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*राष्ट्रीय राजधानी,नई दिल्ली*
देशहित के प्रति समर्पित भावना एवं समाजसेवा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान को देखते हुए राष्ट्रहित में समर्पित हिन्द सेना समाजसेवी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सदस्य केंद्रीय मंत्रालय भारत सरकार मंगेश वैद्य ने राष्ट्रीय प्रतिनिधि युवा ब्रिगेड एवं दिल्ली कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कुमार विशाल की अनुशंसा पर महिला समाजसेवी अधिवक्ता अनीता को दिल्ली महिला ब्रिगेड लीगल सेल कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है।राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगेश वैद्य ने नवनियुक्त अधिवक्ता अनीता को देशहित में समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रसर रहने के निर्देश दिए, संगठन की महिला सशक्तिकरण की दिशा को मजबूत बनाएंगे।नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष का संकल्प एवं उद्धरण नियुक्ति पर अधिवक्ता अनीता ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगेश वैद्य सहित समस्त वरिष्ठ पदाधिकारियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा हिन्द सेना सामाजिक क्रांति की मशाल जलाकर सम्पूर्ण देश में व्याप्त धर्मांधता, क्षेत्रीयता, जातीयता एवं भ्रष्टाचार की जंजीरों को तोड़कर मानव एकता की मिसाल कायम करेगी तथा अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए कटिबद्ध रहेगी।उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि शीघ्र आगामी माह में दिल्ली प्रदेश के समस्त विधानसभाओं का दौरा कर ऊर्जावान नेतृत्वकर्ताओं को कार्यकारिणी में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।संगठन की प्रतिबद्धता एवं भावी योजनाएं हिन्द सेना के लीगल सेल के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों, कानूनी जागरूकता शिविर, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान एवं सामाजिक न्याय पर विशेष फोकस रहेगा। हर्ष व्यक्त करने वालो में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान सिंह परिहार,पर्यावरण संरक्षण विभाग राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रामदयाल मीणा,ओबीसी सेल राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता बोया मैड्डुलेटी,राष्ट्रीय संगठन महामंत्री द्वय योगेश वैद्य,संजीव मल्होत्रा, डॉ मनोज बात्री,महिला ब्रिगेड राष्ट्रीय अध्यक्ष रत्नावली कौशल,युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय अध्यक्ष दक्ष वैद्य,कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष निरंजन सिंह चौधरी,छात्र ब्रिगेड राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह,मानवाधिकार सेल राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह,भ्रष्टाचार निरोधक सेल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर गोपालकृष्णन,कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र महाराणा,आईटी सेल कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष शर्मा,अल्पसंख्यक सेल राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया,राजेश मिश्रा,समरजीत चावला,दीपेश रॉय,दीनानाथ जायसवाल,आनंद टंडन,डॉक्टर सौरभजित हजारिका,अधिवक्ता रमेश भारद्वाज,राष्ट्रीय महामंत्री धीरज सोनकुसरे ,राजेश राठौर खलीफा,सुनील सानाध्य,ठाकुर सिंह साहब,महिला ब्रिगेड राष्ट्रीय महामंत्री अनीता रेड्डी कोडंगल,विधि विभाग राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष ठाकुर,उपाध्यक्ष अधिवक्ता मनीष राठौर,उत्तर पूर्वी प्रदेश प्रभारी निंगोम्बम संजीतकुमार सिंह,राष्ट्रीय सचिव इंदरचंद अग्रवाल,सुशांत भदोरिया,दीपक बिस्ठ,संजय तिवारी,अवधेश लांबा,अतुल श्रीवास्तव,प्रदीप गौतम,राष्ट्रीय संगठन मंत्री द्वय प्रोफेसर प्रीतम सिंह,राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी जुगल किशोर,राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं सनातन ब्रिगेड कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश शर्मा,राष्ट्रीय संगठन मंत्री बिहारी लाल जसावत,विधि सेल राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता महेश गौतम, युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय संगठनमंत्री एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी योगेश राठौर, मीडिया सेल राष्ट्रीय संगठन मंत्री दुलीचंद शर्मा,मजदूर ब्रिगेड राष्ट्रीय संगठन मंत्री लक्ष्मी नारायण जैन,युवा राष्ट्रीय समन्वयक लक्ष्मी नारायण बालू, युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकेश देवांगन,राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं हिमाचल प्रदेशाध्यक्ष डॉ गुरनाम सिंह,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष डॉ योध राज,उतराखंड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता महेश नारायण,राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल जांगड़ा,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बालकृष्ण शुक्ला,दिल्ली महिला ब्रिगेड प्रदेशाध्यक्ष पारुल सिंह ढाका,चंद्र मणि,शशि गुप्ता,मध्यप्रदेश युवा ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता धर्म सिंह चौहान,मनोज शर्मा,युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं आईटी सेल प्रदेशाध्यक्ष कमलेश जूनी,महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता सोनाली श्रीवास्तव,फिज़ा अली खान,विधि विभाग कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता कृपाल सिंह बाथम,धार्मिक न्यास विभाग कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष आचार्य विनोद शुक्ला,भ्रष्टाचार निरोधक सेल कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष डॉ उमेश श्रीवेल,छत्तीसगढ़ प्रदेश मुख्य संयोजक तरुण नाथ योगी, राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष राधेश्याम मीणा,राजस्थान युवा ब्रिगेड प्रदेशाध्यक्ष पवन सिंह नरूका,महाराष्ट्र कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अंसारुल्लाह चौधरी, कला एवं सांस्कृतिक विभाग कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष संजय टिपुगड़े, युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार पुलकुटे,तेलंगाना प्रदेशाध्यक्ष टी रामुलू, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र झंझोड,महिला कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कीर्ति रेड्डी,छात्र ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कटुकुरी विग्नेश कुमार,आंध्र प्रदेश प्रदेशाध्यक्ष डी राजू,वेस्ट बंगाल प्रदेशाध्यक्ष जयंती भट्टाचार्य,उत्तर प्रदेश प्रदेशाध्यक्ष राम प्रकाश यादव,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता जैनेश पंकज,मार्तंड शर्मा,प्रदेश संगठन महामंत्री विश्वनाथ द्विवेदी,बृजेश मिश्रा,युवा ब्रिगेड आईटी सेल कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय गुप्ता,बिहार कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र प्रताप जीतू,आसाम प्रदेशाध्यक्ष सौरभजीत हजारिका,गुजरात प्रदेशाध्यक्ष आलोक पटेल,महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष गीताबेन वाघेला, युवा ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष दर्शन कुमार शाह,कर्नाटक प्रदेशाध्यक्ष डी मातंदूर, युवा ब्रिगेड प्रदेश अध्यक्ष महेश सिद्राई शिगिहल्ली,महिला ब्रिगेड प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता धनलक्ष्मी,हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद ढांडा,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष विजय कुमार, महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष दर्शाना देवी,युवा ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष आकाशदीप शर्मा,योगेश कुमार, पंजाब कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष सुबोध मित्तल,राकेश शर्मा,महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष उमा गोयल,बंदना नेहा देवी,कविता कौर,अंजू सूदन,ओडिशा प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता दीपेश नायक,नितेश कुमार,तमिलनाडु प्रदेशाध्यक्ष ए चंद्रन,युवा ब्रिगेड प्रदेशाध्यक्ष सिदरई, महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता धनलक्ष्मी,केरला प्रदेशाध्यक्ष एम वी जोसेफ,झारखंड प्रदेशाध्यक्ष नारायण लिंडा,युवा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष विनय भगत,महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष उर्मिला देवी,युवा ब्रिगेड एससी सेल कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अमरनाथ राम,राष्ट्रीय प्रतिनिधि व्येंकेटेश येवले,भास्कर येवले,डॉ.एस.के.साहू ,डॉ.सुनील जैन,डॉ.राहुल पांडेय,दिनेश राय ,ए.खान,राष्ट्रीय प्रतिनिधि व पार्षद संतोष महानंद,प्रीति गोसेवाड़ा,एससी सेल राष्ट्रीय प्रतिनिधि कृष्ण मुंशीराम वाल्मिक,छत्तीसगढ प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता नितिन ठक्कर,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष व ऐल्डरमैन संजय साहू,मनोज पटेल,विनय चोपड़ा,मानवाधिकार सेल प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता शिव बघेल,मानवाधिकार सेल कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर पटेल,भ्रष्टाचार निरोधक सेल प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता रूबी नाज़ खान,महिला ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मी चौहान, युवा ब्रिगेड राष्ट्रीय प्रतिनिधि रवि सरकार,प्रदेश महामंत्री नरेश भोयर, प्रदेश संगठन मंत्री चंचल देवांगन,युवा ब्रिगेड कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष खगेन्द्र मल्होत्रा, युवा ब्रिगेड प्रदेश प्रवक्ता एवं बस्तर जिलाध्यक्ष दिलीप गुहा,युवा ब्रिगेड प्रदेश संगठन मंत्री स्वराज मुदलियार सहित हिन्द सेना के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओ ने बधाई दी है |

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वाराणसी। दहेज में पांच लाख रुपए की मांग को लेकर विवाहिता को मारने-पीटने व प्रताड़ित कर घर ने निकाल देने के मामले पति समेत पांच आरोपितों को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने आरोपित पति राजेश शर्मा, सास माया शर्मा, पल्लवी शर्मा, सोनी शर्मा उर्फ एकता झा व आरती झा को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। *अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव उर्फ गुड्डू, नरेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा।*

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादिनी निधि शर्मा ने 19 मई 2022 को चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसका विवाह सुनील शर्मा के साथ 24 जून 2021 को हुआ था। शादी में उसके पिताजी द्वारा सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज दिया गया था। शादी के बाद जब वह विदा होकर अपने ससुराल गयी तो उसके व उसके पति के बीच आएदिन मन-मुटाव रहता था। इस दौरान उसके पति, सास समेत ससुराल के अन्य सदस्यों द्वारा हमेशा उसे कम दहेज लाने को लेकर ताना दिया जाता था और दहेज में पांच लाख रुपए की मांग की जाती थी। उसके असमर्थता जताने पर ससुराल वालों द्वारा उसके साथ मारपीट, गाली-गौलज व जान से मारने की धमकी दी जाती थी। इस बीच 26 अप्रैल 2022 को उसके पति द्वारा उसे लाकर उसके मायके छोड़ दिया गया। जिसके बाद उसने घटना के संबंध में पुलिस कमिश्नकर, वाराणसी को प्रार्थनापत्र दिया था। उनके आदेश पर चौक पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अदालत में विचारण के दौरान आरोप सिद्ध न होने पर अदालत ने सभी आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं विचारण के दौरान एक अन्य आरोपित कुसुम शर्मा की मृत्यु हो जाने पर उसके खिलाफ सुनवाई समाप्त कर दी गई।

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जनता की आवाज ✍️

वाराणसी। काशी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की पहचान अब केवल परंपरा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अब यह *आधुनिक सुविधाओं से लैस विश्वस्तरीय धार्मिक स्थल* के रूप में विकसित होगा। इस ऐतिहासिक परियोजना का नेतृत्व स्वयं *जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार* कर रहे हैं, जिनके सतत निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों में घाट का कायाकल्प तेजी से आगे बढ़ रहा है।

करीब *₹17.56 करोड़* की लागत से चल रहे इस *पुनर्निर्माण कार्य में पुराने स्वरूप* को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं को जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में पुरानी सीढ़ियों को समतल किया जा रहा है और शवों के आवागमन हेतु *स्ट्रेचर फ्रेंडली मार्ग* तैयार किए जा रहे हैं।

*डीएम सत्येंद्र कुमार* ने बताया कि नए घाट पर *व्यूइंग गैलरी, रैंप, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और बेहतर प्रकाश व्यवस्था* की जाएगी, जिससे शोकाकुल परिजनों और श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।

*18 अत्याधुनिक शवदाह संरचनाएं*

परियोजना के अंतर्गत कुल *18 शवदाह संरचनाएं* तैयार की जाएंगी। इनमें से *10 पुरानी संरचनाओं का जीर्णोद्धार* और *8 नई शवदाह संरचनाओं* का निर्माण होगा। सभी *दाह स्थल एलिवेटेड होंगे,* जिससे कम लकड़ी में *शास्त्रसम्मत अंतिम संस्कार* संभव होगा और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

*स्वच्छता और सुविधा पर विशेष फोकस*

*डीएम सत्येंद्र कुमार* के निर्देश पर घाट पर *वेटिंग रूम, शौचालय, पीने का पानी, वेडिंग ज़ोन, लकड़ी भंडारण स्थल* और आधुनिक *ड्रेनेज सिस्टम* विकसित किया जा रहा है, ताकि वर्षों पुरानी गंदगी और सीवेज की समस्या खत्म हो सके।

*सनातन धरोहरों का संरक्षण*

डीएम ने स्पष्ट किया है कि परियोजना के दौरान *विष्णुपादुका, दत्तात्रेय पादुका, मणिकर्णिका कुंड सहित सभी मंदिरों* और धार्मिक स्थलों का संरक्षण और मरम्मत की जाएगी। किसी भी आस्था या परंपरा से कोई समझौता नहीं होगा।

*पीएम मोदी की परिकल्पना, डीएम की कार्ययोजना*

यह परियोजना *रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड* से पूरी हो रही है, जिसकी आधारशिला *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी* ने रखी थी। *डीएम सत्येंद्र कुमार* के अनुसार, कार्य पूर्ण होने के बाद यहां प्रतिदिन *100 से 150 शवों* का अंतिम संस्कार सुचारू रूप से किया जा सकेगा।

*डोमराजा परिवार को मिलेगी आधुनिक सुविधा*

डीएम के निर्देश पर महाश्मशान से जुड़े *डोमराजा परिवार* के लिए भी बेहतर और सुव्यवस्थित सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे उनकी सदियों पुरानी परंपरा सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सके।

*डीएम सत्येंद्र कुमार की निगरानी में मणिकर्णिका घाट बनेगा आस्था, परंपरा और आधुनिक विकास का प्रतीक।*

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'इस्तीफावीर' लॉरेंस एंथोनी की घिनौनी पलटी: पहले संगठन को कोसा, अब पत्रकार को बलि का बकरा बनाकर चाट रहे अपनी जूठन!

*सोनभद्र (ब्यूरो)।* जनपद में 'समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन' के पूर्व जिला सचिव लॉरेंस एंथोनी इन दिनों अपने दोहरे चरित्र और 'पलटू' बयानों को लेकर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। दो दिन पूर्व जिस संगठन को 'विवादों का अड्डा' बताकर और नेतृत्व को 'विफल' घोषित कर उन्होंने इस्तीफा दिया था, आज उसी संगठन में वापस जगह पाने के लिए उन्होंने नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। अपनी थूकी हुई बात को चाटते हुए अब लॉरेंस एंथोनी अपनी गलती छिपाने के लिए स्थानीय पत्रकार अमान खान पर 'दबाव' डालने का मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं।

​ *खुद रचा 'इस्तीफा ड्रामा' और खुद ही सोशल मीडिया पर किया वायरल*

​विदित हो कि 20 जनवरी 2026 को लॉरेंस एंथोनी ने अपने लेटरहेड पर स्पष्ट शब्दों में इस्तीफा लिखा था कि उनके पास संगठन के आपसी झगड़ों के लिए 'फालतू समय' नहीं है और वे समाज सेवा के लिए स्वतंत्र होना चाहते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाकर मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन जैसे ही संगठन के भीतर उनकी स्थिति खराब हुई, उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए नया राग अलापना शुरू कर दिया।

​ *पत्रकार अमान खान को बनाया निशाना, बुनी 'जेल जाने के डर' की झूठी कहानी*

​अब लॉरेंस एंथोनी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पत्रकार अमान खान को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उनका दावा है कि पत्रकार ने उन्हें 'कार्यकर्ताओं के जेल जाने' की बात कहकर डराया और जबरन इस्तीफा लिखवाया। सवाल यह उठता है कि क्या मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले लॉरेंस इतने 'डरपोक' हैं कि किसी की बातों में आकर अपना पद छोड़ दिया? या फिर यह उनकी सोची-समझी साजिश है ताकि वे संगठन की नजरों में फिर से 'बेचारे' बनकर वापसी कर सकें?

​ *'पलटूराम' की पराकाष्ठा: कल तक जो 'नरक' था, आज वही संगठन 'सर्वोपरि'!*

​इस्तीफे के समय लॉरेंस ने संगठन के जिला नेतृत्व पर विफलता का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन आज अचानक उन्हें संगठन की कार्यप्रणाली 'स्वच्छ' लगने लगी है। पत्रकारिता जगत में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए एक निष्पक्ष पत्रकार को मोहरा बनाया जा रहा है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि लॉरेंस एंथोनी के पास अपने आरोपों का कोई सबूत नहीं है और वे केवल 'विक्टिम कार्ड' खेल रहे हैं।

*​जनता की अदालत में विश्वसनीयता 'शून्य', साख बचाने की नाकाम कोशिश*

​सोनभद्र की जनता अब इस 'दोमुंहे' व्यवहार को भली-भांति समझ चुकी है। जो व्यक्ति 48 घंटे के भीतर अपने हस्ताक्षरित पत्र और बयानों से पलट सकता है, उसकी सामाजिक स्वीकार्यता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। जानकारों का कहना है कि लॉरेंस एंथोनी ने अपनी इस 'नौटंकी' से न केवल संगठन की छवि धूमिल की है, बल्कि पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे पर भी कीचड़ उछालने का दुस्साहस किया है, जिसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

*संपादकीय टिप्पणी: "नैतिकता का पतन या अवसरवादिता की पराकाष्ठा?"*

पत्रकारिता समाज का दर्पण होती है, जो सच जैसा है, उसे वैसा ही दिखाने का साहस रखती है। लेकिन जब समाज सेवा का चोला ओढ़े लोग अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं और आपसी कलह की बलि खुद चढ़ने लगते हैं, तो वे अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का सबसे आसान रास्ता चुनते हैं।

लॉरेंस एंथोनी का हालिया प्रकरण इसका जीता-जागता उदाहरण है। कल तक जो संगठन उनकी नजर में 'विवादों का अड्डा' था, आज वे उसी के गुणगान कर रहे हैं। जिस इस्तीफे को उन्होंने खुद लिखकर, दस्तखत कर और मुस्कुराते हुए मीडिया को सौंपा, आज उसे 'दबाव का खेल' बताना उनकी मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है।

एक पत्रकार का काम सूचनाओं को जनता तक पहुँचाना है, न कि किसी के घर में घुसकर जबरन इस्तीफा लिखवाना। पत्रकार अमान खान पर लगाए गए बेबुनियाद आरोप दरअसल उस 'सच' से बचने की छटपटाहट है जो अब लॉरेंस एंथोनी के गले की फांस बन चुका है। ऐसे 'पलटूराम' चरित्र वाले लोग न तो संगठन के सगे हो सकते हैं और न ही समाज के। जनता ऐसे दोमुंहे चेहरों को पहचान चुकी है। अपनी साख बचाने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बदनाम करना कायरता की निशानी है।

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विकास कुमार गुर्जर , जर्नलिस्ट दिल्ली, 8-13 दिसंबर 2025: भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक, लाल किला, इस बार विशेष UNESCO सांस्कृतिक इवेंट का केंद्र बना। छह दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम ने भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने पेश किया।📌 इवेंट का उद्देश्य:भारत के 20 UNESCO Intangible Cultural Heritage (ICH) elements को प्रदर्शित करना।लोक कला, संगीत, नृत्य, उत्सव और पारंपरिक शिल्प के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना।अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान करना।🏰 मुख्य आकर्षण:लाल किला में विशेष प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन।लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत अनुभव।पैनल डिस्कशन और वर्कशॉप्स, जहां विशेषज्ञों ने सांस्कृतिक संरक्षण और UNESCO मान्यता पर चर्चा की।🎨 सांस्कृतिक संदेश:इस इवेंट ने स्पष्ट किया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल ऐतिहासिक महत्व की नहीं है, बल्कि यह जीवंत, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रेरक भी है। UNESCO की भागीदारी ने इसे और भी विशेष और वैश्विक महत्व वाला बना दिया।💫 निष्कर्ष:लाल किले में 8-13 दिसंबर 2025 तक चलने वाला यह इवेंट न केवल भारत की सांस्कृतिक शान को उजागर करता है, बल्कि यह विश्व मंच पर भारतीय परंपराओं और कला को पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। यह साबित करता है कि हमारी मूर्त और अमूर्त विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा और गौरव का स्रोत है।विकास कुमार गुर्जर , जर्नलिस्ट

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रिसोड:- येथील उत्तमचंद बगडिया कला , वाणिज्य व विज्ञान महाविद्यालयाच्या राष्ट्रीय सेवा योजना पथका द्वारा आयोजित विशेष श्रम संस्कार शिबिर मध्ये प्राचार्य डॉ. विनोद कुलकर्णी यांच्या मार्गदर्शनाखाली आरोग्य निदान व औषधोपचार शिबिराचे आयोजन दिनांक 22 जानेवारी 2026 रोजी करण्यात आले होते याप्रसंगी डॉ. रामानंद गट्टानी तसेच डॉक्टर अभिषेक तिवारी हे मान्यवर उपस्थित होते या आरोग्य शिबिरामध्ये गावातील बहुसंख्य रुग्णांची तसेच शाळकरी विद्यार्थी, विद्यार्थिनीची तसेच शिबिरार्थी विद्यार्थी व विद्यार्थिनीची तसेच महाविद्यालयाच्या बहुसंख्य कर्मचाऱ्यांची आरोग्य तपासणी करण्यात आली यानंतर उपस्थित मान्यवरांचे राष्ट्रीय सेवा योजनेच्या वतीने शाल व पुष्पगुच्छ देऊन स्वागत करण्यात आले या कार्यक्रमाच्या अध्यक्षस्थानी राष्ट्रीय सेवा योजना महिला कार्यक्रमाधिकारी डॉ. एम. पी. खेडेकर ह्या होत्या या कार्यक्रमाचे प्रास्ताविक कार्यक्रमाधिकारी डॉ. ए.जी.वानखेडे यांनी केले यानंतर डॉ रामानंद गट्टानी यांनी आपले मनोगत व्यक्त केले व आपल्या मनोगतात राष्ट्रीय सेवा योजनेचा हा उपक्रम स्तुत्य असून आम्ही आमच्या सेवा यापुढेही अशाच देत राहू असे आश्वासन दिले व शिबिरार्थींना शुभेच्छा दिल्या आपल्या अध्यक्षीय भाषणात डॉ. एम.पी. खेडेकर मॅडम यांनी गावकऱ्यांनी या शिबिराचा लाभ घेतल्याबद्दल उपस्थितांना धन्यवाद दिले या कार्यक्रमाचे प्रास्ताविक कु अंजली पुंड हिने तर आभार प्रीतम वैरागड याने मानले. सदर शिबिराच्या यशस्वीते करिता डॉ. किरण बुधवंत प्रा डॉ मेश्राम, डॉ कोमल काळे, प्रा सुमित लाहोरे इत्यादींनी विशेष परिश्रम घेतले

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धनंजय कुमार।
देवघर।
अनुमंडल पदाधिकारी सह अनुमंडल दंडाधिकारी श्री रवि कुमार ने जानकारी दी है कि माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड, रांची द्वारा WP (PIL) No. 1997 of 2019 (Jharkhand Civil Society बनाम राज्य सरकार) एवं Contempt Case (Civil) No. 246 of 2019 में दिनांक 16.07.2024 को पारित आदेश के आलोक में पूरे झारखंड राज्य में DJ बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य सरकार DJ बजाने पर पूर्ण रूप से रोक लगाए तथा किसी भी जुलूस, शोभायात्रा या कार्यक्रम में DJ बजाने की अनुमति नहीं दी जाए। इस आदेश का उल्लंघन न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आएगा।
उक्त आदेश के आलोक में देवघर अनुमंडल अंतर्गत DJ पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
सभी होटल संचालकों, साउंड सिस्टम संचालकों, पूजा समितियों एवं आम नागरिकों से अनुरोध है कि:
किसी भी प्रकार का DJ न बजाएँ।
ध्वनि विस्तारक यंत्र के रूप में केवल पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम / सिंपल माइक का उपयोग करें।
लाउडस्पीकर का प्रयोग रात्रि 10:00 बजे तक ही करें, जो लाउडस्पीकर अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत होगा।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बरेली जेल के गेट पर खड़ा शख़्स आज़ाद ख़ान है। नाम आज़ाद, लेकिन ज़िंदगी के 25 साल सलाख़ों के पीछे गुज़ारने के बाद अब जाकर बाहर आया है। ये रिहाई किसी इंसाफ़ की जीत नहीं, बल्कि इस देश के पुलिसिया, न्यायिक और प्रशासनिक सिस्टम की शर्मनाक हार का दस्तावेज़ है।

कहानी सन 2000 की है, जब एक डकैती हुई। 2001 में मैनपुरी निवासी आज़ाद ख़ान को गिरफ़्तार कर लिया गया। न पुख़्ता सबूत, न ठोस गवाह- फिर भी जिला अदालत ने आज़ाद को उम्रक़ैद की सज़ा सुना दी। एक ग़रीब मज़दूर, जिसके पास न महंगे वकील थे, न रसूख़, वो सिस्टम के पहियों के नीचे कुचल दिया गया।

अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची और दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने साफ़ कहा कि “पुलिस आज़ाद ख़ान के ख़िलाफ़ डकैती डालने का आरोप साबित नहीं कर पाई”, और उसे बरी कर दिया गया। लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते। बेगुनाह क़रार दिए जाने के बाद भी आज़ाद जेल में बंद रहा। वजह?
जेल प्रशासन का बेशर्म तर्क था कि “रिहाई का आदेश कोर्ट से हमें मिला ही नहीं” और एक दूसरे मामले में 7,000 रुपये का जुर्माना जमा नहीं हो सका। सोचिए, 25 साल जेल में काट चुका एक बेगुनाह, उसका परिवार मज़दूरी करके पेट पाल रहा हो, उसके लिए 7,000 रुपये 7 लाख से कम नहीं होते। जुर्माना न भरने पर एक साल और जेल! क्या यही इंसाफ़ है?
आज ज़रूरत पड़ने पर ईमेल से मिनटों में ऑर्डर भेजे जा सकते हैं, लेकिन जब एक ग़रीब मुसलमान की आज़ादी का सवाल था, तब फ़ाइलें “न पहुंचने” का बहाना बन गईं। मामला मीडिया तक पहुंचा, ख़बरें चलीं, तब जाकर वही प्रशासन और अदालत आनन-फानन में ईमेल पर ऑर्डर का आदान-प्रदान करने लगे, यानि इंसाफ़ नहीं, दबाव काम करता है।

मामला सामाजिक तक भी पहुंचा तो संस्था ‘छोटी सी आशा’ की पारुल मलिक और रूपाली गुप्ता ने 7,000 रुपये का जुर्माना अदा किया। तब जाकर बेगुनाह आज़ाद 25 साल बाद जेल से बाहर आया।

लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रकम इंसाफ़ की कीमत थी? क्या 25 साल कोई लौटा सकता है? आज आज़ाद बाहर है, मगर उसका परिवार बिखर चुका है, ज़िंदगी छिन चुकी है। उसकी आंखों में आंसू हैं, ग़रीबी है और वो सवाल हैं जो पुलिस, सरकार और अदालत के ज़मीर को झकझोरने चाहिए।

गलत गिरफ़्तारी का ज़िम्मेदार कौन?
बिना सबूत सज़ा देने वाले जज से कोई जवाबदेही क्यों नहीं?
पुलिस की झूठी कहानी गढ़ने पर कोई सज़ा क्यों नहीं?
और क्या हर ग़रीब, हर मुसलमान की क़ीमत इसी तरह आधी ज़िंदगी होती है?

आज ज़रूरत है आत्ममंथन की। आज़ाद ख़ान कोई अपवाद नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्ची तस्वीर है जहाँ ग़रीबी सबसे बड़ा जुर्म और बेगुनाही सबसे महंगी सज़ा बन चुकी है।
ये रिहाई नहीं, ये एक सवाल है कि अगला आज़ाद कौन?

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