भारत को उकसाना आसान है, लेकिन उसके परिणाम संभालना नामुमकिन।
भारत को उकसाना आसान है, लेकिन उसके परिणाम संभालना नामुमकिन।
अब्दुल बासित का बयान सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक खतरनाक सोच की झलक है। जब एक पूर्व राजनयिक खुले मंच पर यह कहे कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करे तो जवाब भारत को निशाना बनाकर दिया जाएगा, तो यह न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि अपने ही देश की रणनीतिक सोच पर सवाल खड़ा करता है।
भारत की परमाणु नीति भावनाओं पर नहीं, सिद्धांतों पर आधारित है। “नो फर्स्ट यूज़” इसका सबसे मजबूत आधार है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। लेकिन इसका मतलब कमजोरी नहीं है। अगर भारत पर परमाणु हमला होता है, तो जवाब इतना व्यापक और निर्णायक होगा कि उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
भारत “न्यूनतम विश्वसनीय निवारक” की नीति पर चलता है—न हथियारों की दौड़, न दिखावा, सिर्फ सुरक्षा। गैर-परमाणु देशों के खिलाफ परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने की प्रतिबद्धता और रासायनिक या जैविक हमले पर सख्त विकल्प—ये सब भारत की जिम्मेदार शक्ति होने का प्रमाण हैं।
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