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वाराणसी के गंजारी ग्रामसभा के किसानों के भूमि अधिग्रहण का शासन और प्रशासन का मानसिक दबाव बनाने का प्रयास जारी:

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आराजी लाइन ब्लॉक, तहसील राजातालाब के गंजारी ग्राम सभा, वीरभानपुर, हरसोंस के ग्रामीण किसानों की अपनी जमीन के बचाव और न्यायोचित मांग के लिए किये जा रहे शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन को जबरजस्ती दबाव बनाकर डरा धमकाकर शासन एवं प्रशासन द्वारा मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। कल रविवार को पूरे ग्रामसभा में 200 से अधिक पी ए सी जवान, पुलिस प्रशासन के जवान और अधिकारी पूरे दिन ग्रामसभा में घेरेबंदी करके ग्रामीणों किसानों के आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयत्न करते रहे परन्तु निर्भीक ग्रामीण किसान एकसाथ कदम से कदम मिलाकर उनके सामने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे। ज्ञात हो भूमि अधिग्रहण करने का मनमानी तरीके से शासन और प्रशासन द्वारा गरीब ग्रामीण किसानों पर मानसिक दबाव बनाने का उच्च स्तरीय प्रयास लगातार चल रहा है।
2019 के बाद से यहाँ का सर्किल रेट का न्यायोचित पुनर्निरधारण नहीं किया गया है, सिर्फ इसलिए कि दबाव बनाकर मनमानी तरीके से औने पौने दाम में भूमि का अधिग्रहण कर सकें, पूरे वाराणसी जनपद में सबसे कम सर्किल रेट है जोकि वर्तमान क़ीमत से बहुत ज्यादा कम है, और विकास प्राधिकरण के अधिकारीयों का कहना है कि सर्किल रेट नहीं बढ़ाया जायेगा।
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ रामाश्रेय उपाध्याय जी, तहसील बार एसोसिएशन के भूतपूर्व महामंत्री प्रदीप सिंह, हरिश्चन्द्र चौबे, सुरेश उपाध्याय, संजीवधर दूबे जैसे सम्मानित वरिष्ठ लोगों पर मानसिक दबाव बनाने का असफल प्रयास करने में सभी शासन और प्रशासन के अधिकारी लगे हुए हैं, यहाँ तक कि लोकल मिडिया पर भी समाचार प्रकाशित नहीं करने का उच्च स्तरीय दबाव बनाया जा रहा है जिससे किसानों की भूमि को मनमानी तरीके से अधिग्रहण कर सकें।
कल शाम की राजातालाब तहसील में ग्रामीण किसानों और शासनिक एवं प्रशासनिक अधिकारीयों के मध्य वार्ता भी विफल रही, किसानों से कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जान दे देंगे परन्तु अपनी जमीन नहीं देंगे। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन करेंगे, न्यायालय जायेंगे, सरकार भूल गयी है कि यह महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री लोकबंधु राजनारायण सिंह, पंडित श्री कृष्णदेव उपाध्याय जैसे क्रान्तिकारीयों का गांव है यहाँ किसी भी प्रकार के तुगलकी और हिटलरी तानाशाही फरमान से ग्रामीण किसान झुकने और दबने वाले नहीं हैं।
पहले सर्किल रेट का न्यायोचित तरीके से 2013 के नियमानुसार पूनर्निरधारण किया जाय फिर मुआवजा तय किया जाय।

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