महुली में तीन महापुरुषों की संयुक्त जयंती पर उमड़ा जनसैलाब
सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_दुद्धी तहसील अंतर्गत महुली के राजा बरियार शाह खेल मैदान में संत गाडगे, जगदेव बाबू कुशवाहा एवं संत शिरोमणि रविदास की संयुक्त जयंती समारोह श्रद्धा, सामाजिक चेतना और संगठन के आह्वान के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में विभिन्न जाति-समुदाय के लोगों की सहभागिता रही।
समारोह का शुभारंभ महात्मा बुद्ध, छत्रपति साहू जी महाराज, डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत गाडगे, जगदेव बाबू कुशवाहा एवं संत रविदास के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर, मोमबत्ती प्रज्वलन तथा आंबेडकर वंदना से किया गया। तत्पश्चात संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन हुआ।
शिक्षा ही सशक्त समाज की आधारशिला
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही ब्लॉक प्रमुख दुद्धी रंजना चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो जितना पिएगा, उतना ही दहाड़ेगा।” उन्होंने कहा कि जब तक समाज शिक्षित और संगठित नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।
विनोद कुमार ने कहा कि ज्ञानी होना आसान है, परंतु प्रज्ञानी होना कठिन। उन्होंने ज्ञान को आचरण में उतारने की आवश्यकता बताई।
मुख्य वक्ता तेज प्रताप मौर्य ने जगदेव बाबू कुशवाहा के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि समाज को अपने बच्चों को शिक्षित और सक्षम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आत्मबल से ही अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष बसपा रामविचार गौतम ने कहा कि देश में यदि किसी ने शोषित-वंचित वर्ग को राजनीतिक अधिकार दिलाया तो वह डॉ. अंबेडकर थे, जिनके कारण आज हर नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है।
बीआरडी पीजी कॉलेज दुद्धी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार ने द्वि-मत प्रणाली एवं पृथक निर्वाचन व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला और संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी।
“संविधान के रास्ते पर चलकर ही मिलेगी हिस्सेदारी”
मुख्य अतिथि अजय कुमार रजक (डायरेक्टर, सड़क परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार) ने जगदेव बाबू कुशवाहा को “बिहार का लेनिन” बताते हुए कहा कि समाज को अपनी संख्या के अनुरूप हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए संगठित और शिक्षित होना होगा।
उन्होंने संत गाडगे के स्वच्छता अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 121 वर्ष पूर्व उन्होंने महाराष्ट्र के गांव-गांव में झाड़ू उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर जैसे महामानव भी संत गाडगे को अपना गुरु मानते थे।
उन्होंने संत रविदास के 647वें जन्मोत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि महापुरुषों के कार्यों को समय के साथ सम्मान मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकार केवल संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से ही प्राप्त किए जा सकते हैं।
सामाजिक समरसता और जागरूकता पर बल
विशिष्ट अतिथि जुबेर आलम (जिला पंचायत सदस्य, बाघाडू) ने कहा कि महापुरुषों के विचार किसी एक समाज तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और भाईचारे के मार्ग पर चलकर क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाएं।
ओम प्रकाश मौर्य ने कहा कि किसी भी कार्य को जातिगत नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने बहन मायावती के उस वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें ‘हरिजन’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई गई थी।
विशिष्ट अतिथि संजय कुमार सिंह गोंड धुर्वे ने संत गाडगे बाबा की प्रतिमा महुली में स्थापित कराने की घोषणा की और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
सेवानिवृत्त जिला जज एवं भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य राजन चौधरी ने कहा कि संत गाडगे, संत रविदास सहित अन्य महापुरुषों के विचार समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
पूर्व एमएलसी शिवबोध राम ने कहा कि यदि महापुरुषों के सपने अधूरे रह जाते हैं तो इसके लिए समाज स्वयं जिम्मेदार होगा। उन्होंने संगठन और जागरूकता पर बल दिया।
भोजन वितरण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का कुशल संचालन समिति अध्यक्ष अवधेश कुमार कन्नौजिया ने किया। अंत में समिति पदाधिकारियों द्वारा भोजन वितरण कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस अवसर पर कुंदन कन्नौजिया, विवेक कुमार कन्नौजिया, अमित कुमार कन्नौजिया, अरविंद जायसवाल (ग्राम प्रधान महुली), वीरेंद्र कनौजिया, नीरज कुमार कन्नौजिया, संतोष विश्वकर्मा, रविशंकर कन्नौजिया, सूबेदार प्रसाद, त्रिलोकी गुप्ता, दयाशंकर, सतनारायण कन्नौजिया, कृष्ण मुरारी, सुभाष भारती, वीरेंद्र चौधरी, संजय कुमार कन्नौजिया, पंकज कन्नौजिया, गोपाल भारती, कामता प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समारोह ने शिक्षा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश दिया।