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ਬਾਬਾ ਫਰੀਦ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ SHE 4.0 – Tech Startup Connect & Grow ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ ਆਯੋਜਨ
“ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਸੂਬੇ ਦੀਆਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੇ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ਲਈ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਅਤੇ SHE 4.0 ਵਰਗੀਆਂ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਆਤਮਨਿਰਭਰਤਾ ਵੱਲ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ,” ਡਾ. ਅਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਅਰੋੜਾ ।
ਫਰੀਦਕੋਟ: ਬਾਬਾ ਫਰੀਦ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਆਫ ਹੈਲਥ ਸਾਇੰਸਿਜ਼ (BFUHS), ਫਰੀਦਕੋਟ ਵੱਲੋਂ ਸੈਨੇਟ ਹਾਲ ਵਿੱਚ “SHE 4.0 – Tech Startup Connect & Grow” ਵਿਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਇੱਕ ਦਿਨਾ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ ਮੁੱਖ ਉਦੇਸ਼ ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਸੰਬੰਧਿਤ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ-ਨੇਤ੍ਰਿਤਵ ਵਾਲੀਆਂ ਸਟਾਰਟਅੱਪਸ, ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਉਦਯਮਿਤਾ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨਾ ਸੀ।
ਇਸ ਮੌਕੇ ਡਾ. ਅਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਅਰੋੜਾ, ਵਿਧਾਇਕ ਮੋਗਾ ਅਤੇ ਮੈਂਬਰ, ਬੋਰਡ ਆਫ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ (BOM), BFUHS, ਮੁੱਖ ਮਹਿਮਾਨ ਵਜੋਂ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਈਆਂ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਸੰਬੋਧਨ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੇ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਨੂੰ ਦੁਹਰਾਇਆ ਅਤੇ BFUHS ਵੱਲੋਂ SHE 4.0 ਵਰਗੇ ਮੰਚ ਉਪਲਬਧ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾ ਕੀਤੀ।
ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਪ੍ਰੋ. (ਡਾ.) ਰਾਜੀਵ ਸੂਦ, ਵਾਈਸ ਚਾਂਸਲਰ, BFUHS, ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਨੋਵੇਸ਼ਨ ਅਤੇ ਇੰਟਰਪਨਿਊਰਸ਼ਿਪ ਹੁਣ ਕੇਵਲ ਵੱਡੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਤੱਕ ਸੀਮਿਤ ਨਹੀਂ ਰਹੀ, ਸਗੋਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀਆਂ ਅਤੇ ਛੋਟੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਕੌਂਸਲ ਫਾਰ ਸਾਇੰਸ ਐਂਡ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ (PSCST) ਦੀ SHE (Startups’ Handholding & Empowerment) ਪਹਿਲਕਦਮੀ ਦੀ ਪ੍ਰਸੰਸ਼ਾ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਉਦਯਮਿਤਾ ਵੱਲ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕੀਤਾ।
ਡਾ. ਦਪਿੰਦਰ ਕੌਰ ਬਖ਼ਸ਼ੀ, ਜੌਇੰਟ ਡਾਇਰੈਕਟਰ, PSCST, ਨੇ SHE 4.0 ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦਿਆਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਯੋਜਨਾ ਮਹਿਲਾ ਉਦਯਮੀਆਂ ਨੂੰ ਵਿਚਾਰ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਉਤਪਾਦ ਵਿਕਾਸ, ਮਾਰਗਦਰਸ਼ਨ, ਮਾਰਕੀਟ ਲਿੰਕੇਜ ਅਤੇ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ ਤੱਕ ਹਰ ਪੜਾਅ ‘ਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ।
“SHE Cohort 4.0 – Innovations & Entrepreneurship” ਵਿਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਹੋਈ ਪਲੇਨਰੀ ਸੈਸ਼ਨ ਵਿੱਚ, ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਰੀਵਾ ਸੂਦ, ਫਾਊਂਡਰ ਅਤੇ ਮੈਨੇਜਿੰਗ ਡਾਇਰੈਕਟਰ, Agriva Naturally, ਡਾ. ਦੀਪਕ ਕਪੂਰ, ਸੀਨੀਅਰ ਵਿਹਿਆਨੀ, ਡਾ. ਗੌਰੀ ਜਯਮੁਰੂਗਨ (Founder, Gowriz), ਡਾ. ਆਸ਼ਨਾ ਨਰੂਲਾ (Founder & Director, Psychopedia – ਵਰਚੁਅਲ ਮੋਡ), ਮਿਸ ਪਾਲਕ ਪੇਰੀਵਾਲ (Co-Founder, Buckitoz), ਮਿਸ ਅਨੀਤਾ ਧੀਮਾਨ (Founder, Right Wrap – ਵਰਚੁਅਲ ਮੋਡ), ਡਾ. ਜੋਤੀ ਕਟਾਰੀਆ ਅਤੇ ਡਾ. ਸੁਰਭੀ ਜੈਨ (Founder, Whimsical Bakes) ਨੇ ਆਪਣੇ ਵਿਚਾਰ ਸਾਂਝੇ ਕੀਤੇ।
ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ ਸਮਾਪਨ ਡਾ. ਗਜਿੰਦਰਾ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਧੰਨਵਾਦ ਪ੍ਰਸਤਾਵ ਨਾਲ ਹੋਇਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਡਾ. ਸੀਮਾ ਗ੍ਰੋਵਰ ਭੱਟੀ, ਪ੍ਰੋ. ਅਤੇ ਮੁਖੀ, ਓਬੀਜੀ ਵਿਭਾਗ, ਸ਼੍ਰੀ ਸਮੀਰ ਕਾਂਤ ਆਹੁਜਾ, ਡਾ. ਇਸ਼ਾ ਤਾਪਸਵੀ ਅਤੇ ਡਾ. ਅੰਸ਼ੁਲ ਬਰਾੜ ਨੂੰ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦੀ ਸਫ਼ਲ ਆਯੋਜਨਾ ਲਈ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ।
ਇਸ ਮੌਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਕੰਨਸਟੀਚਿਊਟ ਕਾਲਜਾਂ ਦੇ ਅਧਿਆਪਕ ਅਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਹਾਜ਼ਰ ਰਹੇ।

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पिंपळगाव सराई | दि. २३ जानेवारी २०२६ :जनता विद्यालय, पिंपळगाव सराई येथे वसंत पंचमी तसेच नेताजी सुभाषचंद्र बोस, हिंदू हृदय सम्राट बाळासाहेब ठाकरे आणि संत तुकाराम महाराज यांच्या जयंतीनिमित्त संयुक्त कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले. या कार्यक्रमाचे अध्यक्ष विद्यालयाचे प्राचार्य प्रमोद ठोंबरे हे होते.कार्यक्रमाच्या सुरुवातीला वसंत पंचमीचे औचित्य साधून सर्व विद्यार्थ्यांनी ज्ञानदेवता सरस्वतीचे विधीवत पूजन केले. यानंतर मान्यवरांच्या प्रतिमांना पुष्पहार अर्पण करून कार्यक्रमास सुरुवात करण्यात आली.या कार्यक्रमाचे प्रमुख वक्ते सुहास कुलकर्णी व प्रा. रमेश जगताप हे होते. सुहास कुलकर्णी यांनी वसंत पंचमीचे सांस्कृतिक व शैक्षणिक महत्त्व विशद करताना संत तुकाराम महाराजांच्या अभंगपरंपरेतून मिळणाऱ्या जीवनमूल्यांवर प्रकाश टाकला. संत तुकाराम महाराजांचे विचार आजच्या विद्यार्थ्यांसाठी मार्गदर्शक असून साधेपणा, प्रामाणिकपणा आणि मानवतेची शिकवण देतात, असे त्यांनी नमूद केले.प्रा. रमेश जगताप यांनी नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांच्या देशभक्ती, त्याग व धैर्यपूर्ण नेतृत्वाबद्दल माहिती देताना स्वातंत्र्यलढ्यातील त्यांच्या योगदानाचे महत्त्व स्पष्ट केले. तसेच बाळासाहेब ठाकरे यांच्या प्रभावी वक्तृत्वशैली, संघटनकौशल्य आणि सामाजिक-राजकीय जीवनातील भूमिकेवर त्यांनी सविस्तर विवेचन केले.कार्यक्रमाचे अध्यक्ष प्राचार्य प्रमोद ठोंबरे यांनी आपल्या अध्यक्षीय भाषणात सांगितले की,“अशा प्रकारचे संयुक्त कार्यक्रम विद्यार्थ्यांमध्ये इतिहासाची जाणीव, सांस्कृतिक भान आणि सामाजिक जबाबदारीची भावना निर्माण करतात. वसंत पंचमी ज्ञानाची उपासना शिकवते, संत तुकाराम महाराज मानवतेचा मार्ग दाखवतात, नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रप्रेमाची प्रेरणा देतात, तर बाळासाहेब ठाकरे निर्भय विचार मांडण्याचे धैर्य देतात. या सर्व महापुरुषांचे विचार आत्मसात करून विद्यार्थी सुजाण, संवेदनशील आणि कर्तव्यदक्ष नागरिक घडावेत, हीच अपेक्षा आहे.”कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन इयत्ता आठवीतील विद्यार्थिनी पूनम काळे हिने तर आभार प्रदर्शन प्रतिक्षा गुंड हिने अत्यंत आत्मविश्वासाने केले. कार्यक्रमाच्या शेवटी सर्व विद्यार्थ्यांना प्रसादाचे वितरण करण्यात आले.या संपूर्ण कार्यक्रमाचे यशस्वी आयोजन व समन्वय सौ. वंदना लकडे यांनी समर्थपणे पार पाडले.

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से कुछ नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के सामने आने के बाद देशभर में शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है।
इन नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश सरकार में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। वहीं, मशहूर कवि कुमार विश्वास ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।”
क्या हैं UGC के नए नियम?
UGC ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’
(Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) जारी किए हैं। इन नियमों के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं—
1. Equity Committees और Equity Squads का गठन
देश के हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads बनाई जाएंगी। आलोचकों का कहना है कि Equity Squads को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि “भेदभाव” की स्पष्ट परिभाषा नियमों में ठीक से निर्धारित नहीं की गई है।
2. 24×7 हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था
हर संस्थान में Equal Opportunity Centre स्थापित किया जाएगा, जहां छात्र कभी भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। विरोध करने वालों का तर्क है कि बिना ठोस प्रमाण के दर्ज शिकायतें दूसरे छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
3. SC-ST और OBC वर्ग पर विशेष फोकस
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को सुरक्षित और समान अवसर वाला वातावरण उपलब्ध कराना है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इससे सवर्ण वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है और सामाजिक विभाजन और बढ़ेगा।
4. नियमों का अनिवार्य पालन
UGC ने स्पष्ट किया है कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थान की मान्यता रद्द की जा सकती है या वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है। विरोध करने वालों के अनुसार इससे संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
UGC ने क्या कहा?
नियमों को लेकर हो रहे विरोध पर UGC ने सफाई देते हुए कहा है कि ये नियम समय की जरूरत हैं। पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों के खिलाफ भेदभाव से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। UGC का कहना है कि इन नए नियमों से समान अवसर सुनिश्चित होंगे और सभी वर्गों के छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।

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चंडीगढ़ 27/01/2026 एम आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा रक्षत शर्मा अल्फा न्यूज़ इंडिया ----
शिवसेना हिन्दुस्तान ने चंडीगढ़ मुख्य कार्यालय पर तिरंगा ध्वजारोहण करके 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया।

आज शिवसेना हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के अपने मुख्य कार्यालय पर शिवसेना हिन्दुस्तान के पंजाब राज्य सचिव एवं चंडीगढ़ प्रदेश प्रमुख अजय सिंह चौहान ने समस्त वार्ड नं 7और प्रदेश कार्यकारिणी के साथ 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर तिरंगा ध्वजारोहण मोली जागरा कम्पलैक्स में किया। इस अवसर पर अजय चौहान ने गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहरा कर कहा कि विश्व का सब से प्यारा और मजबूत संविधान प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्र भारत का है। उपस्थित सभी को लड्डू वितरित किये और खुशी में सभी को बधाई दी।
अजय सिंह चौहान ने बताया कि जब तक जीवित रहेंगे। अपने तिरंगे झंडे के लिए और अपने सनातन के लिए अपनी पूरी टीम के साथ निरंतर कार्य करते रहेंगे। और आजीवन अपने और अपनी टीम के साथ भारत देश के इस ध्वज के लिए हमेशा नतमस्तक रहेंगे। और जय हिंद वंदे मातरम भारत माता की जय के नारों के साथ उद्घोष किये गये। और शिवसेना की सारी टीम ने मिलकर भारतवर्ष को विश्व गुरु बनाने के लिए सनातन को और भी मजबूत करने के लिए इस भव्य दिन पर श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ किया और सभी ने मिलकर हनुमान चालीसा पढ़ी और यह संदेश दिया कि हम सभी को एक जुट रहकर इस तिरंगे का और इस सनातन का कार्य करना चाहिए। और हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। और सभी को पाठ करने की प्रेरणा भी देनी चाहिए। कार्यक्रम में शामिल लोग
चंडीगढ़ संगठन मंत्री मुरारी लाल जी, हिंदुस्तान मजदूर सेना के अध्यक्ष किशन चौहान चंडीगढ़ युवा अध्यक्ष अजीत चौहान, चंडीगढ़ युवा उपाध्यक्ष अमित अटवाल, वार्ड नंबर 7 प्रभारी संजय गुप्ता, वार्ड नंबर 7 अध्यक्ष प्रकाश चन्द, ओमनाथ जी,वार्ड नंबर 7 के शिव जयसवाल युवा अध्यक्ष, चंडीगढ़ प्रचारक सुरेंद्र वर्मा,ब्लॉक प्रधान पप्पू जी उत्तम तिवारी, धर्मेंद्र, जसदेव कुमार ,शत्रुघ्नसिंह ,प्रवीन, सेक्टर 49 से राजकुमार पर्चे अनिल बिडला गुलाब , प्रवीण कपूर, अजय फोटोग्राफर ,डॉक्टर इब्राहिम खान, राकेश मिश्रा जी आदि शामिल हुए. अल्फा न्यूज़ इंडिया ने गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए इस आयोजन के लिए आयोजकों को भी शाबाशी और साधुवाद दिया है।।

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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी आलोकित त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इन नियमों को छात्रों के एक बड़े वर्ग के लिए अन्यायपूर्ण, भेदभावपूर्ण और एकतरफा करार दिया। आलोकित त्रिपाठी का कहना है कि यूजीसी के नए नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों को बिना किसी ठोस आधार के “स्वतः घोषित अपराधी” मानने जैसी व्यवस्था की गई है, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा के लिए कोई स्पष्ट और प्रभावी प्रावधान नहीं किए गए हैं। यदि किसी छात्र पर झूठा आरोप लगाया जाता है, तो उसके सम्मान, भविष्य और शैक्षणिक जीवन की रक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती। इसके विपरीत, शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई का प्रावधान छात्रों को मानसिक तनाव, सामाजिक बदनामी और करियर नुकसान की ओर धकेल सकता है।

आलोकित त्रिपाठी ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि नए यूजीसी नियमों में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी प्रकार के दंड या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि जब किसी कानून में दुरुपयोग की संभावना को रोकने के उपाय न हों, तो वह कानून न्याय की बजाय अन्याय का माध्यम बन जाता है। ऐसे में निर्दोष छात्रों को सजा और दोषियों को प्रोत्साहन मिलने का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने यूजीसी से मांग की कि नए नियमों की तत्काल समीक्षा की जाए और सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं। आलोकित त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस यूजीसी कानून का पूर्णतः विरोध करते हैं और जब तक इसमें संतुलित व न्यायसंगत बदलाव नहीं किए जाते, तब तक छात्रों और शिक्षाविदों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।

लेख: ऋषभ पराशर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMA मीडिया युवा प्रकोष्ठ

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నగరపంచాయతీ కార్యాలయంలో ఘనంగా గణతంత్ర దినోత్సవం

స్వతంత్ర భారతం గణతంత్ర రాజ్యంగా అవిర్బవించిన సుదినం

చైర్పర్సన్ సరోజిని, వైస్ చైర్మన్ రామారావు

77 వ గణతంత్ర దినోత్సవాన్ని పురస్కరించుకొని నెల్లిమర్ల నగర పంచాయతీ కార్యాలయంలో పతాకావిష్కరణ కార్యక్రమాన్ని ఘనంగా నిర్వహించారు. నగర పంచాయతీ కమిషనర్ ఎస్. జనార్దన్రావు చేతుల మీదుగా జరిగిన పతాకావిష్కరణలో చైర్పర్సన్ బంగారు సరోజిని,వైస్ ఛైర్మన్ సముద్రపు రామారావు మరియు పట్టణ పెద్దలు లెంక అప్పలనాయుడు పాలకవర్గ కౌన్సిలర్లు, కో ఆప్షన్ సభ్యులు, వివిధ హోదాల్లో హాజరైన పెద్దలు,నగర పంచాయతీ, మెప్మా మరియు వార్డు సచివాలయల సిబ్బంది పాల్గొన్నారు.
గణతంత్ర దినోత్సవం సందర్భంగా వైస్ చైర్మన్ సముద్రపు రామారావు మాట్లాడుతూ....
స్వతంత్ర ఆలోచనలు, స్వయం సమృద్ధి సాధన, సమిష్టి సంకల్పం, సంతులన న్యాయం వంటివి మూలభావనలుగా ఏర్పడిన రాజ్యాంగాన్ని గౌరవించే పర్వదినంగా నిర్వహించుకుంటున్న ఈ వేడుక మనందరిలో ఆ భావాలను ప్రేరేపించి సమున్నత లక్ష్యాల సాధనకు ముందుకు నడిపించాలని అందుకు రాజకీయాలకు అతీతంగా అభివృద్ధిలో ప్రతి ఒక్కరూ భాగస్వామ్యం కావాలని, నగర పంచాయతీ పౌరులందరికీ సమాన హక్కులు కల్పిస్తూ ప్రతి ఒక్కరి ఆత్మగౌరవాన్నీ కాపాడాలని పిలుపునిచ్చారు.
ఈ కార్యక్రమంలో గౌరవ కౌన్సిల్ సభ్యులు, కోఆప్షన్ సభ్యులు, వివిధ హోదాల్లో విచ్చేసిన గౌరవ పెద్దలు, నగర పంచాయతీ సిబ్బంది, మెప్మా సిబ్బంది, సచివాలయాల సిబ్బంది, ఇతర పెద్దలు పాల్గొన్నారు.

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​नई दिल्ली: 13 जनवरी 2026 को लागू हुए यूजीसी के नए नियमों ने शिक्षा जगत से लेकर राजनीति तक खलबली मचा दी है। जहाँ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के रुख को लेकर पिछड़ा वर्ग अपनी नाराजगी जता रहा है, वहीं सवर्ण संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।​विवाद के केंद्र में ये 4 नियम:​OBC का समावेश और नई परिभाषा (नियम 3-c): नए नियमों में पहली बार 'जातिगत भेदभाव' की परिभाषा में OBC को भी शामिल किया गया है। आलोचकों का तर्क है कि यह नियम केवल आरक्षित श्रेणियों (SC/ST/OBC) को ही 'पीड़ित' मानता है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के पास भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा का कोई कानूनी आधार नहीं बचता।​समता समिति (Equity Committee) का गठन: हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक 'इक्विटी कमेटी' बनाना अनिवार्य होगा। इसमें आरक्षित वर्गों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। विरोधियों का कहना है कि यह स्वायत्त संस्थानों में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ाएगा।​24 घंटे में कार्रवाई और जवाबदेही: शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर जांच शुरू करना और 15 दिनों में रिपोर्ट देना अनिवार्य है। संस्थानों के प्रमुखों को इसके लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा, जिसे कुछ लोग 'हड़बड़ी में की जाने वाली कार्रवाई' मान रहे हैं।​झूठी शिकायतों पर सजा का अभाव: पिछले ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान था, जिसे फाइनल रेगुलेशन से हटा दिया गया है। सवर्ण संगठनों और प्रशांत किशोर के आलोचकों के बीच यह डर है कि इसका इस्तेमाल 'रंजिश निकालने' के लिए किया जा सकता है।​राजनीतिक हलचल: बिहार में विपक्षी दलों का दावा है कि प्रशांत किशोर का इन नियमों पर 'मौन' या 'अप्रत्यक्ष विरोध' उनकी 'बैकवर्ड विरोधी' छवि को उजागर करता है। वहीं, जन सुराज के समर्थकों का कहना है कि पार्टी केवल नियमों के दुरुपयोग को लेकर चिंतित है।

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