पड़री में परशुराम जन्मोत्सव: भक्ति की गूंज, संस्कारों का संदेश और मूर्ति स्थापना की मांग तेज
पड़री में परशुराम जन्मोत्सव: भक्ति की गूंज, संस्कारों का संदेश और मूर्ति स्थापना की मांग तेज
मिर्ज़ापुर (पड़री /पहाड़ी ) :- पड़री बाजार में मां विंध्यवासिनी कंप्यूटर सेंटर के तत्वावधान में भगवान परशुराम जन्मोत्सव अत्यंत भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। पूरा परिसर मानो श्रद्धा और भक्ति के प्रकाश से आलोकित हो उठा—वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पों की सुगंध, दीपों की ज्योति और श्रद्धालुओं की आस्था ने इस आयोजन को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजन-अर्चन एवं मंगलाचरण से हुआ। भगवान परशुराम की प्रतिमा को पुष्पमालाओं से सुसज्जित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। गूंजते जयकारों और भक्ति गीतों ने वातावरण को और अधिक ऊर्जावान एवं पवित्र बना दिया। इस अवसर पर डॉ. विशाल त्रिपाठी (जिला सचिव), पत्रकार अभय त्रिपाठी (समाजिक वक्ता), पंडित कार्तिकेय दुबे (जिला अध्यक्ष), शिखर ओझा (जिला कार्यकारिणी सदस्य), शाश्वत मिश्रा (जिला महासचिव सदस्य), गौरव पाण्डेय (जिला मीडिया प्रभारी), हर्षित मिश्रा (ब्लॉक अध्यक्ष), विपुल मिश्रा (जिला उपाध्यक्ष), समाजसेवी आनंद दुबे, अनिश कुमार ओझा (प्रदेश अध्यक्ष, सवर्ण आर्मी भारत युवा मोर्चा), सिद्धार्थ दुबे (ब्लॉक उपाध्यक्ष), सचिन दुबे (ब्लॉक सचिव) एवं अभय त्रिपाठी शिवम उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। डॉ. विशाल त्रिपाठी (जिला सचिव) ने कहा कि भगवान परशुराम का अवतार अन्याय के अंधकार में न्याय के प्रकाश का प्रतीक है, जो हमें सत्य, साहस और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। पंडित कार्तिकेय दुबे (जिला अध्यक्ष) ने अपने उद्बोधन में कहा कि परशुराम जी का जीवन त्याग, तपस्या और अनुशासन की पराकाष्ठा है, जो आज भी समाज को नैतिक दिशा प्रदान करता है। अनिश कुमार ओझा (प्रदेश अध्यक्ष, सवर्ण आर्मी भारत युवा मोर्चा) ने कहा कि भगवान परशुराम आत्मसम्मान और स्वाभिमान के प्रतीक हैं, जिनका तेज समाज को जागरूक और सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है। अभय त्रिपाठी (समाजिक वक्ता) ने सामाजिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि परशुराम जी का संदेश सम्पूर्ण मानवता के लिए है—समानता, न्याय और समरसता के माध्यम से ही एक सुदृढ़ और संगठित समाज का निर्माण संभव है। दीपक तिवारी (समाजिक विचारक) ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक देवता नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाभिमान और धर्म के जीवंत प्रतीक हैं, जिनके आदर्श आज के समाज में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। “नमामि भृगुनन्दनं क्षत्रियान्तककारकम्। जमदग्निसुतं वीरं परशुरामं नमाम्यहम्॥”
“परशु धारण कर करुणा धाम, धर्म रक्षा में सदा विराम। अधर्म विनाशक, सत्य के राम, जय-जय श्री परशुराम॥”
इन श्लोकों के उच्चारण से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा और उपस्थित जनसमूह ने दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने एक स्वर में पड़री बाजार चौराहे पर भगवान परशुराम जी की भव्य प्रतिमा स्थापना की मांग उठाई। उन्होंने इसे समाज के स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया और शीघ्र पहल करने का आह्वान किया। अंत में सामूहिक आरती, धन्यवाद ज्ञापन एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति, संतोष और उत्साह की झलक स्पष्ट थी—यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, संस्कार, एकता और सामाजिक चेतना का भव्य संगम बन गया।
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