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बांसवाड़ा। जिले में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बांसवाड़ा पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले के तीन अलग-अलग थानों—आनंदपुरी, कुशलगढ़ और कलींजरा—ने कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस, लूट और लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आनंदपुरी: 2 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार
आनंदपुरी थाना पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले दो वर्षों से फरार चल रहे वांछित आरोपी को पकड़ने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी मुकेश, पुत्र कानजी, निवासी पांचवाड़ा (थाना अरथूना) है। पुलिस लंबे समय से इसकी तलाश में दबिश दे रही थी।
कुशलगढ़: ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत NDPS आरोपी दबोचा
कुशलगढ़ पुलिस ने क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ “ऑपरेशन त्रिनेत्र” के तहत प्रभावी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में एनडीपीएस (NDPS) केस के आरोपी दिलिप, पुत्र श्यामजी, निवासी माजिया (थाना अरथूना) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस आरोपी से तस्करी के नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है।
कलींजरा: लूट का आरोपी गिरफ्तार, वारदात में प्रयुक्त कार जब्त
इधर, कलींजरा थाना पुलिस ने लूट के एक मामले का खुलासा करते हुए आरोपी मनीष, पुत्र छगनलाल पटेल, निवासी चना वाला को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लूट की वारदात में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया है। हालांकि, इस मामले में कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
जनता से सहयोग की अपील
पुलिस प्रशासन ने आमजन से शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि यदि क्षेत्र में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
• पुलिस व्हाट्सएप सूचना नंबर: 95304-39780
यह भी पढ़ें: अपराधियों के खिलाफ जिला पुलिस का यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि आमजन में विश्वास और अपराधियों में भय बना रहे।
: #BanswaraNews #BanswaraPolice #RajasthanPolice #CrimeUpdate #PoliceAction #BreakingNews #Arrested #BanswaraDistrict

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

पटना : ​बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से 'नामांकन अभियान 2026' की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पोस्ट के माध्यम से अभिभावकों और स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे 6 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का नामांकन पास के विद्यालयों में कराएं।

​जमीनी स्तर पर सक्रियता:
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसका 'विकेंद्रीकृत' दृष्टिकोण है। केवल आदेश जारी करने के बजाय, प्रशासन ने टोला सेवकों और तालीमी मरकज के सदस्यों को गृह भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी है।
यह सुनिश्चित करता है कि समाज के सबसे वंचित वर्गों तक भी शिक्षा की पहुंच हो और कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे।

​चुनौतियां और अपेक्षाएं:
अभियान की सफलता केवल नामांकन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती इन बच्चों को स्कूल में बनाए रखने (Retention) और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की है।
"हर बच्चा हो, अब स्कूल का हिस्सा" नारा तभी सार्थक होगा जब स्कूलों में बुनियादी ढांचा, शिक्षकों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं सुदृढ़ होंगी।

​निष्कर्ष:
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति का आधार होती है।
बिहार जैसे राज्य में, जहाँ जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) बहुत अधिक है, इस तरह के अभियान बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकते हैं।
समाज के हर वर्ग को इस 'नामांकन उत्सव' में अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

पटना: ​बिहार सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से एक ऐसा निर्णय लिया है जिसकी चर्चा दशकों से हो रही थी, लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह फाइलों में दबा था।
'सात निश्चय-3' के तहत सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना राज्य की चरमराती सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को आईसीयू से बाहर निकालने की एक गंभीर कोशिश नजर आती है।

​व्यवस्था में सुधार की नींव:
अक्सर यह शिकायत रहती थी कि सरकारी डॉक्टर अस्पतालों से नदारद रहकर अपने निजी क्लीनिकों को प्राथमिकता देते हैं।
इससे गरीब मरीज, जो पूरी तरह सरकारी सुविधाओं पर निर्भर हैं, बिना इलाज के रह जाते थे। नए संकल्प पत्र के अनुसार, अब एलोपैथिक डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षक केवल सरकारी संस्थानों में ही अपनी सेवा दे सकेंगे।
सरकार ने इसके बदले उन्हें 'नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस' (NPA) देने का वादा किया है, जो डॉक्टरों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी भी है।

​चुनौतियां और संभावनाएं:
यह कदम जितना सराहनीय है, इसका कार्यान्वयन उतना ही चुनौतीपूर्ण होगा।
क्या सरकार केवल भत्ते के दम पर डॉक्टरों को निजी क्लीनिकों की मोटी कमाई से दूर रख पाएगी?
इसके लिए सख्त निगरानी और जिला स्तर पर पारदर्शी ऑडिट की आवश्यकता होगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है, ताकि डॉक्टर वहां काम करने के लिए प्रेरित हो सकें।

​निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए यह एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसा कदम है।
यदि यह नीति सफलतापूर्वक लागू होती है, तो न केवल सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा लौटेगा, बल्कि बिहार अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकता है।
अब गेंद स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों के पाले में है कि वे इस बदलाव को किस भावना से स्वीकार करते हैं।

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देवास महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय में जैसे ही अमरनाथ यात्रा 2026 की मेडिकल चेकअप 9 अप्रैल से प्रारंभ हुए है वैसे ही बड़ी संख्या में भक्तजन जय बाबा अमरनाथ बर्फानी भूखे को अन्न प्यासे को पानी के जयकारों के साथ मेडिकल चेकअप करवा रहे है ओर वहीं हमने जब जितेंद्र पटेल से बात की तो उन्होंने बताया कि वे 9 अप्रैल से ही जो मेडिकल चेकअप शुरू हुए है उसमें चेकअप करवाकर 15 अप्रैल से जो रजिस्ट्रेशन फॉर्म शुरू होने वाले है यात्रा के लिए उसमें पहले ही जत्थे में बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए अतिउत्सुक है ओर इसी उम्मीद के साथ हमने मेडिकल चेकअप करवाया है । ओर 15 अप्रैल को रजिस्ट्रेशन कराकर जल्दी से जल्दी बाबा के दर्शन लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।

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✍🏻श्योपुर, 11 अप्रैल 2026
श्योपुर जिले में प्रशासनिक नेतृत्व का नया अध्याय शुरू हो गया है। वर्ष 2015 बैच की आईएएस अधिकारी सुश्री शीला दाहिमा ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से कलेक्टर पद का कार्यभार ग्रहण किया। उनके पदभार ग्रहण करते ही जिले में नई ऊर्जा और अपेक्षाओं का माहौल बन गया है।
पदभार ग्रहण के अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद, एसडीएम श्योपुर श्री गगन सिंह मीणा, कराहल एसडीएम श्री बी.एस. श्रीवास्तव, डिप्टी कलेक्टर श्री संजय जैन एवं श्री विजय शाक्य, तहसीलदार श्रीमती मनीषा मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने नवागत कलेक्टर का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश के तहत सुश्री शीला दाहिमा को श्योपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक अनुभव और कार्यकुशलता के लिए पहचानी जाने वाली सुश्री दाहिमा इससे पूर्व बैतूल में सीईओ जिला पंचायत, भोपाल में राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर संचालक, माध्यमिक शिक्षा मंडल में एडिशनल सेक्रेटरी तथा सहकारिता विभाग में उप सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी नियुक्ति से जिले में विकास कार्यों को गति मिलने और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों और आमजन को उनसे पारदर्शी एवं प्रभावी प्रशासन की आशा है।

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✍🏻श्योपुर, 11 अप्रैल 2026
श्योपुर जिले में प्रशासनिक नेतृत्व का नया अध्याय शुरू हो गया है। वर्ष 2015 बैच की आईएएस अधिकारी सुश्री शीला दाहिमा ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से कलेक्टर पद का कार्यभार ग्रहण किया। उनके पदभार ग्रहण करते ही जिले में नई ऊर्जा और अपेक्षाओं का माहौल बन गया है।
पदभार ग्रहण के अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद, एसडीएम श्योपुर श्री गगन सिंह मीणा, कराहल एसडीएम श्री बी.एस. श्रीवास्तव, डिप्टी कलेक्टर श्री संजय जैन एवं श्री विजय शाक्य, तहसीलदार श्रीमती मनीषा मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने नवागत कलेक्टर का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश के तहत सुश्री शीला दाहिमा को श्योपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक अनुभव और कार्यकुशलता के लिए पहचानी जाने वाली सुश्री दाहिमा इससे पूर्व बैतूल में सीईओ जिला पंचायत, भोपाल में राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर संचालक, माध्यमिक शिक्षा मंडल में एडिशनल सेक्रेटरी तथा सहकारिता विभाग में उप सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी नियुक्ति से जिले में विकास कार्यों को गति मिलने और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों और आमजन को उनसे पारदर्शी एवं प्रभावी प्रशासन की आशा है।

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उजीना से नौशेरा जाने वाली सड़क की स्थिति पर एक गंभीर सवाल
उजीना से नौशेरा को जोड़ने वाली सड़क का हाल आज किसी से छुपा नहीं है। साल 2020 से लेकर अब तक यह सड़क चौथी बार बन रही है, लेकिन दुख की बात यह है कि एक भी बार इसका काम किसी मजबूत और जिम्मेदार ठेकेदार को नहीं सौंपा गया। बार-बार निर्माण और फिर कुछ ही महीनों में सड़क का टूट जाना साफ संकेत देता है कि कहीं न कहीं या तो राजनीति का हस्तक्षेप है या फिर जिला प्रशासन की नजर इस मुद्दे से पूरी तरह हट चुकी है।
उजीना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र, जो मेवात की पहचान है, वहां के लोगों को ऐसी बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, यह बेहद चिंताजनक है। यहां के लोग, समाजसेवी और बड़े नाम—जिनका मेवात विकास में योगदान रहा है—भी इस मुद्दे पर चुप नजर आ रहे हैं। केवल एक नाम सामने आया, श्री मास्टर चेतराम जी, जिन्होंने एक बार निरीक्षण किया, लेकिन उसके बाद किसी ने इस ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा।
मीडिया के साथियों ने इस मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्राम पंचायत नौशेरा की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं—ऐसा लगता है जैसे उन्हें इस समस्या से कोई लेना-देना ही नहीं है। क्या उन्हें आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की कोई चिंता नहीं?
यह कहना गलत नहीं होगा कि जैसे ठेकेदार पहले ही सबको चुप रहने के लिए कह देता है, और फिर घटिया निर्माण कर के निकल जाता है। मैं किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन सच को सामने लाना जरूरी है।
आज हमें खुद से सवाल पूछने की जरूरत है—जब सरकार इस सड़क के लिए पैसा दे रही है, तो हम चुप क्यों हैं? हरियाणा सरकार खुद कहती है कि जनता के विकास के लिए धन दिया जाता है। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है, तो हमें निडर होकर आवाज उठानी चाहिए।
याद रखिए, यह सिर्फ एक सड़क का मुद्दा नहीं है—यह हमारे विकास, हमारे बच्चों के भविष्य और हमारे अधिकारों का सवाल है। यहां खुद मुख्यमंत्री आकर निरीक्षण नहीं करेंगे, यह जिम्मेदारी हमारी है।
मैं अपने सभी नौजवानों, बुजुर्गों और जिम्मेदार नागरिकों से अपील करता हूं कि इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें और आवाज उठाएं। अगर आप साथ देना चाहते हैं, तो आगे आइए—और अगर नहीं, तो मैं अकेला ही इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हूं।
सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब है—सिर्फ 6 महीने पहले बनी सड़क आज फिर से टूट रही है और दोबारा काम शुरू हो गया है। इसके वीडियो और तस्वीरें मेरे पास हैं, जिन्हें मैं आप सबके साथ साझा करूंगा।
अब वक्त है जागने का, बोलने का और सही काम करवाने का।
जय हिंद 🇮🇳
जय भारत 🇮🇳
जय मेवात 🙏

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित रवींद्रालय भवन में आयोजित सोनार समागम में शनिवार को स्वर्णकार समाज का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही कि सभागार के साथ-साथ भवन के बरामदे, परिसर और बाहर का मैदान भी खचाखच भरा नजर आया।
समागम के दौरान पूरे क्षेत्र में स्वर्णकार समाज की जागरूकता और एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। परिसर, सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में लगे बैनर और होर्डिंग इस बात के साक्षी रहे कि समाज अब अपने अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को लेकर सजग हो चुका है। वक्ताओं ने इसे सामाजिक और राजनीतिक चेतना के उदय का शुभ संकेत बताया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वर्णकार समाज राजनीतिक भागीदारी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुमार वर्मा तथा नरहरी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार वर्मा की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में जौनपुर जनपद से भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। नरहरी सेना जौनपुर के जिला अध्यक्ष सुजीत वर्मा, शाहगंज नरहरी सेना के संरक्षक सचिन वर्मा तथा शाहगंज नरहरी सेना के अध्यक्ष सुजीत सेठ की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
समागम के अंत में समाज के उत्थान, एकता और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने “जय संत शिरोमणि नरहरी सेना” के जयघोष के साथ समाज की एकजुटता का प्रदर्शन किया।

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डेलंग पिपिली से सीपीआई(ए" target="_blank" style="text-decoration:none;color:#000;">


डेलंग पिपिली से सीपीआई(एमएल) के वरिष्ठ नेता श्री अशोक प्रधान ने ओडिशा सरकार को किसानों के हित में महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा है कि नदियों के जल का उचित संरक्षण और प्रबंधन किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि नदी के पानी को सही तरीके से बचाया और उपयोग किया जाए, तो किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सकता है।

श्री अशोक प्रधान ने कहा कि सरकार को ऐसी ठोस योजना बनानी चाहिए, जिससे नदी का पानी व्यर्थ न बहने पाए और उसका लाभ सीधे खेती-किसानी से जुड़े लोगों को मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था होने से किसानों की समस्याएं कम होंगी और कृषि उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की भलाई के लिए जल संसाधनों के संरक्षण, संचयन और समुचित वितरण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

रिपोर्ट:
जितेंद्र कुमार त्रिपाठी


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बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अनुशासनहीनता और मुख्यमंत्री की आधिकारिक यात्रा में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में तीन अंचलाधिकारियों (CO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भ्रष्टाचार और कार्य में कोताही के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी निर्देशों की अवहेलना करने वाले और जनता को परेशान करने वाले अधिकारियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मियों को कर्तव्य निष्ठा से काम करने का कड़ा संदेश मिला है।

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बेगूसराय के नावकोठी थाना अंतर्गत वृंदावन गांव में शनिवार को दरभंगा के 'प्रेम ज्वेलर्स' से लूटे गए करोड़ों के सोने-चांदी की बरामदगी के लिए की जा रही छापेमारी के दौरान एक शक्तिशाली बम विस्फोट हो गया। जमीन के नीचे छिपे सामान को खोदकर निकालने के प्रयास में हुए इस धमाके की चपेट में आकर 5 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर किया गया है। शुरुआती जांच के अनुसार, अपराधियों ने लूट के माल की सुरक्षा या पुलिस को निशाना बनाने के इरादे से वहां बम छिपा रखा था; फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और फोरेंसिक टीम की मदद से साक्ष्य जुटाकर फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए सघन छापेमारी शुरू कर दी है।

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टोटो चालक की हत्या व लूट कांड का खुलासा, 4 आरोपी गिरफ्तार

लूटी गई बैटरी व घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद, विशेष टीम ने किया सफल उद्भेदन

नवगछिया : पुलिस जिला नवगछिया की खरीक थाना पुलिस ने टोटो चालक की हत्या एवं लूट कांड का सफल उद्भेदन करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से लूटी गई बैटरी तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को वादी राजेश कुमार ने खरीक थाना में सूचना दी कि उनका पुत्र सिटू कुमार, जो टोटो चलाकर जीविका चलाता था, 29 मार्च की शाम घर से टोटो लेकर निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने कलबलिया धार से टोटो बरामद किया, जबकि अम्भो-दादपुर सड़क किनारे एक गड्ढे से सिटू कुमार का शव मिला। इस मामले में मृतक के पिता के बयान पर खरीक थाना कांड संख्या 84/26 दर्ज किया गया।

मामले के त्वरित खुलासे के लिए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम (STT) का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी और मानवीय अनुसंधान के आधार पर चार आरोपियों—श्रीचन कुमार, सुदामा शर्मा, बादल शर्मा और लड्डू शर्मा—को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लूटपाट के उद्देश्य से टोटो रिजर्व किया और तुलसीपुर स्थित केले के बागान में ले जाकर चालक की हत्या कर दी। इसके बाद टोटो की बैटरी और मोबाइल लूट लिया तथा पहचान छिपाने के लिए शव को गड्ढे में और टोटो को अलग स्थान पर फेंक दिया।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई बैटरी और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

अपराधिक इतिहास:
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी बादल शर्मा पर पूर्व में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं लड्डू शर्मा पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है।

छापामारी टीम:
इस सफल कार्रवाई में खरीक थाना प्रभारी नरेश कुमार सहित डीआईयू नवगछिया एवं सशस्त्र बल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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🚨 कायदेशीर प्रेस नोट (आंतरराष्ट्रीय / विदेशी कायद्याच्या चौकटीत – कडक नोटीस) 🚨
तालुका दौंड, जिल्हा पुणे – ब्रेकिंग न्यूज.11/04/2026.??

विषय: दौंड तालुक्यातील वाढते वाहतूक नियमभंग, रोड रोमिओ, ट्रिपल सीट, बेकायदेशीर सायलेंसर, काळ्या काचा, खोट्या ओळखीचा वापर व शाळा परिसरातील ट्रॅफिक जाम संदर्भात तात्काळ कठोर कारवाईबाबत.

दौंड तालुक्यात सध्या सार्वजनिक रस्त्यांवर कायद्याचे उघड उल्लंघन होत असून नागरिकांच्या जीवन, सुरक्षितता व शांततेच्या मूलभूत अधिकारांवर गंभीर परिणाम होत आहे. विशेषतः शाळा परिसरात विद्यार्थ्यांच्या जीवितास धोका निर्माण झाला आहे.

ही परिस्थिती खालील आंतरराष्ट्रीय कायदे व मानकांचे उल्लंघन करते:

👉 Universal Declaration of Human Rights (कलम 3 – जीवन व सुरक्षिततेचा हक्क)
👉 International Covenant on Civil and Political Rights (सार्वजनिक सुव्यवस्था व सुरक्षा)
👉 Vienna Convention on Road Traffic (रस्ता सुरक्षा नियम)
👉 World Health Organization (ध्वनी प्रदूषण व सार्वजनिक आरोग्य मार्गदर्शक तत्त्वे)

🔴 मुद्देनिहाय कारवाईची मागणी:

१) अल्पवयीनांकडून वाहन चालविणे:

१८ वर्षांखालील मुलांकडून वेगाने वाहन चालविणे ही गंभीर बाब असून
👉 Convention on the Rights of the Child अंतर्गत बालकांचे संरक्षण बंधनकारक आहे.
👉 पालक व वाहनमालकांवर देखील जबाबदारी निश्चित करून गुन्हे दाखल करावेत.

२) ट्रिपल सीट व बेफाम वेग:

👉 गर्दीच्या ठिकाणी ट्रिपल सीट व धोकादायक ड्रायव्हिंग करणाऱ्यांवर तात्काळ गुन्हे नोंद करावेत.

३) बुलेट/इतर वाहनांचे फटाके सायलेंसर:

👉 सायलेंसरमधून फटाके आवाज काढणे हे सार्वजनिक आरोग्यास धोका आहे.
👉 अशा वाहनांवर जप्ती व कठोर दंडात्मक कारवाई करावी.

४) काळ्या काचा (Tinted Glass):

👉 चारचाकी वाहनांवर काळ्या काचा वापरणे सुरक्षेच्या दृष्टीने धोकादायक आहे.
👉 संबंधित वाहनांवर तात्काळ कारवाई करावी.

५) रात्री स्टंट व सार्वजनिक त्रास:

📍 ठिकाणे: डिफेन्स कॉलनी, गोल्ड राऊंड, गोपाळवाडी रोड, शिवाजी चौक, वरदे विनायक परिसर
👉 रात्रीच्या वेळी स्टंट, फटाके आवाज व दहशत निर्माण करणाऱ्यांवर गुन्हे दाखल करावेत.

६) बिना नंबर प्लेट वाहने:

👉 अशा वाहनांमुळे चोरी व गुन्हेगारी वाढते
👉 विशेष तपास मोहीम राबवून जप्ती व चौकशी करावी.

७) शाळा सुटल्यानंतर ट्रॅफिक जाम:

📍 शेठ ज्योती प्रसाद विद्यालय परिसर, आंबेडकर चौक – हुतात्मा चौक – कुरकुंभ मोरी – शालिमार चौक
👉 दुपारी 12:30 वाजता मोठ्या प्रमाणात ट्रॅफिक जाम होत असून विद्यार्थ्यांच्या सुरक्षिततेस धोका निर्माण होतो
👉 किमान 2 पोलीस, होमगार्ड व ट्रॅफिक हवालदार तैनात करणे अत्यावश्यक आहे.

८) खोट्या ओळखीचा वापर (Police / Press / Government):

👉 पर्सनल वाहनांवर “Police”, “Press”, “Government” असे अनधिकृत लिहिणे हा गंभीर कायदेशीर गुन्हा आहे
👉 अशा प्रकरणांवर फसवणूक व कायद्याचा गैरवापर या अंतर्गत कारवाई करावी.

⚖️ स्पष्ट मागण्या:

तात्काळ Special Enforcement Drive राबविण्यात यावा

सर्व नियमभंग करणाऱ्यांवर कायदेशीर पावती + गुन्हा नोंद करावा

CCTV, नाकाबंदी व नियमित गस्त वाढवावी

शाळा व गर्दीच्या ठिकाणी कायमस्वरूपी पोलीस बंदोबस्त ठेवावा

📢 अंतिम कायदेशीर इशारा:

वरील बाबींवर तात्काळ कार्यवाही न झाल्यास,
👉 मानवाधिकार आयोग, उच्च न्यायालय तसेच संबंधित आंतरराष्ट्रीय संस्थांकडे तक्रार दाखल करण्यात येईल.

— निवेदक
अमर मधुकर जोगदंड
RTI कार्यकर्ते व सामाजिक कार्यकर्ते
तालुका दौंड, जिल्हा पुणे
📞 8888058805
📧 jogdand.amar1@gmail.com

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​जब न्याय की तराजू संभालने वाले हाथों पर ही सवाल उठने लगें, तो लोकतंत्र की नींव डगमगाने लगती है। जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसने 'जवाबदेही' की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

​पिछले साल दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित उनके बंगले में लगी आग ने न केवल फाइलों को जलाया, बल्कि उस नकदी के अंबार को भी दुनिया के सामने ला दिया, जिसका हिसाब देना शायद नामुमकिन था। 1.5 फीट ऊंचे अधजले नोटों के ढेर ने उस गरिमा को भी स्वाहा कर दिया, जो एक जज के साथ जुड़ी होती है।

​जस्टिस वर्मा का यह कहना कि जांच 'अनुचित' थी, उनके बचाव का एक हिस्सा हो सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि महाभियोग की कार्यवाही पूरी होने से ठीक पहले इस्तीफा क्यों?
क्या यह सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं (पेंशन आदि) को सुरक्षित रखने की एक सोची-समझी रणनीति है?
​इस्तीफा देना महाभियोग से बचने का 'सुरक्षित रास्ता' तो हो सकता है, लेकिन यह 'न्याय' नहीं है। जनता यह जानने का हक रखती है कि एक लोक सेवक के पास इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई। यदि जांच एजेंसियां अब इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं, तो यह संदेश जाएगा कि 'कानून' केवल आम आदमी के लिए है, खास के लिए नहीं।

​अब गेंद सरकार और पुलिस के पाले में है। जस्टिस वर्मा अब 'जज' नहीं रहे, एक आम नागरिक हैं। क्या कानून अब उसी निष्पक्षता से अपना काम करेगा जिसकी उम्मीद एक आम भारतीय करता है? न्यायपालिका की शुचिता बनाए रखने के लिए इस मामले का तार्किक अंजाम तक पहुंचना अनिवार्य है।

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