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डमी राइस मिल का भंडाफोड़, 32 टन चावल जप्त
डमी राइस मिल का भंडाफोड़, 32 टन चावल जप्त
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर जीरो टॉलरेंस
डमी राइस मिल का भंडाफोड़, 32 टन चावल जप्त
गोयल एग्रो राइस मिल दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट
(छत्तीसगढ़) जिला: एम.सी.बी. 02 फरवरी 2026 कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी व्यवस्था की सघन निगरानी करते हुए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुघरी, तहसील भरतपुर में 16 दिसंबर 2025 को संदेह के आधार पर 32 टन चावल से भरे वाहन क्रमांक CG 10 BM 2906 को खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जप्त किया गया। पूछताछ में वाहन चालक ने बताया कि उक्त चावल गोयल एग्रो राइस मिल, केंवटी (केल्हारी) द्वारा बिहार से मंगवाया गया था। सूचना के बाद राइस मिल की जांच हेतु संचालक को बुलाया गया, किंतु समय पर उपस्थित नहीं होने के कारण उसी दिन मिल को सील बंद कर दिया गया। 22 दिसंबर 2025 को सील खोलकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भरतपुर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व केल्हारी एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया। जांच में मिल में 774.04 क्विंटल चावल की भारी कमी पाई गई। साथ ही आवश्यक बी-1 पंजी का संधारण नहीं, मासिक विवरणी का अभाव तथा मिलिंग के अनुरूप विद्युत खपत में असामान्य कमी सामने आई, जिससे मिल के लंबे समय से बंद रहने की पुष्टि हुई। मिल परिसर में अत्यधिक गंदगी पाई गई। चावल सड़ी अवस्था में मिले तथा भंडारण स्थल पर चूहे व कबूतरों की गंदगी मौजूद थी, जिससे फूड प्वाइजनिंग सहित गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका जताई गई। गुणवत्ता एवं विद्युत खपत के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि मिल डमी मिल के रूप में संचालित की जा रही थी। प्रकरण में राइस मिल संचालक संजीव कुमार गोयल को 1 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका उत्तर 5 जनवरी 2026 को प्राप्त हुआ। दस्तावेजों के परीक्षण के उपरांत यह सिद्ध हुआ कि मिल द्वारा छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 का उल्लंघन किया गया है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए गोयल एग्रो राइस मिल, केंवटी (केल्हारी) को दो वर्षों के लिए काली सूची में दर्ज कर दिया है। कस्टम मिलिंग वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 में उक्त मिल का शासकीय धान उपार्जन हेतु पंजीयन नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में गड़बड़ी और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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