पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की चर्चाएं सामने आईं, तब से आकांक्षा गहरी चिंता में रहने लगी। उसे बार-बार यह डर सताता था कि दोबारा परीक्षा में वही प्रदर्शन कर पाएगी या नहीं। पिता की खराब सेहत और परिवार पर बढ़ते कर्ज का बोझ भी उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
आकांक्षा ने अपने पीछे एक भावुक पत्र छोड़ा, जिसमें उसने लिखा—
"मम्मी-पापा, आपको मुझ पर भरोसा था कि मैं पढ़-लिखकर डॉक्टर बन जाऊंगी, लेकिन अब दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है। पहले पेपर में मेरे अच्छे अंक आने वाले थे, लेकिन अब क्या होगा इसकी कोई गारंटी नहीं। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया..."
इन शब्दों ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
मां बोलीं— सिस्टम के आगे हार गई मेरी बेटी
आकांक्षा की मां ने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कोई भी मां अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी मेहनती थी और डॉक्टर बनकर परिवार का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन परिस्थितियों ने उसे तोड़ दिया।
सियासत भी गरमाई
इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
बड़ा सवाल
आकांक्षा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके जाने के बाद कई सवाल पीछे छोड़ गई है। क्या छात्रों की मेहनत और सपनों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर्याप्त है? क्या पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होगी? और क्या किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द फिर नहीं झेलना पड़ेगा?
इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरा देश कर रहा है।
मऊगंज स्पेशल रिपोर्ट
NEET पेपर लीक के सदमे में छात्रा की मौत! डॉक्टर बनने का सपना अधूरा, कर्ज में डूबे पिता की बेटी ने लगाई फांसी
रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र कुमार पाण्डेय
मऊगंज (मध्य प्रदेश)। मऊगंज जिले के देवतालाब विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नईगढ़ी थाना क्षेत्र की पूर्वा पंचायत के मगनिया गांव की 18 वर्षीय होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना संजोए आकांक्षा ने कथित तौर पर NEET परीक्षा से जुड़ी घटनाओं और पारिवारिक परिस्थितियों से आहत होकर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
घटना के बाद विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों और मीडिया टीम ने मृतिका के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। घर का माहौल बेहद गमगीन था। पिता सदमे में थे, मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और परिजन बेटी की याद में बिलख रहे थे।
डॉक्टर बनने का सपना, पिता का संघर्ष
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी मूल रूप से किसान परिवार से हैं। बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए वे नागपुर जाकर कुक का काम करने लगे। परिवार ने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए जमीन गिरवी रखी, बैंक से ऋण लिया और हर संभव त्याग किया।
परिजनों के अनुसार आकांक्षा पढ़ाई में बेहद मेधावी थी और NEET परीक्षा को लेकर आत्मविश्वास से भरी हुई थी। परीक्षा देकर बाहर निकली तो उसके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उसे विश्वास था कि वह अच्छे अंकों से सफल होगी और डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेगी।
पेपर लीक की खबर के बाद टूटी उम्मीद
परिवार का कहना है कि परीक्षा के बाद जब पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की चर्चाएं सामने आईं, तब से आकांक्षा गहरी चिंता में रहने लगी। उसे बार-बार यह डर सताता था कि दोबारा परीक्षा में वही प्रदर्शन कर पाएगी या नहीं। पिता की खराब सेहत और परिवार पर बढ़ते कर्ज का बोझ भी उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
आकांक्षा ने अपने पीछे एक भावुक पत्र छोड़ा, जिसमें उसने लिखा—
"मम्मी-पापा, आपको मुझ पर भरोसा था कि मैं पढ़-लिखकर डॉक्टर बन जाऊंगी, लेकिन अब दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है। पहले पेपर में मेरे अच्छे अंक आने वाले थे, लेकिन अब क्या होगा इसकी कोई गारंटी नहीं। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया..."
इन शब्दों ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
मां बोलीं— सिस्टम के आगे हार गई मेरी बेटी
आकांक्षा की मां ने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कोई भी मां अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी मेहनती थी और डॉक्टर बनकर परिवार का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन परिस्थितियों ने उसे तोड़ दिया।
सियासत भी गरमाई
इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
बड़ा सवाल
आकांक्षा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके जाने के बाद कई सवाल पीछे छोड़ गई है। क्या छात्रों की मेहनत और सपनों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर्याप्त है? क्या पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होगी? और क्या किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द फिर नहीं झेलना पड़ेगा?
इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरा देश कर रहा है।
मऊगंज स्पेशल रिपोर्ट
NEET पेपर लीक के सदमे में छात्रा की मौत! डॉक्टर बनने का सपना अधूरा, कर्ज में डूबे पिता की बेटी ने लगाई फांसी
रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र कुमार पाण्डेय
मऊगंज (मध्य प्रदेश)। मऊगंज जिले के देवतालाब विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नईगढ़ी थाना क्षेत्र की पूर्वा पंचायत के मगनिया गांव की 18 वर्षीय होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना संजोए आकांक्षा ने कथित तौर पर NEET परीक्षा से जुड़ी घटनाओं और पारिवारिक परिस्थितियों से आहत होकर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
घटना के बाद विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों और मीडिया टीम ने मृतिका के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। घर का माहौल बेहद गमगीन था। पिता सदमे में थे, मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और परिजन बेटी की याद में बिलख रहे थे।
डॉक्टर बनने का सपना, पिता का संघर्ष
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी मूल रूप से किसान परिवार से हैं। बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए वे नागपुर जाकर कुक का काम करने लगे। परिवार ने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए जमीन गिरवी रखी, बैंक से ऋण लिया और हर संभव त्याग किया।
परिजनों के अनुसार आकांक्षा पढ़ाई में बेहद मेधावी थी और NEET परीक्षा को लेकर आत्मविश्वास से भरी हुई थी। परीक्षा देकर बाहर निकली तो उसके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उसे विश्वास था कि वह अच्छे अंकों से सफल होगी और डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेगी।
पेपर लीक की खबर के बाद टूटी उम्मीद
परिवार का कहना है कि परीक्षा के बाद जब पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की चर्चाएं सामने आईं, तब से आकांक्षा गहरी चिंता में रहने लगी। उसे बार-बार यह डर सताता था कि दोबारा परीक्षा में वही प्रदर्शन कर पाएगी या नहीं। पिता की खराब सेहत और परिवार पर बढ़ते कर्ज का बोझ भी उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
आकांक्षा ने अपने पीछे एक भावुक पत्र छोड़ा, जिसमें उसने लिखा—
"मम्मी-पापा, आपको मुझ पर भरोसा था कि मैं पढ़-लिखकर डॉक्टर बन जाऊंगी, लेकिन अब दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है। पहले पेपर में मेरे अच्छे अंक आने वाले थे, लेकिन अब क्या होगा इसकी कोई गारंटी नहीं। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया..."
इन शब्दों ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
मां बोलीं— सिस्टम के आगे हार गई मेरी बेटी
आकांक्षा की मां ने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कोई भी मां अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी मेहनती थी और डॉक्टर बनकर परिवार का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन परिस्थितियों ने उसे तोड़ दिया।
सियासत भी गरमाई
इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
बड़ा सवाल
आकांक्षा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके जाने के बाद कई सवाल पीछे छोड़ गई है। क्या छात्रों की मेहनत और सपनों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर्याप्त है? क्या पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होगी? और क्या किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द फिर नहीं झेलना पड़ेगा?
इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरा देश कर रहा है।
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