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श्री विश्वकर्मा जांगिड़ समाज की विश्वकर्मा सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के आवेदन शुरू, परीक्षा 26 अप्रेल को।
पाली- विश्वकर्मा युवा मित्र मंडल अहमदाबाद एवं अखिल भारतीय जांगिड ब्राह्मण महासभा युवा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में पदम ग्रुप ऑफ कंपनीज, मुंबई के आर्थिक सहयोग से विश्वकर्मा जांगिड़ समाज के लिए राज्य स्तरीय विश्वकर्मा सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है जिसके ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ हो गए हैं।

पाली जिला प्रभारी प्रवीण कुमार जांगिड़ सह प्रभारी रामदयाल किंजा ने बताया कि आवेदन करने की अंतिम तारीख 3 अप्रेल है। परीक्षा 26 अप्रेल रविवार को जिला मुख्यालय पाली पर होगी। जिसमें पाली जिले के लिए रतनचंद लोढ़ा स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।

पाली परीक्षा केंद्र अधीक्षक विजय जांगिड़ ने बताया कि परीक्षार्थियों को ओएमआर शीट पर अपने जवाब देने होंगे। परीक्षा के लिए दो ग्रुप बनाए गए हैं। जिसमें जूनियर ग्रुप में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। और सीनियर ग्रुप में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। 75% से ऊपर सभी मेरिट प्रतियोगी को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। प्रतिभागियों को प्रथम आने पर जिला स्तर पर 1100 रु से लेकर राज्य स्तर पर 31000 रु के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे । आवेदन के लिए https://vkymm.org/gk-competition-2026-registration/ लिंक पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
रिपोर्ट - घेवरचन्द आर्य
प्रचार मंत्री जांगिड़ समाज पाली

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निर्माणाधीन इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन मार्ग को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें आरसीसी ड्रेनेज निर्माण में तथाकथित “प्लास्टिक के सरिये” के उपयोग की भ्रामक जानकारी दी गई।

मामले की सच्चाई जानने के लिए Patrika Madhya Pradesh द्वारा किए गए फैक्ट-चेक में विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि निर्माण में प्लास्टिक नहीं, बल्कि ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर (GFRP) से बने आधुनिक फाइबर सरियों का उपयोग किया जा रहा है। यह उन्नत तकनीक के तहत प्रयुक्त सामग्री है, जो जंग-रोधी होने के साथ-साथ मजबूती और टिकाऊपन के मामले में पारंपरिक लोहे के सरियों की तुलना में बेहतर मानी जाती है और तथा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है।

#JansamparkMP

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ख़त्म-ए-कुरआन की मुकम्मल होने पर दुआ, क्षेत्र में खुशी का माहौल
कुशीनगर जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र अंतर्गत बरवापुर्दील स्थित जामा मस्जिद में माह-ए-रमजान के मुकद्दस महीने में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन शरीफ मुकम्मल (ख़त्म-ए-कुरआन) किया गया।
इस मौके पर मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाज़ी मौजूद रहे। तरावीह में कुरआन शरीफ सुनाने वाले हाफिज व कारी मोहम्मद अली साहब को नमाज़ियों और क्षेत्र के लोगों ने मुबारकबाद पेश की।
ख़त्म-ए-कुरआन के बाद मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए खास दुआ की गई। मस्जिद कमेटी और इलाके के लोगों ने दुआ की कि अल्लाह तआला हम सभी को कुरआन पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए।
इस अवसर पर क्षेत्र के काफी लोग मौजूद रहे और सभी ने एक-दूसरे को रमजान की बरकतों की मुबारकबाद दी।

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AIMA news
इराणवर इस्रायल आणि अमेरिका या दोन देशांनी क्षेपणास्त्र डागली आणि त्यांचे सर्वोच्च नेते अयातुल्ला खामेनी यांना ठार केलं. त्यानंतर इराण विरुद्द इस्रायल आणि अमेरिका असा युद्धाचा भडका उडाला आहे. या युद्धाचा आजचा १७ वा दिवस आहे. ज्यामुळे जगातल्या अनेक देशांमध्ये इंधन टंचाई भासते आहे.
देशभरात गॅस
सिलेंडरच्या पुरवठ्यात अडथळे निर्माण झाल्याच्या पार्श्वभूमीवर नागरिकांना अडचण होऊ नये म्हणून राज्य सरकारनं रेशनिंगवरून पुन्हा रॉकेल देण्याची घोषणा केली आहे. राज्यात रॉकेलचा पुरेसा साठा उपलब्ध असून जुन्या पद्धतीने रेशन दुकानांमधून त्याचं वितरण करण्याची योजना असल्याची माहिती अन्न व नागरी पुरवठा मंत्री छगन भुजबळ यांनी दिली.

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देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले CAPF (Central Armed Police Forces) के जवानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार ने फैसला लिया है कि अब CAPF के जवानों और उनके परिवारों को भी आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिया जाएगा। इस फैसले के बाद लाखों जवानों और उनके परिवारों को बेहतर और मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

CAPF में CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB और असम राइफल्स जैसे बल शामिल हैं। ये जवान देश की सीमाओं से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक हर मोर्चे पर तैनात रहते हैं। ऐसे में लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि इन जवानों और उनके परिवारों को भी आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलना चाहिए।

अब सरकार के इस फैसले के बाद जवानों को देशभर के पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसका मतलब है कि इलाज के समय जवान या उनके परिवार को पहले पैसे देने की जरूरत नहीं होगी।

🏥 क्या मिलेगा फायदा

• सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज
• कैशलेस इलाज की सुविधा
• गंभीर बीमारियों का भी इलाज
• जवानों के साथ उनके परिवार को भी लाभ
• पूरे भारत में पैनल अस्पतालों में सुविधा

📋 इलाज की पूरी प्रक्रिया

स्टेप 1: अस्पताल जाएं
जवान या उनका परिवार आयुष्मान कार्ड लेकर किसी भी सरकारी या पैनल अस्पताल में जा सकते हैं।

स्टेप 2: कार्ड दिखाकर इलाज शुरू
कार्ड का सत्यापन होने के बाद अस्पताल में कैशलेस इलाज शुरू हो जाएगा।

स्टेप 3: जरूरत पड़ने पर रेफरल
अगर बेहतर इलाज की जरूरत हो तो पैनल अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफरल दिया जा सकता है।

स्टेप 4: क्लेम प्रक्रिया
आपात स्थिति में गैर-पैनल अस्पताल में इलाज होने पर बिल जमा करके क्लेम किया जा सकता है।

🇮🇳 जवानों के सम्मान में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश के उन वीर जवानों के लिए सम्मान का प्रतीक है जो हर परिस्थिति में देश की सेवा करते हैं। इससे जवानों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और उनके परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि देश अपने रक्षकों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
जय हिन्द🇮🇳

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*प्रकाशनार्थ*

*पुनर्वास का केरल मॉडल*
*(साभार टिप्पणी : पीपुल्स डेमोक्रेसी, अनुवाद : संजय पराते)*

पिछले हफ्ते, केरल में एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों को 178 घर सौंपे। यह राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे टाउनशिप का पहला चरण था। जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज भी परिवारों को सौंपे गए। मानसून शुरू होने से पहले सभी पीड़ितों को जमीन और घर प्रदान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है।

आपदा के परिणामस्वरूप, एक पूरा इलाका रातोंरात गायब हो गया। लोगों ने अपने प्रियजनों को, घरों को, आजीविका को खो दिया और उन्हें विकलांगता का सामना करना पड़ा। केरल के पूरे समाज ने पीड़ितों को सहारा और सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट होकर काम किया, ताकि वे अपने जीवन को फिर से सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके साथ ही केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा अपनाए गए उच्च मानवतावादी दृष्टिकोण ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह जैविक सहयोग ही था, जिसने मुंडक्काई और चूरलमाला के लोगों की जीवित रहने की कहानी को लिखा।

*अवरोधों को पार करना*

पहली हफ्ते से ही आपदा के बाद कई अवरोध सामने आए। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के धन के उपयोग के खिलाफ झूठा प्रचार किया गया। कुछ राजनीतिक दलों ने सीएमडीआरएफ में एक पैसा भी न देने की अपील की। राज्य सरकार की सहायता और पुनर्वास के बारे में पीड़ितों को गुमराह करने के लिए सचेत प्रयास किए गए। जब राज्य सरकार ने टाउनशिप बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की, तो उन्हें अदालत में ले जाया गया। पुनर्वास परियोजना को पटरी से उतारने के लिए मीडिया में अभियान भी चलाया गया। इसके ऊपर से, अन्य आपदा प्रभावित राज्यों को सहायता देने में अत्यधिक उदार केंद्रीय सरकार ने भी पुनर्वास के लिए केरल को कोई सहायता देने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद भी, निर्माण शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों के भीतर, केरल में एलडीएफ सरकार वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पहला चरण पूरा करने में सक्षम हुई।

इन सभी अवरोधों के बीच, केरल के लोगों की एकता शुरु से ही स्पष्ट थी। केरल के सभी हिस्सों से लोग बचाव कार्यों में शामिल हुए। राहत शिविर जल्दी से स्थापित किए गए, जहां भोजन, दवाएं और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को परामर्श सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविरों में सहायता का प्रवाह हुआ। एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति के नेतृत्व में मंत्रियों ने प्रभावित स्थल पर डेरा डाला और सभी बचाव और राहत गतिविधियों की सीधे निगरानी की। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए पुतुमाला एस्टेट में एक प्लॉट में उचित व्यवस्था की गई, जिसे कुछ दिनों में अधिग्रहित कर एक श्मशान घाट स्थापित किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने शिविरों में रहने वालों को किराए के घरों और सरकारी आवासों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए, जिससे पीड़ितों को कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में वापस आने में मदद मिली।

*सहायता और सहयोग*

अनुपयोगी सरकारी आवासों की मरम्मत की गई और उन्हें उपलब्ध कराया गया। जो लोग अपनी पसंद के स्थान पर किराए पर रहना चाहते थे, उनके लिए राज्य सरकार ने किराया प्रदान किया। प्रति परिवार 6,000 रुपये आवंटित किए गए, जिसमें अब तक 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। 858 परिवारों को प्रति माह 1,000 रुपये के खाद्य कूपन भी प्रदान किए गए। आजीविका खोने वाले पीड़ितों को प्रति दिन 300 रूपये के हिसाब से प्रति माह 9,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई। इस मद में अभी तक कुल 17.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 13 करोड़ रुपये राहत सहायता के रूप में और 1.3 करोड़ रुपये आपातकालीन सहायता के रूप में वितरित किए गए हैं। आपदा में माता-पिता दोनों को खोने वाले 21 बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन लोगों को मदद करने से रोकने के सभी प्रयासों के बावजूद, सीएमडीआरएफ में अभूतपूर्व सहायता का प्रवाह हुआ। वायनाड आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए विशेष रूप से 773.98 करोड़ रुपये दान किए गए। सभी क्षेत्रों के संगठनों और व्यक्तियों ने मदद का हाथ बढ़ाया। यहां तक कि, कुछ अन्य राज्य सरकारें भी केरल की मदद के लिए आगे आईं। केरल में एलडीएफ सरकार ने वायनाड भूस्खलन के 555 पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के बकाए ऋण को पूरी तरह से माफ कर दिया। इसका मतलब 1,620 ऋणों को माफ करना था। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा पीड़ितों के ऋण माफ करने के लिए कई बार अनुरोध किया था, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद केरल की राज्य सरकार ने यह किया गया।

*भूमि अधिग्रहण और निर्माण*

जब पीड़ितों के पुनर्वास की बात आई, तो एलडीएफ सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से व्यापक समाज से राय हासिल किया। सबसे पहले यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि नए घर सुरक्षित स्थान पर हों, जहां पीड़ित एक साथ रह सकें और अपनी आजीविका चला सकें। शुरुआत में वायनाड जिले में 31 स्थानों पर जमीन की पहचान की गई। इसे आगे 9 स्थानों का अंतिम रूप से चयन किया गया। अंत में, पीड़ितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, नेडुम्बाला एस्टेट और एल्स्टन एस्टेट को अधिग्रहित करने का फैसला किया गया। बाद में, 410 परिवारों को एल्स्टन एस्टेट में प्रति परिवार सात सेंट (लगभग 3050 वर्ग फीट) जमीन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के साथ एक टाउनशिप में पुनर्वास किया जाना सुनिश्चित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी आदेश अक्टूबर 2024 में जारी किया गया था। नवंबर 2024 में, पहले चरण में लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच, भूमि अधिग्रहण में कानूनी विवाद के कारण देरी हुई। उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद, जमीन के मूल्यांकन और सर्वेक्षण की प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की गई। अप्रैल 2025 में, अदालत में 44.33 करोड़ रुपये जमा करके एक ही दिन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई। टाउनशिप का निर्माण भी तुरंत शुरू हो गया।

टाउनशिप का निर्माण उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (यूएलसीसीएस) ने किया था। यूएलसीसीएस की स्थापना 100 साल पहले वाग्भटानंदन, जो पुनर्जागरण के नेता थे, के नेतृत्व में मजदूरों को वेतन गुलामी से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। गर्मियों की बारिश और मानसून की चुनौतियों के बावजूद, टाउनशिप का निर्माण आगे बढ़ा और रिकॉर्ड 10 महीनों में पूरा हुआ। आज वायनाड पुनर्वास टाउनशिप एक वास्तविकता है, जो हजारों निर्माण मजदूरों और अधिकारियों की मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने योजनाबद्ध होकर और अनुशासन के साथ काम किया है।

*टाउनशिप*

घरों के साथ-साथ, सामुदायिक हॉल, फुटबॉल मैदान, दुकानें, सामग्री संग्रह सुविधा, जलाशय, 9.5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, जल निकासी प्रणाली, मलजल उपचार संयंत्र, प्रत्येक घर में 2 केवी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र, भूमिगत बिजली वितरण नेटवर्क, आपदा आश्रय और एक आपदा स्मारक जैसी सार्वजनिक सुविधाएं हैं। 5 क्षेत्रों में डिज़ाइन की गई टाउनशिप 35 समूहों में बसाई गई है। प्रत्येक समूह में 8 से 20 घर हैं। प्रत्येक समूह में एक विशाल हरा बगीचा है। साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क इस बगीचे को घेरती है। प्रत्येक समूह के घर उस सड़क का सामना करते हुए बनाए गए हैं। यह बगीचा बड़े लोगों के इकत्र होने, बच्चों के खेलने और यदि चाहें तो एक छोटे रसोई बगीचे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। टाउनशिप में बनाए गए हर घर के लिए आवश्यक फर्नीचर प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।

'बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण' वह लक्ष्य था, जिसने टाउनशिप के निर्माण के दौरान एलडीएफ सरकार का मार्गदर्शन किया। इसलिए, घरों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए किया गया था। प्रत्येक घर 9 कंक्रीट दीवारों के साथ बनाया गया है, जो 90 सेंटीमीटर चौड़ी हैं। इसके अलावा, डेढ़ फीट ऊंचाई वाले बीम, प्लिंथ बीम और छत बीम जमीन के स्तर और छत के स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इसलिए, हालांकि ये घर वर्तमान में एक मंजिला हैं, आवश्यकता होने पर ऊपर और मंजिलें बनाई जा सकती हैं। निर्माण के हर चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है, जिसमें निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का परीक्षण निर्माण स्थल पर ही स्थापित एक प्रयोगशाला में किया गया है। इसके अलावा, निर्माण सामग्री का परीक्षण एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा भी किया गया था। प्रत्येक घर के पूरा होने से पहले 58 प्रकार के निरीक्षण किए गए थे। निर्माण मानकों को पूरा करने के लिए प्रत्येक निर्माण चरण से पहले और बाद में निरीक्षण किए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण उत्तीर्ण होने के बाद ही निर्माण अगले चरण में आगे बढ़ा है।

एलडीएफ सरकार ने पीड़ितों को पुनर्वास के दो विकल्प दिए थे। वे या तो टाउनशिप में एक घर ले सकते थे, या 15 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकार कर सकते थे। अधिकांश परिवारों ने वायनाड पुनर्वास टाउनशिप में एक घर चुनना पसंद किया। टाउनशिप के पहले चरण में, जिनके घर भूस्खलन में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, उन्हें घर दिए गए हैं। आपदा में अपना व्यवसाय खोने वाले उद्यमियों के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी उनकी सलाहों को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, जब वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पूरी तरह से काम पूरा हो जाएगा, तो 402 परिवारों के 1,662 लोग वहां रहेंगे। एलडीएफ सरकार ने एक सुरक्षित स्थान बनाया है, जहां लोग अवर्णनीय दुखों को पार करते हुए सामंजस्य से रह सकते हैं। पुनर्वास का यह केरल मॉडल, वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार की उपेक्षा के बावजूद एक राज्य सरकार द्वारा इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।f*पुनर्वास का केरल मॉडल*

पिछले हफ्ते, केरल में एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों को 178 घर सौंपे। यह राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे टाउनशिप का पहला चरण था। जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज भी परिवारों को सौंपे गए। मानसून शुरू होने से पहले सभी पीड़ितों को जमीन और घर प्रदान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है।

आपदा के परिणामस्वरूप, एक पूरा इलाका रातोंरात गायब हो गया। लोगों ने अपने प्रियजनों को, घरों को, आजीविका को खो दिया और उन्हें विकलांगता का सामना करना पड़ा। केरल के पूरे समाज ने पीड़ितों को सहारा और सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट होकर काम किया, ताकि वे अपने जीवन को फिर से सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके साथ ही केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा अपनाए गए उच्च मानवतावादी दृष्टिकोण ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह जैविक सहयोग ही था, जिसने मुंडक्काई और चूरलमाला के लोगों की जीवित रहने की कहानी को लिखा।

*अवरोधों को पार करना*

पहली हफ्ते से ही आपदा के बाद कई अवरोध सामने आए। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के धन के उपयोग के खिलाफ झूठा प्रचार किया गया। कुछ राजनीतिक दलों ने सीएमडीआरएफ में एक पैसा भी न देने की अपील की। राज्य सरकार की सहायता और पुनर्वास के बारे में पीड़ितों को गुमराह करने के लिए सचेत प्रयास किए गए। जब राज्य सरकार ने टाउनशिप बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की, तो उन्हें अदालत में ले जाया गया। पुनर्वास परियोजना को पटरी से उतारने के लिए मीडिया में अभियान भी चलाया गया। इसके ऊपर से, अन्य आपदा प्रभावित राज्यों को सहायता देने में अत्यधिक उदार केंद्रीय सरकार ने भी पुनर्वास के लिए केरल को कोई सहायता देने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद भी, निर्माण शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों के भीतर, केरल में एलडीएफ सरकार वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पहला चरण पूरा करने में सक्षम हुई।

इन सभी अवरोधों के बीच, केरल के लोगों की एकता शुरु से ही स्पष्ट थी। केरल के सभी हिस्सों से लोग बचाव कार्यों में शामिल हुए। राहत शिविर जल्दी से स्थापित किए गए, जहां भोजन, दवाएं और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को परामर्श सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविरों में सहायता का प्रवाह हुआ। एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति के नेतृत्व में मंत्रियों ने प्रभावित स्थल पर डेरा डाला और सभी बचाव और राहत गतिविधियों की सीधे निगरानी की। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए पुतुमाला एस्टेट में एक प्लॉट में उचित व्यवस्था की गई, जिसे कुछ दिनों में अधिग्रहित कर एक श्मशान घाट स्थापित किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने शिविरों में रहने वालों को किराए के घरों और सरकारी आवासों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए, जिससे पीड़ितों को कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में वापस आने में मदद मिली।

*सहायता और सहयोग*

अनुपयोगी सरकारी आवासों की मरम्मत की गई और उन्हें उपलब्ध कराया गया। जो लोग अपनी पसंद के स्थान पर किराए पर रहना चाहते थे, उनके लिए राज्य सरकार ने किराया प्रदान किया। प्रति परिवार 6,000 रुपये आवंटित किए गए, जिसमें अब तक 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। 858 परिवारों को प्रति माह 1,000 रुपये के खाद्य कूपन भी प्रदान किए गए। आजीविका खोने वाले पीड़ितों को प्रति दिन 300 रूपये के हिसाब से प्रति माह 9,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई। इस मद में अभी तक कुल 17.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 13 करोड़ रुपये राहत सहायता के रूप में और 1.3 करोड़ रुपये आपातकालीन सहायता के रूप में वितरित किए गए हैं। आपदा में माता-पिता दोनों को खोने वाले 21 बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन लोगों को मदद करने से रोकने के सभी प्रयासों के बावजूद, सीएमडीआरएफ में अभूतपूर्व सहायता का प्रवाह हुआ। वायनाड आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए विशेष रूप से 773.98 करोड़ रुपये दान किए गए। सभी क्षेत्रों के संगठनों और व्यक्तियों ने मदद का हाथ बढ़ाया। यहां तक कि, कुछ अन्य राज्य सरकारें भी केरल की मदद के लिए आगे आईं। केरल में एलडीएफ सरकार ने वायनाड भूस्खलन के 555 पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के बकाए ऋण को पूरी तरह से माफ कर दिया। इसका मतलब 1,620 ऋणों को माफ करना था। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा पीड़ितों के ऋण माफ करने के लिए कई बार अनुरोध किया था, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद केरल की राज्य सरकार ने यह किया गया।

*भूमि अधिग्रहण और निर्माण*

जब पीड़ितों के पुनर्वास की बात आई, तो एलडीएफ सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से व्यापक समाज से राय हासिल किया। सबसे पहले यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि नए घर सुरक्षित स्थान पर हों, जहां पीड़ित एक साथ रह सकें और अपनी आजीविका चला सकें। शुरुआत में वायनाड जिले में 31 स्थानों पर जमीन की पहचान की गई। इसे आगे 9 स्थानों का अंतिम रूप से चयन किया गया। अंत में, पीड़ितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, नेडुम्बाला एस्टेट और एल्स्टन एस्टेट को अधिग्रहित करने का फैसला किया गया। बाद में, 410 परिवारों को एल्स्टन एस्टेट में प्रति परिवार सात सेंट (लगभग 3050 वर्ग फीट) जमीन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के साथ एक टाउनशिप में पुनर्वास किया जाना सुनिश्चित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी आदेश अक्टूबर 2024 में जारी किया गया था। नवंबर 2024 में, पहले चरण में लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच, भूमि अधिग्रहण में कानूनी विवाद के कारण देरी हुई। उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद, जमीन के मूल्यांकन और सर्वेक्षण की प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की गई। अप्रैल 2025 में, अदालत में 44.33 करोड़ रुपये जमा करके एक ही दिन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई। टाउनशिप का निर्माण भी तुरंत शुरू हो गया।

टाउनशिप का निर्माण उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (यूएलसीसीएस) ने किया था। यूएलसीसीएस की स्थापना 100 साल पहले वाग्भटानंदन, जो पुनर्जागरण के नेता थे, के नेतृत्व में मजदूरों को वेतन गुलामी से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। गर्मियों की बारिश और मानसून की चुनौतियों के बावजूद, टाउनशिप का निर्माण आगे बढ़ा और रिकॉर्ड 10 महीनों में पूरा हुआ। आज वायनाड पुनर्वास टाउनशिप एक वास्तविकता है, जो हजारों निर्माण मजदूरों और अधिकारियों की मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने योजनाबद्ध होकर और अनुशासन के साथ काम किया है।

*टाउनशिप*

घरों के साथ-साथ, सामुदायिक हॉल, फुटबॉल मैदान, दुकानें, सामग्री संग्रह सुविधा, जलाशय, 9.5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, जल निकासी प्रणाली, मलजल उपचार संयंत्र, प्रत्येक घर में 2 केवी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र, भूमिगत बिजली वितरण नेटवर्क, आपदा आश्रय और एक आपदा स्मारक जैसी सार्वजनिक सुविधाएं हैं। 5 क्षेत्रों में डिज़ाइन की गई टाउनशिप 35 समूहों में बसाई गई है। प्रत्येक समूह में 8 से 20 घर हैं। प्रत्येक समूह में एक विशाल हरा बगीचा है। साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क इस बगीचे को घेरती है। प्रत्येक समूह के घर उस सड़क का सामना करते हुए बनाए गए हैं। यह बगीचा बड़े लोगों के इकत्र होने, बच्चों के खेलने और यदि चाहें तो एक छोटे रसोई बगीचे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। टाउनशिप में बनाए गए हर घर के लिए आवश्यक फर्नीचर प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।

'बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण' वह लक्ष्य था, जिसने टाउनशिप के निर्माण के दौरान एलडीएफ सरकार का मार्गदर्शन किया। इसलिए, घरों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए किया गया था। प्रत्येक घर 9 कंक्रीट दीवारों के साथ बनाया गया है, जो 90 सेंटीमीटर चौड़ी हैं। इसके अलावा, डेढ़ फीट ऊंचाई वाले बीम, प्लिंथ बीम और छत बीम जमीन के स्तर और छत के स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इसलिए, हालांकि ये घर वर्तमान में एक मंजिला हैं, आवश्यकता होने पर ऊपर और मंजिलें बनाई जा सकती हैं। निर्माण के हर चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है, जिसमें निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का परीक्षण निर्माण स्थल पर ही स्थापित एक प्रयोगशाला में किया गया है। इसके अलावा, निर्माण सामग्री का परीक्षण एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा भी किया गया था। प्रत्येक घर के पूरा होने से पहले 58 प्रकार के निरीक्षण किए गए थे। निर्माण मानकों को पूरा करने के लिए प्रत्येक निर्माण चरण से पहले और बाद में निरीक्षण किए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण उत्तीर्ण होने के बाद ही निर्माण अगले चरण में आगे बढ़ा है।

एलडीएफ सरकार ने पीड़ितों को पुनर्वास के दो विकल्प दिए थे। वे या तो टाउनशिप में एक घर ले सकते थे, या 15 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकार कर सकते थे। अधिकांश परिवारों ने वायनाड पुनर्वास टाउनशिप में एक घर चुनना पसंद किया। टाउनशिप के पहले चरण में, जिनके घर भूस्खलन में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, उन्हें घर दिए गए हैं। आपदा में अपना व्यवसाय खोने वाले उद्यमियों के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी उनकी सलाह को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, जब वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पूरी तरह से काम पूरा हो जाएगा, तो 402 परिवारों के 1,662 लोग वहां रहेंगे। एलडीएफ सरकार ने एक सुरक्षित स्थान बनाया है, जहां लोग अवर्णनीय दुखों को पार करते हुए सामंजस्य से रह सकते हैं। पुनर्वास का यह केरल मॉडल, वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार की उपेक्षा के बावजूद एक राज्य सरकार द्वारा इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

*(अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)*

Devashish Govind Tokekar
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🙏*जय भीम, जय शिवराय, जय लहुजी,* *जय आदिवासी* 🙏
*भ्रष्ट अधिकाऱ्यांनो कान उघडे ठेवा — गोरगरिबांच्या घरकुलाच्या पैशावर* *डल्ला मारणाऱ्यांचा आता पँथर* *पद्धतीने पर्दाफाश होणार*

✍️ *लेखक, पत्रकार, पॅंथर चंद्रकांत जगधने*

राहुरी तालुका आणि संपूर्ण नगर जिल्ह्यातील गोरगरीब, कष्टकरी आणि सर्वसामान्य जनतेला एक स्पष्ट आणि थेट संदेश देण्याची वेळ आली आहे. शासन गरीबांसाठी घरकुल योजना आणि विविध कल्याणकारी योजना राबवत आहे, जेणेकरून ज्यांच्याकडे स्वतःचे घर नाही अशा कुटुंबांना किमान एक सुरक्षित छप्पर मिळावे. पण दुर्दैवाची बाब म्हणजे काही ठिकाणी या योजनांभोवती भ्रष्टाचाराची साखळी तयार झाल्याच्या तक्रारी सातत्याने ऐकू येत आहेत. गरीब माणूस घरकुलाचा चेक मिळावा म्हणून सरकारी कार्यालयांचे उंबरठे झिजवतो, पण काही ठिकाणी त्याला सरळ सांगितले जाते की “काम करायचे असेल तर काहीतरी द्यावे लागेल.” ही भाषा लोकशाहीला शोभणारी नाही आणि ही परिस्थिती आता सहन केली जाणार नाही.
आज अनेक गावांमध्ये असा प्रकार ऐकायला मिळत आहे की नागरिक घरकुलाचा चेक सोडण्यासाठी थेट अधिकाऱ्यांना भेटतात, काही ठिकाणी मध्यस्थ लोक पुढे येतात, तर काही ठिकाणी ग्रामपंचायत कार्यालयातील काही कर्मचारी देखील यात सहभागी असल्याच्या चर्चा आहेत. लोकांना सांगितले जाते की “ *वर साहेबांना काहीतरी चिरीमिरी* *द्यावी लागेल, तेव्हा फाईल* *पुढे* *जाईल”, “थोडे पैसे दिले तर* *चेक लगेच सोडतो”, “* *चेक पास करून देतो पण* *त्यातून आमचा* *हिस्सा द्या.”* अशा प्रकारच्या बोलण्यामुळे गोरगरीब जनतेची मोठ्या प्रमाणात लूट होत असल्याची भावना लोकांमध्ये निर्माण होत आहे. गरीब माणूस कर्ज काढून घराचे काम सुरू करतो, आणि त्याच वेळी त्याला सांगितले जाते की अजून पैसे द्या, तेव्हा शासनाचा पैसा मिळेल. हा प्रकार केवळ भ्रष्टाचार नाही तर गरीबांच्या स्वप्नांवर केलेला घाला आहे.
यामध्ये केवळ एखादा अधिकारी किंवा कर्मचारी नाही, तर काही ठिकाणी एक साखळी तयार झाल्याची चर्चा लोकांमध्ये आहे — ग्रामपंचायत कार्यालयापासून ते छोट्या कर्मचाऱ्यांपर्यंत आणि मध्यस्थांपर्यंत. कोणीतरी नागरिकांना सांगतो की वर पैसे द्यावे लागतात, कोणीतरी फाईल अडवतो, तर कोणीतरी मध्यस्थ बनून व्यवहार करण्याचा प्रयत्न करतो. या सगळ्या प्रकारामुळे गोरगरीब नागरिकांच्या मनात भीती निर्माण होते. “पैसे दिले नाहीत तर काम अडेल का?” “घरकुलाचा चेक मिळणार नाही का?” अशा प्रश्नांनी गरीब माणूस त्रस्त होतो. ही परिस्थिती बदललीच पाहिजे.
शासनाने दिलेला पैसा हा गरीबांच्या घरासाठी आहे. तो कोणाच्याही खिशासाठी नाही. गोरगरीब माणूस दिवसभर मजुरी करून, संसार सांभाळून, कधी कर्ज काढून आपले छोटेसे घर उभे करण्याचा प्रयत्न करतो. त्या घराच्या पैशावर जर कोणी दलाली करण्याचा प्रयत्न करत असेल, तर तो प्रकार अन्यायकारक आहे. अशा प्रकाराला आता जनतेने ठामपणे विरोध करायला हवा.
मी पॅंथर पत्रकार चंद्रकांत जगधने राहुरी तालुका आणि नगर जिल्ह्यातील जनतेला स्पष्ट सांगू इच्छितो अन्याय सहन करू नका. भीतीत राहू नका. जर कोणताही अधिकारी, कर्मचारी, मध्यस्थ किंवा ग्रामपंचायत कार्यालयातील कोणताही व्यक्ती तुमच्याकडून घरकुलाचा चेक सोडण्यासाठी किंवा कोणतेही सरकारी काम करण्यासाठी पैसे मागत असेल, तर तो प्रकार लपवू नका.
बिनधास्त मला फोन करा.
तुम्ही एकटे नाही. गोरगरिबांच्या हक्कासाठी आवाज उठवणारे लोक तुमच्या पाठीशी उभे आहेत. तुम्ही माहिती दिली तर त्या प्रकाराचा पाठपुरावा केला जाईल. चुकीचे वागणाऱ्यांना प्रश्न विचारले जातील. गरीबांची लूट करणाऱ्यांना जनतेसमोर उभे केले जाईल.
आज वेळ आली आहे की जनता स्वतःच्या हक्कासाठी उभी राहील. सरकारी योजना या जनतेच्या आहेत. त्या मिळवण्यासाठी कोणालाही लाच देण्याची गरज नाही. *जर कोणी “वर साहेबांना* *द्यावे लागेल”, “* *फाईल पुढे न्यायची असेल तर पैसे द्या* ”, “ *चेक सोडायचा असेल तर* *हिस्सा* *द्या”* असे बोलत असेल, तर तो प्रकार चुकीचा आहे आणि त्याला थांबवणे गरजेचे आहे. राहुरी तालुका आणि नगर जिल्ह्यातील गोरगरीब जनतेने आता धैर्याने पुढे येण्याची गरज आहे. भ्रष्टाचाराविरुद्ध आवाज उठवणे हा गुन्हा नाही, तो लोकशाहीचा अधिकार आहे. गरीबांची लूट करणाऱ्यांना आता भीती वाटली पाहिजे, गरीबांना नाही.
म्हणून पुन्हा एकदा स्पष्ट सांगतो
जर कोणताही अधिकारी, कर्मचारी किंवा मध्यस्थ तुमच्याकडून पैसे मागत असेल तर बिनधास्त मला फोन करा आणि त्या प्रकाराची माहिती द्या. आपण सर्वजण मिळून अशा प्रकारांना थांबवू आणि गोरगरिबांच्या हक्कासाठी लढू.
गोरगरिबांच्या घरकुलाच्या पैशावर डल्ला मारणाऱ्यांनी हे लक्षात ठेवावे
जनतेचा आवाज दाबता येत नाही.
अन्याय जास्त काळ लपून राहत नाही.गोरगरिबांची लूट करणाऱ्यांचा पर्दाफाश होणारच.

*लेखक :*
*पॅंथर पत्रकार चंद्रकांत जगधने*
( *गोरगरिबांच्या हक्कासाठी लढणारा आवाज* )
*मो. 7823089822*

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*राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी किसान सभेचे प्रदेशाध्यक्ष ॲड. वसंतराव मनकर यांनी घेतला भंडारा जिल्हयातील किसान सभेचा आढावा*

विलास केजरकर भंडारा

भंडारा:- दिनांक १६ मार्च २०२६ रोज सोमवार ला राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी किसान सभेचे प्रदेशाध्यक्ष श्री. ॲड. वसंतराव मनकर यांचे भंडारा जिल्हा राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टीचे कार्यालय तिलक वार्ड, भंडारा येथे भंडारा जिल्हयातील किसानसभेचा आढावा घेतला व त्यावेळी सभेमध्ये आलेल्या शेतकऱ्यांच्या समस्या जाणून घेतल्या. तसेच शेतकऱ्यांच्या समस्या सोडविण्याचे आश्वासन दिले. यावेळी महाराष्ट्र राज्याचे दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार यांच्या प्रतिमेला पुष्पहार अर्पण करून श्रद्धांजली देण्यात आली.
याप्रसंगी प्रदेश महासचिव श्री. धनंजय दलाल यांनी भंडारा जिल्हयातील प्रकल्पांबद्दल व त्यावर अवलंबून असलेल्या शेतीची माहिती दिली. त्यांच्या सोबत आलेले विदर्भ किसानसभा अध्यक्ष जगदीश जुनगरी यांनी या किसान सभेमध्ये जिल्हयातील शेतकऱ्यांच्या विविध समस्या सांगितल्या. तसेच किसानसभेच्या अध्यक्षांनी जिल्हयातील शेतकऱ्यांच्या अडचणी सांगितल्या व सध्या धान खरेदी बंद असून त्यांनी धान खरेदी केंद्र लवकरात लवकर सुरु करण्याची मागणी केली.
राज्यसभा सदस्य. श्री. प्रफुल पटेल व राष्ट्रीय सचिव श्री. राजेंद्र जैन यांच्या सुचनेनुसार किसान सभेच्या प्रदेशाध्यक्ष ॲड. वसंतराव मनकर, प्रदेश महासचिव श्री. धनंजय दलाल व किसानसभेचे जिल्हाध्यक्ष धनराज चौधरी यांच्या हस्ते किसानसभेचे नवनियुक्त भंडारा किसान सभेचे तालुका योगराज येलमुले, तुमसर किसानसभेचे तालुका अध्यक्ष रवि सार्वे, मोहाडी किसानसभेचे तालुका अध्यक्ष विष्णू भोयर, पवनी किसानसभेचे तालुका अध्यक्ष मोरेश्वर बाळबुध्दे यांना नियुक्तीपत्र देवून स्वागत करण्यात आले. पुढील वाटचालीकरीता शुभेच्छा देण्यात आल्या.
याप्रसंगी उपस्थितांमध्ये महिला जिल्हाध्यक्ष सरिताताई मदनकर, किसान सभेचे संपर्कप्रमुख डॉ. गणेश डोंगरे, विधानसभा अध्यक्ष देवचंद ठाकरे, पवनी तालुका अध्यक्ष विजय सावरबांधे, तुमसर तालुका अध्यक्ष उमेश तुरकर, भंडारा तालुका अध्यक्ष नरेंद्र झंझाड, हेमंत महाकाळकर, शेखर (बाळाभाऊ) गभने, अन्नाजी टिचकुले, नरेश येवले, विजय खेडीकर, सौ. किर्ती गणविर, सौ. मंजुषा बुरडे, आरजु मेश्राम, सिताराम चौधरी, महेंद्र वाहाने, गजानन आजबले, सुकदेव राहांगडाले, ताराचंद्र कहालकर, नरेंद्र ठाकरे, ईश्वरदयाल गिरीपुंजे, सुनिल भोपे, राजेश लांजेवार, राधेश्याम चोपकर, अंकुश चुटे, सुरेश मोहतुरे, हेमराज बोरकर, सलमान शेख, जयश्री मेश्राम, रेखा मेंढे, छोटू बाळबुध्दे व इतर पदाधिकारी उपस्थित होते. कार्यक्रमाचे संचालन श्री. देवचंद ठाकरे व आभार प्रदर्शन नरेंद्र झंझाड यांनी केले.

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పాణ్యం (పAIMA MEDIA): ప్రముఖ శైవక్షేత్రం పాణ్యం మండలం ఎస్.కొత్తూరు గ్రామంలో వెలిసిన శ్రీ సుబ్రహ్మణ్యేశ్వర స్వామి దేవస్థానం యొక్క ఉగాది బ్రహ్మోత్సవ ఆహ్వాన పత్రికను పాణ్యం ఎమ్మెల్యే గౌరు చరితారెడ్డి, నందికొట్కూరు టిడిపి ఇన్చార్జి వెంకటరెడ్డిలు సోమవారం ఆవిష్కరించారు. ఆలయ కార్యనిర్వహణ అధికారి యం.రామక్రిష్ణ, ఉగాది ఉత్సవ కమిటీ అధ్యక్షులు మిలిటరీ సుబ్బారెడ్డి, ప్రధాన అర్చకులు సురేష్ శర్మ సిబ్బంది మొదటిగా కర్నూలు లోని ఎమ్మెల్యే వారి స్వగృహ కార్యాలయము నందు మర్యాదపూర్వకంగా కలిసి స్వామివారి శేష వస్త్రములు, శాలువా, పూలమాలతో ఘనంగా సత్కరించారు. అనంతరం మార్చి 19 నుండి 21 వరకు జరుగు ఉగాది బ్రహ్మోత్సవాలకు ఆహ్వానించి ఎమ్మెల్యే దంపతుల చేతుల మీదుగా సుబ్రహ్మణ్యేశ్వర స్వామి బ్రహ్మోత్సవ ఆహ్వాన పత్రికను ఆవిష్కరించారు. ఈ సందర్భంగా ఎమ్మెల్యే మాట్లాడుతూ కొత్తూరు సుబ్బారాయుని ఉగాది బ్రహ్మోత్సవముల యందు అధిక సంఖ్యలో భక్తులు పాల్గొని విజయవంతం చేయాలని కోరారు.

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डॉ. वीरेश कुमार सिंह का प्रेरणादायक की कलम से एक संमुख सन्देश.................

समाज में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और लोगों के हित के लिए सोचते और कार्य करते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्वों में एक नाम डॉ. वीरेश कुमार सिंह का भी है, जो लोगों के बीच रहकर उनके सुख-दुख को समझने और समाज में सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं।
आज के दौर में जहां अधिकतर लोग अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं, वहीं डॉ. वीरेश कुमार सिंह का मानना है कि समाज के बीच रहकर लोगों की भावनाओं को समझना और उनके अनुभवों को साझा करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। उनका विचार है कि समाज की सच्ची सेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, सहयोग और कर्मों से होती है।
जब कोई व्यक्ति समाज के बीच जाकर लोगों की समस्याओं को सुनता है, उनके दुख-सुख में सहभागी बनता है, तब उसे जीवन की वास्तविकताओं का अनुभव होता है। यही अनुभव व्यक्ति को और अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और जागरूक बनाते हैं। डॉ. वीरेश कुमार सिंह भी इसी सोच के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से जुड़े रहते हैं और उन्हें सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं।
उनका मानना है कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए सबसे जरूरी है कि लोग एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करें। संवाद और लेखन इसके सबसे प्रभावी माध्यम हैं। जब कोई व्यक्ति अपने अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करता है, तो वह केवल अपनी कहानी नहीं सुनाता, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन जाता है।
डॉ. वीरेश कुमार सिंह हमेशा यह प्रयास करते हैं कि अपने विचारों और अनुभवों को लोगों के सामने इस प्रकार प्रस्तुत करें कि उससे समाज में जागरूकता बढ़े और लोगों के बीच भाईचारा तथा सहयोग की भावना मजबूत हो। उनका विश्वास है कि छोटी-छोटी सकारात्मक पहल भी समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकती हैं।
आज समाज को ऐसे ही जागरूक और संवेदनशील व्यक्तित्वों की आवश्यकता है, जो केवल अपने हित तक सीमित न रहकर समाज और मानवता के व्यापक हित के बारे में सोचें। यदि हर व्यक्ति अपने अनुभवों और सकारात्मक विचारों को साझा करे, तो निश्चित रूप से समाज में एक नई ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
डॉ. वीरेश कुमार सिंह का उद्देश्य भी यही है कि वे लोगों के बीच रहकर उनकी भावनाओं को समझें, अपने अनुभवों को साझा करें और समाज में सहयोग, विश्वास तथा विकास की भावना को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाते रहें। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से आने वाले समय में समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा |

मीडिया प्रभारी: देव ठाकुर बिल्सी (बदायूं)

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वाराणसी, 16 मार्च । उत्तर प्रदेश के वाराणसी कचहरी स्थित कमिश्नरी सभागार में सोमवार को आयोजित एक समारोह में मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष लालचंद चौबे, महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण की और अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मंडलायुक्त ने सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारी अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ न्यायिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में सकारात्मक सहयोग प्रदान करेंगे।

मंडलायुक्त ने स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं के रोल को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद महत्वपूर्ण पदों पर भी अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने केशवानंद भारती समेत देश की न्याय व्यवस्था में पीआईएल की शुरुआत पर भी प्रकाश डालते हुए अधिवक्ताओं के रोल को रेखांकित किया।


अपर आयुक्त विवेक कुमार ने कार्यक्रम में निर्वाचित सभी लोगों को बधाई देते हुए विधि सम्मत कार्य में सभी को सहयोग करने के लिए अपील किया। उन्होंने वादकारियों को सुगम न्याय दिलाने में सभी के सहयोग की अपेक्षा की। कार्यक्रम में उपायुक्त खाद्य ओमप्रकाश पटेल, सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश सहित बार एसोसिएशन के सदस्य, अधिवक्ता गण तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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प्रतापगढ़ जिले के अंतू थाना क्षेत्र के पारा हमीदपुर गांव में सोमवार रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। निर्माणाधीन मकान में रह रही महिला और उसके 13 वर्षीय बेटे की अज्ञात हमलावरों ने सिर कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतका की पहचान शिवपति (40) के रूप में हुई है, जो अपने 13 वर्षीय बेटे औरम मौर्य के साथ घर पर रहकर खेतीबाड़ी करती थी। बताया जा रहा है कि परिवार का निर्माणाधीन मकान बन रहा था, जिसमें मां-बेटा रह रहे थे। देर रात अज्ञात हमलावरों ने दोनों पर हमला कर दिया और सिर कुचलकर हत्या कर दी।
मृतका की तीन बेटियां रुचि, रूबी और अंशिका मौर्य शहर में रहकर नौकरी के साथ पढ़ाई कर रही हैं, जबकि पति दिनेश मौर्य मुंबई में रहकर काम करते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल पहुंच गया। सदर विधायक राजेंद्र मौर्य भी घटनास्थल पर पहुंचे और इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर, सीओ सिटी प्रशांत इंदु, और अंतू थाना प्रभारी अभिषेक सिरोही ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और जल्द ही घटना का खुलासा करने का दावा कर रही है।

गोविंद राज
प्रतापगढ़

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नई दिल्ली/मुंद्रा: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच भारतीय कूटनीति और सैन्य शक्ति की एक बड़ी जीत सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे भारतीय तेल और गैस जहाजों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना ने मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में, आज भारत का पहला बड़ा LPG जहाज 'शिवालिक' सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है।
​नौसेना के दो युद्धपोत तैनात, 'ऑपरेशन संकल्प' तेज
​सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने होर्मुज के पास अपने दो शक्तिशाली युद्धपोत तैनात किए हैं। ये युद्धपोत भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षा घेरा (Escort) प्रदान कर रहे हैं। भारतीय नौसेना का यह 'ऑपरेशन संकल्प' अब और भी सक्रिय हो गया है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए।
​लाखों घरों के लिए राहत: 16 मार्च को पहुंचा 'शिवालिक'
​सोमवार, 16 मार्च की शाम को मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डालने वाला जहाज 'शिवालिक' अपने साथ करीब 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खेप से देश के करीब 32 लाख घरेलू सिलेंडरों की जरूरत पूरी हो सकेगी।
​बड़ी खबर: एक और महत्वपूर्ण जहाज 'नंदा देवी' के भी आज (17 मार्च) देर शाम तक कांडला पोर्ट पहुंचने की पूरी संभावना है।
​प्रधानमंत्री की कूटनीति का असर
​यह सफलता केवल सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय कूटनीति से भी मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद ही भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित हो पाया है। हालांकि, अभी भी करीब 22 भारतीय जहाज खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना और विदेश मंत्रालय लगातार संपर्क में हैं।
​ब्यूरो रिपोर्ट: AIMA MEDIA सच्ची खबर, सटीक विश्लेषण।

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वाराणसी। उच्च शिक्षा से जुड़े प्रस्तावित University Grants Commission (UGC) के वर्ष 2026 के नियमों के विरोध में सोमवार को काशी में जन आक्रोश देखने को मिला। सामाजिक संगठन Kesariya Bharat के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और युवाओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन की शुरुआत वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट से हुई, जहां बड़ी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसके बाद संगठन के राष्ट्रीय संयोजक Krishnanand Pandey के नेतृत्व में जुलूस कचहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन देने की तैयारी भी की।काला कानून’ बताकर वापस लेने की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि यूजीसी के नए प्रस्तावित नियम छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं। प्रदर्शन के दौरान युवाओं, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से इस कथित ‘काला कानून’ को तत्काल वापस लेने की मांग की।

राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानंद पाण्डेय ने कहा कि संगठन पहले भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज करा चुका है। उन्होंने बताया कि 27, 28 और 29 जनवरी को भी संगठन की ओर से विरोध-प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद मामले में Supreme Court of India द्वारा स्थगन आदेश दिया गया था।उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक यह कानून पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनके अनुसार, छात्र, युवा और किसान मिलकर इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे।

अधिवक्ताओं और युवाओं ने किया समर्थन
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता और युवा भी शामिल हुए। इस दौरान यूजीसी नियमों के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। संगठन से जुड़े गौरीश सिंह और गौरव मिश्र ने लोगों से आंदोलन में सहयोग देने और नियमों को वापस लेने तक संघर्ष जारी रखने की अपील की।कई कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में आनन्द मिश्र बब्बू, चन्द्रदेव पटेल, बृजेश पाण्डेय, अधिवक्ता अनुज मिश्र, अर्पित मिश्रा, अशोक पाण्डेय, राकेश त्रिपाठी, अमन सिंह, उपेंद्र सिंह, शुभम पाण्डेय, ऋषभ सिंह, शिवम उपाध्याय, अधिवक्ता अमन कुमार त्रिपाठी और अधिवक्ता रामानन्द पाण्डेय सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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నంద్యాల (AIMA MEDIA): నవనిర్మాణ సమితి ఆధ్వర్యంలో అభివృద్ధి చేసిన స్వర్గధామం హిందూ స్మశాన వాటికల వెబ్ సైట్ మధుమణి సమావేశ భవనంలో నవనిర్మాణ సమితి అధ్యక్షులు డాక్టర్ మధుసూదన రావు అధ్యక్షతన జరిగిన కార్యక్రమంలో ప్రముఖ న్యాయవాది, తెలుగుదేశం పార్టీ రాష్ట్ర కార్యదర్శి వెదుర్ల రామ చంద్ర రావు, రామకృష్ణ విద్యా సంస్థల చైర్మన్ డాక్టర్ రామకృష్ణారెడ్డి, ఐఎంఏ కేంద్ర కమిటీ సభ్యులు ఐఎంఏ రాష్ట్ర మాజీ అధ్యక్షులు డాక్టర్ రవి ప్రారంభించారు.స్వర్గధామం వెబ్ సైట్ ను నంద్యాల నేషనల్ కంప్యూటర్స్ నిర్వాహకులు షణ్ముఖ శ్రీనివాస్, బోయిలకుంట్ల గ్రామ నివాసి సాయినాథ్ రెడ్డి సారథ్యంలో యువ సాంకేతిక ఇంజనీర్లు గౌసియా, లహరి, మణికుమార్ లు పూర్తి ఉచితంగా సేవా దృక్పథంతో రూపొందించారు. ఈ సందర్భంగా డాక్టర్ మధుసూదన రావు మాట్లాడుతూ నంద్యాల ఆంజనేయ స్వామి దేవాలయం వెనుక ఉన్న స్మశాన వాటిక, పి.వి. నగర్ సమీపంలో ఉన్న స్మశాన వాటికలను పరిశుభ్రమైన, స్మశాన వాటికలుగా పట్టణ ప్రజల సహకారంతో తీర్చిదిద్దడం జరిగిందన్నారు. ఇక్కడ అందుతున్న సేవలు గురించి ఎక్కడ ఉన్న వారైనా తెలుసుకోవడం కోసం,వీటి అభివృద్ధి కొరకు సహాయం చేయ దలుచుకున్న వారికి అనువుగా వెబ్ సైట్ రూపొందించడం జరిగిందన్నారు. అనాధ శవాలకు పూర్తి ఉచితంగా సేవలను అందించడం జరుగుతున్నదని చెప్పారు.రాష్ట్ర తెలుగుదేశం పార్టీ కార్యదర్శి,ప్రముఖ న్యాయవాది వెదుర్ల రామచంద్ర రావు మాట్లాడుతూ మృతి చెందిన ప్రతి హిందువు కు గౌరవంగా అంత్యక్రియలను నిర్వహించుకునే విధంగా స్వర్గధామం నిర్వాహకుల సేవలు ప్రశంసనీయమన్నారు.రామకృష్ణ విద్యాసంస్థల చైర్మన్ డాక్టర్ రామకృష్ణారెడ్డి మాట్లాడుతూ స్వర్గధామం చేస్తున్న సేవలు వివిధ సోషల్ మీడియాల ద్వారా ప్రతి ఒక్కరికి తెలియవలసిన అవసరం ఉందన్నారు.స్వర్గధామం స్మశాన వాటిక అభివృద్ధికి అందరూ సహకరించాలని కోరారు.ఐఎంఏ రాష్ట్ర మాజీ అధ్యక్షులు డాక్టర్ జి. రవి కృష్ణ మాట్లాడుతూ నంద్యాల స్వర్గధామం పట్టణంలోనే కాకుండా పరిసర గ్రామాలకు కూడా సేవలు అందించడం అభినందనీయమన్నారు.నవనిర్మాణ సమితి వ్యవస్థాపకులు శివకుమార్ రెడ్డి మాట్లాడుతూ మృతదేహాలను భద్రపరచడానికి శీతలీకరణ కేంద్రాన్ని భవిష్యత్తు లో ఏర్పాటు చేయవలసిన అవసరం ఉందన్నారు.ఈ కార్యక్రమంలో నంద్యాల నవనిర్మాణ సమితి వ్యవస్థాపకులు శివకుమార్ రెడ్డి, పట్టణ ప్రముఖులు గెలివి రామకృష్ణ, శేషు బాబు, కశెట్టి కృష్ణమూర్తి, ప్రముఖ న్యాయవాది రావినూతల దుర్గాప్రసాద్, పరమేశ్వర రాజశేఖర్, దేవరశెట్టి శ్రీనివాసులు, ద్వారకా వసంత్, దాతలు, శ్రేయోభిలాషులు పాల్గొన్నారు.

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व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की किल्लत का असर अब धीरे धीरे पीतल उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है।गौरतलब है पीतल उद्योग में ढलाई की भट्ठियों और बेल्डिंग करने के लिए गैस का इस्तेमाल होता है।स्थानीय पीतल कारखाना संचालको के अनुसार पहले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2500 रुपए थी जो अब बढ़ कर 3200 रुपए हो गई है।इसके साथ ही सिलेंडर की उपलब्धता भी अनिश्चित हो गई है,जिससे कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। लागत बढ़ने का सीधा असर उत्पात के मूल्य पर पड़ेगा।पहले से ही पीतल का रेट बढ़ने के कारण पीतल उद्योग बाजार में मंदी की मार झेल रहा था।अगर जल्द ही अमेरिका ईरान का युद्ध बंद नही हुआ तो आने वाले दिनों में पीतल उद्योग को और मंदी का सामना करना पड़ेगा,जिसकी वजह से लाखों लोगों के रोजगार पर संकट छा सकता है।

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గోస్పాడు (AIMA MEDIA): గోస్పాడు మండలంలోని అన్ని గ్రామాల్లో రైతన్న మీకోసం వారోత్సవాలు నిర్వహిస్తున్నామని మండల వ్యవసాయ అధికారి స్వప్నిక రెడ్డి తెలిపారు.మార్చి 16 ,17, 18,23,24,25 వ తేదీల్లో రైతు సేవ కేంద్రం సిబ్బంది , పశుసంవర్ధక శాఖ, ప్రకృతి వ్యవసాయ సిబ్బంది,గ్రామ రెవెన్యూ అధికారులు టీములుగా ఏర్పడి రోజుకు 90 కుటుంబాలను సర్వే చేసి పూర్తి చేస్తారు అని పేర్కొన్నారు. నీటి భద్రత, డిమాండ్ ఆధారిత పంటలు, అగ్రిటెక్, ఫుడ్ ప్రాసెసింగ్ ,ప్రభుత్వము నుంచి పూర్తి మద్దతు తదితర అంశాలను రైతులకు వివరించారు.మార్చి 16వతేది సోమవారం గోస్పాడు గ్రామంలో సహాయ వ్యవసాయ సంచాలకులు విజయ శేఖర్, మండల వ్యవసాయ అధికారి స్వప్నిక రెడ్డి,వెటర్నరీ డాక్టర్ ఉమాదేవి, గోస్పాడు అగ్రికల్చర్ అసిస్టెంట్ శ్రీధర్ ,రైతులు ఈ కార్యక్రమంలో పాల్గొని రైతులకు ముఖ్యమంత్రి సూచించిన పంచ సూత్రాలు తెలియజేసి మరియు ప్రతి రైతు ఫార్మర్ యాప్ ఏపీ ఎయిమ్స్ 2.0 డౌన్లోడ్ చేసు కోవాలని , వ్యవసాయ రంగంలో వస్తున్న నూతన సాంకేతిక పరిజ్ఞానాలను తెలియజేశారు.

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AIMA MEDIA
सब के साथ, सबसे पहले
नरैनी, गोड्डा (झारखंड) | विशेष संवाददाता
नरैनी मेन रोड पर HASIM AUTO के साथ HASAN HONDA SHOWROOM में आधुनिक बाइक शोरूम और सर्विस सेंटर की सुविधा
नरैनी मेन रोड पर स्थित HASIM AUTO में दोपहिया वाहनों के लिए आधुनिक शोरूम और सर्विस सेंटर की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ ग्राहकों को Honda कंपनी के नए बाइक और स्कूटर के कई मॉडल देखने और खरीदने की सुविधा दी जा रही है।
शोरूम के अंदर आकर्षक काउंटर, ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था, शीतल पेयजल सुविधा तथा बाइक डिलीवरी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सभी प्रकार की सर्विसिंग के लिए प्रशिक्षित मैकेनिक भी उपलब्ध हैं।
बिजली बाधित होने की स्थिति में कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए पावर बैकअप (जनरेटर) की व्यवस्था भी की गई है, जिससे ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल सके।
✔ नई Honda बाइक और स्कूटर उपलब्ध
✔ सभी बाइक की सर्विसिंग सुविधा
✔ स्पेयर पार्ट्स और एक्सेसरीज उपलब्ध
📍 पता: नरैनी मेन रोड, गोड्डा, झारखंड
📞 मोबाइल: 9973864711

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शरीर में होने वाली आवाज़ें और उनके संकेत ⚠️



कानों में सीटी बजना → BP बढ़ने का संकेत

पेट में गड़गड़ाहट → पाचन क्रिया चल रही है

जोड़ों का चटकना → हड्डियों या जोड़ की समस्या

गर्दन से आवाज़ → मांसपेशियों में खिंचाव

पैरों से चटकना → कैल्शियम या Vitamin D की कमी

घुटनों से आवाज़ → जोड़ घिसना या गैस बनना

तेज़-तेज़ सांस → तनाव या फेफड़ों की कमजोरी

हाथों में झनझनाहट → Vitamin B12 की कमी

पीठ से आवाज़ → कमजोरी या एनीमिया

नाक से आवाज़ → साइनस या एलर्जी

आंख फड़कना → थकान या मैग्नीशियम की कमी

सिर में सनसनाहट → माइग्रेन या नसों की समस्या

हड्डियों से आवाज़ → उम्र का असर

नींद में दांत पीसना → ज्यादा टेंशन

बार-बार डकार → पाचन ठीक नहीं



✅ इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर डॉक्टर से सलाह लें।



संदेशकर्ता:

Dr. MD Firoz Alam

ALEENA HEALTH CARE NARAINI

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शाहगंज, जौनपुर। नगर में रविवार को जायसवाल युवा समाज के तत्वावधान में भव्य होली मिलन एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी तथा फूलों की होली खेलकर आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ शामिल हुए और पूरे उत्साह व उल्लास के साथ रंगों के इस पावन पर्व का आनंद लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अवधूत पीठाधीश्वर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. 1008 स्वामी सनातनन्द देव जी महाराज रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सामाजिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवाओं को समाज की सेवा, संगठन की मजबूती और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संदेश दिया।
समारोह में बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों ने होली गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में उत्साह का वातावरण बना दिया, जिसकी उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की।
इस अवसर पर अजितेश जायसवाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जायसवाल युवा मंच), प्रेम नारायण जायसवाल (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जायसवाल समाज), समाज के वरिष्ठ एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल, गीता प्रदीप जायसवाल, युवा जायसवाल समाज के अध्यक्ष धीरज जायसवाल, जौनपुर प्रेस क्लब शाहगंज के अध्यक्ष एवं युवा जायसवाल समाज के मीडिया प्रभारी चंदन कुमार जायसवाल, पत्रकार पंकज जायसवाल, डॉ. एस. एल. गुप्ता, मनोज जायसवाल, लक्ष्मीकांत जायसवाल, संदीप जायसवाल, घनश्याम जायसवाल, निशाकांत जायसवाल, अर्पित जायसवाल, रविकांत जायसवाल, उमेश जायसवाल, रजनीश जायसवाल, देवेश जायसवाल, कमल नयन जायसवाल, शुभम जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, पंकज जायसवाल, अभिनंदन जायसवाल, राजकुमार जायसवाल (मोबिल), उमा जायसवाल, विजय जायसवाल, आलोक जायसवाल सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ की ओर से महिला अध्यक्ष आशा जायसवाल, रीता जायसवाल, संगीता जायसवाल, रश्मि जायसवाल, पूनम जायसवाल, खुशबू जायसवाल, रूबी जायसवाल समेत बड़ी संख्या में महिलाएं भी कार्यक्रम में शामिल हुईं और उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंत में संगठन की नई कार्यकारिणी को विधिवत शपथ दिलाई गई। साथ ही आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। अंत में आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी अतिथियों, समाज के सदस्यों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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आगरा। विश्व प्रसिद्ध धरोहर ताजमहल का भ्रमण करने पहुंचे पीपल मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी डॉ. रघुराज प्रताप सिंह ने ताजमहल परिसर की सुंदरता और वहां की हरियाली की सराहना करते हुए पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

ताजमहल के ऐतिहासिक परिसर में घूमते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस अद्भुत धरोहर को सदियों से संभालकर रखा गया है, उसी प्रकार पृथ्वी की हरियाली और प्रकृति की रक्षा करना भी आज मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

डॉ. रघुराज प्रताप सिंह ने कहा कि ताजमहल के आसपास की हरियाली यह संदेश देती है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं। यदि दुनिया के लोग अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संकल्प लें तो पृथ्वी को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे वृक्षारोपण को एक जन आंदोलन बनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण तैयार करें।

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शाहगंज, जौनपुर। नगर में रविवार को जायसवाल युवा समाज के तत्वावधान में भव्य होली मिलन एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी तथा फूलों की होली खेलकर आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ शामिल हुए और पूरे उत्साह व उल्लास के साथ रंगों के इस पावन पर्व का आनंद लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अवधूत पीठाधीश्वर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. 1008 स्वामी सनातनन्द देव जी महाराज रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सामाजिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवाओं को समाज की सेवा, संगठन की मजबूती और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संदेश दिया।
समारोह में बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों ने होली गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में उत्साह का वातावरण बना दिया, जिसकी उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की।
इस अवसर पर अजितेश जायसवाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जायसवाल युवा मंच), प्रेम नारायण जायसवाल (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जायसवाल समाज), समाज के वरिष्ठ एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल, गीता प्रदीप जायसवाल, युवा जायसवाल समाज के अध्यक्ष धीरज जायसवाल, जौनपुर प्रेस क्लब शाहगंज के अध्यक्ष एवं युवा जायसवाल समाज के मीडिया प्रभारी चंदन कुमार जायसवाल, पत्रकार पंकज जायसवाल, डॉ. एस. एल. गुप्ता, मनोज जायसवाल, लक्ष्मीकांत जायसवाल, संदीप जायसवाल, घनश्याम जायसवाल, निशाकांत जायसवाल, अर्पित जायसवाल, रविकांत जायसवाल, उमेश जायसवाल, रजनीश जायसवाल, देवेश जायसवाल, कमल नयन जायसवाल, शुभम जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, पंकज जायसवाल, अभिनंदन जायसवाल, राजकुमार जायसवाल (मोबिल), उमा जायसवाल, विजय जायसवाल, आलोक जायसवाल सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ की ओर से महिला अध्यक्ष आशा जायसवाल, रीता जायसवाल, संगीता जायसवाल, रश्मि जायसवाल, पूनम जायसवाल, खुशबू जायसवाल, रूबी जायसवाल समेत बड़ी संख्या में महिलाएं भी कार्यक्रम में शामिल हुईं और उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंत में संगठन की नई कार्यकारिणी को विधिवत शपथ दिलाई गई। साथ ही आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। अंत में आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी अतिथियों, समाज के सदस्यों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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आगरा। विश्व प्रसिद्ध धरोहर ताजमहल में आज उस समय एक प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला जब पीपल मैन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात युवा पर्यावरण नेता डॉ. रघुराज प्रताप सिंह वहां पहुंचे।
ताजमहल की भव्यता और उसके चारों ओर फैली हरियाली के बीच डॉ. रघुराज प्रताप सिंह ने एक ऐतिहासिक सेल्फी लेते हुए पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि ताजमहल केवल प्रेम और स्थापत्य कला का प्रतीक ही नहीं, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि महान धरोहरों को सदियों तक संरक्षित रखना मानवता की जिम्मेदारी है। उसी प्रकार पृथ्वी की हरियाली और प्रकृति को बचाना भी आज पूरी दुनिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

डॉ. रघुराज प्रताप सिंह ने कहा कि यदि दुनिया का हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी रक्षा करने का संकल्प ले, तो पृथ्वी को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाकर इस हरित आंदोलन को एक वैश्विक जन आंदोलन बनाएं।

“ताजमहल के साथ ली गई यह सेल्फी केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए हरियाली बचाने का एक संकल्प है।”

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Jablpur : "केंद्रीय आयुध भंडार जबलपुर" 251 वे ऑर्डनेस कोर–डे, के उपलक्ष्य में चल रही विभिन्न खेल कूद प्रतियोगिता में स्पोर्ट्स सेक्रेट्री संतोष रघुवंशी जी से प्राप्त जानकारी अनुसार फ्रेंडली क्रिकेट मैच दिनांक 21 मार्च 2026 को असैनिक और सैनिक (कर्मचारियों/ अधिकारीयो) के बीच एमई ग्राउंड में होगा महा मुकाबला, आज से फुटबॉल मैच की हुईं शुरुआत, जिसमें टीम 'A' एस ए एस डी और टीम 'B' एडम ब्लॉक/आर्टी के मध्य खेला गया, जिसमें आर्टी/एडम ब्लॉक, टीम B ने, अच्छा प्रदर्शन करते हुए पहले ही हॉफ में 5–1 से बढ़त हासिल कर, एस ए एस डी, टीम A को मात देकर , 🏆 विजय हासिल कीl

मैच का शुभारंभ उपस्थित कार्य समिति सदस्यों अमित सिंह, श्याम सिंह, संजय दुबे, सतीश बर्मन संदीप पटेल सरबन कुमार राजकुमार धनिक आदि और यूनियन पदाधिकारी सुधीर उपाध्याय, संतोष तिवारी, रामा राव बहादुर यादव, सुनील सिंह, सागर पटेल शंभु सिंह, निलेश गौतम, अतुल प्रदीप चौधरी, विजय यशवंत बर्मन द्वारा ग्राउंड में खिलाडीयों से हाथ मिलकर किया, आज के खेल में रेफरी राजू रजक जी , संजय रजक जी थे, खेल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी वीरेंद्र, रोहित ,मोहित विष्ट, निखिल जोशी, रवि , गणेश पिल्लै, प्रकाश रजक शरद चौकसे, अमित ठाकुर आदि का सराहनीय खेल रहा,
👉अगला फुटबॉल मैच दिनांक 18 मार्च को KV ग्राउंड पर सुबह 9:30 बजे से टीम C –RSSDऔर टीम D –ASD बीच खेला जाएगा l

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बिहार में ​शिक्षा विभाग शर्मसार:

" क्यों अररिया में बच्चों की बेंचेस खा गया 'घोटालेबाज' अधिकारी ?

क्यों ग़याजी में 19 बर्ष से रिश्वतखोरी का भेंट चढ़ गई शांति कुमारी ?

"बकाया वेतन रोकना,
क्यों है सिस्टम की लाचारी ?

क्या सिस्टम को नहीं पता है मौलिक अधिकारी ?"'

गया | विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

किशनगंज शिक्षा विभाग में 40 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले के मामले में कार्रवाई के बाद अब एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। जब करोड़ों रुपये की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई हो सकती है, तो गया जिले की महिला शिक्षिका शांति कुमारी को 19 वर्षों से लंबित वेतन अब तक क्यों नहीं मिला?
सूत्रों के अनुसार, शांति कुमारी की नियुक्ति को लेकर विभागीय जांच पहले ही उनके पक्ष में जा चुकी है। जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित जांच रिपोर्ट में भी उनकी नियुक्ति को वैध माना गया है। इसके बावजूद भी अब तक वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया?

यह मामला केवल एक शिक्षक के वेतन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी प्रश्न बन गया है।

किशनगंज: डीपीओ पर 40 करोड़ का घोटाला
किशनगंज शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क, विद्यालय जीर्णोद्धार और प्री-फैब्रिकेटेड भवन निर्माण से जुड़ी योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई की गई और उनकी पेंशन में 25 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया गया।
बड़ा सवाल
जब करोड़ों रुपये के घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है, तो:
एक महिला शिक्षक का 19 वर्षों का वेतन क्यों रोका गया?
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?
आदेश और जांच रिपोर्ट के बावजूद भुगतान क्यों लंबित है?

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झारखंड विधानसभा परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने स्वयं रक्तदान कर किया शुभारंभ

रांची (झारखंड)। झारखंड विधानसभा परिसर स्थित विधानसभा औषधालय में आज स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने स्वयं रक्तदान करते हुए शिविर का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने रक्तदान को एक महान मानवीय कार्य बताते हुए कहा कि यह ऐसा पुण्य कार्य है, जिससे अनेक जरूरतमंदों को नया जीवन प्राप्त होता है।

उन्होंने विधानसभा के सभी सदस्यों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। साथ ही, समाज के प्रत्येक वर्ग से रक्तदान के महत्व को समझने और इसे नियमित रूप से अपनाने की अपील की।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री रविन्द्र नाथ महतो, मंत्रीगण, विधायकगण तथा विधानसभा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।

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Cricket ke mahakumbh

IPL

ka Bigul bajne hi wala hai, aur har team apni taiyariyon ko akhiri roop de rahi hai. Lekin, is ulat-pher aur utsah bhare mahaul mein, ek khabar aisi aayi hai jo

Kolkata Knight Riders (KKR)

ke fans aur management ke liye kisi

Bade Jhatke

se kam nahi hai. Unke promising young pace sensation,

Harshit Rana

, knee surgery ke baad

IPL 2026

ke ek

Major Chunk

se miss karne wale hain. Yeh khabar

KKR

ke bowling attack ki backbone ko hila kar rakh degi, jiska asar unki campaign par seedha padega. Kya

KKR

is

Shattering Blow

se ubhar payegi?




The Inner Story:

Harshit Rana

Ki Chot Aur

KKR

Ke Liye Double Trouble




Humein yeh jaankari mili hai ki

Harshit Rana

ne February mein knee surgery karwai thi. Unhein yeh unfortunate injury

India

ke T20 World Cup warm-up match mein

South Africa

ke khilaf lagi thi, jahan woh sirf ek over hi daal paaye the. Yeh ek ligament strain tha unke right knee mein. Is injury ne unhein na sirf us T20 World Cup se bahar kar diya, jise

India

ne aakhir mein jeeta, balki ab

IPL 2026

mein bhi unki

Availability

par

Big Question Mark

laga diya hai.

Harshit

abhi recovery aur rehab ke daur se guzar rahe hain, aur

BCCI medical team

ne abhi tak unki comeback date

Earmark

nahi ki hai, jisse unki season mein return ki

Uncertainty

badh gayi hai. Yeh bahut hi

Dukh ki Baat

hai, khaas kar tab jab haal hi mein unhein

BCCI awards

mein Best International Debutant ka khitaab mila tha.




Is mushkil ghadi mein,

KKR

ke liye sirf

Harshit Rana

ki chot hi akeli pareshani nahi hai. Unhein

Bangladesh

ke experienced left-arm pacer

Mustafizur Rahman

ke bina bhi pura

IPL

season khelna padega. December-January mein

India

aur

Bangladesh

ke beech strained geopolitical relations ke mahol mein,

BCCI

ne

KKR

ko

Mustafizur

ko squad se

Release

karne ka "instruction" diya tha. Iske baad,

KKR

ne

Zimbabwe

ke speedster

Blessing Muzarabani

ko sign kiya hai, jinhone

PSL

mein

Islamabad United

ke saath apni deal chhod kar

KKR

join kiya. Ek aur

Concerns



Matheesha Pathirana

ki fitness ko lekar bhi the, jinhein T20 World Cup se calf strain ke chalte bahar hona pada tha. Lekin, us waqt yeh

Expect

kiya ja raha tha ki

Pathirana

ki

IPL availability

par koi asar nahi padega.

KKR

ke liye yeh saari khabrein ek ke baad ek

Trouble

hi la rahi hain!




Analysis & Numbers:

KKR

Ka Pace Attack: Mushkilon Ka Pahaad!







Harshit Rana

ki absence

KKR

ke bowling resources ko

Severely Impact

karegi. Woh apni pace, seam movement aur death overs mein wicket-taking ability ke liye jaane jaate hain, jo

KKR

ke liye ek

Valuable Asset

tha.




Mustafizur Rahman

ki non-availability se left-arm variety ki kami mahsus hogi.

Blessing Muzarabani

unki jagah aae hain, jinki height aur bounce

Indian Pitches

par

Effective

ho sakti hai, lekin unka

IPL Experience

kam hai.




KKR

ke pass ab pace bowling options mein

Matheesha Pathirana

(jinpar fitness ka doubt abhi bhi thoda latak raha hai),

Vaibhav Arora

,

Akash Deep

,

Umran Malik

,

Kartik Tyagi

, aur allrounders

Cameron Green

aur

Ramandeep Singh

shamil hain. In domestic pacers aur allrounders ko ab

Extra Responsibility

uthani hogi.




KKR

ka

IPL 2026

mein opening game

March 29

ko

Wankhede Stadium

mein

Mumbai Indians

ke khilaf hai. Ek tough opponent ke khilaf, bina key pacers ke shuruat karna unke liye

Real Test

hoga.










The Guru Gyan Verdict:







Harshit Rana

ka

IPL 2026

ke bulk season se bahar hona

KKR

ke liye ek

Massive Blow

hai. Unki pace aur swing team ke liye

Gamechanger

saabit hoti thi.

Mustafizur

ki absence se yeh situation aur bhi

Challenging

ho gayi hai. Ab

KKR

ko apne domestic talents jaise

Vaibhav Arora

,

Akash Deep

, aur naye recruit

Blessing Muzarabani

par bahut depend karna hoga. Team management ko apni bowling strategy mein ek

Masterclass

perform karna hoga agar woh is season mein

Dominance

dikhana chahte hain. Naye

Heroes

ko ab

Step Up

karne ka time hai!








Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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