महानिदेशक के निर्देश पर गठित एसआईटी ने खोला सनसनीखेज राज, तंत्र-मंत्र के नाम पर 13 वर्षीय बच्ची की हत्या
जयदीप कुमार सिन्हा
बरही/विष्णुगढ़ : हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुसुम्बा में 13 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले का पुलिस ने सफल उद्भेदन कर दिया है। प्रारंभिक रूप से साधारण हत्या प्रतीत हो रहा यह मामला जांच के दौरान अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ी बेहद भयावह सच्चाई में बदल गया। इस संबंध में डीआईजी, हजारीबाग, उपायुक्त (डीसी) एवं पुलिस अधीक्षक (एसपी) हजारीबाग द्वारा संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विस्तृत जानकारी दी गई।
*मामले का प्रारंभिक घटनाक्रम*
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दिनांक 24/25 मार्च 2026 की रात्रि मंगला जुलूस के दौरान कुसुम्बा गांव से एक नाबालिग बच्ची के लापता होने तथा उसकी हत्या की घटना घटित हुई। दिनांक 25 मार्च 2026 को प्रातः लगभग 08:30 बजे विष्णुगढ़ थाना को सूचना प्राप्त हुई कि कुसुम्बा गांव स्थित मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में बांस झाड़ी के पास एक बच्ची का शव पड़ा हुआ है।
*प्राथमिकी एवं कानूनी कार्रवाई*
इस संबंध में मृतका की मां रेशमी देवी (उम्र करीब 35 वर्ष), पति विनोद सिंह, साकिन कुसुम्बा, थाना विष्णुगढ़, जिला हजारीबाग के लिखित आवेदन के आधार पर भैंरो पासवान एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध अपनी नाबालिग पुत्री (उम्र 13 वर्ष) के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने के आरोप में विष्णुगढ़ थाना कांड संख्या-42/26, दिनांक 25.03.2026, धारा 103(1)/65(2) बीएनएस एवं 4/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
*एसआईटी का गठन*
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांड के त्वरित उद्भेदन एवं अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड, रांची के निर्देश पर तथा पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग के नेतृत्व में दिनांक 26 मार्च 2026 को श्री नागराजे शुभम भाटसाहेब (भा.पु.से.) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
*जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य*
गठित एसआईटी टीम द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्य एवं आसूचना संकलन के आधार पर कांड का अनुसंधान किया गया। अनुसंधान के क्रम में मृतका के परिजनों तथा कुसुम्बा गांव की शांति देवी उर्फ भगतिनी (उम्र करीब 55 वर्ष), पति स्व. ईश्वर ठाकुर से पूछताछ की गई।
पूछताछ में भगतिनी द्वारा बताया गया कि मृतका की मां रेशमी देवी पिछले लगभग एक वर्ष से अपने पुत्र सुधीर कुमार सिंह की शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं के समाधान हेतु उसके पास आती-जाती थी। भूमि विवाद एवं अन्य पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए भी वह भगतिनी से संपर्क करती थी।
भगतिनी द्वारा पहले भी रेशमी देवी के घर में तंत्र-मंत्र कर “भूत बांधने” की बात कही गई थी। उसने रेशमी देवी को यह भी विश्वास दिलाया था कि उसके पुत्र की समस्याओं के निवारण के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देना आवश्यक है। साथ ही उसने यह भी कहा था कि उसकी छोटी बेटी पर “माता सवार” है, इसलिए उसकी बलि देना अधिक फलदायी होगा।
घटना की पूरी साजिश और क्रियान्वयन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मृतका पिछले तीन महीनों में कई बार भगतिनी के संपर्क में आई थी। दिनांक 24 मार्च 2026 (मंगला जुलूस/अष्टमी) को शाम लगभग 07:00 बजे मृतका की मां अपने तीनों बच्चों के साथ जुलूस में शामिल हुई। रात लगभग 7-8 बजे वह अपनी छोटी बेटी (मृतका) को लेकर भगतिनी के घर पूजा के लिए पहुंची।
भगतिनी ने रात 09:00 बजे के बाद “अच्छा नक्षत्र” होने की बात कहकर बच्ची को वहीं रुकने को कहा तथा बाद में दूसरे पुरुष के साथ आने को कहा।
इसके बाद लगभग 09:30 बजे मृतका की मां, गांव के भीम राम के साथ बच्ची को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। पूजा के लिए 251 रुपये देने की बात हुई, लेकिन रेशमी देवी ने मात्र 20 रुपये दिए।
भगतिनी के घर स्थित मनसा मंदिर में विधिवत तंत्र-मंत्र के साथ पूजा प्रारंभ की गई। बच्ची को बैठाकर उसके माथे पर सिंदूर का टीका एवं काजल लगाया गया तथा प्रसाद के रूप में इलायची-दाना खिलाया गया।
*निर्ममता की पराकाष्ठा*
इसके बाद भगतिनी अपने “भूत बांधने” के स्थान बांसबाड़ी में भीम राम एवं रेशमी देवी के साथ बच्ची को लेकर गई। वहां बच्ची को जमीन पर लिटाया गया। पूर्व से लाए गए बोरा के अंदर का प्लास्टिक जमीन पर बिछाकर बच्ची को सुलाया गया।
भगतिनी के हाथ में बांस का “कॉलिंग स्टिक” था, जिसे वह बच्ची के शरीर के चारों ओर घुमाते हुए मंत्रोच्चार कर रही थी। इसी दौरान उसने कहा कि “मुझे इस कुंवारी लड़की का खून चाहिए।”
इसके बाद भीम राम ने बच्ची का गला घोंट दिया। बच्ची के छटपटाने पर उसकी मां रेशमी देवी ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए। जब बच्ची की मृत्यु हो गई, तब भगतिनी ने कॉलिंग स्टिक को उसके शरीर पर घुमाया तथा उसके निर्देश पर मां रेशमी देवी ने बच्ची के पैंट को कमर से जांघ तक खींच दिया। इसके बाद भगतिनी ने मंत्र पढ़ते हुए कॉलिंग स्टिक को बच्ची के गुप्तांग में जबरन प्रवेश कराया। वहीं भीम राम ने अपने साथ लाए पत्थर से बच्ची के सिर पर कई वार किए, जिससे उसका सिर फट गया और चेहरा खून से लथपथ हो गया।
इसके बाद भगतिनी ने मृत शरीर पर खून से “पूजा” की और खून को अपने हाथों में लेकर मनसा मंदिर में छिड़क दिया।
*जघन्य कांड में संलिप्त गिरफ्तार अभियुक्त*
भीम राम (उम्र करीब 45 वर्ष), पिता स्व. छेदी भुइयां
रेशमी देवी (उम्र करीब 35 वर्ष), पति विनोद कुमार सिंह
शांति देवी उर्फ भगतिनी (उम्र करीब 55 वर्ष), पति स्व. ईश्वर ठाकुर
तीनों साकिन कुसुम्बा, थाना विष्णुगढ़, जिला हजारीबाग के निवासी हैं।
*कांड के उद्भेदन एवं गिरफ्तारी हेतु गठित छापामारी दल में शामिल पदाधिकारी*
नागराजे शुभम भाटसाहेब (भा.पु.से.)
वैद्यनाथ प्रसाद, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, विष्णुगढ़
अनुभव भारद्वाज, पुलिस उपाधीक्षक, हजारीबाग
प्रशांत कुमार, पुलिस उपाधीक्षक, हजारीबाग
सपन कुमार महथा, पुअनि सह थाना प्रभारी, विष्णुगढ़ तथा अन्य पुलिसकर्मी
*संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति*
उक्त सभी जानकारी डीआईजी, हजारीबाग, पुलिस अधीक्षक (एसपी) हजारीबाग एवं उपायुक्त (डीसी) हजारीबाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई।
*पुलिस की अपील*
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि अंधविश्वास एवं तंत्र-मंत्र जैसी कुप्रथाओं से दूर रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
*समाज के लिए चेतावनी*
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि अंधविश्वास आज भी मासूमों की जान ले रहा है। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए व्यापक जनजागरूकता और शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।
ज्ञात हो कि,
*आक्रोशित था पूरा प्रदेश* :
मामले को लेकर हजारीबाग जिला सहित पूरा प्रदेश आक्रोशित था, विपक्ष जिले में एक दिवसीय सांकेतिक बंदी कर चुका था । 3 अप्रैल को झारखंड बंद के घोषणा कर रखी थी । मामले को लेकर उच्च न्यायाल ने भी संज्ञान लेते हुए सरकार से तलब किया था । राज्य के वित्त मंत्री भी घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति से अवगत होते हुए जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए दो दिनों के अंदर मामले के उद्भेदन करने का निर्देश दे चुके थे ।