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स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश नवीनीकरण के लिए 28 मार्च तक खुला रहेगा प्रवेश पोर्टल

स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण के लिए विशेष अवसर

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों के व्यापक शैक्षणिक हितों एवं भविष्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण (Admission Renewal) के लिए विशेष अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ. दिवा मिश्रा ने बताया कि यह विशेष सुविधा उन विद्यार्थियों के लिए प्रदान की गई है, जो प्रवेश नवीनीकरण के लिए निर्धारित तिथि के उपरांत पूरक परीक्षा परिणामों की घोषणा के कारण नियत समय-सीमा में अपनी प्रवेश औपचारिकताएं पूर्ण करने से वंचित रह गए थे।

प्रवेश पोर्टल को 28 मार्च 2026 तक सक्रिय (Activate) किया जा रहा है। संबंधित विद्यार्थी, इस विस्तारित अवधि का लाभ उठाकर अपने प्रवेश नवीनीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूर्ण करें।

समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों के शेष पात्र विद्यार्थियों का त्वरित चिन्हांकन कर, उनका प्रवेश नवीनीकरण एवं शुल्क समय सीमा में जमा करवाना सुनिश्चित करें।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा सीमित अवधि के लिए ही उपलब्ध होगी, इसलिए सभी संबंधित विद्यार्थी एवं संस्थान निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें, जिससे किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक निरंतरता बाधित न हो।

#MadhyaPradesh
#college

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#जल_गंगा_संवर्धन_अभियान_MP

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत खेड़ा मानगढ़ एवं बड़गांव की

नल-जल योजनाओं का भौतिक सत्यापन

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मुरैना द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गुरुवार को विकासखंड कैलारस की ग्राम पंचायत कुरौली के अंतर्गत ग्राम खेड़ा मानगढ़ एवं बड़गांव में संचालित नल-जल योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराया गया।
इस अवसर पर जनपद पंचायत कैलारस के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रामपाल करजरे, विकासखंड समन्वयक डॉ. गिरीश इंदौलिया, श्री रविन्द्र पाल (आईएसए कॉर्डिनेटर), सरपंच, सचिव, ठेकेदार एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी के साथ संयुक्त रूप से चर्चा कर योजनाओं को ग्राम पंचायत के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान ग्रामीणों को नल-जल योजना के सुचारू संचालन एवं संधारण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही जनपद सीईओ श्री करजरे द्वारा सरपंच एवं सचिव को नल-जल योजना का पंचायत स्तर पर विधिवत हस्तांतरण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
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#JansamparkMP #morena2026 #Morena #MadhyaPradesh Jansampark Madhya Pradesh

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निर्वाचन से ठीक पहले, चुनाव आयोग की सख्ती साफ दिखाई दे रही है। असम समेत 5 राज्यों में पिछले 10 दिनों के भीतर 400 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और अन्य प्रलोभन सामग्री ज़ब्त की गई है।

सिर्फ ज़ब्ती ही नहीं, बल्कि ‘C-Vigil’ ऐप के ज़रिए जनता भी पूरी तरह एक्टिव है — अब तक 70,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जो चुनावी पारदर्शिता की ओर एक बड़ा संकेत है।

आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए 24 मार्च को चुनाव आयोग ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें 5 चुनावी राज्यों और उनसे जुड़े 12 राज्यों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। इसमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुख मौजूद रहे।

👉 बैठक के बड़े फैसले:

🔹 बेहतर समन्वय: सभी विभागों के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर
🔹 निष्पक्ष चुनाव: हिंसा, डर और लालच से मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश
🔹 तेज़ कार्रवाई: शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य
🔹 कड़ी निगरानी: 5,000 से ज्यादा फ्लाइंग स्क्वायड और सर्विलांस टीमें तैनात

26 फरवरी से 25 मार्च के बीच, देशभर में जब्ती का आंकड़ा चौंकाने वाला है:
💰 97.44 करोड़ रुपये नकद
🍾 16.3 लाख लीटर शराब (मूल्य 37.68 करोड़ रुपये)
💊 167.38 करोड़ रुपये के ड्रग्स
🥇 23 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं
🎁 163.30 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार

👉 कुल मिलाकर 408.82 करोड़ रुपये की अवैध सामग्री जब्त की गई।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सख्ती के साथ-साथ आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर शिकायत समितियां बनाई गई हैं।

📱 अब हर नागरिक सीधे ‘C-Vigil’ ऐप या 1950 हेल्पलाइन नंबर के जरिए आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकता है।

15 मार्च से 25 मार्च के बीच:
📊 70,144 शिकायतें दर्ज
✅ 70,831 का निपटारा
⚡ 96.8% शिकायतों का समाधान 100 मिनट के भीतर

👉 साफ है — इस बार चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जनता की भागीदारी का भी इम्तिहान है।

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यह रहा आज का राशिफल (सामान्य दैनिक भविष्यफल) — सभी 12 राशियों के लिए:
🔮 मेष (Aries)
आज आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। काम में सफलता मिलेगी, लेकिन जल्दबाज़ी से बचें।
लकी रंग: लाल | लकी नंबर: 9
🔮 वृषभ (Taurus)
आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा।
लकी रंग: हरा | लकी नंबर: 6
🔮 मिथुन (Gemini)
नई योजनाएं बनेंगी। दोस्तों से मदद मिलेगी, लेकिन ध्यान भटक सकता है।
लकी रंग: पीला | लकी नंबर: 5
🔮 कर्क (Cancer)
भावनात्मक रूप से थोड़ा कमजोर महसूस कर सकते हैं। धैर्य रखें।
लकी रंग: सफेद | लकी नंबर: 2
🔮 सिंह (Leo)
आज सफलता के योग हैं। नौकरी और बिजनेस में फायदा मिलेगा।
लकी रंग: सुनहरा | लकी नंबर: 1
🔮 कन्या (Virgo)
काम में व्यस्तता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
लकी रंग: हरा | लकी नंबर: 7
🔮 तुला (Libra)
रिश्तों में मिठास आएगी। नई शुरुआत के लिए अच्छा दिन है।
लकी रंग: गुलाबी | लकी नंबर: 6
🔮 वृश्चिक (Scorpio)
आज थोड़ा तनाव रह सकता है। विवाद से दूर रहें।
लकी रंग: लाल | लकी नंबर: 8
🔮 धनु (Sagittarius)
यात्रा के योग बन रहे हैं। भाग्य आपका साथ देगा।
लकी रंग: नारंगी | लकी नंबर: 3
🔮 मकर (Capricorn)
काम में सफलता मिलेगी। धन लाभ के संकेत हैं।
लकी रंग: नीला | लकी नंबर: 8
🔮 कुंभ (Aquarius)
नई सोच और नए मौके मिलेंगे। निवेश सोच-समझकर करें।
लकी रंग: बैंगनी | लकी नंबर: 4
🔮 मीन (Pisces)
आज का दिन अच्छा रहेगा। मन शांत रहेगा और कार्य पूरे होंगे।
लकी रंग: पीला | लकी नंबर: 3
📌 ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज का दिन कई राशियों के लिए मिश्रित परिणाम देने वाला हो सकता है—कुछ के लिए लाभ और कुछ के लिए सावधानी का संकेत है। �

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Balendra Shah to Take Oath as Nepal Prime Minister Today


Rastriya Swatantra Party (RSP) leader Balendra Shah will be sworn in as Prime Minister of Nepal today. The swearing-in ceremony will be held at the President’s Office in Sheetal Niwas in Kathmandu at 12:34 pm local time. Balendra Shah was elected as the leader of the RSP Parliamentary party yesterday, paving his way to become Nepal’s youngest elected prime minister. His party, RSP, secured a landslide victory in the March 5 parliamentary poll.

The 35-year-old rapper-turned-politician will also be the first person from the Madhes region to hold the top executive post in the country. Nepal chose former Kathmandu mayor Balendra Shah, popularly known as Balen and his RSP to form the next government, decimating the traditional parties in the first general elections since last year’s violent Gen Z protests that sought generational change and a corruption-free regime.

The RSP that had projected Balen as the prime ministerial candidate secured a massive 182 seats out of a total of 275 seats in the House of Representatives. Of the 275 members of the House of Representatives, 165 are elected through direct voting and 110 through proportionate voting.

Balen defeated four-time prime minister K P Sharma Oli in Jhapa-5 constituency, a long-standing stronghold of the Communist Party of Nepal (Unified Marxist-Leninist), by a huge margin.

Devashish Govind Tokekar
VANDE Bharat live tv news Nagpur
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
Indian Council of press,Nagpur
Journalist Cell
All India Media Association
Nagpur District President
Delhi Crime Press
RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
Contact no.
9422428110/9146095536
Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर केंद्र सरकार ने पूर्णविराम लगा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) मजबूती से काम कर रही है।
​अफवाहों पर न दें ध्यान, आपूर्ति है सुचारू
​मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें। सरकार के अनुसार:
​देश के सभी पेट्रोल पंपों और LPG वितरण केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
​ईंधन की सप्लाई में कोई बाधा नहीं है और वितरण प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है।
​नागरिकों को घबराहट में आकर (Panic Buying) ईंधन का अनावश्यक भंडारण नहीं करना चाहिए।
​वैश्विक तनाव के बीच भारत की स्थिति मजबूत
​हालांकि खाड़ी देशों में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं, लेकिन सरकार ने आश्वस्त किया है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंत्रालय ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आने वाले समय में भी किल्लत की कोई संभावना नहीं है।
​राशन कार्ड धारकों के लिए बड़ी खबर: फिर जलेगा स्टोव!
​युद्ध के हालातों और भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने एक वैकल्पिक कदम भी उठाया है। केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए 37 लाख 44 हजार लीटर केरोसिन (मिट्टी का तेल) के आवंटन को मंजूरी दी है।
​मुख्य बिंदु:
​ राज्य सरकारों को केरोसिन का कोटा जारी कर दिया गया है। ​इसके तहत पात्र राशन कार्ड धारकों को 3 लीटर केरोसिन उपलब्ध कराया जाएगा।
​विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन लोगों के लिए राहत भरा है जो पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं, ताकि आपात स्थिति में वे पुराने स्टोव का उपयोग कर सकें।
​निष्कर्ष: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
​सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। गैस एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सुचारू वितरण सुनिश्चित करें। जनता से अनुरोध है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।

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वार्ड नं.०२ मध्ये झेंडा मिरवणुकीवर दगडफेक;श्रीरामपुरात तणाव...

श्रीरामपूर (शिवप्रहार न्यूज) श्रीरामपूर शहरातील श्रीरामनवमी उत्सवानिमित्त गोंधवणीरोड येथून श्रीराम मंदिरावर आणण्यात येणाऱ्या झेंडा मिरवणुकीवर वार्ड नंबर ०२ येथील मस्जीदसमोर दगडफेक करण्यात आली.या दगडफेकीत २-३ हिंदू तरुण जखमी होवुन रक्तभंबाळ झाले.काही जिहादी प्रवृत्तीच्या तरुणांनी झेंडा मिरवणूक मस्जीद समोर आल्यावर हि दगडफेक केली. यावेळी शहरातील विविध हिंदुत्ववादी संघटनेच्या कार्यकर्त्यांनी आरोपींवर गुन्हा दाखल होण्यासाठी पोलीस ठाण्यात धाव घेतली.
या घटनेमुळे श्रीरामपूर शहरात तणावाचे वातावरण निर्माण झाले आहे.छत्रपती शिवाजी महाराज रोड व मेनरोड वरील दुकाने बंद झाली आहेत.तसेच रामनवमी यात्रेसाठी लागलेली दुकाने देखील पोलिसांनी खबरदारी म्हणून बंद केले आहे.पोलीसांनी तात्काळ बंदोबस्त सतर्क करत छत्रपती शिवाजी महाराज चौकात मोठा फौजफाटा तैनात केला आहे.

Devashish Govind Tokekar
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रुदौली (अयोध्या): क्षेत्र के बीपी मवई पेट्रोल पंप पर डीजल और पेट्रोल लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे किसानों और आम वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार बुधवार को सुबह से ही पंप पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे। �स्थानीय किसानों का कहना है कि खेतों में काम के लिए ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनों में डीजल की जरूरत होती है, लेकिन लंबी कतारों की वजह से उन्हें समय पर ईंधन नहीं मिल पा रहा है। इससे खेती-बाड़ी के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।पंप पर मौजूद लोगों के अनुसार कई बार इतनी लंबी लाइन लग जाती है कि एक-एक वाहन को नंबर आने में काफी समय लग जाता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि ईंधन की उपलब्धता को लेकर फैली अफवाहों के कारण भीड़ और बढ़ गई है, जिससे स्थिति और अधिक परेशान करने वाली हो गई है।किसानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से व्यवस्था सुधारने और पर्याप्त मात्रा में डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि लोगों को लंबी कतारों में खड़े होकर परेशानी न झेलनी पड़े।

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*प्रकाशनार्थ*

*भगत सिंह : ‘विद्वान-क्रांतिकारी’ की विरासत और छात्र राजनीति की प्रासंगिकता*
*(आलेख : अखिलेश यादव)*

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के विशाल और उथल-पुथल भरे इतिहास में ‘शहीद-ए-आज़म’ भगत सिंह को अक्सर उनकी उग्र क्रांतिकारी कार्रवाइयों के दृष्टिकोण से याद किया जाता है। हालांकि, उन्हें केवल एक सशस्त्र क्रांतिकारी के रूप में देखना उनकी विरासत के मूल को सीमित कर देना है। दरअसल, भगत सिंह एक ‘विद्वान-क्रांतिकारी’ के रूप में उभरते हैं, एक ऐसा दुर्लभ व्यक्तित्व, जिसमें वैचारिक गहराई और क्रांतिकारी प्रतिबद्धता का अद्वितीय संगम दिखाई देता है।

उनका मानना था कि बौद्धिक जागरूकता ही किसी सफल क्रांति की सच्ची और स्थायी नींव होती है। वे इस दृढ़ विश्वास के साथ काम करते थे कि किसी राष्ट्र का भविष्य केवल युद्ध के मैदान में तय नहीं होता, बल्कि वह कक्षाओं में और उन शैक्षणिक स्थानों में विकसित होने वाली राजनीतिक चेतना में भी आकार लेता है।

1920 के दशक में, जब भारत एक निर्णायक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा था, भगत सिंह ने छात्र राजनीति को न तो शौक, न ही गौण गतिविधि, और न ही पढ़ाई से ध्यान भटकाने वाला माध्यम माना। इसके बजाय, उन्होंने इसे भारतीय समाज के व्यापक पुनर्निर्माण के लिए एक आवश्यक आधार के रूप में देखा।

यह मौलिक दृष्टिकोण उनके महत्वपूर्ण निबंध ‘विद्यार्थी और राजनीति’ में सबसे स्पष्ट रूप से सामने आता है, जो जुलाई 1928 में ‘किरती’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उस समय ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार और रूढ़िवादी भारतीय शिक्षाविदों का एक वर्ग यह जोर देकर कह रहा था कि छात्रों को राजनीति से पूरी तरह दूर रहना चाहिए और अपना ध्यान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखना चाहिए।

भगत सिंह इस दृष्टिकोण से सख्त असहमत थे. उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य ‘लिपिक’ या आज्ञाकारी सरकारी कर्मचारी पैदा करना नहीं हो सकता, जिन्हें औपनिवेशिक मशीनरी को चालू रखने के लिए डिज़ाइन किया गया हो। इसके विपरीत, वे शिक्षा को ऐसे सजग और संवेदनशील नागरिक गढ़ने का माध्यम मानते थे, जो अपनी मातृभूमि के दर्द को समझें और उसे जन्म देने वाली व्यवस्थाओं को उखाड़ फेंकने का आवश्यक साहस रखे।

*लाहौर : आंदोलन का बौद्धिक केंद्र*

भगत सिंह की राजनीति को पूरी तरह समझने के लिए उस विशिष्ट परिवेश को देखना ज़रूरी है, जिसने उनके विचारों को आकार दिया। 20वीं सदी की शुरुआत में लाहौर ब्रिटिश राज की मात्र एक प्रशासनिक इकाई नहीं था, बल्कि भारत की उभरती बौद्धिक और क्रांतिकारी चेतना का केंद्र बन चुका था।

1921 में असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद ऐसे शैक्षणिक संस्थानों की आवश्यकता महसूस हुई, जो औपनिवेशिक सत्ता के प्रभाव से मुक्त हों। इसी जरूरत के जवाब में लाला लाजपत राय ने लाहौर में ‘नेशनल कॉलेज’ की स्थापना की। यह संस्थान उस दौर के सरकारी स्कूलों के मुकाबले एक स्वदेशी और विद्रोही विकल्प के रूप में खड़ा किया गया था।

नेशनल कॉलेज की दीवारों के भीतर ही भगत सिंह ने सुखदेव, भगवती चरण वोहरा और एहसान इलाही जैसे अपने करीबी साथियों के साथ मिलकर संगठित छात्र शक्ति की क्रांतिकारी संभावनाओं को समझना शुरू किया।

नेशनल कॉलेज का पाठ्यक्रम ब्रिटिश-नियंत्रित संस्थानों (जैसे- गवर्नमेंट कॉलेज) से मूलतः अलग था। यहां भारतीय इतिहास, वैश्विक क्रांतिकारी आंदोलनों और अर्थशास्त्र पर विशेष जोर दिया जाता था। इस तरह की शिक्षा ने भगत सिंह के वैचारिक विकास और उनके आगे के कार्यों के लिए एक मजबूत बौद्धिक आधार तैयार किया। इसी प्रक्रिया में उन्होंने महसूस किया कि छात्रों के पास एक विशिष्ट और अनछुई ऊर्जा होती है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि उनके पास देशभर में जागरूकता की निरंतर लहर पैदा करने के लिए आवश्यक समय और सामर्थ्य भी मौजूद है।

इस ऊर्जा को संगठित दिशा देने के लिए भगत सिंह ने 1926 में ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना की। यद्यपि यह संगठन केवल छात्रों तक सीमित नहीं था, लेकिन इसकी रीढ़ युवा ही थे। सभा का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच पर आधारित विश्वदृष्टि की ओर प्रेरित करना था। भगत सिंह का मानना था कि सांप्रदायिकता और अंधविश्वास वे बेड़ियां हैं, जो भारतीय युवाओं को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने से रोकती हैं। इसलिए उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे धर्म को निजी मामला मानें और एक एकीकृत राष्ट्रीय शक्ति के रूप में संगठित हों।

*एक स्वतंत्र आयोजक के रूप में छात्र*

आंदोलन में भगत सिंह का योगदान केवल लेखन या भाषणों तक सीमित नहीं था ; वे एक कुशल और दूरदर्शी आयोजक भी थे। वे समझते थे कि किसी छात्र आंदोलन के प्रभावी होने के लिए उसमें संगठित संरचना के साथ-साथ स्वतंत्रता भी आवश्यक है।

इसी सोच के तहत उन्होंने ऑल पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन (एपीएसयू) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्र संगठनों को लेकर उनका दृष्टिकोण स्पष्ट था। वे नहीं चाहते थे कि ये संगठन किसी स्थापित राजनीतिक दल की “पूंछ” बनकर रह जाएँ। इसके बजाय, उनका मानना था कि छात्र संघ अपने बौद्धिक और राजनीतिक दिशा-निर्धारण में स्वतंत्र और सक्षम होने चाहिए।

पंजाब का छात्र आंदोलन धीरे-धीरे पूरे भारत में एक अग्रणी उदाहरण बन गया. इसने छिटपुट विरोध प्रदर्शनों से आगे बढ़कर संगठित और अनुशासित छात्र यूनियनों का रूप ले लिया। 1927 में स्थापित लाहौर स्टूडेंट्स यूनियन इस परिवर्तन का शुरुआती और महत्वपूर्ण उदाहरण थी। इसका दायरा केवल शैक्षणिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘स्वतंत्रता, संस्कृति और शांति’ जैसे व्यापक आदर्शों को केंद्र में रखा गया।

1936 तक यही क्षेत्रीय ऊर्जा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के गठन के साथ एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल गई। नेशनल कॉलेज के छात्र और भगत सिंह के समकालीन प्रबोध चंद्र, जो आगे चलकर एआईएसएफ के नेता बने, ने अपनी 1938 की पुस्तक ‘स्टूडेंट मूवमेंट इन इंडिया’ में इस दौर का विस्तृत वर्णन किया है। उनके लेखन से स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालयों को अलग-थलग ‘हाथीदांत की मीनार’ नहीं, बल्कि राजनीतिक संघर्ष के सक्रिय मंच के रूप में देखा जाने लगा था, जहां छात्रों से सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक बनने की अपेक्षा की जाती थी।

*साइमन कमीशन और ‘बम का दर्शन'*

लाहौर के छात्र आंदोलन की वास्तविक शक्ति की परीक्षा 1928 में साइमन कमीशन के आगमन के साथ हुई। 30 अक्टूबर को लाला लाजपत राय के नेतृत्व में हजारों छात्र एक विशाल विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके बाद हुए बर्बर पुलिस लाठीचार्ज, जिसकी चोटों के कारण बाद में लालाजी की मृत्यु हो गई, ने युवाओं को गहराई से झकझोर दिया।

भगत सिंह के लिए, जो उस समय तक भूमिगत क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय एक पूर्व छात्र बन चुके थे, यह घटना केवल दमन नहीं, बल्कि गहरे राष्ट्रीय अपमान का प्रतीक थी। जेए स्कॉट और जॉन सॉन्डर्स जैसे ब्रिटिश अधिकारियों की क्रूरता ने युवाओं को इस कठोर सच से रूबरू कराया कि औपनिवेशिक दमन के सामने अहिंसक विरोध की अपनी सीमाएं हैं। इस अनुभव के बाद आंदोलन का रुझान क्रांतिकारी समाजवाद की ओर तेज़ी से बढ़ा।

यह बदलाव भगत सिंह के प्रसिद्ध कथन ‘बहरों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज़ की आवश्यकता होती है’ में स्पष्ट रूप से झलकता है, जो सेंट्रल असेंबली बमकांड और उसके बाद चले ऐतिहासिक मुकदमे के संदर्भ में दिया गया था। इसी दौर का उल्लेख करते हुए प्रबोध चंद्र लिखते हैं कि लाहौर के छात्रावासों में ‘बम का दर्शन’ (कल्ट ऑफ द बॉम्ब) ने प्रभावी रूप से अहिंसा के दर्शन का स्थान ले लिया था।

भगत सिंह की तस्वीरें लगभग हर छात्र के कमरे में दिखाई देती थीं, जो एक उभरते हुए ‘वर्ग-चेतन’ छात्र आंदोलन का संकेत था, ऐसा आंदोलन, जिसने देश की गुलामी के दौरान निष्क्रिय बने रहने से इनकार कर दिया था। यहां तक कि सॉन्डर्स की हत्या के बाद जब भगत सिंह और उनके साथी भूमिगत हो गए, तब लाहौर के छात्रावासों और ‘सेफ हाउस’ ने ही उन्हें शरण और सुरक्षा प्रदान की।

*गोलियों पर किताबों की सर्वोच्चता*

सशस्त्र कार्रवाइयों में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद भगत सिंह का मूल आग्रह यह था कि पिस्तौल की तुलना में किताब कहीं अधिक शक्तिशाली होती है। अपने निबंध ‘विद्यार्थी और राजनीति’ में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जो लोग छात्रों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देते हैं, वे दरअसल ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं, जो सत्ता से कभी सवाल न करे। उन्होंने यह भी आगाह किया कि युवावस्था में राजनीतिक समझ का अभाव व्यक्ति को आगे चलकर एक भ्रष्ट व्यवस्था का मूकदर्शक बना देता है।

भगत सिंह ने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल भावनात्मक नारों के बहाव में न बहें। इसके बजाय, उन्होंने उन्हें मार्क्सवाद, समाजवाद और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का गंभीर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उनके लिए ‘तर्कवाद’ को ‘भावुकता’ से ऊपर रखना जरूरी था, ताकि युवाओं को महज़ बयानबाज़ी से गुमराह न किया जा सके।

इस बौद्धिक प्रतिबद्धता का प्रमाण यह है कि जेल में रहते हुए भी उन्होंने सैकड़ों किताबें पढ़ीं। उनका स्पष्ट संदेश था कि ‘आलोचना और स्वतंत्र सोच’ किसी भी प्रकार की तानाशाही को चुनौती देने के सबसे बुनियादी और प्रभावी हथियार हैं।

*भविष्य के लिए एक विरासत*

आज जब भी छात्र संघ चुनाव या कैंपस सक्रियता की बात होती है, भगत सिंह की याद स्वाभाविक रूप से उभरती है। वे शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन के एक सशक्त आदर्श बने हुए हैं। उन्होंने कभी भी छात्रों को पढ़ाई छोड़ने के लिए नहीं कहा, बल्कि उन्हें दुनिया के प्रति सजग और उत्तरदायी रहते हुए अध्ययन करने की प्रेरणा दी। उनकी विरासत का वास्तविक सम्मान इसी में है कि शिक्षा को केवल निजी कैरियर का साधन न मानकर समाज के सबसे वंचित वर्गों के उत्थान का माध्यम बनाया जाए।

प्रबोध चंद्र ने अपने लेखन के अंत में एक गंभीर विकल्प सामने रखा था कि जो छात्र अपनी मातृभूमि की मुक्ति में योगदान नहीं देता, उसे आने वाली पीढ़ियों द्वारा ‘गद्दार’ करार दिया जाएगा।

आज के छात्र भी कुछ ऐसे ही निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। संस्थागत स्वायत्तता का संघर्ष दरअसल भारतीय लोकतंत्र के भविष्य का संघर्ष है। भगत सिंह किसी प्रतीक मात्र (एक झंडे) के लिए नहीं, बल्कि हर भारतीय के स्वतंत्र रूप से सोचने, कार्य करने और जीने के अधिकार के लिए शहीद हुए। वे आज भी उन सभी के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं, जो अपने समय के सवालों से मुंह मोड़ने के बजाय उनका सामना करना चाहते हैं। अंततः, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समानतामूलक भविष्य का स्वप्न है, जो हर जागरूक छात्र के भीतर धड़कता है।

*(साभार : द वायर। लेखक जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टॉरिकल स्टडीज के शोधार्थी हैं और एनएसयूआई से जुड़े हैं।)*

Devashish Govind Tokekar
VANDE Bharat live tv news Nagpur
Editor/Reporter/Journalist
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Indian Council of press,Nagpur
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Nagpur District President
Delhi Crime Press
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🚨 AIMA MEDIA | बड़वानी (मध्यप्रदेश)

लोकायुक्त इंदौर की टीम ने बड़वानी जिले के निवाली में बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (BRC) महेंद्र सिंह राठौर को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस मामले में सब इंजीनियर अश्विन डागर को भी आरोपी बनाया गया है।

👉 शिकायत प्राथमिक शिक्षक जितेंद्र सोनी द्वारा की गई थी।
👉 स्कूल में बालिका शौचालय के लिए ₹20,000 स्वीकृत हुए थे।
👉 शिक्षक ने खुद के खर्च से काम पूरा किया, फिर भी पूर्णता प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत मांगी गई।

लोकायुक्त टीम ने ट्रैप प्लान बनाकर राजपुर में एसबीआई एटीएम के पास कार्रवाई की और आरोपी को रिश्वत लेते ही पकड़ लिया।

⚖️ आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 और बीएनएस 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

❗ सोचिए — जो सिस्टम बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए बना है, वही अगर भ्रष्टाचार में डूब जाए तो समाज किस दिशा में जाएगा?
यह समस्या किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग सभी विभागों में फैल चुकी है।

“मुंह में राम, लेकिन भीतर रावण का वास” — यही आज की सच्चाई बनती जा रही है।

पूरे भारत की यही कहानी है। जिस शिक्षा विभाग को सबसे पवित्र माना जाता था, आज वह भी पूरी तरह निष्कलंक नहीं रहा। चपरासी से लेकर अधिकारी तक, कई स्तरों पर लोग इसमें लिप्त हैं।

जबकि शासन इतना प्रदान करता है कि एक सम्मानजनक जीवन आसानी से जिया जा सके, फिर भी कुछ लोग विलासिता के पीछे भाग रहे हैं।

सोचिए — अगर आप किसी के दर्द, आंसुओं या मजबूरी से कमाई करके अपने घर जाते हैं, तो क्या आपके परिवार में सच्ची शांति रह पाएगी?

किसी की बेटी की समस्या, किसी के बच्चे की परेशानी… उनके दर्द की कीमत पर कमाई गई संपत्ति कभी सुख नहीं दे सकती।

इस पर अंकुश तभी लगेगा जब हर व्यक्ति के भीतर का जमीर जागेगा।

आज हाल यह है कि छोटे से छोटे काम के लिए भी नियमों का जाल बिछाकर लोगों को परेशान किया जाता है।

समय आ गया है कि हम सब खुद से सवाल करें —
क्या हम सही रास्ते पर हैं?

📢 अगर आपसे भी कोई रिश्वत मांगे, तो चुप न रहें — लोकायुक्त में शिकायत करें।

#MadhyaPradesh #Barwani #umaria #EducationSystem #Corruption #Lokayukta #MPNews

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✨ शिरपूरमध्ये अभिमानास्पद घटना – ट्रिपलेट बाळांचा नॉर्मल जन्म ✨

शिरपूर :
शहराच्या वैद्यकीय इतिहासात प्रथमच एक अभिमानास्पद घटना घडली असून, तीन जुळ्या बाळांचा (ट्रिपलेट) सुरक्षित व नैसर्गिक प्रसूतीद्वारे जन्म झाल्याची माहिती समोर आली आहे.

आदिशक्ती मॅटर्निटी व जनरल हॉस्पिटल येथे सुप्रसिद्ध स्त्रीरोगतज्ञ
डॉ. दिलबर पावरा यांच्या मार्गदर्शनाखाली ही दुर्मिळ आणि उच्च जोखमीची प्रसूती यशस्वीरित्या पार पडली.

विशेष म्हणजे, ही प्रक्रिया सुमारे दोन महिन्यांच्या सातत्यपूर्ण तपासणी, योग्य औषधोपचार आणि बारकाईने केलेल्या फॉलोअपमुळे शक्य झाली. डॉक्टरांच्या अनुभवी टीमने आई आणि तिन्ही बाळांच्या आरोग्यावर सतत लक्ष ठेवत योग्य नियोजन केले.

राम नवमी या पवित्र दिवशी तिन्ही बाळांचा सुरक्षित जन्म झाल्याने हा क्षण अधिक आनंददायी आणि अभिमानास्पद ठरला.

👉 या घटनेमुळे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले की –
योग्य उपचार

सतत वैद्यकीय निरीक्षण

आणि अनुभवी डॉक्टरांचे मार्गदर्शन

यांच्या मदतीने कितीही अवघड परिस्थितीवर मात करता येते.

रुग्णालयातर्फे आई व तिन्ही बाळांना उत्तम आरोग्यासाठी शुभेच्छा देण्यात आल्या आहेत
यशवंत शिंदे.

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✨ शिरपूरमध्ये अभिमानास्पद घटना – ट्रिपलेट बाळांचा नॉर्मल जन्म ✨

शिरपूर :
शहराच्या वैद्यकीय इतिहासात प्रथमच एक अभिमानास्पद घटना घडली असून, तीन जुळ्या बाळांचा (ट्रिपलेट) सुरक्षित व नैसर्गिक प्रसूतीद्वारे जन्म झाल्याची माहिती समोर आली आहे.

आदिशक्ती मॅटर्निटी व जनरल हॉस्पिटल येथे सुप्रसिद्ध स्त्रीरोगतज्ञ
डॉ. दिलबर पावरा यांच्या मार्गदर्शनाखाली ही दुर्मिळ आणि उच्च जोखमीची प्रसूती यशस्वीरित्या पार पडली.

विशेष म्हणजे, ही प्रक्रिया सुमारे दोन महिन्यांच्या सातत्यपूर्ण तपासणी, योग्य औषधोपचार आणि बारकाईने केलेल्या फॉलोअपमुळे शक्य झाली. डॉक्टरांच्या अनुभवी टीमने आई आणि तिन्ही बाळांच्या आरोग्यावर सतत लक्ष ठेवत योग्य नियोजन केले.

राम नवमी या पवित्र दिवशी तिन्ही बाळांचा सुरक्षित जन्म झाल्याने हा क्षण अधिक आनंददायी आणि अभिमानास्पद ठरला.

👉 या घटनेमुळे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले की –
योग्य उपचार

सतत वैद्यकीय निरीक्षण

आणि अनुभवी डॉक्टरांचे मार्गदर्शन

यांच्या मदतीने कितीही अवघड परिस्थितीवर मात करता येते.

रुग्णालयातर्फे आई व तिन्ही बाळांना उत्तम आरोग्यासाठी शुभेच्छा देण्यात आल्या आहेत.

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నంద్యాల (AIMA MEDIA ): నంద్యాల పట్టణం నందు నూతన బీసీ సంఘం స్థల సేకరణ, బీసీ భవనం కొరకు నంద్యాల జిల్లా జాయింట్ కలెక్టర్ ను మర్యాదపూర్వకంగా కలిసిన రాష్ట్ర బీసీ జాతీయ సంఘం నాయకులు కుమ్మరి ప్రసాదు.ఈ సందర్భంగా ఆయన మాట్లాడుతూ ఆంధ్రప్రదేశ్ రాష్ట్రంలోని ప్రతి జిల్లాలలో బీసీ భవనాలు ఏర్పాటు చేయాలని ఆయన కోరారు. అలాగే నంద్యాల నూతన జిల్లాలో కూడా బీసీ భవనానికి స్థలాన్ని సేకరణ చేసి ఇవ్వాలని జాయింట్ కలెక్టర్ ను ఆయన కోరారు.జాయింట్ కలెక్టర్ స్పందిస్తూ స్థల సేకరణ కొరకు ఎమ్మార్వోకి ఫోన్ చేసి తెలియజేశారు.త్వరితగతిన బీసీ నాయకులకు స్థల సేకరణ చేయవలసిందిగా జాయింట్ కలెక్టర్ నంద్యాల ఎమ్మార్వోకి చెప్పారు.ఈ కార్యక్రమంలో వాల్మిక సంఘం రాష్ట్ర నాయకులు పులికొండ కొండన్న, బీసీ నాయకులు రాము, వెనకబడిన తరగతుల జిల్లా అధికారులు జగ్గయ్య, వేణుగోపాల్ తదితరులు పాల్గొన్నారు.

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పాణ్యం (AIMA MEDIA): ప్రముఖ శైవక్షేత్రం పాణ్యం మండలం ఎస్.కొత్తూరు గ్రామంలో వెలిసిన శ్రీ సుబ్రహ్మణ్యేశ్వర స్వామి దేవస్థానం నందు నంద్యాల డివిజన్ దేవాదాయశాఖ తనిఖీ అధికారి పి.హరిచంద్రారెడ్డి పర్యవేక్షణలో గురువారం హుండీ లెక్కింపు నిర్వహించారు. హుండీ లెక్కింపు వల్ల 12 లక్షల 38వేల 825 రూపాయలు నగదు, 523 గ్రాముల వెండి ఆదాయంగా వచ్చినట్లు ఆలయ ఈవో యం.రామక్రిష్ణ తెలిపారు. ఈ లెక్కింపు గత ఫిబ్రవరి 5వ తేదీ నుండి మార్చి 26వతేది వరకు ఈ ఆదాయం సమకూరినదని ఆలయ ఈవో యం.రామక్రిష్ణ తెలిపారు. ఈ కార్యక్రమంలో గ్రామ పెద్దలు మిలిటరీ సుబ్బారెడ్డి, బీరం శివరామిరెడ్డి, అర్చకులు నారాయణస్వామి, సురేష్ శర్మ, బ్యాంక్ అధికారులు, ఏఎస్ఐ రఫీ, పిసి వెంకటేశ్వరరావు, బాలాజీ సేవా సంస్థ, తిరుమల బాలాజీ సేవా సంస్థ అధ్యక్షులు శివయ్య, సీతారామిరెడ్డి సంస్థల సభ్యులు, ఆలయ సిబ్బంది సుబ్బారెడ్డి, నాగేశ్వరరావు తదితరులు పాల్గొన్నారు.

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मेरठ। आर.जी.डिग्री कॉलेज मेरठ में करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट सेल में गुप्ता क्लासेज द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया ।कार्यशाला डिग्री कॉलेज की प्रधानाचार्य महोदया, डॉ/प्रोफ़ेसर निवेदिता कुमारी एवं करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट सेल की इंचार्ज डॉ बबीता माझी जी के निर्देशन में आयोजित की गई।

साथ में रसायन शास्त्र विभाग की शिक्षिका डॉ नलिनी द्विवेदी, गृह विज्ञान विभाग की शिक्षिका डॉ ममता कुमारी और श्रीमान मरगूब मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन गुप्ता क्लासेज मेरठ के निर्देशक (डॉ आलोक गुप्ता )रहे। और गुप्ता क्लासेज की मार्केटिंग हेड "पूजा सोलंकी " द्वारा करियर काउंसलिंग वर्कशॉप का बहुत अच्छे से संचालन कराया गया। और साथ में गुप्ता क्लासेज की पूरी टीम आई.टी.हेड सारंग सर, वीडियो एडिटर कार्तिक, स्टाफ़ पर्सन भानु जी के सहयोग से करियर काउंसलिंग कार्यशाला बहुत अच्छे से सम्पन्न हुई।

करियर काउंसलिंग सेल की इंचार्ज बबीता माझी ने अपने स्वागत भाषण में इस कार्यशाला की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां किस प्रकार एक अच्छा करियर बनाने के लिए सहायक होती है। डॉ आलोक गुप्ता ने कार्यशाला में डिग्री कॉलेज कि छात्राओं को सरकारी नौकरी की पूर्ण जानकारी दी ,और इनमें सफलता पाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की ।

डॉ आलोक गुप्ता ने छात्राओं को विस्तार से समझाया की बैंक , एसएससी ,यूपी पुलिस, दिल्ली पुलिस, एन डी ए, सी डी एस, क्लैट, टीचिंग आदि में तथा अन्य सरकारी /प्राइवेट परीक्षा एंटरेंस में सफलता पाने के लिए किस प्रकार योजनाबद्ध प्रयास किया जाए।

इसके साथ-साथ गणित की बड़ी कैलकुलेशन को शॉर्टकट मेथड एवं अजब गजब मेथड द्वारा सेकंड में हल करना सिखाया ।अंत में छात्राओं के साथ संवाद सत्र में सक्रिय प्रतिभागिता करने वाली छात्राओं को पुरस्कार वितरण भी किया।

कार्यक्रम का संचालन बबीता माझी ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला की ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ ममता कुमारी और प्रधानाचार्य महोदया डॉ/प्रोफ़ेसर निवेदिता कुमारी ने किया।

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Possible Restrictions in India Amid Energy Lockdown: भारत एक बार फिर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां लॉकडाउन शब्द गलियारों में गूंजने लगा है, लेकिन इस बार वजह कोई वायरस नहीं बल्कि एनर्जी यानी ऊर्जा का संकट है.

Middle East में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में आई बाधाओं ने देश की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिए गए भाषणों और 25 मार्च को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद एनर्जी लॉकडाउन की चर्चा तेज हो गई है. अगर यह प्रभावी होता है, तो भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी वैसी नहीं रहेगी जैसी आज है. तेल की राशनिंग से लेकर वर्क फ्रॉम होम तक, बहुत कुछ बदलने वाला है.

कैसे शुरू हुई एनर्जी लॉकडाउन की चर्चा?

सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में एनर्जी लॉकडाउन शब्द तब से ट्रेंड कर रहा है जब प्रधानमंत्री ने संसद में वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया है. केंद्र सरकार ने 25 मार्च को शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी प्रभावों पर चर्चा की गई. कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा सकती है. हालांकि सरकार ने अब तक पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक होने का आश्वासन दिया है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए मांग को कम करने की रणनीति अपनाई जा सकती है.

क्या है एनर्जी लॉकडाउन का असली मतलब?

सरल शब्दों में कहें तो एनर्जी लॉकडाउन ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण की एक ऐसी अवस्था है, जहां खपत पर कड़े अंकुश लगाए जाते हैं. इसकी कोई किताबी परिभाषा तो नहीं है, लेकिन जब ईंधन और बिजली की कमी होने लगती है, तो सरकारें मजबूरन आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर पाबंदियां लगाती हैं.

इसे आप संसाधनों का राशनिंग काल भी कह सकते हैं, जहां फिजूलखर्ची पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है, ताकि अनिवार्य सेवाओं के लिए ऊर्जा बचाई जा सके. यह समाज को एक अनुशासित उपभोग की ओर ले जाने का एक कड़ा तरीका है.

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही एनर्जी लॉकडाउन की चर्चा?

इस चर्चा को हवा देने में इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बड़ी भूमिका है. वे इन ऊर्जा संरक्षण के कदमों को 2020 के कोविड लॉकडाउन से जोड़कर पेश कर रहे हैं, जिससे आम जनता के मन में डर और उत्सुकता दोनों बढ़ गई है. जब लोग देखते हैं कि सरकारें वर्क फ्रॉम होम या गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक की बात कर रही हैं, तो वे इसे तुरंत पुराने लॉकडाउन जैसा मान लेते हैं. यही वजह है कि एनर्जी लॉकडाउन शब्द आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है और एक ट्रेंड बन चुका है.

एनर्जी लॉकडाउन में किन चीजों पर कसेगी लगाम?

एनर्जी लॉकडाउन की स्थिति में सबसे पहले गाज परिवहन व्यवस्था पर गिर सकती है. ईंधन की राशनिंग के तहत पेट्रोल और डीजल की बिक्री को सीमित किया जा सकता है. बड़े शहरों में ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम करने के लिए कार-फ्री संडे या ऑड-इवन जैसी व्यवस्था दोबारा लागू की जा सकती है.

निजी बस ऑपरेटरों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डीजल की कमी के कारण लंबी दूरी की यात्राएं महंगी और मुश्किल हो सकती हैं. सरकार नागरिकों को गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दे सकती है ताकि बचा हुआ ईंधन आवश्यक सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा जा सके.

दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों का स्वरूप बदलेगा

कोरोना काल की यादें ताजा करते हुए सरकार एक बार फिर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की गाइडलाइंस जारी कर सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य दफ्तर जाने वाले लाखों लोगों द्वारा खर्च किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल की बचत करना है. इसी तरह, स्कूलों और कॉलेजों को भी ऑनलाइन मोड पर वापस जाने के लिए कहा जा सकता है.

शिक्षण संस्थानों के बंद रहने से हजारों स्कूल बसें और निजी वाहन सड़कों से हट जाएंगे, जिससे ऊर्जा की बड़ी बचत होगी. यह कदम पूरी तरह से देश की ऊर्जा खपत के ग्राफ को नीचे लाने के लिए उठाया जा सकता है.

आयोजनों और मनोरंजन पर क्या पड़ेगा असर?

भारत में आईपीएल (IPL) जैसे बड़े आयोजनों का समय करीब है, लेकिन एनर्जी लॉकडाउन के चलते स्टेडियमों में दर्शकों के प्रवेश पर रोक लग सकती है. बड़ी भीड़ के जुटने से होने वाली बिजली की खपत और वहां तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल होने वाले निजी वाहनों को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा सकती है.

सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों और बड़े जलसों पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है. हवाई यात्रा के क्षेत्र में भी उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है, क्योंकि जेट फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें और सीमित उपलब्धता एविएशन सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है.

कमर्शियल गैस और उद्योगों पर संकट

ऊर्जा संकट का सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर दिखना शुरू हो गया है. होटलों, रेस्टोरेंट्स, बेकरी और कैटरिंग व्यवसायों को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है. कई शहरों में होटलों ने पहले ही अपना काम सीमित कर दिया है क्योंकि उनके पास खाना पकाने के लिए पर्याप्त गैस नहीं है.

सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए उद्योगों को दी जाने वाली गैस की आपूर्ति में कटौती कर दी है. गैर-जरूरी उद्योग, जैसे पेट्रोकेमिकल और भारी विनिर्माण इकाइयां, अस्थायी रूप से बंद की जा सकती हैं ताकि बिजली घरों और घरों के लिए ऊर्जा बची रहे.

घरेलू रसोई और गैस की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में देश के कई राज्यों में गैस स्टेशनों पर किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. लोग घबराहट में गैस सिलेंडर की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी में देरी हो रही है और नए कनेक्शनों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है.

कई इलाकों में सिलेंडर के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है और कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं. सरकार ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें, क्योंकि घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है.

क्या खुला रहेगा और क्या होंगी प्राथमिकताएं?

एनर्जी लॉकडाउन का मतलब पूरी तरह से कामकाज ठप करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा के इस्तेमाल को प्राथमिकता देना है. अस्पताल, आपातकालीन वाहन, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी रहेगी. सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो रेल, सरकारी बसें और ट्रेनें चलती रहेंगी ताकि आम जनता को कम से कम परेशानी हो.

बिजली उत्पादन के लिए पावर प्लांट्स और रिफाइनरियों को भी प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का मुख्य लक्ष्य आवासीय क्षेत्रों में बिजली और गैस की किल्लत को रोकना होगा, भले ही इसके लिए कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर को कुछ समय के लिए थामना पड़े.

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हरान. पश्चिम एशिया में चल रहे महायुद्ध के बीच ईरान ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर अहम बयान दिया है.

उन्होंने बताया कि किन देशों के जहाजों को इस खतरे वाले इलाके से सुरक्षित निकाला जा रहा है. ईरान ने जिन मित्र देशों की लिस्ट जारी की है, उसमें भारत का नाम भी मजबूती से शामिल है. यह भारत की मजबूत विदेश नीति और कूटनीतिक जीत का सबसे बड़ा सबूत है.

जब अमेरिका और इजरायल जैसे देश ईरान से सीधा टकरा रहे हैं, तब भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकाल रहा है. ईरान ने साफ किया है कि भारत ने उनसे सीधे बात की और तालमेल बिठाया. इस लिस्ट में रूस, चीन और इराक जैसे देश भी शामिल हैं. यह दिखाता है कि ग्लोबल क्राइसिस में भी भारत अपने हितों की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है.

ईरान की 'फ्रेंड लिस्ट' में भारत: ईरान के विदेश मंत्री ने दुनिया को एक साफ मैसेज दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने सुरक्षित मार्ग के लिए उनसे संपर्क किया था. अराघची ने कहा, 'जिन देशों को हम मित्र मानते हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया गया'. इस लिस्ट में भारत का नाम आना कूटनीतिक लिहाज से बहुत अहम है. यह दिखाता है कि ग्लोबल प्रेशर के बाद भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं.

रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकारी टीवी का हवाला देते हुए विदेश मंत्री के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा, "जहाजों के कई मालिकों, या उन देशों ने जिनके ये जहाज हैं, हमसे संपर्क किया है और अनुरोध किया है कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से उनके सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करें. इनमें से कुछ देशों के लिए जिन्हें हम मित्र मानते हैं, या ऐसे मामलों में जहां हमने अन्य कारणों से ऐसा करने का फैसला किया है, हमारी सेनाओं ने सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है."

उन्होंने आगे कहा, "आपने खबरों में देखा होगा: चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक और भारत. कुछ रात पहले इनके दो जहाज यहां से गुजरे थे, और कुछ दूसरे देश भी, मुझे लगता है कि बांग्लादेश भी. ये वे देश हैं जिन्होंने हमसे बात की और हमारे साथ तालमेल बिठाया, और यह सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा, यहां तक कि युद्ध के बाद भी."

बैलेंसिंग एक्ट में पास हुआ भारत: आज दुनिया दो बड़े गुटों में बंटी हुई है. एक तरफ अमेरिका है, तो दूसरी तरफ रूस और चीन. भारत ने किसी एक गुट का हिस्सा बनने से इनकार किया है. भारत अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पार्टनर भी है. वहीं दूसरी तरफ उसने ईरान से भी सीधे बात करके अपने व्यापारिक जहाज बचाए.

चीन और रूस के साथ भारत: ईरान के विदेश मंत्री ने अपनी लिस्ट में चीन और रूस का नाम लिया. इसके साथ ही इराक, पाकिस्तान और भारत का भी जिक्र किया गया. अराघची ने कहा, 'कुछ रात पहले इनके दो जहाज यहां से गुजरे थे'. ईरान ने इन देशों के साथ भविष्य में भी तालमेल जारी रखने की बात कही है.

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ಇಂದು ಮಾರ್ಚ್ 27, 2026, ಶುಕ್ರವಾರ.
​ಹಿಂದೂ ಪಂಚಾಂಗದ ಪ್ರಕಾರ ಇಂದು ಶ್ರೀ ಕ್ರೋಧಿ ನಾಮ ಸಂವತ್ಸರವಾಗಿದ್ದು, ಉತ್ತರಾಯಣ ಮತ್ತು ವಸಂತ ಋತುವಿನ ಅವಧಿಯಾಗಿದೆ. ಇಂದಿನ ವಿವರಗಳು ಹೀಗಿವೆ

​ಪಂಚಾಂಗದ ವಿವರಗಳು
​ಮಾಸ: ಚೈತ್ರ ಮಾಸ (ಅಮಾವಾಸ್ಯಾಂತ/ಪೂರ್ಣಿಮಾಂತ ಪದ್ಧತಿಯಂತೆ ಬದಲಾಗಬಹುದು)
​ಪಕ್ಷ: ಶುಕ್ಲ ಪಕ್ಷ
​ತಿಥಿ: ನವಮಿ (ಶ್ರೀರಾಮ ನವಮಿ)
​ನಕ್ಷತ್ರ: ಪುನರ್ವಸು (ಸಂಜೆವರೆಗೆ)
​ಯೋಗ: ಅತಿಗಂಡ
​ಕರಣ: ಕೌಲವ

ಶುಭ ಮತ್ತು ಅಶುಭ ಸಮಯಗಳು
ವಿವರ ಸಮಯ
ಸೂರ್ಯೋದಯ ಬೆಳಗ್ಗೆ 06:24
ಸೂರ್ಯಾಸ್ತ ಸಂಜೆ 06:33
ರಾಹುಕಾಲ ಬೆಳಗ್ಗೆ 10:57 ರಿಂದ 12:28 ವರೆಗೆ
ಗುಳಿಕಕಾಲ ಬೆಳಗ್ಗೆ 07:55 ರಿಂದ 09:26 ವರೆಗೆ
ಯಮಗಂಡಕಾಲ ಮಧ್ಯಾಹ್ನ 03:30 ರಿಂದ 05:01 ವರೆಗೆ
ಅಭಿಜಿತ್ ಮುಹೂರ್ತ ಮಧ್ಯಾಹ್ನ 12:05 ರಿಂದ 12:53 ವರೆಗೆ

ವಿಶೇಷ ಸೂಚನೆ: ಇಂದು ಶ್ರೀರಾಮ ನವಮಿ. ಸಕಲ ಸನ್ಮಂಗಳವನ್ನುಂಟುಮಾಡುವ ಈ ದಿನದಂದು ರಾಮ ನಾಮ ಸ್ಮರಣೆ ಅತ್ಯಂತ ಶುಭದಾಯಕ.

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वैकल्पिक मार्ग निर्धारित, ओवरब्रिज क्षेत्र में रहेगा आवागमन प्रतिबंधित

जयदीप कुमार सिन्हा

बरही । रामनवमी जुलूस एवं झांकी को लेकर बरही प्रशासन ने शहर में सुचारू यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान जारी किया है। जुलूस के दौरान मुख्य चौक एवं प्रमुख मार्गों पर भीड़ और जाम की स्थिति को देखते हुए कई सड़कों को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा तथा वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
जारी निर्देश के अनुसार, बिलौतीया मोड़ (धनबाद रोड) बाधित होने की स्थिति में धनबाद/कोलकाता से आने-जाने वाले वाहन बरही बायपास होते हुए ओवरब्रिज के पास एनएच-20 (पुराना एनएच-33) से बाएं उतरकर पेट्रोल कट मार्ग से दाएं लाईन होकर गंतव्य तक पहुंचेंगे। धनबाद/कोलकाता से रांची/हजारीबाग की ओर जाने वाले वाहन ओवरब्रिज के पास से उतरकर बाईं ओर से एनएच 20 (पुराना एनएच 33) से वाईं ओर डायवर्ट किए जाएंगे।
इसी तरह, धनबाद रोड जाम रहने पर कोडरमा/पटना से धनबाद/कोलकाता की ओर जाने वाली वहां बाईपास होकर गुजरेगी । रांची/हजारीबाग से धनबाद/कोलकाता जाने वाले वाहनों को भी तिलैया रोड स्थित कोबरा कट से मुड़कर बाईपास होते हुए वैकल्पिक मार्ग से होकर गुजरने की सलाह दी गई है। छोटा वाहन, जो गया/दिल्ली की ओर जाएंगे, उन्हें ओवरब्रिज से दाहिने लेन में प्रवेश कर आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन द्वारा जारी नक्शे में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि बरही चौक के ऊपर स्थित ओवरब्रिज के एक हिस्से में ‘रोड क्लोज’ रहेगा, जबकि पेट्रोल पंप कट, कोबरा कट और सर्विस रोड के जरिए वाहनों का संचालन किया जाएगा।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यातायात बाधित होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें तथा जुलूस के दौरान भीड़भाड़ वाले मार्गों से बचते हुए निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें।

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Cm कार्यक्रम से लोटते समय बस पलटी घटना स्थल उमरानाला जिला छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश मे 3 की मौत व 41 घायल की पुस्ती की गई 1 का हाथ कट के अलग हुआ और काई लोगो के सर फूट गए मिली सूचना के आनुसार ट्रैक से बस की टक्कर हुई पुलिस के मुताबिक दुर्घटना 26 मार्च 2026 गुरुबार शाम 6:00 बजे हुई
घटना स्थल उमरानाला क्षेत्र छिंदवाड़ा से उमरानाला की तरफ जा रही थी बस बताया गया बस चौरई तहसील में अयोजित हितग्राही सम्मेलन
से लोट रही थी सम्मेलन में सीएम डॉक्टर मोहन यादव जी भी शामिल थे
दुर्घटना का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हुआ डॉक्टरो की टीम व पुलिस राहत और बचाव के कार्यों में जुटी हुई है प्राथमिक उपचार के बाद घयालो को जिला अस्पताल रेफर किया गया
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Jan Kranti sangh
Designation: Media prabhari district chhindwara madhya pradesh
Name:aman pandole
News Reporter
Social media activist
District chhindwara madhya pradesh
......कृपया 🙏 इसे अपने फेसबुक और व्हाट्सएप मित्रों को भेजें

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हेडलाइंस:
ज्ञानपुर में गाधी नहर सड़क चौड़ीकरण का भूमि पूजन सम्पन्न
समाचार:
ज्ञानपुर क्षेत्र में गाधी नहर के किनारे प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण कार्य का भूमि पूजन आज सम्पन्न हो गया। यह भूमि पूजन विपुल दुबे के द्वारा विधिवत कराया गया।
करीब 16.70 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क परियोजना से सिंहपुर समेत आसपास के गांवों को बड़ी राहत मिलेगी। भूमि पूजन कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय ग्रामीण तथा समर्थक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस दौरान विधायक विपुल दुबे ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से और समयबद्ध पूरा कराया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि सड़क बनने से आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

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Reading the New World Order: Facts Many Ignore

Abdallah Gasmi Tunisia
The American war on Iran has confirmed the end of the current world order and revealed the features of a new, multipolar world order that will witness the collapse of one empire and the rise of others. It is now certain that Fukuyama's "end of history" theory has ended, and we are witnessing the beginning of a new chapter in history, some of whose pages may be painful. However, the most prominent player in this new history will not be China, as most analysts and scholars believe. Rather, anyone who follows events with a discerning eye can easily see that China desires to maintain the current world order because it has been the biggest beneficiary of it for the past thirty years. Furthermore, China's meteoric rise is closely linked to the American economy, and the decline or fall of the American role will be a cause for China's decline. The economic relationship between China and America is one of integration: America is the financier and consumer, and China is the manufacturer. Most American companies are based in China, and most American imports come from China. The highest volume of trade in the world is between America and China. In addition, China is the world's largest holder of US dollar reserves and the largest holder of US Treasury bonds. It is not in China's interest for the dollar to depreciate, as this would cost it significant losses from its global currency reserves. Nor is it in China's interest for US Treasury bonds to depreciate, as this would also result in substantial losses. Therefore, China is not currently considering overthrowing the existing world order. Instead, it is working on a somewhat long-term plan by finding alternatives to the US and creating new markets in Africa, Europe, and the US through the Belt and Road Initiative. Of course, in this endeavor, China is pursuing a soft power strategy, aiming to avoid losing the United States as its largest customer. Conversely, the United States is pursuing a policy of containment against China through economic sanctions and tariffs, despite recognizing that these tariffs are counterproductive, as most goods imported from China originate from American factories located in China. Regarding Taiwan, the hesitant US stance reflects this policy. While the US supports the "One China" principle, it threatens military intervention should China invade Taiwan. This is aimed at maintaining the containment policy and preventing China from dominating semiconductor technology. China is accelerating its economic diversification project, and its arms race is perhaps nothing more than a preemptive measure for the future. This will be confirmed by US President Trump's state visit to China, where he will receive a grand welcome. Major economic agreements are expected to be signed between the US and China, bringing them closer and revealing the true intentions of both countries. In short, a confrontation between China and the US is currently postponed, and it is in their interest to divide the global pie. China will allow the US to expand its influence in Latin America, while China will expand its influence in Europe to help the US block the path of the true superpower. So the question is, if the US and China are striving to avoid confrontation and maintain the global order, who will seek to undermine it? There is no doubt that the greatest threat to the global order is Russia, even though its economic weight is not comparable to China or America. Russia is armed with a formidable military force and a clear strategic vision. It understands that American hegemony stems from the strength of the dollar, and therefore it has repeatedly sought to undermine the dollar within the BRICS organization. It also exploited its war on Ukraine to the fullest extent, using it to prolong the war and militarily exhaust the West. Herein lies the paradox: Russia's arms industry is state-owned and produces in enormous quantities, while in America, this task is undertaken by the private sector in an agreement with the state based on a peculiar principle: cost plus profit. This means that arms-producing companies produce weapons at a fluctuating price. We mean that these companies sell weapons to the state at a price distributed as follows: the cost of materials, the cost of manufacturing, and a profit margin estimated between 10 and 20 percent. Of course, these companies manipulate arms prices due to the high cost of raw materials and because this industry is very precise and mostly manual, and of course, due to their desire to achieve the highest profit margin. This makes American arms production very expensive, while Russia controls the resources and energy, and weapons are manufactured in a Ministry of Defense factory. Therefore, every shell and every missile launched in Russia Ukraine is an economic drain on Western countries, especially Europe, which has lost cheap Russian energy and replaced it with American energy, which costs almost 10 times more than Russian energy. Furthermore, Europe is obligated to support Ukraine militarily, thus depleting its resources in In this senseless war, Putin will not seek a swift resolution but will instead prolong it by focusing on strikes against Odessa, which Europe fears will fall into his hands. He will also exploit the unwarranted fear displayed by some countries like Lithuania and Poland, leading them to increase their military spending, which will burden their citizens, especially after the American war on Iran. Putin seeks to prolong this war by providing Iran with intelligence and information to halt energy exports, particularly Qatari gas, to Europe. The longer the American war on Iran continues, the closer Putin's objective will become. His goal is clear: to instigate a political upheaval in Europe, toppling the current ruling political elites and elevating nationalist European elites who will seek closer ties with Russia, viewing it as a European power that provides cheap energy. America will not succeed in countering Putin's plan because the European transformation will be political and internal, leading to a decline in American influence and an increase in Russian influence in Europe. This Russian influence will also grow in the Gulf region, where Arab states have realized that America is incapable of protecting them. This will lead to a shift in political and military alliances, a shift that Russia will undoubtedly welcome. Thus, Russia will become the new partner for the region and the anticipated alternative to the American presence. Although American influence in the Gulf region will not completely disappear, the Gulf states have come to realize that America is not a trustworthy ally, and due to the danger posed by the Zionist entity, which is supported by the US, to the countries of the region. Consequently, Russia will have a significant role in shaping global policies, as it will become the controller of the energy market. This will bring China and India under its control, and both will seek to rid themselves of American dependence, which will be unable to provide them with alternative energy sources. Of course, India and China will not be subservient to Russia, but will deal with it on the basis of partnership and mutual interests. In return, America will lose its hegemony over Europe, the Gulf, China, and India, and will strive to dominate its backyard, namely Latin America. The final alliance in the new multipolar system with multiple spheres of influence will include Japan and South Korea. Those following the American war on Iran are not discussing the biggest loser in this war, which is Japan. Japan imports 70 percent of its oil needs from the Gulf, and with the continuation of the war, the closure of the Strait of Hormuz, and the destruction of the Gulf, this will significantly impact its energy security. With its oil facilities, Japan is threatened in industry and in every other sector. Even if the war ends, Japan will not put all its eggs in one basket again. It will seek to diversify its energy sources, and its only option is Russia. It will strive for rapprochement with Russia and strike deals with it at the expense of America. South Korea will follow suit. Despite this, both countries will maintain military cooperation with America, but not to the same extent as before. Of course, some emerging countries, such as Brazil, South Africa, Ethiopia, and Turkey, will exploit this situation, either to try to break free from economic and military dependence or to create spheres of economic influence. Thus, we will witness in the new world order multiple poles with overlapping and conflicting interests, harboring contradictions and differing political visions that may lead to military confrontations, potentially culminating in a world war. Therefore, we see that the main player in the new world order is Russia, not China. China will not be the initiator but will pursue an opportunistic, self-serving policy that will force it to catch up with the Russian bear to become a pole, not a follower

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रामनवमी पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोनारी के विभिन्न अखाड़ा समितियों में की पूजा-अर्चना

जमशेदपुर (झारखंड)। झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता जी रामनवमी के पावन अवसर पर सोनारी उपकार संघ बुधराम मोहल्ला में नवरात्रि जंवारा पूजा, सोनारी कुम्हारपाड़ा सिनेमा मैदान श्री श्री बजरंग अखाड़ा में रामनवमी उत्सव, सोनारी खुटाडीह श्री श्री सार्वजनिक हनुमान मंदिर समिति बाबा अखाड़ा में रामनवमी के अवसर पर आयोजित जागरण, सोनारी पंचवटी नगर श्री श्री शिव बजरंग अखाड़ा समिति के द्वारा आयोजित रामनवमी उत्सव के कार्यक्रम में उपस्थित होकर पूजा अर्चना कर सभी को रामनवमी की शुभकामना दिया।

इस अवसर पर अखाड़ा समितियों के सदस्यों ने उन्हें पगड़ी पहनाकर एवं तलवार भेंट कर सम्मानित किया।

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​पटना/डेहरी: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की सतर्कता और न्यायिक प्रक्रिया की दृढ़ता ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता की जेब काटने वालों के लिए कानून के घर में कोई जगह नहीं है।
​हाल ही में माननीय न्यायालय द्वारा कृष्णदेव पासवान (तत्कालीन प्रधान लिपिक, नगर परिषद, डेहरी ऑन सोन) को दी गई सजा केवल एक व्यक्ति को मिली सजा नहीं है, बल्कि उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत को अपना हक समझते हैं।
​: क्या था पूरा विवाद?
​यह मामला साल 2007 का है, जब नगर परिषद के ही एक कर-संग्राहक (Tax Collector) सुधीर कुमार रावत से उनके काम के बदले ₹3500 की रिश्वत मांगी गई थी। भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी थीं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक कर्मचारी ने अपने ही सहकर्मी को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
​निगरानी विभाग ने 14 जून 2007 को कार्रवाई करते हुए ₹2900 लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तारी की थी। लगभग 19 साल चले इस लंबे कानूनी सफर के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई।
​न्यायालय का फैसला: कानून का डंडा
​माननीय न्यायाधीश श्री मो० रुस्तम ने इस मामले में कठोर रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act 1988) के तहत सजा सुनाई:
​सजा: आरोपी को विभिन्न धाराओं में 2 से 3 साल तक के सश्रम कारावास की सजा मिली।
​अर्थदंड: कुल ₹40,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसे न भरने पर अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
​ व्यवस्था में सुधार की दरकार:
​भले ही इस फैसले को आने में 19 साल लग गए, लेकिन यह उन ईमानदार अधिकारियों और शिकायतकर्ताओं के हौसले को बढ़ाता है जो सिस्टम से लड़ने का साहस रखते हैं।
निगरानी ब्यूरो के अनुसंधानकर्ता परमानन्द सिंह और विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह की प्रभावी पैरवी का परिणाम है कि आज एक भ्रष्ट लोक सेवक अपने अंजाम तक पहुँचा।
​बिहार जैसे राज्य में, जहाँ विकास की गति को अक्सर भ्रष्टाचार का दीमक चाट जाता है, वहां इस तरह के फैसले प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसी प्रक्रियाओं को और सरल बनाए ताकि कोई भी अधिकारी किसी आम नागरिक या कर्मचारी का शोषण न कर सके।
​निष्कर्ष: न्याय में देरी न्याय न मिलने के बराबर कही जाती है, लेकिन जब फैसला आता है, तो वह समाज में विश्वास बहाल करता है। कृष्णदेव पासवान का यह मामला हर उस सरकारी बाबू के लिए चेतावनी है, जो जनता की सेवा के बजाय अपनी तिजोरी भरने में विश्वास रखते हैं।

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पटना। पटना से एक दुखद हादसा सामने आया है, जहां पटना से हावड़ा जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना बाढ़ रेलवे स्टेशन की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उक्त व्यक्ति प्लेटफॉर्म पर मौजूद था और गुटखा खा रहा था। इसी दौरान वह ट्रैक की ओर गया और गुटखा थूकने लगा। तभी दूसरी ओर से तेज रफ्तार में वंदे भारत एक्सप्रेस आ रही थी। ट्रेन के चालक द्वारा लगातार हॉर्न बजाने के बावजूद उसने कोई ध्यान नहीं दिया और ट्रेन की चपेट में आ गया।

बताया जा रहा है कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों और रेलवे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत अनुमंडलीय अस्पताल बाढ़ पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे पटना रेफर कर दिया गया।

हालांकि, इलाज के दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल रेलवे पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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देहरादून/हरिद्वार/रुड़की। प्रेम, सेवा और मानव एकता के आध्यात्मिक संदेश के साथ 22 से 25 मार्च 2026 तक देहरादून, हरिद्वार और रुड़की में वार्षिक “मेहेर मेला” श्रद्धा एवं भक्ति भाव से सम्पन्न हुआ। चार दिवसीय इस आयोजन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए मेहेर प्रेमियों ने भाग लेकर सत्संग, भजन, प्रार्थना एवं आध्यात्मिक चिंतन का लाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए प्रेम, सेवा और भाईचारे का संदेश आत्मसात किया। आयोजन के दौरान आध्यात्मिक एकाग्रता, अनुशासन और समर्पण का विशेष वातावरण देखने को मिला।

23 मार्च 1953 का ऐतिहासिक महत्व:
अवतार मेहेर बाबा के जीवन से जुड़ा 23 मार्च 1953 का दिन आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, बाबा 18 फरवरी 1953 को अपने आध्यात्मिक कार्य हेतु कुछ समय के लिए देहरादून आए थे। भक्तों के आग्रह पर 23 मार्च 1953 (रामनवमी) को उन्होंने देहरादून में प्रथम सार्वजनिक दर्शन (Public Darshan) दिया, जो आध्यात्मिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की।

बताया जाता है कि बाबा ने अपने संदेश में कहा कि "ईश्वर ही शाश्वत सत्य है तथा सच्चा साधक वही है जो सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी ईश्वर का स्मरण बनाए रखे।"

देहरादून की विशेष आध्यात्मिक पहचान:
मेहेर प्रेमियों के अनुसार देहरादून को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार अवतार मेहेर बाबा ने अपने प्रेमियों को प्रेम मार्ग एवं सरल जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।

इसी कालखंड में अवतार मेहेर बाबा द्वारा “परवरदिगार प्रार्थना” (13 अगस्त 1953) तथा “ऊँचे से ऊँचा” (7 सितम्बर 1953) जैसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश दिए गए, जो आज भी अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं।

इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि बाबा ने अपने “न्यू लाइफ़” काल से संबंधित महत्वपूर्ण अवधि वर्ष 1950 में देहरादून क्षेत्र में व्यतीत की, जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया।

विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु:
चार दिवसीय मेहेर मेले में देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना, भजन एवं आध्यात्मिक विचार गोष्ठियों में भाग लिया। आयोजन के दौरान मानव एकता, प्रेम एवं सेवा को जीवन का आधार मानने पर बल दिया गया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन मन को शांति प्रदान करते हैं तथा व्यक्ति को सकारात्मक सोच एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करते हैं।

आध्यात्मिक एकता का संदेश:
आयोजन में यह संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया कि प्रेम और निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से ही ईश्वर के निकट पहुंचा जा सकता है। मेहेर प्रेमियों के अनुसार ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, नैतिक मूल्यों एवं आंतरिक शांति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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In the evolving geopolitics of the 21st century, few chokepoints carry as much strategic weight as the Strait of Hormuz. Linking the oil-rich Persian Gulf to global markets, this narrow maritime corridor handles nearly one-fifth of the world’s petroleum supply. Today, it stands not just as a trade route—but as a pressure point in the contest for global dominance. Recent tensions involving Iran, the United States, and regional actors have revived a haunting historical analogy: the Suez Crisis. Prominent investor and historian Ray Dalio has suggested that failure to secure Hormuz could mirror Britain’s loss of the Suez Canal—an event that marked the decline of an empire. But is this comparison valid—or dangerously oversimplified?

In 1956, Egypt nationalized the Suez Canal, triggering a military response from United Kingdom, France, and Israel. Militarily, Britain could act. Politically, it could not sustain the consequences. Under pressure from both the United States and the Soviet Union, Britain was forced to withdraw. The implications were seismic: the pound weakened, allies recalibrated, and colonial dissolution accelerated. The lesson was not about military defeat—it was about loss of credibility. Power, once questioned, rapidly erodes, and perception becomes reality in the hierarchy of nations.

The Strait of Hormuz is not just another shipping lane; it is the artery of global energy flows. Through it passes oil from Saudi Arabia, exports from United Arab Emirates, and supplies from Kuwait and Iraq. A disruption would not merely spike prices—it would reverberate across supply chains, impacting manufacturing hubs from China to India and beyond. Unlike the mid-20th century, today’s world is deeply interconnected, where energy shocks cascade into inflation, currency volatility, and political instability across continents.

The strategic objectives in this evolving confrontation extend far beyond conventional military goals such as nuclear containment or missile neutralization. At a deeper level, the contest revolves around control over energy flows, dominance of maritime trade routes, and the broader geopolitical aim of containing rising powers like China. For the United States, ensuring uninterrupted passage through Hormuz is not merely about regional stability; it is about sustaining the architecture of global economic leadership. Meanwhile, regional actors pursue their own layered objectives, creating a complex web of overlapping interests and calculated risks.

Drawing from centuries of historical patterns, Ray Dalio outlines a recurring cycle in the rise and fall of empires. A dominant power controls trade and finance until a challenger tests its authority at a critical node. The world then observes the response, and credibility either strengthens or fractures. This dynamic is not solely determined by military strength but by the perception of inevitability and resilience. Markets, alliances, and currencies respond to confidence as much as to القوة, making trust the ultimate currency of power.

The United States remains unmatched in military capability, yet it faces structural pressures including high sovereign debt, war fatigue, and increasing multipolar resistance. Past engagements—from Vietnam to Afghanistan—have shaped global perceptions about endurance and strategic clarity. However, equating these challenges with imminent decline risks oversimplification. Unlike post-war Britain, the United States retains the world’s primary reserve currency, deep capital markets, and extensive alliance networks, making its position far more resilient than surface comparisons suggest.

On the other side, Iran leverages asymmetry rather than conventional dominance. Its geographic proximity to the Strait of Hormuz, combined with its ability to employ indirect and incremental strategies, allows it to exert influence disproportionate to its size. The objective is not outright victory but the gradual elevation of costs for any opposing force. In such conflicts, endurance often outweighs intensity, and time becomes a strategic weapon in itself.

The analogy to historical turning points like the Battle of Waterloo or the Suez Crisis is compelling but imperfect. Unlike Britain in 1956, the United States is not isolated, and its economy is deeply embedded within global systems. Moreover, any disruption in Hormuz would have far-reaching consequences not only for Western economies but also for nations like China and India, creating a paradox where no major power truly benefits from full-scale instability.

Looking ahead, the future is likely to unfold across multiple scenarios rather than a single निर्णायक outcome. Controlled escalation may see rising tensions alongside continued maritime operations under heavy security. Temporary disruptions could trigger sharp price spikes and rapid diplomatic interventions. In a more severe scenario, prolonged instability could lead to systemic economic shocks and a reconfiguration of global trade routes. Each pathway carries implications that extend far beyond the Middle East.

Ultimately, the true stakes are not confined to the waters of the Strait of Hormuz but lie in a broader question of whether the current global order can maintain trust under stress. History shows that empires do not collapse overnight; they erode through miscalculations, overreach, and shifting perceptions. The Hormuz crisis, if it intensifies, will not single-handedly end an era, but it may accelerate an ongoing transition toward a more fragmented and multipolar world.

In this context, Hormuz is not the final battle but a signal—a hint of deeper structural shifts shaping the future of global power.

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भारत में भ्रष्टाचार अब कोई छुपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि एक खुला ज़हर बन चुका है।

नालंदा में एक BCMO का ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाना कोई अलग घटना नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम की झलक है जहाँ हर फाइल की कीमत तय है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार की यह कार्रवाई सराहनीय जरूर है, लेकिन सवाल यह है कि:
जो नहीं पकड़े गए, उनका क्या?
जब एक स्वास्थ्य अधिकारी जन्म तिथि सुधारने जैसे सामान्य कार्य के लिए रिश्वत मांगता है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह गरीब और आम आदमी के अधिकारों की हत्या है।
और यहीं से यह मामला और भी गंभीर हो जाता है…
क्या यह सिर्फ लापरवाही है?
या फिर यह एक संगठित भ्रष्टाचार का नेटवर्क है?
अगर एक अधिकारी छोटी रिश्वत में पकड़ा जाता है, तो यह मान लेना चाहिए कि सिस्टम के भीतर करोड़ों के खेल चल रहे हैं।
निष्कर्ष:
अब वक्त आ गया है:
हर विभाग की CBI/न्यायिक जांच,
दोषियों की तत्काल बर्खास्तगी,
पीड़ितों को न्याय और मुआवजा,
वरना “सुशासन” सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा।

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పశ్చిమాయాసియాలో ఉద్రిక్త పరిస్థితులకు కారణంగా ఉన్న అమెరికా - ఇరాన్ యుద్ధంపై ప్రముఖ యోగా గురువు రాందేవ్ బాబా జోస్యం చెప్పారు. ఈ యుద్ధంలో అమెరికా విజయం సాధించలేదని, అలాగని ఇరాన్ ఓడిపోదని అభిప్రాయపడ్డారు.
హరిద్వార్‌లోని పతంజలి యోగాపీఠ్‌లో గురువారం జరిగిన శ్రీరామ నవమి వేడుకల సందర్భంగా ఆయన పాల్గొని మీడియాతో మాట్లాడారు.
ఈ యుద్ధంలో అమెరికా గెలవదు, ఇరాన్ ఓడిపోదని నేను గతంలోనే చెప్పాను. 1000 నుంచి 1200 కిలోమీటర్ల నుంచి 4000 నుంచి 5000 కిలోమీటర్ల దూరంలోని లక్ష్యాలను ఛేదించగల బాలిస్టిక్ క్షిపణులను ప్రయోగించడం ద్వారా కేవలం ఆయుధాలతో ఎవరూ ఎవరినీ భయపెట్టలేరని ఇరాన్ నిరూపించిందన్నారు.

ప్రజాస్వామ్యం అంటే ఇతరులను భయపెట్టడం కాదని ఆయన హితవు పలికారు. ప్రపంచంలోనే అతిపెద్ద ప్రజాస్వామ్య దేశంగా అమెరికా గర్వపడే అమెరికా ఇతర దేశాల సార్వభౌమత్వాన్ని కూడా గౌరవించాలని సూచించారు. ఇదేసమయంలో ఇలాంటి సంక్షోభ సమయంలో భారత్ కీలక పాత్ర పోషించాలని ఆయన ఆకాంక్షించారు.

వసుదైక కుటుంబం అనే సిద్ధాంతం ఆధారంగా ప్రపంచాన్ని ఏకతాటిపైకి తీసుకురావాలన్న సందేశాన్ని భారత్ ఇస్తూనే ఉండాలని ఆయన సూచించారు. ప్రధాని నరేంద్ర మోడీ రాజకీయంగా, దౌత్యపరంగా చేయాల్సిన ప్రయత్నాలన్నీ చేస్తున్నారని కొనియాడారు.

ఇజ్రాయెల్ - అమెరికా, ఇరాన్ మధ్య యుద్ధాన్ని ఎవరైనా మధ్యవర్తిత్వంతో ఆపగలిగితే అది ఒక్క భారతదేశానికి మాత్రమే సాధ్యమవుతుందన్నారు. ఈ యుద్ధం వల్ల తలెత్తిన పెట్రోల్, గ్యాస్ సంక్షోభంతో పాటు ప్రపంచ ఆర్థిక మాంద్యానికి కూడా చర్చల ద్వారానే పరిష్కారం లభిస్తుందన్నారు.

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