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स्कूलों का महंगी कॉपी, किताबें और स्टेशनरी पर अपना लोगो/ब्रांड लगाकर बेचना बच्चों के परिवारों के साथ सीधी लूट जैसा है। यह आम बाज़ार की चीज़ों से 2-3 गुना ज़्यादा पैसे लेता है, जबकि लोगो लगाने के अलावा इसमें कुछ खास नहीं होता। ऐसा क्यों होता है? स्कूल ये चीज़ें खुद या अपनी टाई-अप दुकानों के ज़रिए बेचते हैं। वे “यूनिफ़ॉर्मिटी और बच्चे को स्कूल से जोड़ने” का बहाना बनाते हैं। असल में, यह एक तरह की मोनोपॉली है जिससे माता-पिता से ज़्यादा पैसे ऐंठते हैं। सरकार का क्या रुख है? पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों में) और दूसरे राज्यों की सरकारों ने इसके ख़िलाफ़ गाइडलाइंस जारी की हैं: प्राइवेट स्कूल माता-पिता को किसी खास दुकान से खरीदने के लिए मजबूर न करें। स्कूल सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ों की लिस्ट दे सकता है, लेकिन लोगो वाली चीज़ें खरीदना ज़रूरी नहीं कर सकता। कई जगहों पर इसे गैर-कानूनी माना गया है और इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई है। लेकिन असल में, कई स्कूल इसे नज़रअंदाज़ करते हैं और बच्चों पर लोगो वाली कॉपी लाने का दबाव डालते हैं। आप क्या कर सकते हैं? स्कूल प्रिंसिपल से लिखकर पूछें कि बिना लोगो वाली सादी कॉपी लाने पर कोई रोक है या नहीं, तो उसका रेफरेंस मांगें। अपने इलाके के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) या पंजाब स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत करें। ज़्यादातर जगहों पर ऐसी शिकायतों पर एक्शन लिया गया है। दूसरे पेरेंट्स से बात करें। अगर हम सब मिलकर आवाज़ उठाएंगे, तो बदलाव आना आसान है। आम मार्केट से अच्छी क्वालिटी की कॉपी खरीदकर ले जाएं। अगर बच्चा डरता है, तो उसे समझाएं कि यह उसका हक है। यह प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए क्योंकि पढ़ाई महंगी नहीं होनी चाहिए, खासकर मिडिल क्लास और गरीब परिवारों के लिए। पढ़ाई बच्चों के लिए होनी चाहिए, स्कूल अथॉरिटीज़ की जेब भरने के लिए नहीं। 🍳*हरबंस सिंह, एडवाइजर* 🙏🏻 शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

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बेरमो में कुदरत का कहर, भीषण आंधी और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई जगहों पर गिरे पेड़ और पोल, घरों के उड़े एस्बेस्टस सीट

बेरमो
बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और एक चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण बेरमो कोयलांचल क्षेत्र में बुधवार को मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि चारों ओर तबाही के निशान नजर आने लगे। दोपहर के बाद अचानक आए भीषण आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। चक्रवातीय प्रभाव के कारण 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी, ओलावृस्ट बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया। बहुत एज बारिश के साथ बड़े बड़े बर्फ के बारिश ने आम जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। आंधी तूफान और बारिश के वजह से दोपहर के समय पूरा क्षेत्र मे अंधेरा छा गया। जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि क्षेत्र के कई हिस्सों में दशकों पुराने विशाल पेड़ जड़ से उखड़ गए। फुसरो-जैनामोड़ मुख्य मार्ग और बेरमो-गोमिया रोड पर पेड़ों के गिरने से आवाजाही घंटों बाधित रही। राहगीरों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी। फुसरो, जारंगडीह, करगली और कथारा जैसे बड़े इलाकों में बिजली के पोल ताश के पत्तों की तरह गिर गए। हाई-टेंशन तार टूटने के कारण पूरे कोयलांचल में ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। बिजली विभाग के अनुसार, नुकसान काफी अधिक है और बहाली में समय लग सकता है। शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई कच्चे मकानों के एस्बेस्टस और छप्पर उड़ गए। बाजार क्षेत्रों में दुकानों के साइनबोर्ड और होर्डिंग्स उखड़कर सड़कों पर आ गिरे। कुछ स्थानों पर खड़ी गाड़ियों पर पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। फुसरो नगर परिषद कार्यालय परिसर में खड़ी चलंत शौचालय के ऊपर विशाल पेड़ गिरने से चलंत शौचालय क्षतिग्रस्त हो गया।
पिछले कई दिनों से पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा था, जो इस तूफान के बाद गिरकर सीधे 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया है। हालांकि, इस राहत के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में लगी सब्जियों और अन्य फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिससे स्थानीय किसान चिंतित हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, नगर परिषद और बिजली विभाग की टीमें राहत कार्य में जुट गई हैं। गैस कटर की मदद से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाकर रास्ता साफ किया जा रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बोकारो सहित आसपास के जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। अगले 48 घंटों तक इसी तरह के मौसम और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम में घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी:
​वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जब भी जनता अपने संवैधानिक अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए उठ खड़ी होती है, तो सत्ता अक्सर 'कानून-व्यवस्था' का हवाला देकर दमन का मार्ग चुनती है।

​संवैधानिक विरोधाभास:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।
पूर्व सूचना के बावजूद गिरफ्तारी करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े करता है।

​रणनीतिक चूक:
प्रशासन द्वारा की गई गिरफ्तारियां अक्सर आंदोलन को कमजोर करने के बजाय उसे और अधिक जन-समर्थन और धार प्रदान कर देती हैं।

​आंदोलन का स्वरूप:
'संविधान सुरक्षा महारैली' जैसे आयोजन वैचारिक होते हैं। विचार को सलाखों के पीछे कैद करना असंभव है।

​क्या संविधान की रक्षा की बात करना अब 'अपराध' है?

​आज जिला प्रशासन द्वारा अंबेडकर संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार और उनके साथियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या इस देश में असहमति की आवाज़ के लिए कोई जगह बची है?
शांतिपूर्ण धरना और अनशन किसी भी जीवित लोकतंत्र के सबसे बड़े हथियार होते हैं, लेकिन जब प्रशासन इन हथियारों को ही 'अपराध' मान ले, तो समझ लेना चाहिए कि तंत्र लोक से डरने लगा है।

​दमन का दौर और उठते सवाल,
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन और संविधान सुरक्षा महारैली जैसे आयोजन किसी व्यक्ति विशेष के नहीं, बल्कि एक विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण के प्रतीक हैं।

1 मई 2026 की महारैली को रोकने का प्रयास और अनशनकारियों को हिरासत में लेना सीधे तौर पर उन बुनियादी अधिकारों पर प्रहार है,
जिन्हें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें सौंपा था।

​प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिह्न ?
प्रशासन का कार्य व्यवस्था बनाए रखना है, न कि शांतिपूर्ण वैचारिक आंदोलनों का गला घोंटना।
जब आंदोलनकारियों ने पूर्व में विधिवत सूचना दे दी थी,
तो वार्ता के बजाय गिरफ्तारी का मार्ग चुनना प्रशासनिक विफलता और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।

​निष्कर्ष
इतिहास गवाह है कि जब-जब हक़ की आवाज़ को दबाया गया है, वह और अधिक बुलंद होकर गूंजी है।

सत्ता को यह समझना होगा कि संविधान की रक्षा का संकल्प लेने वाले लोग जेल की दीवारों से नहीं डरते।

यदि संविधान सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र की नींव ढह जाएगी।

​आज की यह गिरफ्तारी केवल कुछ नेताओं की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक की आवाज को दबाने की कोशिश है जो न्याय और समानता की बात करता है। लेकिन याद रहे— "संविधान बचेगा, तो ही देश बचेगा!"

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हेडलाइन:
👉 रिश्तों की असली पहचान: जो बिना कहे समझ ले हर एहसास!
📄 डिस्क्रिप्शन:
आज के दौर में रिश्ते शब्दों से नहीं, समझ और भावनाओं से मजबूत बनते हैं।
सच्चा दोस्त, सच्चा प्यार वही होता है जो आपकी मुस्कान के पीछे छुपा दर्द, नाराज़गी के पीछे का प्यार और खामोशी की असली वजह बिना कहे समझ जाए।
मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन का यह संदेश समाज को एक नई दिशा देता है—
👉 रिश्तों में दिखावा नहीं, सच्ची समझ और सम्मान जरूरी है।
आइए, हम सभी अपने रिश्तों को और मजबूत बनाएं, एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और मानवता को आगे बढ़ाएं।
📍 रिपोर्टर: सूर्य प्रकाश पाण्डेय
#Hashtags:
#रिश्ता #दोस्ती #सच्चाप्यार #मानवाधिकार #HumanRights #EmotionalConnect #TrueRelations #Respect #Understanding #SocialMessage #ViralPost #TrendingNow

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​बरेली से आई यह तस्वीर केवल तीन आरोपियों की नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच की है जहाँ सरकारी नौकरी की चाहत को ठगों ने अपना हथियार बना लिया है।
दो सगी बहनें—विप्रा और शिखा—जिन्होंने न केवल कानून की आंखों में धूल झोंकी, बल्कि दर्जनों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
खुद को आईएएस ट्रेनी और एडीएम बताकर इन बहनों ने एक ऐसा मायाजाल बुना, जिसमें पढ़े-लिखे बेरोजगार आसानी से फंस गए।

​धोखाधड़ी का 'सिस्टम':
कैसे बनाया शिकार?
खबरों के मुताबिक, इन बहनों ने बड़ी चतुराई से सरकारी रसूख का दिखावा किया।
किसी को कंप्यूटर ऑपरेटर तो किसी को सचिवालय में नौकरी का झांसा दिया गया।
मामला तब खुला जब ठगी के शिकार युवा फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर लखनऊ पहुंचे और वहां उन्हें पता चला कि उनके साथ लाखों की धोखाधड़ी हुई है।

लगभग 11.5 लाख रुपये की ठगी का यह मामला तो महज एक शुरुआत है; पुलिस को अंदेशा है कि पीड़ितों की संख्या और भी अधिक हो सकती है।

​ सतर्कता ही बचाव है,
यह घटना हमारे सिस्टम और समाज के लिए कई सवाल खड़े करती है:

​अंधविश्वास और जल्दबाजी:
सरकारी नौकरी पाने की होड़ में लोग बुनियादी वेरिफिकेशन करना क्यों भूल जाते हैं?

​पहचान का संकट:
फर्जी आईडी और पद का इस्तेमाल कर अपराधी समाज में खुलेआम घूम रहे हैं।

​डिजिटल साक्षरता की कमी: क्या हम इतने भोले हैं कि व्हाट्सएप पर आए लेटर और मौखिक वादों पर लाखों रुपये लुटा दें?

​निष्कर्ष
बरेली पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है। किसी भी विभाग में नियुक्ति की एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया होती है।
"शॉर्टकट" और "सेटिंग" के नाम पर पैसे मांगने वाला हर व्यक्ति अपराधी हो सकता है।
यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।
​सावधान रहें, जागरूक रहें। नौकरी मेहनत से मिलती है, घूस से नहीं।

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🔥 हेडलाइंस स्टाइल (Viral Headlines) 🔥
🇮🇳 देश की असली ताकत: ईमानदारी!
💥 झूठ से नहीं, सच से बनेगा भारत महान
⚖️ हर दिल में ईमानदारी, तभी मजबूत होगी जिम्मेदारी
🚨 भ्रष्टाचार पर वार—ईमानदारी ही हथियार!
🌟 सच्चाई का रास्ता ही असली जीत का रास्ता
🔔 30 अप्रैल: खुद से वादा—ईमानदार बनना है ज्यादा
✨ शॉर्ट वायरल कैप्शन (Poster/Status के लिए) ✨
👉 “ईमानदारी अपनाओ, देश को आगे बढ़ाओ 🇮🇳”
👉 “सच की राह—सबसे बड़ी चाह”
👉 “निष्ठा + कर्तव्य = मजबूत राष्ट्र”
👉 “ईमानदार बनो, देश का मान बढ़ाओ”
👉 “आज नहीं तो कब? ईमानदारी अब!”
👉 “ईमानदारी ही असली देशभक्ति है”
📢 एक लाइन का सुपर वायरल कैप्शन: “ईमानदारी ही पहचान है—यही सच्चा हिंदुस्तान है 🇮🇳”

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​गया। जब पारा 45 डिग्री को पार करने की जिद पर अड़ा हो, तब बूंद-भर पानी की कीमत उस प्यासे परिवार से पूछिए जो घंटों सूखी टोंटियों को निहारता रहता है।
गया के जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर का पुलिस लाइन और सिंगरा स्थान जलापूर्ति केंद्र पर औचक धावा महज एक 'सरकारी दौरा' नहीं, बल्कि उन लापरवाह अधिकारियों के लिए 'वेक-अप कॉल' है, जो फाइलों में तो जलापूर्ति सुचारू दिखाते हैं, लेकिन धरातल पर वाल्व को जंग खाने के लिए छोड़ देते हैं।

​सिस्टम की 'सुलिस' में फंसी जनता की प्यास,
​यह विडंबना ही है कि एक तरफ सरकार करोड़ों की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करती है, वहीं दूसरी ओर बुडको के जिम्मेवार अभियंताओं की नाक के नीचे मुख्य सड़क पर वाल्व बंद पड़े रहते हैं।
एपी कॉलोनी से लेकर गवालबीघा तक की जनता पिछले चार दिनों से पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही थी, और विभाग सोया रहा।
डीएम की नाराजगी जायज है—वेतन रोकना और स्पष्टीकरण मांगना उन अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश है जो जनता की बुनियादी जरूरतों को 'कैजुअल' लेते हैं।

​समय प्रबंधन और तकनीकी गैप,
​सिंगरा स्थान केंद्र का डेटा डराने वाला है।
8 घंटे की मेहनत (टंकी भरना) का फल सिर्फ 45 मिनट (डिस्चार्ज) में समाप्त हो जाता है।
ऐसे में एक मिनट की भी लापरवाही हजारों घरों को प्यासा रख सकती है।
प्रशासन ने सही पकड़ा है कि यहाँ 'निगरानी' ही एकमात्र समाधान है।
अंतिम छोर (Tail End) तक पानी पहुंचाना केवल पाइपलाइन का काम नहीं, बल्कि उस पर तैनात कर्मी की ईमानदारी का काम है।

​आपदा प्रबंधन: अब कोताही बर्दाश्त नहीं
​भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं है।
डीएम द्वारा 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' के तहत कार्रवाई की चेतावनी देना यह साबित करता है कि अब पानी की चोरी या सप्लाई में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। 24 घंटे का अल्टीमेटम बुडको के लिए 'अग्निपरीक्षा' है।

​हमारा नजरिया:
प्रशासनिक सख्ती स्वागत योग्य है, लेकिन गया जैसे शहर को केवल 'निरीक्षणों' के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
बुडको और नगर निगम को एक 'स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम' विकसित करना होगा ताकि वाल्व बंद होने या सप्लाई रुकने की जानकारी डीएम के पहुंचने से पहले मुख्यालय को मिल जाए। जनता को पानी चाहिए, बहाने नहीं।

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30 अप्रैल | भगवान नृसिंह जयंती विशेष 🔥
आज पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है भगवान नृसिंह जयंती। भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह जी ने अन्याय और अधर्म का अंत कर धर्म और न्याय की स्थापना का संदेश दिया था।
🙏 इस पावन अवसर पर मानवाधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा ऑर्गेनाइजेशन की ओर से सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
✨ संदेश:
जहां अन्याय हो, वहां आवाज उठाना ही सच्चा धर्म है।
न्याय, सत्य और मानवता की रक्षा ही हमारी असली पहचान है।
📢 संस्था के प्रतिनिधि सूर्य प्रकाश पांडेय ने कहा कि आज का दिन हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है।
🌼 भगवान नृसिंह जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे, यही मंगलकामना।
📞 संपर्क: 8999396014
📍 मानवाधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा

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गढ़वा सदर अस्पताल की बदहाली उजागर, स्लाइन स्टैंड तक नसीब नहीं

गढ़वा (झारखंड)। गढ़वा जिले के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल को भले ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बताया जाता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।

ताजा मामले में सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज को इलाज के दौरान स्लाइन चढ़ाने के लिए स्टैंड तक उपलब्ध नहीं हो पाया। मजबूरी में मरीज के परिजनों को खुद हाथ में स्लाइन की बोतल पकड़कर ड्रिप चढ़वानी पड़ी। यह दृश्य अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आए दिन इस तरह की समस्याएं सामने आती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस अस्पताल का उद्देश्य आखिर क्या है।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं और लोगों ने जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

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शाहगंज, जौनपुर। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सामने स्थित एक बिजली का खंभा इन दिनों बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहा है। काफी हद तक झुक चुके इस खंभे पर कई बिजली के तारों का भार है, जिससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है। चिंताजनक बात यह है कि ठीक बगल में दूसरा बिजली का खंभा मौजूद होने के बावजूद अब तक तारों को उस पर स्थानांतरित नहीं किया गया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने होने के कारण इस मार्ग पर दिनभर मरीजों, तीमारदारों, एंबुलेंस तथा आम नागरिकों की आवाजाही बनी रहती है। आसपास मेडिकल स्टोर और अन्य दुकानें होने से यहां हमेशा भीड़भाड़ का माहौल रहता है। ऐसे में झुका हुआ खंभा और उस पर लटकते तार राहगीरों, मरीजों व दुकानदारों के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, खंभा काफी समय से झुका हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी स्थिति और अधिक खराब हो गई है। हल्की बारिश या तेज हवा चलने पर इसके गिरने की आशंका बनी रहती है। यदि खंभा गिरता है तो बिजली के तार टूटकर करंट फैलने से जनहानि हो सकती है। साथ ही यातायात बाधित होने और आसपास की दुकानों को नुकसान पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खंभे के पास से प्रतिदिन मरीजों की एंबुलेंस गुजरती हैं। ऐसे में किसी भी क्षण यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। लोगों ने सवाल उठाया कि पास में दूसरा खंभा लगे होने के बावजूद उस पर तार स्थानांतरित क्यों नहीं किए गए, जबकि इससे समस्या का समाधान आसानी से हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने विद्युत विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर झुके हुए खंभे को सीधा कराने अथवा तारों को दूसरे खंभे पर शिफ्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं। फिलहाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने झुका यह खंभा हर आने-जाने वाले व्यक्ति के लिए चिंता और खतरे का सबब बना हुआ है।

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का एक छोटा सा गांव 'कालादेव', जो कभी दशहरे पर होने वाले हिंसक 'पत्थर युद्ध' के लिए जाना जाता था,
आज सामाजिक चेतना और समरसता की एक नई इबारत लिख रहा है।

इस गांव ने अपनी सदियों पुरानी हिंसक परंपरा को त्यागकर शिक्षा, आध्यात्मिकता और संवैधानिक मूल्यों को अपनाया है।

​हिंसा से शांति का सफर,
कालादेव की पहचान कभी पत्थरों से होने वाली लड़ाई थी, जिसमें अक्सर लोग घायल होते थे।
लेकिन अप्रैल 2020 में हरिशंकर बौद्ध ने अपने घर से बोधगया के के के बौद्ध द्वारा मिली प्रेरणा से शुरू की गई एक छोटी सी पहल ने पूरे गांव की दिशा बदल दी।

आज यहाँ हर बुधवार को ग्रामीण एकत्रित होते हैं, बुद्ध वंदना करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात—सामूहिक रूप से भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ करते हैं।

​संविधान और शिक्षा पर जोर,
इस बदलाव की सबसे खूबसूरत बात यह है कि ग्रामीण अब केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं हैं।

गांव के 70 से अधिक परिवार इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना दिखाया जा रहा है, और "खीर दान" जैसी परंपराओं के माध्यम से आपसी भाईचारे को मजबूत किया जा रहा है।

​निष्कर्ष
यदि समाज पुरानी और हानिकारक परंपराओं को छोड़कर शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों की ओर बढ़ता है, तो कालादेव जैसे गांव पूरे देश के लिए 'मॉडल विलेज' बन सकते हैं।
यह लेख हमें याद दिलाता है कि वैचारिक परिवर्तन ही वास्तविक विकास की नींव है।

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गाजियाबाद। शास्त्री नगर स्थित जवाहरलाल नेहरू गर्ल्स पब्लिक स्कूल में नागरिक सुरक्षा द्वारा पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का किया गया समापन।

उक्त प्रशिक्षण अपर जिलाधिकारी नगर एवं उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा श्री विकास कश्यप के दिशा निर्देशन तथा सहायक उपनियंतक नेम सिंह के नेतृत्व में चलाया गया।

इस प्रशिक्षण में छात्र-छात्राओं एवं अध्यापकों को नागरिक सुरक्षा की बेसिक जानकारी, सहयोगी सेवाएं एवं विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं बाढ़, भूकंप, आग, दुर्घटना से सुरक्षा एवं बचाव तथा उसके उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। आपदा के समय घायलों को बाहर निकालने के लिए उपलब्ध संसाधनों से बनाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के स्टेचर की जानकारी दी गई तथा छात्र-छात्राओं को अभ्यास भी कराया गया। विशेष कर आग एवं उसके प्रकार तथा आग से सुरक्षा एवं बचाव में प्रयोग होने वाले एंक्सटीगयूसर की विस्तार से जानकारी दी गई एवं अभ्यास भी कराया गया।

प्रशिक्षण उपरांत कुछ प्रतिभाशाली बच्चों एवं अध्यापिकाओं को नागरिक सुरक्षा की टाई देकर पुरस्कृत भी किया गया। सभी सफल छात्र छात्रों तथा अध्यापिकाओं को प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए।

प्रशिक्षण सहायक उप नियंत्रक नेम सिंह एवं घटना नियंत्रण अधिकारी संजय शर्मा पोस्ट वार्डन रिजर्व अरुण कुमार श्रीवास्तव द्वारा दिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर डायरेक्टर गौरव सिंह एवं प्रधानाचार्य द्वारा सभी पदाधिकारी को पौधा देकर सम्मानित किया गया।

उक्त प्रशिक्षण में मुख्य रूप से घटना नियंत्रण अधिकारी संजय शर्मा, पोस्ट वार्डन रिजर्व अरुण कुमार श्रीवास्तव, वार्डन मोनिका गोयल अखिल भटनागर तथा स्कूल अध्यापिकाओं में श्रीमती चेतना चौधरी नेहा शर्मा, पिंकी दीक्षित, अभिलाष शर्मा, पूजा पंत, आदि ने सराहनीय सहयोग किया।

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रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर, श्री अयोध्या धाम में प्रतिष्ठित

श्री शंभू महादेव मंदिर के शिखर पर आज भव्य पावन सनातनी धर्म ध्वजारोहण हेतु आयोजित समारोह में सम्मिलित हुआ।

इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव श्री चंपत राय जी व
अन्य सम्मानित पदाधिकारियों तथा पूज्य साधु-संतों एवं धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रभु श्री राम के विराट त्रिकालदर्शी स्वरूप के अनुरूप भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण और

मंदिर परिसर में स्थित भगवान शिव के मंदिर में आज भगवा ध्वज का आरोहण पूर्ण भव्यता और दिव्यता के साथ हुआ है।

दीनू मिश्रा पत्रकार
जिला बहराइच
सभी सनातन धर्मावलंबियों को हार्दिक बधाई।

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रायबरेली। नगर कोतवाली में तैनात एक कॉन्स्टेबल पर युवक ने मारपीट करने और उसकी बहन के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर मामले की शिकायत करते हुए न्याय की मांग की है।
जानकारी के अनुसार भदोखर थाना क्षेत्र के महंगू का पुरवा पोस्ट गोंदवारा निवासी कपिराज मिश्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी बहन और जीजा के बीच आपसी विवाद हो गया था। उसकी बहन की शादी नगर कोतवाली क्षेत्र के निराला नगर में हुई है। विवाद के बाद उसकी बहन ने नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पति-पत्नी दोनों को थाने बुलाया गया था।
पीड़ित कपिराज मिश्रा का आरोप है कि वह अपनी बहन से मिलने नगर कोतवाली पहुंचा था, जहां तैनात कॉन्स्टेबल धीरज गौड़ उसकी बहन से अभद्र भाषा में बात कर रहे थे। जब उसने इसका विरोध करते हुए पूछा कि उसकी बहन को गाली क्यों दी जा रही है, तो कॉन्स्टेबल ने उसकी एक न सुनी और थप्पड़ों से पिटाई कर दी।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि कॉन्स्टेबल द्वारा उसकी बहन के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किया गया। उसने कहा कि जब प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा और महिला सम्मान को लेकर अभियान चला रही है, तब इस प्रकार की घटनाएं सवाल खड़े करती हैं।
मामले को लेकर कपिराज मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में क्षेत्राधिकारी अरुण नौहवार ने बताया कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत करने की बात कही है। फिलहाल अब देखना होगा कि मामले में पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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