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मुंबई: डॉ. एम. एस. बाली ने सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में ‘‘हिंदू खतरे में है’’ के कथन की समीक्षा की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या यह खतरा वास्तविक है या एक सुनियोजित भय जो जनमानस में बैठाया जा रहा है। देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी के बीच इस अवधारणा पर विचार करते हुए डॉ. बाली ने बताया कि भय का निर्माण सत्ता और प्रभाव बनाए रखने का एक माध्यम रहा है, जो नागरिकों को भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने को प्रेरित करता है।

डॉ. बाली ने यह भी कहा कि धार्मिक पहचान को प्रमुखता देने से लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती मिलती है और शिक्षित वर्ग भी बिना गहराई से विचार किए इस विमर्श का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा भावनात्मक मुद्दों के उपयोग पर भी चिंता जताई और कहा कि वास्तविक चुनौती समाज में बढ़ती दूरी, अविश्वास और संवादहीनता है। डॉ. बाली ने भारत की विविधता और सहअस्तित्व की महत्ता को रेखांकित करते हुए सामाजिक एकता और विवेक के मार्ग अपनाने का आह्वान किया है।

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एयर इंडिया ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईंधन संकट के कारण एयरलाइन ने जुलाई तक अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया है।

एयर इंडिया न्यूज़रूम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही यह खबर कि एयर इंडिया ने सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद कर दी हैं, पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।

हालांकि, एयर इंडिया ने यह स्वीकार किया है कि बढ़ती ईंधन लागत और लंबी उड़ान अवधि के कारण जून से अगले तीन महीनों के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों में कटौती की जा रही है।

इसी के तहत दिल्ली से शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसी कुछ उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है।

दरअसल, पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत और क्रू लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

कुछ उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब वियना या स्टॉकहोम में तकनीकी स्टॉप भी करना पड़ रहा है, जिससे परिचालन खर्च और बढ़ गया है।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल ने एयरलाइंस पर दबाव बढ़ा दिया है। मई 2026 के पहले सप्ताह में एविएशन फ्यूल की औसत कीमत बढ़कर 162.89 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो फरवरी के अंत में 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी।

एयरलाइन उद्योग में ईंधन लागत कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% तक होती है, इसलिए लंबी दूरी की उड़ानें चलाने वाली कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी कर्मचारियों से कहा है कि बढ़ती ईंधन कीमतों और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स अब घाटे में जा रहे हैं, इसलिए सेवाओं में अस्थायी कटौती जारी रह सकती है।

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इनसेप्शन डेली न्यूज़/ID News,
संदीप शास्त्री (ब्यूरो चीफ)

लखनऊ/वाराणसी
वाराणसी में पारंपरिक स्वर्णकारी व्यवसाय से जुड़े कई परिवार अब आर्थिक संकट और कारोबार में आई भारी गिरावट के चलते नया रोजगार अपनाने को मजबूर हो गए हैं। शहर के कई इलाकों में स्वर्णकार समुदाय के लोगों ने अब झालमूड़ी और फास्ट फूड की छोटी-छोटी दुकानें शुरू कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि सोने-चांदी के बढ़ते दाम, ग्राहकों की घटती संख्या और ऑनलाइन बाजार के बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक आभूषण कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे छोटे कारीगरों और दुकानदारों की आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है।
स्वर्णकारों का कहना है कि परिवार चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें वैकल्पिक रोजगार तलाशना पड़ा। कई लोगों ने सड़क किनारे झालमूड़ी, चाट और अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें लगानी शुरू कर दी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बनारस की पहचान रहे पारंपरिक कारीगरों का इस तरह दूसरा पेशा अपनाना चिंताजनक है। वहीं, व्यापारियों ने सरकार से छोटे स्वर्णकारों के लिए राहत और सहायता की मांग की है, ताकि पारंपरिक कारोबार को फिर से मजबूती मिले।

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आमजन को पहले सेवा अभियान: गरीब, युवा, अन्नदाता, किसान एवं नारी शक्ति की सेवा के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने पर जोर

मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक के निर्देशानुसार आमजन को पहले सेवा और अनुशासन के संकल्प को साकार करने के लिए विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जिले में वर्षभर सम्पर्क अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान का मूल उद्देश्य गरीब, युवा, अन्नदाता, किसान, नारी शक्ति की सेवा के साथ-साथ कम्पनी की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना है।

इस संबंध में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने अभियान के सफल संचालन एवं लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु जिला प्रशासन एवं विद्युत कम्पनी के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए आदेश जारी किया है।

जिसमें समस्त ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, विद्युत विभाग द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार कलस्टर शिविरों में आवश्यकता अनुसार उपस्थित रहेंगें। वे उपभोक्ताओं को बकाया राशि भुगतान हेतु प्रेरित करेगें एवं स्थल पर ही शिकायतों के निराकरण में सहयोग करेगें।
शहरी क्षेत्रों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी सघन बस्तियों में शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेगें, ताकि राजस्व वसूली के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।

उपभोक्ताओं के प्रमाणीकरण एवं स्थानीय समन्वयक हेतु पंचायत अमला विद्युत विभाग के अमले को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। ताकि गरीब, युवा, अन्नदाता, किसान, नारी शक्ति वर्ग के पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिल सके और विवादित बिलों को मौके पर समाधान हो।
समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत राजस्व संग्रहण की प्रगति एवं शिविरों की सफलता की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे।

जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग के मध्य कैम्पों को सफल बनाने हेतु श्री अभिषेक चौरसिया नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे, जो अभियान की प्रगति एवं लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग प्रदान करेंगे।

कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। शासन के राजस्व हितों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
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#JansamparkMP #morena2026 #Morena #MadhyaPradesh Jansampark Madhya Pradesh

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हुसैनगंज, फतेहपुर संवाददाता।
हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सातमील तिराहे पर दो ट्रकों के बीच हुई टक्कर में एक खलासी घायल हो गया। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रक संख्या यूपी 71 एटी 3817 को एक अज्ञात ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक में बैठे खलासी अमित पुत्र स्वर्गीय दशरथ निवासी सैदनपुर थाना हुसैनगंज घायल हो गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल खलासी को निजी वाहन से उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि घायल को हल्की चोटें आई हैं।
सूचना पर पुलिस द्वारा मामले की जानकारी जुटाई जा रही है तथा अज्ञात ट्रक की तलाश की जा रही है।

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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित NEET (UG) 2026 परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। एजेंसी ने कहा है कि परीक्षा अब दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।

NTA के मुताबिक, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद यह फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द की गई है ताकि राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा बना रहे।

CBI करेगी बड़ी जांच
इस मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर प्रश्नपत्र या उससे जुड़ा मैटेरियल छात्रों तक कैसे पहुंचा।

कैसे हुआ कथित पेपर लीक?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET परीक्षा से करीब 15 दिन से एक महीने पहले ही एक गेस पेपर छात्रों के बीच घूम रहा था। बताया जा रहा है कि इस गेस पेपर में करीब 410 सवाल थे, जिनमें से लगभग 120 सवाल सीधे केमिस्ट्री सेक्शन में परीक्षा में आ गए।

राजस्थान पुलिस SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह सिर्फ गेस पेपर था या इसके जरिए संगठित तरीके से चीटिंग करवाई गई।

लाखों रुपये में बिकने के आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कथित प्रश्न बैंक राजस्थान और अन्य राज्यों में कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा से दो दिन पहले इसकी कीमत करीब 5 लाख रुपये तक बताई जा रही थी, जबकि परीक्षा से एक दिन पहले यह करीब 30 हजार रुपये में बेचा गया।

जांच एजेंसियों को कई मोबाइल फोन से Forwarded many times वाले मैसेज भी मिले हैं, जिससे बड़े स्तर पर डिजिटल सर्कुलेशन की आशंका बढ़ गई है।

केरल से राजस्थान तक फैला नेटवर्क

सूत्रों के मुताबिक, यह कथित मैटेरियल सबसे पहले चूरू के एक मेडिकल छात्र से जुड़ा पाया गया, जो फिलहाल केरल में पढ़ाई कर रहा है। वहां से यह सामग्री सीकर भेजी गई और बाद में एक PG संचालक के जरिए छात्रों और काउंसलर्स तक पहुंचाई गई।

अब तक 13 गिरफ्तार

राजस्थान SOG ने पिछले चार दिनों में देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग करियर काउंसलिंग और एडमिशन गाइडेंस के कारोबार से जुड़े बताए जा रहे हैं।

NTA की अपील

NTA ने कहा है कि उसे 7 मई को कथित अनियमितताओं की जानकारी मिली थी, जिसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। एजेंसी ने छात्रों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है।

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सम्पर्क अभियान के तहत वितरण केन्द्र बागचीनी एवं अन्य क्षेत्रों में विद्युत समस्या निराकरण शिविर आयोजित होंगे

मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के निर्देशानुसार विद्युत मंडल द्वारा उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु सम्पर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न वितरण केन्द्रों में विद्युत संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के तहत वितरण केन्द्र बागचीनी अंतर्गत 14 मई को हड़वांसी स्थित माध्यमिक विद्यालय में प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक शिविर आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में 16 मई को नाहरदोंकी पंचायत भवन में, 23 मई को वीरमपुरा प्राथमिक विद्यालय में तथा 25 मई को उम्मेदगढ़वांसी पंचायत भवन में प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक शिविर आयोजित किए जाएंगे।

इसी प्रकार वितरण केन्द्र जींगनी अंतर्गत गंजरामपुर पंचायत भवन में तथा वितरण केन्द्र बानमौर अंतर्गत स्कूल के पास, सुमावली पंचायत भवन, मसूदरपुर आंगनबाड़ी भवन एवं जयनगर मंदिर परिसर के समीप 14 मई को प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक विद्युत संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु शिविर लगाए जाएंगे।

इन शिविरों में विद्युत उपभोक्ताओं की विभिन्न समस्याओं जैसे बिल संशोधन, गलत बिलिंग, अत्यधिक बिल राशि, मीटर रीडिंग, स्मार्ट मीटर, मीटर एवं सर्विस केबल, घरेलू कनेक्शन तथा कृषि कनेक्शन संबंधी शिकायतों का निराकरण किया जाएगा। उपभोक्ताओं से निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होकर शिविर का लाभ लेने की अपील की गई है।
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Opening Hook:
Cricket जगत में एक और Masterstroke की खबर ने हलचल मचा दी है! England के दिग्गज Allrounder Andrew Flintoff अब BBL में Sydney Thunder के नए Head Coach बनने जा रहे हैं। Flintoff की यह वापसी सिर्फ एक कोचिंग appointment नहीं, बल्कि एक बयान है – The Guru Gyan की भविष्यवाणी है कि यह BBL Season explosive होने वाला है! क्या 'Freddie' अपनी fiery spirit से Thunder की किस्मत बदल पाएंगे, या यह सिर्फ एक और high-profile Experiment साबित होगा?

The Inner Story / Asli Maajra:
Cricket की दुनिया में, जब ऐसे बड़े coaching बदलाव होते हैं, तो fans और pundits दोनों की नज़रें भविष्य पर टिक जाती हैं। कई observers और analysts तो [www.thegurugyan.com](http://www.thegurugyan.com) जैसे TRUE AI prediction platforms की ओर भी देखते हैं, जहाँ Match शुरू होने से पहले ही संभावित outcomes को पढ़ने का confidence दिखाया जाता है।
Sydney Thunder ने अपने नए BBL Coach के रूप में Andrew Flintoff पर भरोसा दिखाया है। यह Flintoff का पहला overseas franchise coaching Role होगा, जिसने Cricket circuits में सनसनी मचा दी है। दो Seasons तक The Hundred में Northern Superchargers के साथ रहने और England Lions को coach करने के बाद, Flintoff अब BBL की चुनौती के लिए तैयार हैं।

Thunder के लिए यह फैसला तब आया है जब उन्होंने England के 2019 ODI World Cup विजेता Coach Trevor Bayliss से रास्ते अलग कर लिए थे। Bayliss के पाँच साल के कार्यकाल में Team 2024-25 में BBL Final तक तो पहुंची, लेकिन 2023-24 और 2025-26 Seasons में आखिरी पायदान पर रही। Thunder के General Manager Trent Copeland ने एक "world-class T20 coach" की तलाश की बात कही थी, और अब उन्हें Flintoff के रूप में अपना जवाब मिल गया है।

Flintoff, जो England's A side, England Lions के Coach रह चुके हैं और Ashes tour के दौरान Australia का दौरा भी कर चुके हैं, उनके पास Coaching का अनुभव है। उन्होंने Matthew Mott के कार्यकाल में England के white-ball squads के लिए Consultant के रूप में भी काम किया है। हालांकि, franchise Cricket में उनका एकमात्र अनुभव The Hundred के दो Seasons का है। दिलचस्प बात यह है कि Flintoff Northern Superchargers के नए Indian Owners, Sun Group (जिसे अब Sunrisers Leeds के नाम से जाना जाता है) के साथ terms पर सहमत नहीं हो पाए, जिसके बाद उन्होंने 2026 में Team को Coach न करने का फैसला किया। Bharat के Owners का यह Strategic Move भी Cricket Business की बदलती तस्वीर दिखाता है।

Flintoff का BBL से पुराना नाता भी रहा है; उन्होंने 2014-15 Season में Brisbane Heat के लिए एक Player के रूप में खेला था, जो उनके 20-year professional Career के आखिरी Matches थे। अब Flintoff के सामने पहली बड़ी चुनौतियों में से एक होगी David Warner की Captaincy का भविष्य, जिन पर April में drink driving का Charge लगा था और 24 June को उनकी Matter Court में वापस आएगी।

Cricket New South Wales भी अपने Men's Programs में बड़े बदलाव कर रहा है। James Hopes को Sydney Sixers का BBL Coach बनाया गया है, जबकि Brad Haddin ने NSW State Coach के रूप में Greg Shipperd की जगह ली है।

Analysis & Numbers:
- Flintoff का Coaching Experience: England Lions और England white-ball squads के साथ रहने के बावजूद, franchise T20 Coaching का उनका अनुभव अभी तक Northern Superchargers के साथ दो Seasons तक ही सीमित है। यह BBL जैसी बड़ी League में एक नया Challenge होगा।
- Sydney Thunder का Recent Performance: Team ने 2023-24 और 2025-26 Seasons में Last Position पर Finish किया है। Flintoff को इस Performance Graph को ऊपर ले जाना होगा, जिसके लिए एक Gamechanger Strategy की ज़रूरत होगी।
- David Warner की Captaincy Dilemma: Flintoff को आते ही David Warner के Legal Issues और उनकी Captaincy के भविष्य पर एक बड़ा फैसला लेना होगा, जो Team Dynamics पर सीधा असर डालेगा। यह एक High-Pressure Situation होगी।

The Guru Gyan Verdict:
Andrew Flintoff का Sydney Thunder का Coach बनना एक साहसिक और high-stakes Move है। Flintoff का Player के तौर पर शानदार Record और उनकी leadership qualities किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन Coaching की दुनिया में BBL का Pressure बिल्कुल अलग होता है। Thunder ने एक ऐसे Coach पर दांव लगाया है जो अपनी Unfiltered Personality और Winning Mentality के लिए जाने जाते हैं। The Guru Gyan का मानना ​​है कि Flintoff के आने से Thunder में एक नई ऊर्जा और Aggression देखने को मिलेगी। हालांकि, Team के पिछले खराब Performances और David Warner जैसे Key Player की Uncertainty को देखते हुए, यह सफर आसान नहीं होगा। अगर Flintoff अपनी Vision को Players में भर पाए, तो यह Thunder के लिए एक Prophecy साबित हो सकती है, लेकिन अगर शुरुआती Results नहीं मिले, तो Critics का शोर मचाना तय है।

Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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AIMA न्यूज
मनोज कुमार शर्मा
खगड़िया, बिहार 14 मई 26

खगड़िया जिला के गोगरी प्रखण्ड अन्तर्गत बन्नी पंचायत के महदा गाँव का जर्जर सामूदायिक भवन की अवस्था कोई बड़ी अनहोनी होने का संकेत दे रहा है। यह सामूदायिक भवन वर्षों से महदा ग्राम वासियों के लिए सामूहिक कार्य सेवा का सहारा बना हुआ है। सोसल एक्टिविस्ट सह बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह जर्जर सामुदायिक भवन के अवस्था का प्रमुखता से निरिक्षण करते हुए बताया कि यह सामूदायिक भवन महदा ग्राम वासियों का एकमात्र सामूहिक सामाजिक कार्य का सहारा है। इसी सामुदायिक भवन के तले बन्नी पंचायत के वार्ड 12 स्थित प्राथमिक विद्यालय महदा के स्कूली छात्र-छात्राओं को लाकर विद्यालय विधि व्यवस्था अभाव में मद्याह्न भोजन कराया जाता है । जिससे कभी भी बच्चों के साथ अनहोनी घटना घटित होने आशंका बनी रहती है।
एक ओर जहां खगड़िया अपना विकासात्मक गौरव गाथा लिए 45 वीं जिला स्थापना दिवस का जश्न मना रहा है वहीं यह महादा का जर्जर सामूदायिक भवन अपनी दयनीय स्थिति को दिखाते हुए कभी भी कोई बड़ी अनहोनी घटना होने का संकेत देकर प्रशासनिक अधिकारियों को चिढ़ा रहा है।

विगत वर्ष सितम्बर महिने से हीं लगातार आजतक सोशल ग्रामीण एक्टिविस्ट सरपंच नवल किशोर सिह ग्रामिणों के आग्रह और सहयोग से उच्चाधिकारियों को आवेदन देकर सामूदायिक भवन की जर्जर अवस्था की ओर लगातार ध्यान आकृष्ट कराते हुए वही पर पुनः जर्जर भवन हटाकर नये भवन निर्माण करने की मांग करते आ रहे हैं । परंतु 8 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कोई सुधि नहीं ली गई है । समय रहते यदि अधिकारियों द्वारा इसकी सुधि नहीं ली गई , तो कभी भी खंडहर का रूप लिए सामुदायिक भवन का छत एवं दीवार ढहकर कोई बड़ी अनहोनी घटना में तब्दील हो सकता है।

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इनसेप्शन डेली न्यूज़/ID News
ब्यूरो चीफ: संदीप शास्त्री

लखनऊ । समाजवादी परिवार से जुड़े प्रतीक यादव की मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अहम तथ्य उजागर हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रतीक यादव के शरीर पर कुल छह चोटों के निशान मिले हैं, हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि इनमें से कोई भी चोट जानलेवा नहीं थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक पांच चोटें दाहिने हाथ में कोहनी से कलाई तक पाई गईं, जबकि एक चोट छाती के दाहिने हिस्से और एक चोट बाईं कलाई पर मिली। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि ये चोटें गिरने या किसी हादसे के दौरान लगी हो सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार प्रतीक यादव की मौत का मुख्य कारण पल्मोनरी एंबॉलिज्म (Pulmonary Embolism) रहा। यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति होती है, जिसमें शरीर में बना खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) नसों के जरिए फेफड़ों की धमनियों में जाकर फंस जाता है। इससे फेफड़ों में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है।
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक प्रतीक यादव के शरीर में बड़ा ब्लड क्लॉट मिला था। डॉक्टरों का कहना है कि क्लॉट फेफड़ों तक पहुंचने के बाद अचानक सांस रुकने की स्थिति बनी और कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई। ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से दिल के दाहिने हिस्से पर अत्यधिक दबाव पड़ा, जिससे हार्ट फेलियर की स्थिति उत्पन्न हुई।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

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ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर आरोह-2026 का शुभारंभ

खेल प्रशिक्षण के साथ फिटनेस, व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक जागरूकता का समग्र मंच बनेगा आरोह-2026

कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ के मार्गदर्शन में ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर आरोह-2026 का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मराज मीणा की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, उपायुक्त नगर निगम श्री डोडिया, खेल अधिकारी श्री प्रशांत कुशवाह सहित खेलों से जुड़े शिक्षक, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री धर्मराज मीणा ने कहा कि आरोह-2026 शिविर खेल प्रशिक्षण के साथ-साथ फिटनेस, व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक जागरूकता का समग्र मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि शिविर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी बनने हेतु प्रेरित एवं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय सहित सभी विकासखंड मुख्यालयों पर विभिन्न खेल विधाओं के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त हो सकें।
शिविर अंतर्गत अंबेडकर स्टेडियम में एथलेटिक्स, योगा, कबड्डी, व्हॉलीबॉल, पिट्ठू, ताइक्वांडो एवं थुम्बा खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि पॉलीटेक्निक ग्राउंड में क्रिकेट एवं कलारीपट्टू के प्रशिक्षण शिविर संचालित किए जाएंगे। इन खेलों के लिए पंजीयन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न होगी।
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Cricket जगत में वापसी की कहानियाँ हमेशा दिल को छू जाती हैं, लेकिन जब वापसी Ollie Robinson जैसे किसी 'controversial' Player की हो, तो सवाल उठना लाज़मी है। England Cricket ने दो साल के लंबे इंतज़ार के बाद अपने 'world-class' Fast Bowler को New Zealand के खिलाफ Test Squad में वापस बुला लिया है। क्या यह Comeback सिर्फ Head Coach Brendon McCullum और Managing Director Rob Key का एक जुआ है, या फिर Robinson सच में एक Gamechanger साबित होंगे?

The Inner Story / Asli Maajra:
Ollie Robinson का Test Cricket से बाहर रहना England के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा था। उनकी आखिरी Test Match, Bharat के खिलाफ Ranchi में थी, जहाँ उन्हें एक First-Innings Fifty बनाने के बाद Back Spasm की समस्या हुई। उस Match में उन्होंने पूरे 13 Wicketless Overs फेंके, और उनकी Bowling Pace 70 mph से नीचे चली गई थी। यह उनकी Frustrating Run of Injuries का चरम था, जिसकी वजह से उन्हें 2021-22 Ashes के दौरान Jon Lewis जैसे Experts ने Fitness को लेकर लताड़ा था।

इसके बावजूद, उनके Statistics चौंकाने वाले हैं – 20 Tests में 22.92 की Average से 76 Wickets. Rob Key ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा, "Ollie Robinson, जब वह Fit और 82-83 mph की decent Pace पर Bowling करते हैं, तो वह World-Class हैं।" Key के अनुसार, उनके Record की तुलना Globally कुछ बेहतरीन Bowlers से की जा सकती है।

पिछले September में Ashes Squad से उनकी Omission ने कई लोगों को हैरान नहीं किया था, लेकिन Robinson ने इसका जवाब Bat और Ball दोनों से दिया। Sussex के Captain बनने के बाद उन्होंने अपनी Team को Five Games में Three Wins दिलाईं, Worcestershire के खिलाफ 11 Wickets और Leicestershire के खिलाफ Five-Wicket Haul लिया। Surrey के खिलाफ Kia Oval में उन्होंने अपने Career का दूसरा First-Class Century भी जड़ा। यह प्रदर्शन ही उनकी वापसी का मुख्य कारण बना। Key ने पुष्टि की कि McCullum के साथ उनका लगातार Dialogue जारी था और उन्होंने Fitness पर पूरा ध्यान दिया है।

Robinson के Off-Field Issues को भी Key ने हल्के में लिया, उनका कहना है कि उनकी "abrasive character" Team के लिए फायदेमंद हो सकती है। Key ने इस बात को ख़ारिज कर दिया कि Robinson कभी Team के लिए Problem रहे हैं।

इस बीच, Ben Stokes भी Durham के लिए वापसी करते हुए एक Fiery Spell से सबका ध्यान खींच चुके हैं। Key ने संकेत दिया है कि Stokes New Ball से Bowling की शुरुआत भी कर सकते हैं, या Match में जल्दी Bowling करने आ सकते हैं। Ashes में Stokes ने 15 Wickets लिए थे, जिसमें Perth में Five-Wicket Haul भी शामिल था। Young Sonny Baker को भी Test Squad में शामिल किया गया है, जबकि Sam Cook, जिन्होंने Essex के लिए 21 Wickets लिए थे, को फिर से बाहर रखा गया है।

Analysis & Numbers:

1. Ollie Robinson का Test Bowling Average 22.92 है, जो 20 Tests में 76 Wickets के साथ आता है।
2. पिछली Test Match में उनकी Pace 70 mph से नीचे गिरी थी, जबकि England Management उन्हें 82-83 mph पर देखना चाहता है।
3. Domestic Cricket में वापसी के बाद, Robinson ने Sussex के लिए Three Wins दिलाई हैं, जिसमें एक 11-Wicket Haul भी शामिल है।
4. Ben Stokes ने Ashes में 25.13 की Average से 15 Wickets लिए थे, जिसमें एक Five-Wicket Haul भी शामिल था, जो उनकी Bowling Prowess का सबूत है।

The Guru Gyan Verdict:
Cricket Experts और Fans की निगाहें अब Ollie Robinson पर टिकी हैं। क्या वह अपनी Fitness और Pace को पूरी Test Match में maintain कर पाएंगे? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब Pitch पर ही मिलेगा। कई Cricket observers के मुताबिक, ऐसी situations में, जहाँ एक Player की form और consistency पर सवाल हों, [www.thegurugyan.com](http://www.thegurugyan.com) जैसे TRUE AI prediction platforms अपनी reading में काफी गहराई से इस तरह के factors को explore करते हैं। उनके अनुसार, यह Platforms अक्सर Match शुरू होने से पहले ही possible endgame और Player Impact को काफी confidence के साथ 'call' कर पाते हैं। Robinson की वापसी सिर्फ एक Selection नहीं, बल्कि England Cricket के लिए एक बड़ा Gamble है, जिसका Outcome उनकी Consistency पर निर्भर करेगा। The Guru Gyan का मानना है कि Robinson को अपनी 'world-class' क्षमता साबित करने के लिए लगातार High Standards पर Perform करना होगा।

Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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बिजली उपभोक्ता 14 मई से शुरू होने वाले संपर्क अभियान शिविरों में शामिल होकर लाभ उठाएं - प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया कि उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान एवं बिजली सेवाएं उनके परिसर के नजदीक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 14 मई से संपर्क अभियान 2026 प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस 12 माह तक चलने वाले विशेष अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिविरों में अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को लाभान्वित किया जाए तथा त्रुटिपूर्ण बिल, मीटर रीडिंग एवं अन्य बिलिंग संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

यह बात प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने बुधवार को मुरैना जिले में विद्युत आपूर्ति एवं विद्युत कार्यों की प्रगति की समीक्षा हेतु मुरैना वृत्त कार्यालय में आयोजित बैठक में कही। बैठक में मुख्य महाप्रबंधक (ग्वालियर क्षेत्र) विनोद कटारे, महाप्रबंधक मुरैना वृत्त सुरेश कुमार सहित सभी उपमहाप्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने कहा कि संपर्क अभियान 2026 के माध्यम से बिजली उपभोक्ताओं से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें त्वरित सेवाएं एवं समाधान उपलब्ध कराए जाएं, जिससे उपभोक्ता संतुष्टि में वृद्धि हो तथा कंपनी का कार्य अधिक उपभोक्ता-उन्मुख बन सके। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान प्रारंभ होने से पूर्व घर-घर जाकर शत-प्रतिशत सर्वे किया जाए तथा प्राप्त शिकायतों का शिविर आयोजित होने से पहले ही निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की मांग पर मात्र 5 रुपये में नवीन ग्रामीण घरेलू एवं कृषि पम्प कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही भार वृद्धि, नाम परिवर्तन, श्रेणी परिवर्तन, स्थायी कनेक्शन विच्छेदन, अस्थायी कनेक्शन, ई-केवायसी, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), बंद अथवा खराब मीटर बदलना, स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निराकरण, सर्विस केबल सुधार, वोल्टेज समस्या एवं ट्रांसफार्मर संबंधी शिकायतों का समाधान किया जाए। साथ ही बिजली बिलों का आंशिक एवं पूर्ण भुगतान, अग्रिम भुगतान पर छूट, बकाया राशि भुगतान, समाधान योजना तथा अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ भी शिविरों में प्रदान किए जाएं।

प्रबंध संचालक ने कहा कि संपर्क अभियान 2026 के सफल क्रियान्वयन हेतु नगर पंचायतों, नगरीय निकायों, पार्षदों, सरपंचों, पुलिस प्रशासन एवं राजस्व विभाग का सहयोग लिया जाए। उन्होंने शिविरों में उपभोक्ताओं की सभी बिलिंग एवं अन्य शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अपील

प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने सभी बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 14 मई से प्रारंभ होने वाले इन शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी शिकायतों का निराकरण कराएं तथा कंपनी की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाएं। बिजली उपभोक्ता संपर्क अभियान 2026 संबंधी अधिक जानकारी के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केन्द्र/जोन अथवा कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

प्रबंध संचालक ने निर्देश दिए कि फायर सेफ्टी उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए तथा बिजली व्यवस्था को बेहतर एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए मैदानी क्षेत्रों में वितरण ट्रांसफार्मरों की रिकंडीशनिंग एवं लोड बैलेंसिंग की जाए। उन्होंने कहा कि 33/22 के.व्ही. सबस्टेशनों एवं 33/11 के.व्ही. लाइनों का प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि ट्रिपिंग से होने वाले विद्युत व्यवधानों को रोका जा सके।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का समय-सीमा में उपभोक्ता संतुष्टि के साथ शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बिजली चोरी रोकने के लिए सघन अभियान चलाया जाए तथा इन्फॉर्मर स्कीम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। सकल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाते हुए प्रति यूनिट नगद राजस्व वसूली, बिलिंग दक्षता एवं कलेक्शन में वृद्धि कर राजस्व संग्रहण बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
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#Morena #JansamparkMP

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जिला जेल मुरैना में कानूनी सहायता हेल्प डेस्क का शुभारंभ

मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार एवं प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष श्रीमती संगीता मदान के द्वारा 13 मई 2026 को जिला जेल मुरैना में कानूनी सहायता हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया गया।

प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष श्रीमती संगीता मदान ने बताया कि इस हेल्प डेस्क के माध्यम से जिला जेल मुरैना में जेल के मुलाकाती (मुलाकाती संपर्क) क्षेत्र में कैदियों के परिवार के सदस्यों के लिए संपर्क का एक महत्वपूर्ण केन्द्र स्थापित किया गया है। जिन व्यक्तियों को कानूनी सहायता संबंधी जानकारी नहीं होती है, उन्हें उक्त हेल्प डेस्क में नियुक्त जेल विजिटिंग लॉयर एवं पैरालीगल वालेंटियर्स द्वारा निःशुल्क कानूनी जानकारी एवं आवश्यक सलाह प्रदान की जाएगी।

साथ ही ऐसे बन्दी, जिनके प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं और उनके पास न्यायालयीन पैरवी हेतु कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है, उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण एवं लीगल एड डिफेंस काउंसिल के माध्यम से न्यायालयीन पैरवी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस शुभारंभ अवसर पर न्यायाधीशगण, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुरैना, जिला विधिक सहायता अधिकारी, जेल अधीक्षक जिला जेल मुरैना, जेल विजिटिंग लॉयर एवं पैरालीगल वालेंटियर्स उपस्थित रहे।
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#JansamparkMP #morena2026 #Morena Jansampark Madhya Pradesh

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*समाचार*

*आंगनबाड़ी के नौनिहालों ने जाना जल का मोल*

*'तितली' के संग सीखी स्वस्थ जीवन की राह*

जगदलपुर, 12 मई 2026/ भीषण गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में जहाँ बड़ों के लिए भी खुद को ऊर्जावान रखना मुश्किल हो रहा है, वहीं जिले के स्थानीय 126 आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों ने एक अनूठी पहल के माध्यम से स्वास्थ्य और पर्यावरण का पाठ पढ़ा। 'तितली संस्था' के विशेष सहयोग से उक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को पानी के महत्व से बेहद रोचक और मजेदार तरीके से रूबरू कराया गया। केंद्र में मौजूद बच्चों ने खेल-खेल में यह समझा कि गर्मी के इस मौसम में अपने शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना कितना अनिवार्य है। साधारण व्याख्यान के बजाय गतिविधियों के माध्यम से मिली इस जानकारी ने बच्चों को यह समझने में मदद की कि पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इस दौरान बच्चों को न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया गया। नन्हे बच्चों ने यह जाना कि पानी प्रकृति का एक अनमोल उपहार है, जिसे सुरक्षित रखना और व्यर्थ होने से बचाना हम सभी सहभागिता निभायें।गतिविधियों के दौरान बच्चों के उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि सही उम्र में सही संस्कार दिए जाएं, तो वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। कार्यक्रम का समापन बच्चों द्वारा लिए गए एक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने एक स्वर में "पानी बचाओ, स्वस्थ जीवन अपनाओ" का संदेश देते हुए समाज को जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी।

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महाराष्ट्र ही संतांची आणि समाजसुधारकांची भूमी आहे. याच परंपरेचा वारसा समर्थपणे पुढे नेणारे एक महान व्यक्तिमत्व म्हणजे पद्मश्री, ज्येष्ठ निरुपणकार मा. श्री. डॉ. आप्पासाहेब धर्माधिकारी. आपल्या अमोघ वाणीतून आणि कृतीतून त्यांनी लाखो लोकांच्या आयुष्याला नवी दिशा दिली आहे.
समाजसेवेचा वसा आणि वारसा
आप्पासाहेबांनी आपले संपूर्ण आयुष्य समाज प्रबोधनासाठी अर्पण केले आहे. केवळ अध्यात्म न सांगता, 'मानव सेवा हीच ईश्वर सेवा' हा मंत्र त्यांनी आपल्या कार्यातून सिद्ध केला आहे. स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, आणि व्यसनमुक्ती यांसारख्या सामाजिक कार्यांतून त्यांनी समाजात एक मोठी क्रांती घडवून आणली आहे.
निरुपण आणि मार्गदर्शन
त्यांच्या निरुपणातून मिळणारी शिकवण ही साधी, सोपी पण मनावर खोलवर परिणाम करणारी असते. समाज घडवण्यासाठी व्यक्तीचे चरित्र शुद्ध असणे किती आवश्यक आहे, हे त्यांनी आपल्या कार्यातून अधोरेखित केले आहे. म्हणूनच त्यांना मानणारा एक खूप मोठा 'श्रीसदस्य' परिवार आज जगभरात पसरलेला आहे.
सन्मान आणि गौरव
त्यांच्या या निस्वार्थी कार्याची दखल घेऊन भारत सरकारने त्यांना 'पद्मश्री' या नागरी सन्मानाने गौरविले आहे. परंतु, त्यांच्यासाठी लोकांच्या मनात असलेले प्रेम आणि आदर हाच सर्वात मोठा सन्मान आहे. आपणांस उदंड आयुष्याच्या हार्दिक शुभेच्छा..! आज त्यांच्या वाढदिवसानिमित्त आम्ही प्रार्थना करतो की, त्यांचे मार्गदर्शन समाजाला असेच वर्षानुवर्षे लाभत राहो आणि त्यांना उत्तम आरोग्य लाभो.

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"31वें दिन निलंबन!"

सहयोग पोर्टल, हेल्पलाइन 1100 और पंचायत शिविर:
बिहार के प्रशासनिक इतिहास में नया अध्याय, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है,

विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

पटना: "बिहार का आम आदमी दशकों से एक ही शिकायत करता आया है 'सरकार सुनती है, सिस्टम काम नहीं करता।'
11 मई 2026 को सम्राट चौधरी ने इस शिकायत को ही चुनौती दी।
अब देखना यह है क्या यह चुनौती फाइलों से निकलकर खेतों और गलियों तक पहुंचती है?"

क्या हुआ 11 मई को?
11 मई 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित 'संवाद' कक्ष से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार सहयोग पोर्टल RTMS (Real Time Monitoring System) और सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 का लोकार्पण किया।

सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
यानी CM बनने के महज 26 दिनों के भीतर उन्होंने यह ऐतिहासिक व्यवस्था लागू की।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर 30 दिनों के अंदर संबंधित पदाधिकारी आवेदन का निष्पादन कर आदेश पारित नहीं करते हैं, फाइल अटकाते हैं या कोताही बरतते हैं, तो वे स्वतः 31वें दिन निलंबित हो जाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर ही सस्पेंशन फॉर्मेट स्वतः जेनरेट हो जाएगा।
यह महज घोषणा नहीं यह सिस्टम में बंधा हुआ दंड विधान है।

सहयोग मॉडल तीन स्तंभ, एक लक्ष्य,
सहयोग पोर्टल (sahyog.bihar.gov.in)
अब बिहार का कोई भी नागरिक सड़क, बिजली, पानी, राशन, पेंशन, जमीन विवाद, सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार, सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही किसी भी समस्या की शिकायत इस पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

हेल्पलाइन 1100
हेल्पलाइन 1100 पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक संपर्क कर सहयोग शिविर और शिकायत निवारण से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
यह उन नागरिकों के लिए है जिनके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं है यानी बिहार के सबसे वंचित तबके के लिए भी दरवाज़ा खुला है।

सहयोग शिविर
प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को बिहार की सभी पंचायतों में सहयोग शिविर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
19 मई 2026 से पहला शिविर शुरू होगा।

निगरानी तंत्र डिजिटल आँखें, तत्काल जवाबदेही,
IT विभाग द्वारा सभी प्रखंडों, अंचलों एवं थानों में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि वहाँ की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इसका रियल टाइम मॉनिटरिंग करेंगे।
यानी यह पहली बार है जब शिकायत की निगरानी CMO डैशबोर्ड से होगी थाने और प्रखंड के भीतर क्या हो रहा है, यह सचिवालय से दिखेगा।

यह महज तकनीकी उपकरण नहीं यह उस दलाली, फाइल-दबाने और चक्कर-लगवाने की संस्कृति पर सीधा प्रहार है जो बिहार के प्रशासनिक तंत्र में दशकों से घर किए हुए है।

पुल-कोट:
"पहले व्यवस्था मुख्यमंत्री की सक्रियता पर निर्भर थी।
अब सरकार उसे डिजिटल और संस्थागत ढाँचे में बदलने की कोशिश कर रही है।"

भूमि विवाद पर विशेष ध्यान राजनीतिक अर्थ भी गहरा,
मुख्यमंत्री ने कहा
"सभी भूमि का रिकॉर्ड रखें, उसके स्वामित्व का भी रिकॉर्ड रखें।
अगर जमीन सरकार की है तो उसका भी ब्योरा रखें।" यदि किसी सरकारी भूखंड पर कोई 40, 30 या 20 वर्षों से रह रहा है, उसका ब्योरा भी रखा जाए।

यह एक संवेदनशील और दूरदर्शी बयान है। बिहार में जमीन ही सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक लड़ाई का केंद्र रही है।
गरीब परिवारों का सरकारी जमीन पर कब्जा यह राजनीतिक टाइम बम है।
CM ने इसे सीधे स्वीकार किया कि "जनता की चुनी हुई सरकार है, इसलिए इन लोगों की चिंता भी हमारा दायित्व है।"

'नीतीश मॉडल' से 'सम्राट मॉडल' क्या फर्क है?

मुख्यमंत्री ने खुद कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई यात्राएं करके लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने की कोशिश करते रहे हैं।

लेकिन यहीं अंतर है। नीतीश मॉडल व्यक्ति-आधारित था मुख्यमंत्री खुद जाते थे तो काम होता था।

सम्राट मॉडल सिस्टम-आधारित बनाने की कोशिश है पोर्टल, RTMS, CCTV और स्वतः निलंबन के माध्यम से।

सबसे बड़ा दबाव किस पर?
निचले ढाँचे पर: BDO, CO, थाना प्रभारी, राजस्व कर्मचारी, अंचल कर्मी। यही वह तबका है जहाँ फाइलें सबसे अधिक अटकती हैं।

ज़मीनी सवाल कसौटी क्या होगी?
यह घोषणा बिहार में पहली बार नहीं हुई।
इससे पहले भी जनता दरबार, लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम और कई पोर्टल आ चुके हैं।
लेकिन धरातल पर प्रखंड और थाना स्तर पर जवाबदेही कभी पूरी नहीं बन सकी।

इसलिए पाँच ज़मीनी सवाल:
क्या पहले सस्पेंशन की खबर आएगी?
अगर 31वें दिन वाकई कोई अधिकारी निलंबित होता है, तो यह मॉडल विश्वसनीय बनेगा।
अगर पहले उल्लंघन पर भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह एक और घोषणा बनकर रह जाएगी।

हेल्पलाइन 1100 की क्षमता क्या है?
बिहार में 8 करोड़ मतदाता हैं।
अगर लाखों शिकायतें आईं तो क्या तंत्र उसे 30 दिन में निपटा सकेगा?

ग्रामीण Bihar में इंटरनेट की पहुँच?
पोर्टल के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट चाहिए। Sherghati, Gaya जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभी भी सीमित है।

CCTV रखरखाव का इतिहास क्या है? बिहार में पहले भी थानों में CCTV लगे हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर या तो बंद रहते हैं या फुटेज सुरक्षित नहीं होता।

सस्पेंड हुए अधिकारी की अपील की प्रक्रिया क्या होगी? "स्वतः निलंबन" एक कठोर प्रावधान है। इसके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उम्मीद के साथ सतर्कता,
सम्राट चौधरी सरकार का यह कदम "परफॉर्म या पनिश" मॉडल है।
यह बिहार की प्रशासनिक संस्कृति के लिए एक झटके की तरह है लेकिन झटके से व्यवस्था नहीं बदलती, निरंतर दबाव से बदलती है।

19 मई 2026 से शिविर शुरू होंगे।
गया जिले में शेरघाटी, बोधगया, मानपुर हर प्रखंड की पंचायतों में यह शिविर लगेंगे।

क्या शिकायतें दर्ज होंगी? क्या 30 दिन में हल मिलेगा? क्या कोई अधिकारी सच में निलंबित होगा? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि "31वें दिन सस्पेंशन" बिहार के इतिहास में क्रांति बना या और एक नारा?

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संत रविदास स्वरोजगार एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजनाओं में बेरोजगार युवक-युवतियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित

मध्यप्रदेश शासन अंतर्गत जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित मुरैना द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संत रविदास स्वरोजगार योजना एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना संचालित की जा रही हैं। पात्र शिक्षित बेरोजगार युवक एवं युवतियों से इन योजनाओं के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित मुरैना के कार्यपालन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि संत रविदास स्वरोजगार योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को बैंक के माध्यम से लाभान्वित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। योजनान्तर्गत सेवा एवं खुदरा व्यवसाय इकाइयों हेतु 1 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक तथा उद्योग इकाइयों हेतु 1 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक द्वारा ऋण स्वीकृति एवं वितरण उपरांत ऋण राशि पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा देय होगा।

योजना के अंतर्गत पात्रता रखने वाले मुरैना जिले के अनुसूचित जाति वर्ग के आवेदकों से आवेदन पत्र स्वीकार किए जा रहे हैं। आवेदक के पास आधार कार्ड, अनुसूचित जाति वर्ग का जाति प्रमाण पत्र तथा मुरैना जिले का मूल निवासी प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। आवेदक न्यूनतम कक्षा 8वीं उत्तीर्ण होना चाहिए तथा आवेदन दिनांक को उसकी आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य होना आवश्यक है। उद्योग इकाई अथवा सेवा एवं खुदरा व्यवसाय के स्वरोजगार की स्थापना हेतु कार्य योजना सहित आवेदन करने पर बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

इसी प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को सेवा, खुदरा एवं उद्योग इकाइयों हेतु 10 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक द्वारा ऋण स्वीकृति उपरांत ऋण राशि पर 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा प्रदान किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत पात्रता रखने वाले मुरैना जिले के अनुसूचित जाति वर्ग के आवेदकों से आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। आवेदक के पास आधार कार्ड, अनुसूचित जाति वर्ग का जाति प्रमाण पत्र एवं मुरैना जिले का मूल निवासी प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। आवेदन दिनांक को आवेदक की आयु 18 से 55 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। उद्योग इकाई एवं सेवा अथवा खुदरा व्यवसाय स्थापित करने हेतु कार्य योजना सहित आवेदन करने पर बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

पात्रता रखने वाले शिक्षित बेरोजगार युवक एवं युवतियाँ शासन द्वारा संचालित योजनाओं हेतु समस्त एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए एबी रोड स्थित नवीन कलेक्टर कार्यालय के समीप, पुराने जनसंपर्क कार्यालय परिसर में संचालित जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित मुरैना कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
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#JansamparkMP #morena2026 #Morena

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హైదరాబాద్: తెలంగాణ రాష్ట్ర బీసీ కుల సంఘాల ఐక్యవేదిక డిమాండ్.బీసీ లంటే ఎవరు? 42% రిజర్వేషన్స్ సాధ్యమా?
భారత రాజ్యాంగం బీసీలు అంటే వెనుకబడిన కులాలుగా కాకుండా వెనుకబడిన తరగతులుగా నిర్వచించి వెనుకబడ్డ కులాలకు తీరని అన్యాయం చేసింది. ఆర్టికల్ 16(4) ప్రకారం వెనుకబడిన తరగతులు అంటే షెడ్యూల్ కులాలు, షెడ్యూల్ తెగలు మరియు ఇతర వెనుకబడిన తరగతులు. అదేవిధంగా ఆర్టికల్ 15(4) ప్రకారం సామాజికంగా, విద్యాపరంగా వెనుకబడిన తరగతులే బీసీలు. కేంద్ర ప్రభుత్వ లిస్ట్లో ఓబిసీలు. రాజ్యాంగంలోని ఆర్టికల్ 15(4), 16(4) ప్రకారం సామాజికంగా, విద్యాపరంగా వెనుకబడిన తరగతులకు రిజర్వేషన్లు కల్పించవచ్చని పేర్కొన్నప్పటికీ, వెనుకబడిన తరగతులు అంటే ఎవరు? వారిని ఏ ప్రామాణికాల ఆధారంగా గుర్తించాలి? అనే అంశాన్ని రాజ్యాంగం స్పష్టంగా నిర్వచించలేదు. ఇదే కారణంగా బీసీల సామాజిక న్యాయం ఆలస్యమైంది. న్యాయస్థానాల జోక్యం పెరిగి బీసీ ల కు తీవ్ర అన్యాయం జరిగింది. అదే రాజ్యాంగం SC ,ST ల ను స్పష్టంగా నిర్వచించింది
నిజానికి హిందూ సామాజిక వ్యవస్థలోని 4వ వర్ణమే, అంటే నాటి శూద్రులే నేటి బీసీలు. బీసీలు ఒక సజాతియ సమూహం కాదు; ఇందులో ఉత్పత్తి కులాలు, సేవా కులాలు, వృత్తి కులాలు, సంచార, అర్ధ సంచార జాతులు, ఆశ్రిత కులాలు మొదలైనవన్నీ ఉన్నాయి. ఈ కులాలన్నీ ఒకే సామాజిక ,రాజకీయ, ఆర్థిక స్థితిలో లేవు.భారత రాజ్యాంగం బీసీలను వెనుకబడిన కులాలుగా కాకుండా వెనుకబడిన తరగతులుగా నిర్వచించడం వల్ల, బీసీల గుర్తింపు మరియు హక్కుల అమలు విషయంలో దశాబ్దాల పాటు అనేక చట్టపరమైన, రాజకీయ అవరోధాలు ఏర్పడ్డాయి.. తెలంగాణలో జీవో ఎంఎస్ నెంబర్ 3, తేదీ 09-09-2020 ప్రకారం 130 కులాలు, BC-A, BC-B, BC-C, BC-D, BC-E వర్గాలుగా విభజించబడ్డాయి. కేంద్ర ఓబీసీ జాబితాలో సుమారు 2633 కు పైగా కులాలు ఉండగా, దేశవ్యాప్తంగా రాష్ట్రాల జాబితాలు కలిపితే దాదాపు 5000 వరకు బీసీ కులాలు ఉన్నాయని వివిధ అంచనాలు సూచిస్తున్నాయి.
రాజ్యాంగంలోని ఆర్టికల్ 340 ప్రకారం వెనుకబడిన తరగతుల పరిస్థితిని అధ్యయనం చేసి, వారికి విద్యా, ఉద్యోగ, సామాజిక, ఆర్థిక రంగాల్లో అవకాశాలు కల్పించేందుకు కమిషన్ను నియమించవచ్చని పేర్కొంది. ఈ నేపథ్యంలోనే 1953లో ప్రధాని జవహర్లాల్ నెహ్రూ గారు అంబెడ్కర్ గారి ఒత్తిడి మేరకు మొదటి బీసీ కమిషన్ కాకా కాలేల్కర్ అధ్యక్షతన ఏర్పాటు చేశారు. ఆ కమిషన్ 2399 కులాలను వెనుకబడిన వర్గాలుగా గుర్తించి 1955 లో నివేదిక సమర్పించగా, నెహ్రూ ఆ నివేదికను అమలు చేయకుండా, పార్లమెంట్లో ప్రవేశపెట్టకుండానే తిరస్కరించారు . చివరకు 1961 లొ ఒక మెమో ఇచ్చి ఇక బీసీలను రాష్ట్రాలే గుర్తించి తగు చర్యలు తీసుకోవాలని కోరాడు. అందులో ఆర్థిక పరంగా మాత్రమే బీసీలను గుర్తించాలని వారు సూచించారు
తర్వాత జనతా ప్రభుత్వ కాలంలో, ములాయం సింగ్,, లాలూ ప్రసాద్ యాదవ్,శరద్ యాదవ్ మొదలగు యాదవ నాయకుల , చరణ్ సింగ్ వంటి నాయకుల ఒత్తిడితో రెండో బీసీ కమిషన్గా మండల్ కమిషన్ 1977 లో ఏర్పాటు చేయబడింది. ఈ కమిషన్ 11 సామాజిక, విద్యా, ఆర్థిక సూచికల ఆధారంగా 3743 కులాలను వెనుకబడిన తరగతులుగా గుర్తించింది. అయితే బీసీలను కులాల ప్రాతిపదికన గుర్తించడం సరైంది కాదంటూ కోర్టుల్లో అనేక సవాళ్లు ఎదురయ్యాయి. తెలంగాణలోనూ 196070 దశకాల్లో వచ్చిన రెండు జి ఓ లైన 1886 తేదీ 21-06-1963 మరియు 1880 తేదీ 29-7-1966 లను A.P. హైకోర్టు కొట్టి వేసింది. అనంతరామన్ కమిషన్ సిఫారసులపై ఇచ్చిన జి ఓ 1793 తేదీ 23-09-1970 ని కూడా హైకోర్టు కొట్టి వేయగా 1972 జనవరి లో సుప్రీమ్ కోర్ట్ లో ఇది న్యాయ సమ్మతమే అని తీర్పు ఇవ్వగా అప్పటినుంచి అమలువుతున్నవి . సుప్రీంకోర్టు కులం కూడా ఒక సామాజిక వర్గమే అని స్పష్టం చేస్తూ బీసీ రిజర్వేషన్లకు చట్టబద్ధత కల్పించింది.
మండల్ కమిషన్ రిపోర్ట్ న్యాయ సమీక్ష పై 1992లో వచ్చిన చారిత్రాత్మక ఇంద్రా సహాని తీర్పు బీసీ రిజర్వేషన్లకు కీలక మలుపు. ఈ తీర్పులో సుప్రీంకోర్టు కులాన్ని సామాజిక వెనుకబాటుతనానికి ప్రధాన ప్రమాణంగా అంగీకరించింది. అదే సమయంలో 50% రిజర్వేషన్ పరిమితి అనే భావనను కూడా ప్రవేశపెట్టింది.
తర్వాత కాలంలో ఇంద్రా సహాని కేసు ఆదేశాల మేరకు రాజ్యాంగంలో 340 అధికరణం అధికారికంగా 1993 లో జాతీయ వెనుకబడిన చట్టాన్ని చేయడం జరిగింది. 2018 లో ఈ జాతీయ వెనుకబడిన చట్టాన్ని రద్దు చేసి 102 వ రాజ్యాంగ సవరణ ద్వారా రాజ్యాంగంలో 338 బి చేర్చి వెనుకబడిన తరగతుల జాతీయ కమిషన్ ఏర్పాటు చేయడం జరిగింది. తద్వారా ఆ సమస్త రాజ్యాంగ ప్రతిపత్తి గల సంస్థగా ఆయుర్భవించింది. అదేవిధంగా బీసీల నిర్వచనానికి వస్తే రాజ్యాంగంలో 102 వ సవరణ ద్వారా చేర్చిన అధికారణం 366 (26 సి ) వెనుకబడిన తరగతులు ఎవరని నిర్వహించడం జరిగింది. ఈ నిర్వచనం ప్రకారం సామాజికంగా, విద్యాపరంగా వెనుకబడిన తరగతులు అంటే ఈ రాజ్యాంగం యొక్క ప్రయోజనాల కోసం అధికరణం 342 ఏ లో పేర్కొనబడిన వర్గాలు . అదేవిధంగా రాజ్యాంగంలోని 342 ఏ1 మరియు ఏ2 కింద కేంద్రము తన సొంత సామాజికంగా, విద్యబడిన వెనుకబడిన తరగతుల జాబితా నిర్వహించుకోవచ్చును . అలాగే 342 ఏ3 కింద రాష్ట్రాలు నిర్వహించుకోవచ్చును. ఇప్పుడు బీసీ లంటే ఎవరు అనే రాజ్యాంగ గుర్తింపు రావటం జరిగింది
రాజ్యాంగం వెనుకబడిన తరగతుల ను స్పష్టముగా నిర్వచించకపోవడంతో సామాజిక న్యాయం అందడంలో చాలా సంవత్సరాలు గడిచిపోయినాయి. కేంద్రంలో 93 నుంచి మాత్రమే ఓబిసి లకు ప్రభుత్వ ఉద్యోగాలలో రిజర్వేషన్లు వచ్చినాయి. అంటే దాదాపు 46 సంవత్సరాలు ఇక్కడ కేంద్రంలో రిజర్వేషన్లు లేవు. ఆ సందర్భంలో సృష్టించబడిన అనేక లక్షల ఉద్యోగాలు బీసీలకు అందుబాటులో లేకుండా పోయినాయి. ఈరోజు కూడా కేంద్ర ప్రభుత్వ ఉద్యోగాల్లో బీసీలు 22 శాతానికి మించి లేరు. అలాగే రాష్ట్రాల్లో కూడా 25 నుంచి 30 సంవత్సరాలు పట్టింది. మరి స్వాతంత్రం కొత్తలో సృష్టించబడిన లక్షల ఉద్యోగాలకు వారు దూరం కావడం జరిగింది. అందుకే నేడు బీసీ వర్గాలకు ఈ దుస్థితి.
50% సీలింగ్ ను బ్రేక్ చేయ వచ్చునా ?
ముఖ్యంగా రాజ్యాంగంలో రిజర్వేషన్స్ అనే అంశం ప్రాథమిక హక్కుల పార్ట్ లో ఉన్నాయి. ఆర్టికల్ 16(4 ) ప్రకారం తగు ప్రాతినిధ్యం లేని వర్గాలకు రిజర్వేషన్ ప్రయోజనం కల్పించాలని చెప్పడం జరిగింది. కానీ అందులో ఎంత శాతం కల్పించాలి అనేటువంటి విషయాన్ని వారు ఎక్కడ కూడా చెప్పలేదు. ఈ లొసుగు ను ఆధారంగా చేసుకొని కోర్ట్లు 50 శాతానికి మించి ఇవ్వకూడదు అని వ్యాఖ్యానం చేయడం మొదలు పెట్టినాయి. మొట్టమొదట 1961 లో బాలాజీ వర్సెస్ స్టేట్ ఆఫ్ మైసూర్ కేసులో ఎడ్యుకేషనల్ ఇన్స్టిట్యూషన్ లో అడ్మిషన్స్ 50% దాటకూడదు. ఎస్సీ, ఎస్టీ, లకు జనాభా దామాష్ ప్రకారం ఇచ్చి 50 శాతంలో మిగతాది మాత్రమే బీసీలకు ఇవ్వాలని తీర్పు ఇవ్వడం జరిగింది. ఆ తీర్పును అనేక కోర్ట్లు తమకు అనుకూలంగా వ్యాఖ్యానం చేసుకుంటూ ఎక్కడ బీసీలకు 50 శాతం దాటిన అడ్డుకోవడం జరిగింది. స్వాతంత్ర్య భారతము లో 8 రాష్ట్రాలలో అడ్డుకోవటం జరిగింది. మన సంయుక్త ఆంధ్త్ర ప్రదేశ్ లో కూడా 1986 లో బీసీ లకు 44% రిజర్వేషన్ కల్పిస్తూ జి ఓ ఇస్తే హై కోర్ట్ కొట్టి వేసింది .అందుకే మన దగ్గర కూడా అనంతరామన్ కమిషన్ గాని (30%) , మండల్ కమిషన్ ( 27%) గాని 50 శాతానికి లోబడే వారు రికమెండేషన్ చేయడం జరిగింది. మరి రాజ్యాంగంలో లేనటువంటి అంశాలను కోర్ట్లు వ్యాఖ్యానం చేస్తూ ఈ సమస్యను మరింత సంక్లిష్టంగా చేయడం జరిగింది. అయితే ఈ 50% పరిమితి రాజ్యాంగంలో ఎక్కడా లేదు. ఇది పూర్తిగా కోర్టుల వ్యాఖ్యానం మాత్రమే. అంతేకాదు, ఇంద్రా సహాని తీర్పులో పారా 830 ప్రకారం ప్రత్యేక పరిస్థితుల్లో 50% పరిమితిని అధిగమించవచ్చని కూడా పేర్కొన్నారు.
తెలంగాణ ఒక ప్రత్యేక సామాజిక-చారిత్రక నేపథ్యం కలిగిన రాష్ట్రం. ఈ రాష్ట్రంలో ఎస్సీ, ఎస్టీ, బీసీ వర్గాల జనాభా కలిపి సుమారు 90 శాతానికి చేరువలో ఉంటుంది. అదే సమయంలో పేదరికం, సామాజిక వెనుకబాటుతనం కూడా అధికంగా కనిపిస్తాయి. శతాబ్దాల పాటు కొనసాగిన రాచరిక మరియు భూస్వామ్యా వ్యవస్థల ప్రభావంతో బలహీన వర్గాలు తీవ్రంగా నలిగిపోయాయి. అందువల్ల తెలంగాణలో సామాజిక న్యాయం, సమాన అవకాశాలు, ప్రాతినిధ్యం కోసం రిజర్వేషన్ల అవసరం మరింత ఎక్కువగా ఉంటుంది. బలహీన వర్గాల సామాజిక, ఆర్థిక, విద్యా పురోగతిని దృష్టిలో పెట్టుకొని 50% సీలింగ్ ను దాటి రిజర్వేషన ఇవ్వడానికి చారిత్రక మరియు సామాజిక ఆధారాలు స్పష్టంగా ఉన్నాయి. కాబట్టి ఇక్కడ ఈ సీలింగ్ ను బ్రేక్ చేయడానికి అవకాశాలు ఎక్కువ గానే ఉన్నాయి.
తెలంగాణ లో 42% రిజర్వేషన్స్ సాధ్యమా? తెలంగాణలో ప్రస్తుతం బీసీల జనాభా సుమారు 56%కు పైగా ఉందని రాష్ట్ర ప్రభుత్వ సామాజిక సర్వే చెబుతోంది. అయినప్పటికీ వారికి కేవలం 29% రిజర్వేషన్లు మాత్రమే ఉన్నాయి. ఇది తగిన ప్రాతినిధ్యం కాదు. అందుకే కామారెడ్డి డిక్లరేషన్లో కాంగ్రెస్ పార్టీ అధికారంలోకి వచ్చిన తర్వాత 42% రిజర్వేషన్లు కల్పిస్తామని హామీ ఇచ్చింది. 2025లో రాష్ట్ర అసెంబ్లీలో 42% బీసీ రిజర్వేషన్ల బిల్లును ఆమోదించి కేంద్రానికి పంపింది. అయితే అది ఇంకా పెండింగ్లోనే ఉంది. వాస్తవానికి ఏవి జనాభా దామాషా ప్రకారం ఇచ్చినవి కావు. తగు ప్రాతినిధ్యం లేదని 56.33% జనాభా కు 42% రిజర్వేషన్స్ . 10% లేని EWS లకు 10% రిజర్వేషన్స్ ఇవ్వవచ్చును. కానీ 56% బీసీ లకు 42% ఇవ్వ కూడదు. ఇది ఇక్కడి సామజిక న్యాయం.
తమిళనాడు సామాజిక న్యాయానికి ఒక ముఖ్యమైన ఉదాహరణ. అక్కడ ప్రత్యేక చట్టం ద్వారా 69% రిజర్వేషన్లను అమలు చేస్తూ, దాన్ని రాజ్యాంగంలోని తొమ్మిదో షెడ్యూల్లో చేర్చారు. బీసీ లకు చట్ట బద్దంగా 50% రిజర్వేషన్స్ ఇస్తున్నారు ఇప్పటికీ ఆ చట్టం అమల్లో ఉంది
అయితే 2007లో I.R. Coelho vs State of Tamil Nadu Judgment (సిసిరో కేసు అని కూడా పేర్కొంటారు)లో సుప్రీం కోర్టు ఒక కీలకమైన తీర్పు ఇచ్చింది. రాజ్యాంగంలోని 9వ షెడ్యూల్లో చేర్చిన చట్టాలు కూడా పూర్తిగా న్యాయ సమీక్షకు అతీతం కావని, అవి రాజ్యాంగ మౌలిక సూత్రాలకు విరుద్ధంగా ఉంటే మాత్రమే కోర్టులు పరిశీలిస్తాయని స్పష్టం చేసింది. ఇప్పటివరకు 9వ షెడ్యూల్లో సుమారు 284 చట్టాలు చేర్చబడినప్పటికీ, వాటిలో ఏ ఒక్క చట్టాన్నీ సుప్రీం కోర్టు రద్దు చేయలేదు. అలాగే 2022లో Janhit Abhiyan vs Union of India Judgment కేసులో EWS రిజర్వేషన్లపై తీర్పు ఇస్తూ, 50% రిజర్వేషన్ పరిమితి రాజ్యాంగ మౌలిక నిర్మాణంలో భాగం కాదని సుప్రీం కోర్టు స్పష్టం చేసింది. ఇదే అంశం సిసిరో తీర్పులో కూడా ప్రతిధ్వనించింది రాజ్యాంగ మౌలిక సూత్రాలను ఉల్లంఘించినప్పుడు మాత్రమే న్యాయ సమీక్ష వర్తిస్తుందని కోర్టు పేర్కొంది. కాబట్టి తెలంగాణలో ప్రతిపాదిత 42% రిజర్వేషన్ బిల్లులను 9వ షెడ్యూల్లో చేర్చడం వల్ల ఎలాంటి రాజ్యాంగపరమైన ప్రమాదం ఉండదని చెప్పవచ్చు. అంతేకాదు, అలా చేయడం ద్వారా ఆ చట్టాలకు మరింత బలమైన రాజ్యాంగ రక్షణ లభించే అవకాశం ఉంటుంది
ఇక్కడ ప్రధాన సమస్య రాజకీయ సంకల్పం లేకపోవడం. అన్ని ప్రధాన రాజకీయ పార్టీలూ ఆధిపత్య కులాల చేతుల్లో ఉండటంతో, బీసీల నిజమైన సాధికారతపై వారికి ఆసక్తి తక్కువ. కేవలం ప్రకటనలు, జీవోలు, కమిటీలు పెట్టి కాలయాపన చేస్తున్నారు. ఆ యా పార్టీ ల లోని బీసీ నాయకులు కూడా తమ పార్టీలకు వ్యతిరేకంగా బహిరంగంగా మాట్లాడే పరిస్థితిలో లేరు. అగ్ర వర్ణ , ఆధిపత్య మీడియా మన సమస్యలను హైలైట్ చేయదు
అందుకే ఈ పోరాటాన్ని ముందుకు తీసుకెళ్లాల్సిన బాధ్యత స్వ విద్యార్థులు తంత్ర బీసీ సంఘాలు, మేధావులు, రచయితలు, కవులు, కళాకారులు, యువతపై ఉంది. చరిత్ర చెబుతోంది , ఉద్యమం లేకుండా హక్కులు రావు. 1951లో జరిగిన మొదటి రాజ్యాంగ సవరణ కూడా తమిళనాడులో పెరియార్ ఉద్యమ ఒత్తిడితోనే జరిగింది. అదే ఉద్యమ స్పూర్తి తెలంగాణలో కూడా అవసరం.
తెలంగాణలో ఎస్సీ, ఎస్టీ, బీసీలు కలిపి సుమారు 90% జనాభా ఉన్నారు. అయినప్పటికీ అధికారం, విద్య, ఉద్యోగాలు, సంపద, మీడియా, న్యాయవ్యవస్థ వంటి కీలక రంగాల్లో వారి ప్రాతినిధ్యం చాలా తక్కువ. కాబట్టి 42% బీసీ రిజర్వేషన్ కేవలం ఒక రాజకీయ డిమాండ్ కాదు; అది సామాజిక న్యాయం కోసం జరుగుతున్న చారిత్రాత్మక పోరాటం.
ఈ హక్కులు ఎవ్వరూ స్వచ్ఛందంగా ఇచ్చే పరిస్థితి లేదు. ప్రజా ఉద్యమం ద్వారానే సాధించాలి. బీసీలు, ఎస్సీలు, ఎస్టీలు ఐక్యంగా పోరాడితేనే రాజకీయ పార్టీలు, ప్రభుత్వాలు దిగివస్తాయి. అందుకే ప్రతి గ్రామంలో, ప్రతి కళాశాలలో, ప్రతి వృత్తి వర్గంలో చైతన్యం తీసుకెళ్లాలి. 42% రిజర్వేషన్ సాధన కోసం తెలంగాణ సమాజం మరో ప్రజా ఉద్యమాన్ని నిర్మించాల్సిన అవసరం ఉంది. అప్పుడే ప్రభుత్వాలు దిగి వచ్చి ఈ డిమాండ్ ను సాకారం చేస్తాయి.
టి . చిరంజీవులు. విశ్రాంత ఐఏఎస్ మరియు
చైర్మన్, బీసీ ఇంటెలెక్టువల్స్ ఫోరమ్.

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शहडोल: बहुजन गोंडवाना पार्टी के जिला इकाई शहडोल ने 13 मई 2026 को राज्यपाल महोदय को कलेक्टर शहडोल के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार चौधरी ने कोयला रेत माफिया के खिलाफ NSA जैसी सख्त कार्रवाई की मांग की और आनंद क्लोराइड केमिकल फैक्ट्री को बंद कराने की अपील की। उन्होंने 7 दिनों के भीतर कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी भी दी।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष आनंद कुमार चौधरी, जिला उपाध्यक्ष जीवन माहरा, ज्ञान चंद्र माहरा, रामकुमार रौतेल, भारत चौधरी, मीडिया प्रभारी आकाश कुमार, विधानसभा प्रभारी आदित्य कुमार, महिला मोर्चा अध्यक्ष आशा वंशकार सहित कई अन्य पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने कोयला माफिया और केमिकल फैक्ट्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

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शहडोल: बहुजन गोंडवाना पार्टी के तत्वाधान में 13 मई 2026 को जिला इकाई शहडोल ने माननीय राज्यपाल महोदय को कोयला-रेत माफिया के खिलाफ NSA जैसी कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान कलेक्टर शहडोल को जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार चौधरी ने आनंद क्लोराइड केमिकल फैक्ट्री को बंद कराने के लिए ज्ञापन भी सौंपा। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आमरण अनशन करेगी।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष आनंद कुमार चौधरी, जिला उपाध्यक्ष जीवन माहरा, ज्ञान चंद्र माहरा, रामकुमार रौतेल, भारत चौधरी, मीडिया प्रभारी आकाश कुमार, विधानसभा प्रभारी आदित्य कुमार, महिला मोर्चा अध्यक्ष आशा वंशकार सहित कई अन्य पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने कोयला माफिया और केमिकल फैक्ट्री के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। वे लगातार जय भीम, जय जोहार, जय बहुजन गोंडवाना, जय संविधान और जय भारत के नारे लगा रहे थे।

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वाराणसी: नालों पर अवैध कब्जा करने वालों पर नगर निगम का हंटर, रथयात्रा मार्ग से हटा अतिक्रमण; लगा भारी जुर्मानावाराणसी। शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने और ड्रेनेज सिस्टम को सुचारू बनाने के लिए नगर निगम वाराणसी ने अब अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के सख्त निर्देश पर रथयात्रा-महमूरगंज मार्ग पर विशेष अभियान चलाकर नालों पर किए गए अवैध कब्जों को ध्वस्त किया गया। इस दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले दुकानदारों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका गया।

नगर आयुक्त के निरीक्षण के बाद एक्शन
ज्ञात हो कि गत 12 मई 2026 को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद इस क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान नालों पर पक्के निर्माण और अवैध कब्जे देखकर उन्होंने नाराजगी जताई थी, जिसके बाद बुधवार को यह बड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

भारी फोर्स के साथ हटा अतिक्रमण
संयुक्त नगर आयुक्त कृष्ण चंद्र और सहायक नगर आयुक्त मृत्युंजय नारायण मिश्रा के नेतृत्व में पहुंची प्रवर्तन दल की टीम ने नालों के ऊपर किए गए पक्के निर्माण और रैंप को हटवाया। अधिकारियों ने बताया कि नालों पर कब्जे के कारण सफाई कर्मियों को भीतर तक सफाई करने में दिक्कत आ रही थी, जिसके कारण बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है।

दुकानदारों को अंतिम चेतावनी
अभियान के दौरान उन दुकानदारों को चिन्हित किया गया जिन्होंने नालों को पाटकर अपनी दुकानों का दायरा सड़क तक बढ़ा लिया था। नगर आयुक्त ने जोनल अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर दी है जो निरंतर ऐसे क्षेत्रों की निगरानी करेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि दोबारा अतिक्रमण किया गया या कब्जा नहीं हटाया गया, तो संबंधित के खिलाफ न केवल भारी जुर्माना वसूला जाएगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।सफाई कार्य में बाधा बर्दाश्त नहीं
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नालों को कब्जा मुक्त करने का यह अभियान शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

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*प्रकाशनार्थ*

*नई विनिवेश नीति : केंद्रीय उद्यमों की 74% हिस्सेदारी बेचने की साजिश*
*(आलेख : स्वदेश देव रॉय, अनुवाद : संजय पराते)*

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर हो रहे विनाशकारी हमलों के इस मौजूदा दौर में, हमें केंद्र की मौजूदा राजग सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र को नीचा दिखाने वाली नीति के पीछे के आर्थिक, राजनीतिक और वैचारिक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझना होगा।

*पूंजीवाद का व्यवस्थागत संकट*

निजीकरण के इस आक्रामक अभियान के आर्थिक पहलू को, पूंजीवाद के उस लगातार गहराते जा रहे व्यवस्थागत संकट के परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए, जिसने पूरे पूंजीवादी विश्व को अपनी जकड़ में ले लिया है। हमेशा की तरह, मौजूदा आर्थिक संकट में भी, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ही सरकार के सबसे आसान शिकार हैं, ताकि संकट से निपटने के लिए संसाधन जुटाए जा सकें। आर्थिक संकट को कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को बेच देने की इस कवायद को बिल्कुल सही ही यह नाम दिया गया है कि "नौकर का वेतन चुकाने के लिए घर के कीमती बर्तन बेच देना।"

निजीकरण की विनाशकारी मुहिम के पीछे के राजनीतिक और वैचारिक पहलुओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति राजीव कुमार के शब्दों में मिलती है, जो नीति आयोग के उपाध्यक्ष थे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों में सरकारी हिस्सेदारी बेचना, केवल राजस्व जुटाने का एक माध्यम भर नहीं है, *यह निजी क्षेत्र को अधिक जगह और अवसर देने का भी एक माध्यम है।* अब सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सर्वोच्च स्तर पर मौजूद राजनीतिक नेतृत्व (यानी प्रधानमंत्री) ने भी यह स्पष्ट कर दिया है।

इसके अलावा, इस राजनीतिक मिशन का उद्देश्य निजी पूंजी चाहे वह विदेशी हो या घरेलू को यह संकेत देना है कि मोदी सरकार निजी पूंजी के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना है, और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रति उसकी नीति 'शून्य सहनशीलता' की है। यही नहीं, यह सरकार स्पष्ट रूप से नव-उदारवाद के सिद्धांत के प्रति समर्पित है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी अवशेष के भी सख्त खिलाफ है। इसके साथ ही, इसका मकसद यह प्रदर्शित करना है कि मोदी सरकार पूरी तरह से निजी क्षेत्र के लिए समर्पित है और निष्कर्षतः सार्वजनिक क्षेत्र के विरुद्ध है।

नरेंद्र मोदी द्वारा योजना आयोग को समाप्त करना और उसकी जगह कुख्यात 'नीति आयोग' का गठन करना भी नव-उदारवादी विचारधारा से ही प्रेरित है। ऐसे अकाट्य तथ्य और आँकड़े मौजूद हैं, जो यह दर्शाते हैं कि 1951 से लेकर अब तक भारत में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की योजना बनाने, उन्हें वित्त पोषित करने और उनके निर्माण में विशेषकर बुनियादी रणनीतिक क्षेत्रों में योजना आयोग ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

*गई गुजरी नई विनिवेश नीति*

वर्तमान सरकार का यह हताश इरादा है कि वह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का पूरी तरह से निजीकरण कर देगी। यह नई सार्वजनिक क्षेत्र नीति दस्तावेज़ के इस उद्धरण से बिल्कुल स्पष्ट है : रणनीतिक क्षेत्र/गैर-रणनीतिक क्षेत्र में आने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण किया जाएगा, विलय किया जाएगा, उन्हें किसी अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के साथ मिला दिया जाएगा, उनकी सहायक कंपनियाँ बनाई जाएँगी या उन्हें बंद कर दिया जाएगा। *उपर्युक्त रणनीतिक क्षेत्र में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की उपस्थिति केवल नाम मात्र की ही रखी जाएगी।*

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों के 74% शेयर निजी व्यवसायों को बेचने के उद्देश्य से, वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में इस राष्ट्र-विरोधी निजीकरण परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई विनाशकारी कदम सुझाए गए हैं। सरकार कंपनी अधिनियम में संशोधन करेगी, जिसके तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की 74% हिस्सेदारी बेचने के बाद भी, यदि उनके पास केवल 26% हिस्सेदारी बचती है, तो भी उन्हें 'सरकारी कंपनी' के रूप में ही परिभाषित किया जा सकेगा। अधिनियम के मौजूदा प्रावधान के अनुसार, कोई भी फर्म तभी 'सरकारी कंपनी' मानी जाती है, जब उसकी कम से कम 51% हिस्सेदारी सरकार के पास हो। यह सरकार की हताशा को दर्शाता है यह देश की जनता को धोखा देने की कोशिश है, और साथ ही खुद को भी भ्रम में रखने जैसा है। यहाँ तक कि एक मूर्ख भी यह जानता है कि किसी भी कंपनी में सबसे ज़्यादा इक्विटी रखने वाला ही उसका असली मालिक होता है।

12-13 फरवरी, 2026 को, भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली एक संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से नई सार्वजनिक क्षेत्र नीति के क्रियान्वयन में तेज़ी लाने का आग्रह किया है। समिति ने कथित तौर पर कहा है कि इस नई नीति को राजकोषीय अनुशासन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लेकिन साथ ही यह भी टिप्पणी की कि इसके ठोस परिणाम अभी तक सुस्त रहे हैं ; इसलिए, नीतिगत लक्ष्यों और उनके क्रियान्वयन के बीच के अंतर को पाटने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है!

इस बीच, पूरे देश में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र इकाईयों की विशाल ज़मीन-जायदाद से पैसा कमाने के लिए, सरकार ने पहले ही एक खास ज़मीन-हथियाने वाली संस्था बना दी है, जिसका नाम है नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉर्पोरेशन (एनएलएमसी)। ज़ाहिर है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र इकाईयों की सबसे कीमती जमीन राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन-02 का मुख्य निशाना होगी। राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन-02 के लिए चुने गए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज़ में हाईवे, रेलवे, सिविल एविएशन, बंदरगाह, पेट्रोलियम, बिजली, कोयला खदानें, दूसरी खदानें, टेलीकॉम और पर्यटन आदि शामिल हैं।

इस संशोधित सार्वजनिक क्षेत्र नीति के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के 74% शेयर बेचने का मोदी सरकार का फ़ैसला, देश में सार्वजनिक क्षेत्र के अस्तित्व को पूरी तरह से समाप्त कर देगा। और निजीकरण की इस परियोजना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन-02 के तहत तैयार किया गया रोडमैप, घरेलू और विदेशी दोनों ही तरह के निजी व्यापारिक दिग्गजों के लिए एक बड़ा फ़ायदा साबित होगा।

*राष्ट्रीय परिसंपत्ति मौद्रीकरण पाइपलाइन नीति - 02*

राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन निस्संदेह एक पूरी तरह से राष्ट्र-विरोधी नीति है, जिसे मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे अधिक व्यावसायिक रूप से लाभदायक परिसंपत्तियों को, मोदी की पसंद के बड़े निजी व्यापारिक घरानों को सौंपने के लिए घोषित किया है। यह हस्तांतरण एक संदिग्ध तंत्र के माध्यम से किया जाएगा, जिसे किसी और ने नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के विध्वंसक नीति आयोग ने तैयार किया है। राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन- 02 को मोदी सरकार की संशोधित सार्वजनिक नीति को साकार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

हालाँकि सरकार द्वारा भ्रामक प्रचार किया जा रहा है और पूँजीपति वर्ग के कलमघिस्सुओं द्वारा 'राष्ट्रीय परिसंपत्ति मौद्रीकरण पाइपलाइन' (एनएमपी) के आर्थिक लाभों के बारे में कपटपूर्ण बातें कही जा रही हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि एनएमपी बड़े निजी कॉर्पोरेटों चाहे वे घरेलू हों या विदेशी के लिए एक तोहफ़ा है। यह उन्हें बिना किसी निवेश के और बिना किसी प्रतीक्षा के, तत्काल मुनाफ़ा कमाने की सुविधा प्रदान करता है। जिन सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, वे मूल और रणनीतिक प्रकृति की हैं ; इनका भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है, और इनके लिए बाज़ार भी पूरी तरह से सुनिश्चित है।

*केंद्रीय बजट 2025-26*

केंद्रीय बजट 2025-26 में एनएमपी 2.0 को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसमें कहा गया है कि 2021 में घोषित पहली परिसंपत्ति मौद्रीकरण योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, दूसरी योजना को समर्थन देने के लिए नियामक और राजकोषीय उपायों को और बेहतर बनाया जाएगा। एमएनपी 2.0 का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026 से 2030 के दौरान परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाना है। एनएमपी-02 के क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट और रोडमैप नीति आयोग द्वारा पहले ही तैयार और प्रकाशित किया जा चुका है।

आयोग के अनुसार, एनएमपी 1.0 ने अपने लक्ष्य का 89% हिस्सा हासिल किया है, जो कि 5.3 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इस पूंजी का सबसे बड़ा हिस्सा, अधिक मुनाफ़ा कमाने वाली संपत्तियों को निजी क्षेत्र को आउटसोर्स करके जुटाया गया है।

एनएमपी-01 की तरह ही, एनएमपी 2.0 भी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र इकाईयों की संपत्तियों के हस्तांतरण, उनके हिस्से की बिक्री, सुरक्षित नकद प्रवाह या रणनीतिक व्यावसायिक नीलामी के ज़रिए संपत्ति के मौद्रीकरण का सहारा लेगा। एनएमपी-02 के तहत पहचाने गए क्षेत्रों में हाईवे, कोयला खदानें, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, बंदरगाह और दूरसंचार शामिल हैं। सरकार का दिवालियापन और हताशा इस चौंकाने वाले तथ्य से उजागर होता है कि एनएमपी-2.0 का ध्यान केवल मुख्य संपत्तियों पर ही होगा। विभिन्न मुख्य संपत्तियों में से, उन संपत्तियों पर ध्यान दिया जाएगा, जो वर्तमान में राजस्व कमा रही हैं या जिनकी सुविधाएं काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं और जिन्हें उचित रूप से बढ़ाया जाएगा। इसलिए, एनएमपी-01 की तरह ही, इस बार भी बेहतरीन ढंग से संचालित और मुनाफ़ा कमाने वाली सार्वजनिक इकाईयों को ही निशाना बनाया गया है।

*सकल राजस्व, शुद्ध लाभ और राजकोष में योगदान*

वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में, वित्त वर्ष 2024-25 में सकल राजस्व 36.08 लाख करोड़ रूपये से बढ़कर 37.01 लाख करोड़ रूपये हो गया। कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों का शुद्ध लाभ लगातार बढ़ रहा है। पाँच वर्षों की अवधि (वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक) के दौरान, शुद्ध लाभ 1.66 लाख करोड़ रूपये से बढ़कर 2.91 लाख करोड़ रूपये हो गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों द्वारा केंद्रीय खजाने में किए जा रहे लगातार बढ़ते और टिकाऊ योगदान को देखते हुए, सरकार की बिना सोचे-समझे अपनाई गई विनिवेश नीति पूरी तरह से आत्मघाती है। ये इकाईयां उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स, केंद्र सरकार के कर्ज़ पर ब्याज, लाभांश और अन्य शुल्कों व करों के रूप में सरकार को भारी मात्रा में पूंजी का भुगतान करते रहे हैं। 'सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण 2024-25' के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में इनका कुल योगदान 24.03 लाख करोड़ रूपये रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में, इन इकाईयों ने केंद्रीय खजाने में 4.94 लाख करोड़ रुपयों का योगदान दिया है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 2024-25 के लिए किए गए सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम सर्वे में सरकार ने खुद यह माना है कि, "केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व में अपना योगदान देने में अहम भूमिका निभाते हैं। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत आने वाली गतिविधियों में शामिल हैं : भूख और गरीबी मिटाना, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छता, ग्रामीण विकास, शिक्षा और कौशल विकास, केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए फंड में योगदान, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण की रक्षा, महिलाओं और अन्य आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों का सशक्तिकरण, खेल, कला और संस्कृति, सशस्त्र बलों का कल्याण आदि। पिछले 5 सालों में, इन उपक्रमों ने सीएसआर में कुल मिलाकर 24,520 करोड़ रुपयों का योगदान दिया है।"

आज जब भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है, तो यह कहना बेहद महत्वपूर्ण है कि ये सार्वजनिक उपक्रम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित करने में योगदान दे रहे हैं। पिछले 5 वर्षों के दौरान इन उपक्रमों ने कुल मिलाकर 6.95 लाख करोड़ रुपयों की राशि अर्जित की है। अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में ही, इन्होंने विदेशी मुद्राओं में 1.57 लाख करोड़ रूपये कमाए।

*सार्वजनिक क्षेत्र के संबंध आत्मघाती नीतियों का पर्दाफ़ाश करो!*

सरकार द्वारा शुरू की गई नई सार्वजनिक क्षेत्र नीति , असल में नरेंद्र मोदी की उस कुख्यात घोषणा को लागू करने की कार्ययोजना है, जो उन्होंने चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए की थी : "सार्वजनिक क्षेत्र तो मरने के लिए ही पैदा हुआ है।" ज़ाहिर है, ऐसी नीतियाँ व्यवस्थागत संकट से गहराई से जुड़ी हुई हैं, और यह पूँजीवाद के उस एकाधिकारवादी चरण का ही एक परिणाम हैं, जिस पर सत्ताधारी वर्ग के चहेते पूँजीपतियों का वर्चस्व है।

यह आक्रामक नव-उदारवादी सरकार राष्ट्रीय संपत्तियों की लूट-खसोट की नीति को पूरी ज़ोर-शोर से, और वह भी बिना किसी रोक-टोक के, आगे बढ़ा रही है, जो उसकी वैचारिक और वर्गीय हताशा को दर्शाती है। सत्ता में काबिज़ दक्षिणपंथी पार्टी की विभाजनकारी चालों ने उन लोगों की चेतना को ही सुस्त कर दिया है, जिन्होंने इन संपत्तियों का निर्माण किया है और जिनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे ऐसी राष्ट्र-विरोधी नीतियों को हराने के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे। जिस तरह हमें अपने देश के प्रगतिशील इतिहास को याद रखना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए, ठीक उसी तरह हमें आज़ादी के बाद भारत के आर्थिक पुनर्निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा निभाई गई भूमिका को भी याद रखना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों की रक्षा के लिए संघर्ष करना होगा।

*(लेखक सीटू के राष्ट्रीय सचिव हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)*

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*वार्ड नंबर ०२ मधील डॅा.राज शेखला बेकायदा गर्भपात प्रकरणी अटक*


श्रीरामपूर (*शिवप्रहार न्यूज नेटवर्क*)लोणी पोलीस स्टेशन येथे दाखल असणाऱ्या गर्भलिंग चाचणी व बेकायदेशीरपणे गर्भपात प्रकरणाबाबतच्या गुन्ह्यात यापूर्वी एकूण 12 आरोपी अटक करण्यात आलेले आहेत. त्यामध्ये एकूण दोन डॉक्टर,चार एजंट व सहा संबंधित गर्भवती महिलांचे कुटुंबीय असे एकूण 12 आरोपी अटकेत आहेत.
दरम्यान गुन्ह्याचा बारकाईने तपास करत असताना पोलीसांना असे निष्पन्न झाले की,बेकायदेशीर गर्भपात करण्यासाठी लागणाऱ्या गोळ्या या श्रीरामपूर येथील डॉक्टर राज अजीज शेख हा पुरवत आहे. त्यानुसार आज बुधवारी डॉक्टर राज शेख, वार्ड नंबर 2 यांना अप्पर पोलीस अधीक्षक कार्यालय, श्रीरामपूर येथील पथकाने ताब्यात घेतले.त्याच्याकडे विचारपूस केली असता त्यांनी बेकायदेशीर गर्भपाताच्या गोळ्या पुरवल्याचे कबूल केले आहे.त्यानुसार सदरच्या गुन्ह्यामध्ये डॉक्टर राज अजिज शेख,राहणार-वार्ड नंबर ०२,श्रीरामपूर याला अटक केली आहे.

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వేసవి తీవ్రత దృష్ట్యా ప్రజల దాహార్తీని తీర్చేందుకు పల్నాడు జిల్లాలోని అన్ని నియోజకవర్గ కేంద్రాల్లో మజ్జిగ చలివేంద్రాలను ఏర్పాటు చేస్తున్నట్లు లోక్ జనశక్తి పార్టీ (రామ్ విలాస్) జిల్లా అధ్యక్షులు, న్యాయవాది జొన్నలగడ్డ విజయ్ కుమార్ ప్రకటించారు. సత్తెనపల్లి తాలుకా కోర్టు గేట్ వద్ద బుధవారం ఏర్పాటు చేసిన మజ్జిగ పంపిణీ కార్యక్రమంలో ఆయన మాట్లాడుతూ.. బాబాసాహెబ్ అంబేడ్కర్ ఆశయాల సాధనే లక్ష్యంగా, పార్టీ జాతీయ అధ్యక్షులు చిరాగ్ పాశ్వాన్ నాయకత్వంలో ప్రజాసేవ చేస్తున్నామని తెలిపారు. బార్ అసోసియేషన్ అధ్యక్షులు గంగూరి అజయ్ కుమార్, సీనియర్ న్యాయవాది పూజల వెంకట కోటయ్యలు ఈ చలివేంద్రాన్ని ప్రారంభించగా, ఈ కార్యక్రమంలో పార్టీ నాయకులు షేక్ ఖాసిం పీరా, కొరబండి రాబర్ట్, మద్ది వెంకటేశ్వర్లు తదితరులు పాల్గొని ప్రజలకు మజ్జిగ పంపిణీ చేశారు

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Trump and Xi set for high-stakes talks in Beijing

The two leaders are expected to tackle thorny issues dividing US and China, with Iran, trade and Taiwan on the cards.

United States President Donald Trump is escorted by China's Vice President Han Zheng upon the president's arrival at Beijing Capital International Airport in Beijing on May 13, 2026. (Photo: AFP/Brendan Smialowski)

BEIJING: US President Donald Trump and Chinese leader Xi Jinping are set to tackle thorny issues dividing the two superpowers when they meet in Beijing on Thursday (May 14), with Iran, trade and Taiwan on the cards.

Xi will greet Trump with pomp and ceremony as they meet at 10am in the opulent Great Hall of the People, a lavish welcome that belies the deep tensions between the world's biggest economies.

The two leaders will also enjoy a state banquet at the hall in the evening, and Trump will visit the historic Temple of Heaven, a World Heritage site where China's emperors once prayed for good harvest.

The US president arrived for the two-day summit on Air Force One late Wednesday accompanied by top CEOs, including Nvidia's Jensen Huang and Tesla's Elon Musk - symbols of business deals Trump hopes to reach.

He was given a red carpet welcome, with 300 Chinese youth in white uniforms chanting "welcome" and waving small Chinese and US flags in unison as he descended the steps of the presidential plane pumping his fist.

On Friday, Trump and Xi are set to have tea and a working lunch before the US president heads home to Washington.

The trip to Beijing marks the first by a US president in nearly a decade, after Trump visited in 2017, accompanied - unlike this time - by his wife Melania.

Following that first visit, Trump unleashed a barrage of tariffs and restrictions on Chinese goods. He did so again after returning to the White House last year, triggering a trade war before Xi and Trump agreed to a truce in October.

"BIG HUG"
Trump has said he expects a "great big hug" from Xi as he banks on what he believes is a strong personal relationship with the Chinese leader who he has admiringly said rules China with an "iron fist".

Top of his wish list will be business deals on agriculture, aircraft and other topics, with a host of top businessmen in the US leader's delegation.

Aboard Air Force One en route to Beijing, Trump vowed on social media to push Xi to "open up" China to US firms "so that these brilliant people can work their magic".

The Chinese foreign ministry said Wednesday it "welcomes" Trump's visit and that "China stands ready to work with the United States ... to expand cooperation and manage differences".

But Trump is dealing with a different and more emboldened China to the one he visited nine years ago, with a host of unresolved trade and geopolitical tensions between the two countries.

The Iran war in particular has threatened to weaken Trump's position in talks with Xi, having already forced him to postpone it from March.

The US president said he expected a "long talk" with Xi about Iran, which sells most of its US-sanctioned oil to China, but insisted that "I don't think we need any help with Iran" from Beijing.

US Secretary of State Marco Rubio struck a somewhat different tone.

"We hope to convince them to play a more active role in getting Iran to walk away from what they are doing now, and trying to do now in the Persian Gulf," US Secretary of State Marco Rubio told broadcaster Fox News in an interview aired Wednesday.

TARIFF TRUCE?
The long-simmering trade war between the two countries will also be top of the agenda, after Trump's sweeping tariffs last year triggered tit-for-tat levies that exceeded 100 per cent.


Trump and Xi are set to discuss extending a one-year tariff truce, which the two leaders reached during their last meeting in South Korea in October, although a deal is far from certain.

On Taiwan, another issue that has bedevilled ties, Trump said Monday he would speak to Xi about US arms sales to the self-governing democracy claimed by China.

That would be a departure from historic US insistence that it will not consult Beijing on its support for the island, and one which will be closely watched by Taipei and US allies in the region.

China's controls on rare earth exports, AI rivalry and the countries' raucous trade relationship are also among the topics expected to be taken up by the two heads of state.

Both sides will be looking to come out of the summit with whatever wins they can, while also stabilising an often tense relationship between Beijing and Washington that has global implications.

Trump will also be hoping to leave with a firm date for a reciprocal visit by Xi to the United States later in 2026, to prove his rapport with his Chinese counterpart.

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प्रयागराज। नौशाद अली:14 मई 2026-सहारा समूह से संबंधित मामले में विश्व भारती जनसेवा संस्थान द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले को सहारा समूह से जुड़े अन्य लंबित प्रकरणों के साथ संबद्ध करते हुए अगली सुनवाई के लिए 27 मई की तिथि निर्धारित की है।
विश्व भारती जनसेवा संस्थान ने कहा है कि वह किसी भी स्थिति में सहारा मीडिया की बिक्री संबंधी प्रक्रिया को पूरा नहीं होने देना चाहता। संस्थान का कहना है कि सहारा मीडिया की बिक्री से प्राप्त धनराशि सहारा कर्मचारियों को नहीं, बल्कि वर्षों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे जमाकर्ताओं को दी जानी चाहिए।
संस्थान के राष्ट्रीय सचिव नगेंद्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि देशभर के लाखों जमाकर्ता अपनी जमा पूंजी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं और संस्थान उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।

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बंदूक छोड़ी, कलम उठाई: एक फौजी की वह खोज, जिसने इतिहास के पन्नों से गायब 745 बैरागी शहीदों का सच खोल दिया!
लेखक: नरेश दास वैष्णव 'निंबार्क'
(पूर्व नायब सूबेदार, भारतीय सेना)
भूमिका: महलों की चौखट से परे का सच
इतिहास अक्सर महलों की चौखट पर जाकर दम तोड़ देता है, लेकिन सच आज भी उन मठों और अखाड़ों की धूल में सुरक्षित है जहाँ 'माला' और 'भाला' एक साथ तपस्या करते थे। एक सैनिक के रूप में मैंने 24 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दीं और सीमाओं की रक्षा की। उस समय मेरा शस्त्र 'बंदूक' थी। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद, ग्वालियर की उस पवित्र माटी ने मुझे एक नया शस्त्र थमा दिया 'कलम'।
मेरी यह यात्रा पुस्तकालयों के बंद कमरों से नहीं, बल्कि उस दर्द और उपेक्षा से शुरू हुई जिसे मैंने ग्वालियर के 'बैरागी द्वारे' (महंत गंगादास की शाला) में महसूस किया। यह लेख उस अनकहे बलिदान की गाथा है जिसे मुख्यधारा के इतिहास ने हाशिए पर धकेल दिया।
ग्वालियर का 'बैरागी द्वारा': जहाँ इतिहास आज भी सिसक रहा है
जब मैं अपनी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला वैष्णव के साथ ग्वालियर के उस ऐतिहासिक स्थान पर पहुँचा, तो जो दृश्य देखा उसने हम दोनों को भीतर तक झकझोर दिया। निर्मला जी मेरी इस पूरी खोजपूर्ण यात्रा में छाया बनकर साथ रहीं। वह स्थान, जो कभी 1500 सशस्त्र नागा साधुओं और बैरागी सैनिकों की छावनी था, जहाँ राष्ट्र-रक्षा के लिए तोपों और 'बाला-बरछी' का जखीरा तैयार रहता था, आज अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।
18 जून, 1858: वह रक्त-रंजित स्वर्णिम पन्ना
इतिहास का वह दिन याद कीजिए जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लोहा लेते हुए घायल अवस्था में इसी बैरागी छावनी में लाई गई थीं। उनके गुरु, महान क्रांतिकारी संत महंत गंगादास जी वहाँ के पीठाधीश्वर थे। रानी के अंतिम शब्द थे "गुरुदेव! ये गोरे फिरंगी मेरे शरीर को हाथ न लगा सकें।"
महंत जी ने विलंब नहीं किया। उन्होंने अपने 1500 बैरागी सैनिकों को आदेश दिया। उस समय जब साधारण जनता के पास आत्मरक्षा के लिए चाकू तक नहीं था, हम वैष्णव बैरागियों के पास अपनी 'तोपें' थीं। आज भी वे तोपें वहाँ सुरक्षित हैं और हर विश्वकर्मा दिवस पर उनकी गर्जना सुनी जा सकती है। उन जांबाज संतों ने रानी की देह की रक्षा के लिए वह अभेद्य घेरा बनाया कि अंग्रेजों की विशाल सेना भी उसे भेद न सकी। अंततः, रानी का अंतिम संस्कार उसी परिसर में बाबा गंगादास की कुटिया की घास-फूस से किया गया।
745 शहीदों का मौन बलिदान
उस एक दिन में 745 बैरागी योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। वे न तो किसी राजसी वैभव के भूखे थे और न ही उनके पीछे रोने वाला कोई परिवार था। वे विरक्त थे, जिनका घर भी राष्ट्र था और परिवार भी राष्ट्र।
विश्व पटल पर सनातन का शंखनाद: बंदूक से कलम तक का सफर
ग्वालियर की उस उपेक्षा ने मुझे सिखाया कि वैचारिक और ऐतिहासिक दुश्मन को रोकने के लिए 'कलम' उठाना अनिवार्य है। जब से मैंने यह मार्ग चुना है, मेरा ध्येय केवल लेखन नहीं बल्कि सत्य की पुनर्स्थापना रहा है।
आज मुझे यह बताते हुए गर्व और संतोष की अनुभूति होती है कि मेरी लेखनी के माध्यम से:
3 हिंदी पुस्तकें और 7 अंग्रेजी पुस्तकें वर्तमान में पूरी दुनिया में 'सनातन वैष्णव बैरागी' परंपरा का परचम लहरा रही हैं।
इन पुस्तकों में "Sanatan Vaishnav Bairagi: Warriors and Soldiers" और "Nimbarka Sampradaya: Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition" जैसे शोधपूर्ण कार्य शामिल हैं, जो वैश्विक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पाठकों तक पहुँच रहे हैं।
यह केवल मेरा प्रयास नहीं, बल्कि उन 745 शहीदों का आशीर्वाद है कि आज दुनिया भर के शोधकर्ता और पाठक हमारी इस महान योद्धा परंपरा के वास्तविक स्वरूप को पहचान रहे हैं।
अखाड़ों की सैन्य संरचना और 'नागा' कमांडो
एक पूर्व सैनिक होने के नाते, जब मैंने अखाड़ों के भीतर की दुनिया को देखा, तो मुझे प्राचीन भारतीय गुरिल्ला युद्ध पद्धति की झलक मिली। अखाड़ों में 'पटेबाजी', 'लाठी-संचालन' और 'मल्लयुद्ध' की वे तकनीकें आज भी जीवित हैं।
श्री महंत: ये एक सेनापति की भांति अपने खालसों और जत्थों का संचालन करते हैं।
नागा योद्धा: ये वास्तव में सनातन धर्म के 'कमांडो' हैं। संसार से विरक्त होकर भी इनकी आँखें सदैव धर्म के शत्रुओं पर सजग रहती हैं।
1882 का षड्यंत्र: ब्रिटिश हुकूमत ने 'बैरागी' को एक संकुचित जाति का जामा पहनाया ताकि उनकी 'योद्धा' पहचान को मिटाया जा सके। लेकिन सच यह है कि बैरागी कोई जाति नहीं, बल्कि एक 'वैचारिक और सैन्य क्रांति' थी।
निष्कर्ष: यश नहीं, हक की लड़ाई
आज इस आयु में मेरा ध्येय यश पाना नहीं, बल्कि उन 'बेनाम' योद्धाओं को उनका हक दिलाना है। मेरी हर पुस्तक, हर लेख और हर व्याख्यान उन शहीदों को समर्पित है जिन्होंने अपनी झोपड़ी और नाम तक की चिंता नहीं की, पर देश के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच छोड़ गए।
लेखक परिचय:
नरेश दास वैष्णव 'निंबार्क' एक लेखक, स्वतंत्र शोधकर्ता और इतिहासकार हैं। वे भारतीय सेना से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार हैं और वर्तमान में हरियाणा के सोनीपत जिले के रामनगर गाँव में निवास करते हैं। वे 'सनातन भारत - नया सवेरा' डिजिटल पत्रिका के संपादक भी हैं।
संपर्क एवं शोध कार्य के लिए:
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in

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विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

पटना : "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, जब वर्दी कानून का नहीं लालच का औज़ार बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?"
खाकी पर दाग: जब रक्षक ने तानी सरकारी पिस्टल, तो कांप उठी कानून की रूह!

राजधानी के जानीपुर थाने से आई एक खबर ने पूरे बिहार के पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है।
एक तरफ बिहार सरकार 'जीरो टॉलरेंस' का नारा देती है, तो दूसरी तरफ जानीपुर थाने के एडिशनल SHO संजय सिंह जैसे अधिकारी कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं।
1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए इस अधिकारी ने जो किया, वह किसी अपराधी से कम नहीं था।

घटना का पूरा सच
बिहार की राजधानी के जानीपुर थाने का एडिशनल SHO यानी वो अधिकारी जिसे कानून का रखवाला माना जाता है बुधवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (NIB) के जाल में फंस गया।
एडिशनल SHO संजय सिंह को उस वक्त रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया जब वे गाजाचक मोहम्मदपुर पंचायत के कोरियावां प्लॉट पर "सर्वे" के बहाने गए थे और वहां पहुंचकर पीड़ित कौशल से एक लाख रुपए नकद वसूल रहे थे।

यह पैसा किसलिए था?
एक जमीन विवाद के मामले का निपटारा करने के लिए। यानी कानून का दरवाज़ा खुलवाने की कीमत एक लाख रुपए।

शिकायत से गिरफ्तारी तक पूरी कहानी,
कौशल एक साधारण नागरिक हैं जो जमीन विवाद की समस्या लेकर थाने पहुंचे।
वहाँ उनसे "मामला सुलझाने" के बदले पाँच लाख रुपए माँगे गए।
कौशल के पास इतना पैसा नहीं था पर दर्द था, और हिम्मत भी।
बातचीत के बाद रकम दो लाख पर आई।
लेकिन कौशल ने घूस देने की जगह निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई।

निगरानी ने जाल बिछाया।
संजय सिंह बुधवार को "सर्वे" के बहाने कोरियावां प्लॉट पहुंचे। जैसे ही उन्होंने एक लाख रुपए अपने हाथ में लिए निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया।
लेकिन यहाँ कहानी और खतरनाक मोड़ लेती है।

पुल-कोट:
"पकड़े जाने के बाद संजय सिंह ने अपनी सरकारी पिस्टल कॉक कर ली निगरानी ASI रवि कुमार ने जान जोखिम में डालकर उनका हाथ थाम लिया। इस जद्दोजहद में ASI रवि कुमार घायल हो गए।"

वर्दी और हथियार का दुरुपयोग सवाल उठने चाहिए,
एक पुलिस अधिकारी जो घूस लेते पकड़ा गया उसने सरकारी पिस्टल कॉक की।
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, यह सरकारी हथियार से निगरानी दल को धमकाने का प्रयास था।
यह राज्य के खिलाफ विद्रोह की भाषा है।
क्या यह पिस्टल जनता की सुरक्षा के लिए दी गई थी?
या अपराध को ढकने के लिए?

निगरानी ASI रवि कुमार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए हाथ थाम लिया और इस खतरनाक स्थिति को संभाला। वे बिहार के असली नायक हैं चोट खाकर भी अपने दायित्व से नहीं हटे।

यह कोई अकेला मामला नहीं,
बिहार में पुलिस भ्रष्टाचार के ये मामले पैटर्न बन चुके हैं।
कदमकुआं थाने के एडिशनल SHO अर्जुन यादव को हाल ही में 7,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
सारण में SI मोहित मोहन को 9,000 में।
सिवान में SI कन्हैया सिंह को 40,000 में।
यह सिलसिला बताता है कि थानों में "रेट कार्ड" चल रहा है जमीन विवाद से लेकर मुकदमे बंद करने तक।

सवाल यह है: जब बार-बार पुलिसकर्मी पकड़े जाते हैं तो विभाग के भीतर जवाबदेही कब तय होगी?

जीरो टॉलरेंस की असलियत क्या है?
सरकार "जीरो टॉलरेंस" का नारा देती है। निगरानी विभाग कार्रवाई भी करता है। लेकिन जब तक:
पुलिस विभाग के भीतर आंतरिक जवाबदेही नहीं बनती,
दोषी अधिकारियों की सेवा तत्काल समाप्त नहीं होती,
पीड़ित शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती,
तब तक यह नारा सिर्फ अखबारों की सुर्खी बनकर रह जाएगा।

कौशल जैसे साहसी नागरिक ने घूस न देकर शिकायत की यह असाधारण है।
लेकिन क्या हर पीड़ित के पास इतनी हिम्मत और जागरूकता है?
ज़्यादातर लोग चुपचाप पैसा देते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि शिकायत करने पर उनका मामला और उलझेगा।

वीडियो सबूत जो मिटाया नहीं जा सकता
घूस लेते संजय सिंह का वीडियो सामने आ गया है।
यह डिजिटल युग का सबसे बड़ा हथियार है भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ। अब न इनकार संभव है, न बचाव।

यह वीडियो सिर्फ एक अधिकारी का नहीं पूरी उस व्यवस्था का आईना है जिसमें वर्दी, ताकत और हथियार सब जनता के विरुद्ध इस्तेमाल हो सकते हैं।

बिहार पुलिस में ऐसे अधिकारी भी हैं जो ईमानदारी से काम करते हैं। ASI रवि कुमार इसका प्रमाण हैं। लेकिन संजय सिंह जैसे अधिकारी उन सभी की मेहनत और छवि पर कालिख पोत देते हैं। पुलिस सुधार अब विकल्प नहीं अनिवार्यता है।

मांगें और जवाबदेही,
संजय सिंह को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई हो।
ASI रवि कुमार को राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया जाए और उनके इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार ले।
पीड़ित कौशल की सुरक्षा सुनिश्चित हो उन्हें किसी प्रकार का दबाव या प्रतिशोध न झेलना पड़े।
जानीपुर थाने की पूरी कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
हथियार के दुरुपयोग के लिए अलग से मुकदमा दर्ज हो यह सामान्य भ्रष्टाचार से गंभीर मामला है।
अंत में जनता से एक बात,
कौशल ने जो किया, वह हम सभी को सीखना होगा।
घूस मत दो शिकायत करो।
निगरानी का टोल-फ्री नंबर 1064 है। यही नंबर भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
जब तक एक-एक कौशल खड़ा होता रहेगा संजय सिंह जैसे लोग पकड़े जाते रहेंगे।

वर्दी की इज्ज़त उन्हें बचाती है जो उसके काबिल हैं। जो नहीं हैं उनके लिए निगरानी का जाल है।

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लड़ाई-झगड़े के मामले में एक नाबालिग सहित तीन आरोपी गिरफ्तार, अपराध शाखा ऊंचा गांव टीम की कार्रवाई
फरीदाबाद। लड़ाई-झगड़े के मामले में क्राईम ब्रांच ऊंचा गांव की टीम ने एक नाबालिग सहित तीन आरोपियों को काबू किया है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि प्रवीन निवासी इंद्रा कॉलोनी फरीदाबाद ने थाना सेक्टर-8 में दी शिकायत में आरोप लगाया कि 1-2 मई की रात उसका छोटा भाई अपने फ्लैट ग्रीन फील्ड की तरफ जा रहा था। रास्ते में कुछ लडक़ों ने उसे रोक लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। एक युवक ने बोतल से उसके ऊपर हमला किया तथा अन्य दो ने पत्थर से उसके सिर पर वार किया। शिकायत पर थाना सेक्टर-8 में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि अपराध शाखा ऊंचा गांव की टीम ने कार्रवाई करते हुए सागर व दुष्यंत निवासी शाहपुर कलां फरीदाबाद को गिरफ्तार किया है। घटनाक्रम में एक नाबालिग को भी पुलिस ने अभिरक्षा में लिया है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि कुछ समय पहले सागर का पीडि़त के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। उसी की रंजिश रखते हुए सागर ने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। सागर ने बोतल से तथा दुष्यंत ने पत्थर से हमला किया था।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को माननीय अदालत में पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है, वहीं नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है।

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नारी शक्ति की नई सुबह:

विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी: "जब एक कामकाजी माँ यह जानकर घर से निकले कि उसके बच्चे की देखभाल सुरक्षित हाथों में है तो वह सिर्फ काम पर नहीं जाती, वह आत्मसम्मान की राह पर चलती है।"

गया में बदलाव की दस्तक
13 मई 2026 को गया कलेक्ट्रेट में एक ऐसा समारोह हुआ जो सरकारी रस्म नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक जीवंत प्रतिज्ञा थी।
जिला पदाधिकारी गया, श्री शशांक शुभंकर IAS ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अंतर्गत संचालित पालना घर (क्रेश/शिशु देखभाल केंद्र) में चयनित कर्मियों और DHEW (District Hub for Empowerment of Women) के नवनियुक्त Gender Specialist को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

यह महज एक कागज़ नहीं था
यह उन हजारों कामकाजी महिलाओं के लिए आश्वासन था जो रोज़ यह दुविधा लेकर दफ्तर जाती हैं कि "घर पर बच्चा कैसा होगा?"

क्या है पालना घर
और क्यों ज़रूरी है यह?
मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अंतर्गत बिहार में पालना घर (क्रेश) संचालित किए जाते हैं।

यह योजना कामकाजी महिलाओं की सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या
बच्चों की सुरक्षित देखभाल का समाधान करती है।
बिहार में लाखों महिलाएं सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करती हैं।
लेकिन उनके छोटे बच्चों के लिए कोई सुरक्षित, सुलभ और सस्ती देखभाल व्यवस्था नहीं थी।
इसीलिए कई महिलाएं या तो काम छोड़ देती थीं, या बच्चे को अयोग्य हाथों में छोड़कर जाती थीं।

पालना घर इस त्रासदी का जवाब है।
यहाँ प्रशिक्षित क्रेश वर्कर और असिस्टेंट क्रेश वर्कर तैनात होते हैं जो बच्चों को
सुरक्षित वातावरण
पोषण और देखभाल
प्रारंभिक शिक्षा का आधार
प्रदान करते हैं।
गया जिले में पुलिस मुख्यालय परिसर सहित अनेक स्थानों पर पालना घर संचालित हैं।

DHEW महिला सशक्तिकरण का जिला तंत्र
District Hub for Empowerment of Women (DHEW) बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी संरचना है जो महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए काम करती है।
Gender Specialist के रूप में वे व्यक्ति नियुक्त होते हैं जो सामाजिक कार्य, समाजशास्त्र, या महिला अध्ययन में स्नातक हों और जेंडर संबंधी मुद्दों में न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव रखते हों।

Gender Specialist की भूमिका होती है
Mission Shakti और अन्य सशक्तिकरण कार्यक्रमों की निगरानी,
जेंडर बजटिंग में तकनीकी सहयोग,
One Stop Center और हेल्पलाइन से समन्वय, तथा जिले में महिला लाभार्थियों का डेटाबेस रखना।

सरल भाषा में
Gender Specialist वह पुल है जो सरकारी योजना और आम महिला के बीच की खाई को भरता है।

डीएम शशांक शुभंकर का संदेश
शब्द नहीं, संकल्प,
श्री शशांक शुभंकर IAS 3 जून 2025 से गया के जिला पदाधिकारी हैं।
उनके कार्यकाल में यह नियुक्ति समारोह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

डीएम ने नव नियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए तीन मूल बातें कहीं:

"महिलाओं एवं बच्चों के समग्र विकास, सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।"

यह कथन सिर्फ औपचारिकता नहीं यह उस जिम्मेदारी की स्वीकृति है जो राज्य की हर कामकाजी माँ पर सरकार का दायित्व बनाती है।

उन्होंने सभी कर्मियों से "पूरी निष्ठा एवं संवेदनशीलता" के साथ काम करने का आह्वान किया और यह शब्द महत्वपूर्ण हैं।
क्योंकि पालना घर में काम सिर्फ "ड्यूटी" नहीं, एक बच्चे की सुरक्षा और एक माँ का भरोसा है।

कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी और उनकी भूमिका,
इस समारोह की मज़बूती यह थी कि इसमें पूरी महिला-बाल विकास मशीनरी एक साथ उपस्थित थी:
डॉ रश्मि वर्मा (जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, ICDS गया) आंगनबाड़ी नेटवर्क और बाल पोषण की धुरी।
उनकी उपस्थिति यह बताती है कि पालना घर ICDS के साथ समन्वय में काम करेगा।
जयवन्ती सिन्हा (जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम, गया) WCDC के माध्यम से योजनाओं की वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी।
सुशांत आनंद (जिला मिशन समन्वयक, DHEW गया) Gender Specialist की टीम के सीधे पर्यवेक्षक। उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि जेंडर आधारित हिंसा से पीड़ित महिलाओं तक सरकारी सहायता पहुंचे।

पुल-कोट:
"पालना घर सिर्फ एक केंद्र नहीं यह उस सामाजिक अनुबंध का प्रतीक है जो कहता है: 'तुम काम करो, हम बच्चे संभालेंगे।'"

ज़मीनी हकीकत उम्मीद के साथ जवाबदेही,
यह समारोह सकारात्मक है, प्रशंसनीय है। लेकिन एक जागरूक पत्रकार का दायित्व है कि वह सवाल भी पूछे:

क्या पालना घर के कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण मिलेगा?
बच्चों की देखभाल सिर्फ उपस्थिति से नहीं होती उसके लिए प्रशिक्षित हाथ और संवेदनशील मन चाहिए।
क्या Gender Specialist को पर्याप्त संसाधन और स्वायत्तता मिलेगी?
Gender Specialist का मासिक मानदेय 23,000 है यह एक संविदा पद है।
इस राशि में क्या वे उतनी निष्ठा से काम कर पाएंगे जितनी डीएम ने अपेक्षा की?
क्या DHEW के पास पर्याप्त बजट और जनशक्ति है?

DHEW गया का मुख्यालय गया कलेक्ट्रेट भवन में है।
लेकिन गया जैसे विशाल जिले में जहाँ 100 से अधिक प्रखंड और हजारों गाँव हैं एक Gender Specialist काफी नहीं।

महिला सशक्तिकरण संख्या नहीं, संवेदना चाहिए,है
बिहार में महिला सशक्तिकरण की योजनाएं अनेक हैं Mission Shakti, One Stop Center, Nari Shakti Yojana, DHEW लेकिन इनकी सफलता इस पर निर्भर है कि ज़मीन पर काम करने वाले कर्मी कितने सक्षम, प्रेरित और संसाधन-संपन्न हैं।

आज गया में जो नियुक्ति पत्र बांटे गए वे केवल रोज़गार के दस्तावेज़ नहीं हैं। वे उन महिलाओं के प्रति वचन हैं जो हिंसा झेल रही हैं, जो बच्चे को घर पर छोड़कर काम पर जाती हैं, जो यह नहीं जानतीं कि उनके अधिकार क्या हैं।

पालना घर कर्मियों को त्रैमासिक प्रशिक्षण दिया जाए और उनके प्रदर्शन की निगरानी हो।
Gender Specialist की संख्या बढ़ाई जाए गया जैसे बड़े जिले में न्यूनतम 3-5 Gender Specialist होने चाहिए।
संविदा कर्मियों का मानदेय पुनर्विचार हो 23,000 में परिवार चलाना और ज़मीनी काम करना कठिन है।
DHEW की कार्यवाहियों की मासिक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी हो जनता को जानने का अधिकार है।
पालना घर की सुविधाओं की नियमित सामाजिक ऑडिट कराई जाए।

अंत में
एक नई शुरुआत को सलाम,
गया की धरती पर आज जो बीज बोया गया वह महिला सशक्तिकरण का बीज है।
डीएम शशांक शुभंकर ने यह समारोह करके केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं निभाई उन्होंने यह संदेश दिया कि जिला प्रशासन इस मिशन को गंभीरता से लेता है।
डॉ रश्मि वर्मा, जयवन्ती सिन्हा और सुशांत आनंद जैसे समर्पित अधिकारियों की टीम इस सपने को हकीकत बनाने की क्षमता रखती है।

अब देखना यह है क्या यह नियुक्ति पत्र एक नई सुबह की शुरुआत है, या बस एक और सरकारी समारोह?

इसका जवाब उन महिलाओं के चेहरे पर मिलेगा जो कल अपना बच्चा पालना घर में छोड़कर निश्चिंत होकर काम पर जाएंगी।
जब एक कामकाजी माँ यह जानकर घर से निकले कि उसके बच्चे की देखभाल सुरक्षित हाथों में है तो वह सिर्फ काम पर नहीं जाती, वह आत्मसम्मान की राह पर चलती है।

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यह अखबार की एक खबर है जिसमें बसेड़ी में हुए एक हाईवोल्टेज ड्रामे के बारे में बताया गया है।

*खबर की मुख्य बातें:*

*हेडलाइन*: प्रेमिका से शादी करने की जिद में टावर पर चढ़ा क्लर्क, मां के आंसू देख उतरा

*क्या हुआ था*:
1. *घटना*: बसेड़ी कस्बे में सोमवार सुबह एक सरकारी क्लर्क प्रेमिका से शादी की मांग को लेकर पंचायत समिति परिसर स्थित सिंचाई विभाग के ऊंचे टावर पर चढ़ गया।
2. *समय*: करीब 4 घंटे तक वह टावर पर बैठा रहा और बार-बार प्रेमिका को मौके पर बुलाने की मांग करता रहा।
3. *परिवार*: नदबई से उसकी मां, भाई और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे।
4. *समाधान*: प्रशासन, पुलिस और परिजनों के समझाने पर भी नहीं माना। आखिरकार मां की भावुक अपील और आंसू देखकर दोपहर करीब डेढ़ बजे नीचे उतरा। उतरते ही मां से लिपटकर रो पड़ा।

*कार्रवाई*:
- शिक्षा विभाग ने कनिष्ठ सहायक राजकुमार को निलंबित कर दिया।
- निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय राजाखेड़ा रहेगा।
- 11 मई को आरएफसी टावर पर चढ़कर अनुचित मांग करने पर यह कार्रवाई की गई।

*अतिरिक्त जानकारी*:
- युवक 33 वर्षीय राजकुमार, नदबई भरतपुर का निवासी है।
- उसने प्रेम प्रसंग को लेकर एक भावुक पत्र स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप में भी डाला था।
- स्थानीय लोगों के अनुसार युवक पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था।

*पहले की घटनाएं*: बॉक्स में बताया गया है कि अप्रैल 2024 में मसूदपुर और नवंबर 2023 में बाड़ी में भी इसी तरह टावर/टंकी पर चढ़ने की घटनाएं हुई थीं।

यह घटना दिखाती है कि मानसिक तनाव और भावनात्मक मुद्दे किस तरह गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। अगर आप या आपका कोई जानने वाला तनाव में है, तो परिवार या पेशेवर काउंसलर से बात करना मददगार होता है।

क्या आप इस घटना पर कुछ चर्चा करना चाहते हैं?

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गाजियाबाद। व्यापारियों की समस्याओं एवं उनके समाधान को लेकर वृंदावन की पावन नगरी में आयोजित भव्य व्यापारी समागम में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष प्रीतम लाल ने जिले के व्यापारियों का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल एवं उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वावधान में मां ज्वाला धाम श्री कृष्णा आश्रम, वृंदावन में किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों एवं उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों से व्यापारी नेता एवं पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

गाजियाबाद से जिला अध्यक्ष प्रीतम लाल के नेतृत्व में जिला मीडिया प्रभारी संजय शर्मा, जिला मंत्री अमित गोयल, मोदीनगर से निर्दोष खटाना तथा प्रदेश मंत्री सतीश अग्रवाल सहित कई व्यापारी प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में लगभग 300 से अधिक व्यापारी एवं संगठन पदाधिकारी उपस्थित रहे।

समागम के दौरान राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें व्यापारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि बाबूलाल गुप्ता, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा, महासचिव राजेंद्र गुप्ता तथा युवा प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र उर्फ जीतू सोनी सहित अनेक वरिष्ठ व्यापारी नेताओं का पटका पहनाकर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों एवं जिलों के व्यापारियों की समस्याओं को एक मंच पर लाकर उनके समाधान हेतु ठोस रणनीति तैयार करना रहा। इस दौरान गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष प्रीतम लाल ने व्यापारियों से संबंधित कई गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जीएसटी विभाग द्वारा व्यापारियों की गाड़ियों को अनावश्यक रूप से रोककर जांच के नाम पर परेशान किया जाता है। इसके अलावा जीएसटी पोर्टल पूरी तरह ऑनलाइन होने के बावजूद व्यापारियों को नोटिस भेजकर कार्यालय बुलाया जाता है, जहां उन्हें अनावश्यक परेशानियों और सुविधा शुल्क की मांग का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जब अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा सकती हैं तो व्यापारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। इससे व्यापारियों का समय और आर्थिक संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।

बैठक में अन्य जिलों के जिला अध्यक्षों एवं व्यापारी प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व ने व्यापारियों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम के अंत में संगठन की एकजुटता, व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा तथा व्यापारी हितों के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया। समागम में उपस्थित व्यापारियों ने इसे व्यापारी एकता एवं संगठनात्मक मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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बरेली: ग्राम पंचायत गलियां में सामाजिक न्याय पार्टी (जनादेश) की विशाल जनसभा एवं संगठनात्मक बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर देवेंद्र कश्यप थे। बैठक में 120 भोजीपुरा विधानसभा के कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे, जिनमें प्रदेश सचिव संदीप कश्यप, प्रदेश अध्यक्ष (पश्चिम) डॉ. सोनू कश्यप, प्रदेश महासचिव एवं 120 भोजीपुरा विधानसभा प्रभारी नरपत कश्यप, जिला अध्यक्ष (बदायूं) महावीर कश्यप, जिला अध्यक्ष युवा मंच (बरेली) नेम सिंह कश्यप, कार्यकर्ता फकी चंद कश्यप और 120 भोजीपुरा विधानसभा अध्यक्ष गजराज प्रधान शामिल थे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सम्मानित साथियों एवं क्षेत्रवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सामाजिक न्याय एवं समाज की मजबूती के लिए सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। यह बैठक संगठन को मजबूत करने और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर कार्य करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

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Raipur के मैदान में Virat Kohli नाम का तूफान फिर गरज उठा! Cricket की दुनिया में ऐसे पल कम ही आते हैं जब एक Champion खिलाड़ी अपनी वापसी का ऐलान इस अंदाज़ में करता है कि विरोधी टीम के पसीने छूट जाएं और दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठे। Royal Challengers Bengaluru (RCB) की जीत का जश्न जारी है, और इसकी वजह एक ही है – King Kohli का अविस्मरणीय Bat.

The Inner Story / Asli Maajra:
IPL 2026 के इस रोमांचक Match में, जहाँ Royal Challengers Bengaluru ने Kolkata Knight Riders (KKR) की चार Match की Winning Streak को रौंदा, असली Gamechanger कोई और नहीं, बल्कि Virat Kohli ही रहे। पिछले दो Innings में Back-to-Back Ducks झेलने के बाद, Kohli ने emphatically दिखा दिया कि वह सिर्फ Runs से दूर थे, Form से नहीं। Raipur में KKR के खिलाफ उनकी 60-Ball की 105 Run की Unbeaten Innings एक Masterclass थी, एक Vintage Chase Effort जो Cricket Textbooks में शामिल होने लायक है। यह सिर्फ एक Century नहीं थी; यह था Dominance का प्रदर्शन, Controlled Aggression का नमूना। Kohli ने अपनी Innings में लगातार Wickets के बीच Sprinting की, और Gorgeous Strokeplay का भी जादू बिखेरा, खासकर Innings की शुरुआत और अंत में। सबसे बड़ी बात, वह कभी भी Stretched नहीं लगे, यह दिखाता है कि वह अपनी Peak Form में वापस आ चुके हैं।

RCB ने KKR को 192 Runs पर रोकने में शानदार काम किया, भले ही उन्होंने केवल चार Wickets गंवाए। RCB के Bowlers, विशेष रूप से Seamers, ने Pitch के Two-Paced स्वभाव का बखूबी फायदा उठाया और Discipline का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं KKR का Inexperienced Seam Attack RCB के सामने कहीं नहीं टिका। उनमें न तो वह Discipline दिखा और न ही वह Ability कि वह ऐसी Pitch पर Bowlers से Misbehaviour निकाल पाते। यह साफ था कि Match का नतीजा दोनों टीमों के Bowling Attacks की Relative Quality पर निर्भर था, और यहाँ RCB ने बाज़ी मारी। इस जीत के साथ, RCB ने IPL 2026 Table में Top पर अपनी जगह बना ली है।

Analysis & Numbers:
- Virat Kohli की 60-Ball में 105 Run की Unbeaten Innings उनके IPL Career का नौवाँ Hundred है, जो Run-Chase में उनकी महारत को दर्शाता है।
- Royal Challengers Bengaluru ने Kolkata Knight Riders को 192 Runs पर रोकने में सफलता हासिल की, जबकि KKR के सिर्फ 4 Wickets गिरे थे, यह RCB के Bowlers की बेहतरीन Economy और Discipline का सबूत है।
- KKR के Raghuvanshi ने 71 Runs बनाए और Rinku Singh ने 49* Runs की शानदार Innings खेली, लेकिन RCB के Tyagi ने 3 Wickets लेकर Middle Overs में KKR की गति पर अंकुश लगाया।

The Guru Gyan Verdict:
आज Raipur में सिर्फ एक Match नहीं जीता गया, बल्कि एक Champion का Grand Comeback देखा गया। Virat Kohli ने यह साबित कर दिया कि Class is Permanent, और उनकी Absence सिर्फ एक Short Break थी। RCB के Bowlers ने शानदार नींव रखी, और Kohli ने उस पर Dominance की इमारत खड़ी कर दी। KKR को अपनी Bowling Strategy पर फिर से विचार करना होगा, क्योंकि ऐसे Big Matches में Inexperienced Attack के भरोसे जीतना नामुमकिन सा है। यह RCB के लिए एक Gamechanger जीत है जो उन्हें आगे के Tournament के लिए भरपूर Confidence देगी। King Kohli का Bat बोल रहा है, और IPL 2026 में अब कोई उन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करेगा।

Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना के तहत मृत किसान परिवार को 4 लाख की सहायता

पांढुर्णा / सौंसर

#मुख्यमंत्री_कृषक_जीवन_कल्याण_योजना अंतर्गत कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ द्वारा खेत में कृषि कार्य के दौरान ट्रैक्टर पलटने से मृत किसान के परिजन को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम जामछीखोला तहसील सौंसर निवासी आकाश पिता कचरू नागपुरे की खेत में कृषि कार्य करते समय ट्रैक्टर पलटने से दुःखद मृत्यु हो गई थी। मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पांढुर्णा श्रीमती अलका एक्का एवं नायब तहसीलदार सौंसर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के आधार पर कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना के तहत आर्थिक सहायता स्वीकृत की।

कलेक्टर द्वारा मृतक के वारिस श्री चंद्रशेखर नागपुरे निवासी ग्राम जामछीखोला तहसील सौंसर के पक्ष में 4 लाख रुपये की सहायता राशि चेक के माध्यम से प्रदान की गई।

प्रशासन ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक संबल प्रदान करना है, ताकि प्रभावित परिवार को राहत मिल सके।

#पांढुर्णा #मुख्यमंत्री_कृषक_जीवन_कल्याण_योजना #सौंसर #किसान_सहायता

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हजारीबाग में नशा कारोबार के खिलाफ बड़ा अभियान, 100 ठिकानों पर छापेमारी

हजारीबाग (झारखंड)। पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के कारोबार और सेवन के खिलाफ जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए 100 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। यह अभियान 12 और 13 मई 2026 की रात पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाया गया।

पुलिस के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मादक पदार्थों के मामलों में संलिप्त अभियुक्तों तथा नशे के सेवन, खरीद-बिक्री में शामिल लोगों के विरुद्ध जिले के सभी अनुमंडलों में एक साथ कार्रवाई की गई। अभियान का नेतृत्व विभिन्न पुलिस उपाधीक्षकों और पुलिस निरीक्षकों ने किया।

अभियान की प्रमुख बातें

जिलेभर में कुल 43 छापामारी टीमों का गठन किया गया।

अभियान में 118 पुलिस पदाधिकारी एवं जवान शामिल रहे।

पिछले पांच वर्षों में मादक पदार्थ मामलों से जुड़े लोगों के लगभग 100 ठिकानों पर दबिश दी गई।

कार्रवाई के दौरान 77 संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए थाना लाया गया। बाद में उन्हें पीआर बॉन्ड पर चेतावनी देकर छोड़ा गया।

पुलिस ने दो लोगों को 32 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

हजारीबाग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के कारोबार, सेवन और अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उनके इलाके में मादक पदार्थों का सेवन, बिक्री या संदिग्ध अड्डेबाजी की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी थाना को दें, ताकि त्वरित सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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मुरादाबाद: मोहम्मद आसिम, जो सिहाली खड्डर, डिलारी, मुरादाबाद के निवासी और All India Media Association (AIMA) के सदस्य हैं, ने ग्रामीण विकास में चरित्र निर्माण और 'केकड़ा मानसिकता' से मुक्त होने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की कमी नहीं बल्कि समाज में व्याप्त दोहरी मानसिकता है, जो प्रगति में रोड़ा बनती है। उन्होंने 'सोच बदलो, देश बदलेगा' को एक वैचारिक क्रांति बताया और चरित्र को समाज की सार्थक दिशा देने वाला बताया।

आसिम ने बताया कि 'केकड़ा मानसिकता' के कारण जब कोई व्यक्ति प्रगति की ओर बढ़ता है, तो समाज के अन्य लोग उसे नीचे खींचने लगते हैं, जिससे समग्र विकास बाधित होता है। उन्होंने लालच की तुलना कार्य-कौशल की गरिमा से करते हुए कहा कि असली खुशी और मानसिक सृजन तभी संभव है जब काम में पारदर्शिता हो। एक मीडियाकर्मी के रूप में उनका लक्ष्य गलत विचारों को समाप्त कर वैचारिक पारदर्शिता लाना है, जिससे देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर हो सके। अंत में उन्होंने कहा कि जब हर व्यक्ति अपने चरित्र की शुद्धि करेगा तभी समाज और देश महान बनेगा।

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पांढुर्णा जिला समाचार

प्रशासन, शिक्षा, स्वच्छता और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों ने पकड़ी रफ्तार

पांढुर्णा

* पांढुर्णा जिले में इन दिनों प्रशासनिक गतिविधियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वच्छता एवं सामाजिक अभियानों को लेकर लगातार सक्रियता देखने को मिल रही है। जिला प्रशासन द्वारा जहां विकास कार्यों की मॉनिटरिंग तेज की गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार एवं जनजागरूकता कार्यक्रम भी प्रभावी रूप से संचालित किए जा रहे हैं।

* समय-सीमा बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा

कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में आयोजित समय-सीमा बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान, जनकल्याणकारी योजनाओं, जाति प्रमाण पत्र, पेंशन प्रकरण एवं विकास कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में अवैध उत्खनन एवं खनिज परिवहन पर सख्ती बरतने और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

* उर्वरक वितरण को लेकर सख्त निर्देश

उर्वरक वितरण समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने सभी सहकारी समितियों को जल्द से जल्द किसानों के ई-टोकन बुक कर उर्वरकों का उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बेहतर कार्य करने वाली समितियों की सराहना की गई, जबकि लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी भी दी गई।

* वॉश ऑन व्हील्स बना स्वच्छता की नई पहचान

जिला पंचायत द्वारा संचालित वॉश ऑन व्हील्स एवं वॉश ऑन व्हील्स प्लस सेवा गांव-गांव तक पहुंचकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को नई मजबूती दे रही है। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है और अन्य राज्यों द्वारा भी इसे अपनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

* जल संरक्षण के लिए बच्चों को दिलाई शपथ

ग्राम धावडीखापा में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विद्यार्थियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। बच्चों को जल के महत्व एवं संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी बताया गया।

* सांदीपनि विद्यालय में समर कैंप

सांदीपनि विद्यालय पांढुर्णा में आयोजित समर कैंप में योग, खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। बच्चों में कैंप को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।

* किसान नवाचार बना प्रेरणा

सौसर विकासखंड के ग्राम मोहगांव के प्रगतिशील कृषक श्री दशरथ बावनकर द्वारा 3 एकड़ में ग्रीष्मकालीन ज्वार की खेती कर फसल विविधीकरण का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया गया। कृषि विभाग ने इसे लाभकारी खेती की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया।

* कृषक परिवार को 4 लाख की सहायता

मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना के अंतर्गत खेत में ट्रैक्टर पलटने से मृत किसान आकाश नागपुरे के परिजन को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई।

* एमपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम में संशोधन

माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश द्वारा हायर सेकेंडरी द्वितीय परीक्षा 2026 के परीक्षा कार्यक्रम में आंशिक संशोधन किया गया है। विद्यार्थियों को संशोधित टाइम टेबल के अनुसार तैयारी करने की सलाह दी गई है।

* भाजपा नेताओं की सौजन्य भेंट

पूर्व मंत्री श्री नाना भाऊ मोहड़ के निवास पर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज सिंह तेकाम की सौजन्य भेंट हुई। इस दौरान संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की गई।

* विधायक सुनील उइके ने किए दर्शन

जाम सांवली हनुमान मंदिर में जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

#पांढुर्णा #जिला_समाचार #प्रशासन #स्वच्छता #कृषि #शिक्षा #जनकल्याण

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न्यूज रिपोर्ट:
आज के बदलते दौर में जहां लोग तेज़ी से सफलता पाने की दौड़ में लगे हैं, वहीं जीवन के मूल्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है। इसमें बताया गया है कि जिस घर में संस्कार, संयम और सत्य का वास होता है, वहां कठिन से कठिन परिस्थितियां भी अंततः हार मान लेती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और सही समय की पहचान भी बेहद जरूरी है। ये गुण व्यक्ति को कठिन हालात में भी स्थिर बनाए रखते हैं और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अहंकार, आलस्य और गलत संगति व्यक्ति के पतन के मुख्य कारण होते हैं। ऐसे में युवाओं को इनसे दूर रहकर सकारात्मक सोच और अच्छे वातावरण को अपनाने की सलाह दी गई है।
समय को सबसे शक्तिशाली बताते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है। इसके साथ ही शिक्षा को सबसे अच्छा मित्र बताया गया है, क्योंकि शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान और अवसर प्राप्त करता है।
समाज के बुद्धिजीवियों ने इस संदेश को वर्तमान पीढ़ी के लिए बेहद उपयोगी बताया है और इसे अपनाने की अपील की है, ताकि एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण हो सके।

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ખેડૂતો માટે ફરજ પ્રથમ: તળાવની વચ્ચે જઈને યુજીવીસીએલના જાંબાઝ સ્ટાફે વીજ લાઇન રિપેર કરી.....

ચાણસ્મા વીજ કચેરીના કર્મચારીઓએ ગઈકાલે ૧૩ મે ૨૦૨૬ના રોજ પોતાની ફરજ પ્રત્યે અદભુત નિષ્ઠા અને બહાદુરીનું ઉદાહરણ પૂરું પાડ્યું છે. જેને લઈને સમગ્ર પંથકમાં તેમના આ બાહોશ પ્રયત્નને ભારે બિરદાવવામાં આવી રહ્યો છે.મળતી માહિતી મુજબ, ગઈકાલ રોજ ૧૧ કેવી (11Kv) ખોરસમ ખેતીવાડી ફીડર લાઇન ભારે ફોલ્ટમાં આવી ગઈ હતી. તપાસ કરતા માલુમ પડ્યું કે આ લાઇનનો એક મુખ્ય વીજ પોલ (થાંભલો) સ્થાનિક તળાવની બિલકુલ વચ્ચે આવેલો છે. આ થાંભલા પરથી મુખ્ય વીજ વાયર છૂટો પડીને નીચે ઉતરી ગયો હતો. જેના કારણે ખેતીવાડીનો વીજ પુરવઠો સંપૂર્ણ ખોરવાઈ ગયો હતો.તળાવમાં પાણી હોવા છતાં અને પરિસ્થિતિ જોખમી હોવા છતાં, ચાણસ્મા વીજ કચેરીના કર્મનિષ્ઠ કર્મચારીઓ પાછા હઠ્યા નહોતા. સ્ટાફના જાંબાઝ સભ્યોએ ખેડૂતોના પાક અને વીજ જરૂરિયાતને ધ્યાને રાખી તળાવના પાણીને વટાવીને વચ્ચે સુધી જવાનો મક્કમ નિર્ણય કર્યો હતો.વીજ કર્મચારીઓએ જીવના જોખમે તળાવ વટાવી, વીજ પોલ પર ચડીને છૂટા પડેલા વાયર ને યોગ્ય રીતે ફિટ કર્યો હતો. કર્મચારીઓની આ ભારે જહેમત બાદ લાઇન ચાલુ કરવામાં આવી હતી અને પાવર સપ્લાય પુનઃ કાર્યરત કરાયો હતો. વીજ કંપનીના સ્ટાફની આ સમયસૂચકતા, બહાદુરી અને ફરજ પરસ્તતા જોઈને સ્થાનિક ગ્રામજનો અને ખેડૂતોએ તમામ કર્મચારીઓનો આભાર માની તેમની કામગીરીને દિલથી બિરદાવી છે.

રિપોર્ટર મુકેશ પિત્રોડા ચાણસ્મા

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साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी, 7 मोबाइल और 9 सिम कार्ड बरामद

जामताड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी कॉल और KYC अपडेट के नाम पर करते थे ठगी

जामताड़ा (झारखंड)। पुलिस द्वारा 13 मई 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार साइबर अपराध थाना की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई फतेहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बंगढ़ी एवं करमाटांड़ थाना क्षेत्र के आसपास की गई।

पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह के निर्देश पर साइबर थाना प्रभारी मो. फारूक के नेतृत्व में छापेमारी दल का गठन किया गया। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपी

गुलाम मुहम्मद, उम्र लगभग 30 वर्ष, ग्राम बंगढ़ी, थाना फतेहपुर

मो. मकबूल अंसारी, उम्र लगभग 31 वर्ष, ग्राम डुमरिया, थाना करमाटांड़

बरामद सामान

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से:

7 मोबाइल फोन

9 सिम कार्ड

बरामद किए हैं।

अपराध करने का तरीका

पुलिस के अनुसार आरोपी विभिन्न तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। इनमें शामिल हैं:

गेमिंग ऐप या ऑनलाइन ऑफर के नाम पर कॉल कर झांसे में लेना

अलग-अलग बैंकों का APK फाइल डाउनलोड करवाकर बैंक खातों से पैसे निकालना

जियो कस्टमर केयर बनकर KYC अपडेट के नाम पर लोगों की निजी जानकारी लेना

ऑनलाइन रिचार्ज और फर्जी ग्राहक सेवा के माध्यम से साइबर ठगी करना

इनका नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों तक फैला हुआ बताया गया है।

दर्ज धाराएं

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट तथा टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या आवाहनानंतर महाराष्ट्र राज्य सरकारने प्रशासकीय खर्चात कपात आणि पर्यावरण संवर्धनासाठी काही महत्त्वपूर्ण निर्णय घेतले आहेत. या निर्णयामुळे राज्याच्या तिजोरीवरील भार कमी होण्यास मदत होणार आहे.
प्रमुख निर्णय:
इलेक्ट्रिक वाहनांचा वापर: सरकारी ताफ्यात आता केवळ इलेक्ट्रिक गाड्यांचाच समावेश केला जाणार आहे. यामुळे इंधनावर होणारा मोठा खर्च वाचणार असून प्रदूषणावरही नियंत्रण मिळवता येईल.
ऑनलाईन बैठकांना प्राधान्य: प्रवासाचा वेळ आणि खर्च वाचवण्यासाठी सर्व महत्त्वाच्या बैठका आता ऑनलाईन पद्धतीने घेतल्या जातील.
काॅन्स दौरा रद्द: विदेशी चलनाची बचत करण्यासाठी राज्य सरकारने आगामी 'कान्स' दौरा रद्द करण्याचा निर्णय घेतला आहे.
इंधन आणि पैसा वाचवण्यासाठी राज्य सरकार आता पूर्णपणे सज्ज झाले असून, मुख्यमंत्री आणि उपमुख्यमंत्र्यांनी या निर्णयांची कडक अंमलबजावणी करण्याचे संकेत दिले आहेत.

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IPL Playoffs की race में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही Chennai Super Kings के लिए एक और बुरी खबर आई है। Team के सबसे प्रभावी Allrounders में से एक Jamie Overton Thigh Injury के कारण England वापस लौट गए हैं, जिससे Team की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

The Inner Story / Asli Maajra:
यह Season Chennai Super Kings के लिए Injuries से भरा रहा है, और अब Allrounder Jamie Overton का चोटिल होकर वापस जाना Team के लिए एक और बड़ा setback है। Overton को Right Thigh Injury हुई है, जिसके आगे के Assessment और Management के लिए वह UK लौटेंगे। CSK ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि Jamie Overton कितने समय के लिए Team से बाहर रहेंगे या क्या वह पूरे Season के लिए बाहर हो गए हैं। लेकिन, Team के आगामी तीन League Games में उनकी वापसी की संभावना बेहद कम दिख रही है। शुक्रवार को Lucknow Super Giants के खिलाफ होने वाले Away Game से पहले यह खबर Chennai Super Kings के Management और Fans के लिए चिंता का विषय है।

Analysis & Numbers:
Jamie Overton ने इस IPL Season में Chennai Super Kings के लिए एक Gamechanger की भूमिका निभाई थी। वह Team के लिए दूसरे सबसे ज़्यादा Wickets लेने वाले Bowler हैं, जिन्होंने 14 Wickets झटके हैं। उनका Average 17.78 रहा है, हालांकि उनकी Economy Rate 18.89 बताई गई है, जो कुछ Cricket Pundits के लिए सोचने पर मजबूर करती है।
अपने पिछले Game में, जो Lucknow Super Giants के खिलाफ Chepauk में May 11 को खेला गया था, Overton ने एक Masterclass Performance दी थी। उन्होंने 3 Wickets लेकर केवल 36 Runs दिए थे और Team की पांच-Wicket की जीत में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए Player of the Match का Award जीता था। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी Team के Bowling Attack पर भारी असर डालेगी, खासकर जब Playoffs की दौड़ अपने चरम पर है। Team के समीकरण और Match Outcomes पर गहरी नज़र रखने वाले कई Cricket Observers [www.thegurugyan.com](http://www.thegurugyan.com) जैसे TRUE AI prediction platforms को देखते हैं, जो Match शुरू होने से पहले ही संभावित Endgame को समझने का confidence रखते हैं, और इस तरह की Key Player Injury उनके लिए भी एक अहम factor बनती है।

The Guru Gyan Verdict:
Chennai Super Kings के लिए यह वाकई एक मुश्किल Test है। एक के बाद एक Injuries ने उनके Playoff hopes को कमजोर किया है। Jamie Overton जैसे प्रभावशाली Player का बाहर होना Team की Depth और Resilience की असली परीक्षा लेगा। अब समय है कि Team के बाकी Players उठ खड़े हों और एक collective Masterclass Performance दें, अगर उन्हें Top 4 में अपनी जगह पक्की करनी है। यह सिर्फ एक Player की कमी नहीं, यह Team के Character का Moment है।

Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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