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హిందూపురం ఐమామీడియా+మీ24న్యూస్✍️




ఆల్ ఇండియా ట్రెక్కర్స్ డ్రైవర్స్ హెల్ప్ లైన్ నేషనల్ వైస్ ప్రెసిడెంట్ ఎస్. భాషా గారు మరియు ఆంధ్రప్రదేశ్ రాష్ట్ర బృందం (రామకృష్ణ గారు, ఖజపీర్ గారు) డ్రైవర్ల సంక్షేమం కోసం ప్రతిపాదించిన ఈ అంశాలు చాలా హర్షణీయమైనవి. అహర్నిశలు శ్రమిస్తూ దేశ ఆర్థిక వ్యవస్థలో కీలక పాత్ర పోషిస్తున్న డ్రైవర్ల భద్రత మరియు భవిష్యత్తు కోసం మీరు ..చేస్తున్న పోరాటం అభినందనీయం.
మీరు పేర్కొన్న ప్రధాన డిమాండ్లు మరియు సూచనలను ఈ క్రింది విధంగా క్రమబద్ధీకరించవచ్చు:
డ్రైవర్ల ఆరోగ్య మరియు కుటుంబ భద్రత
హెల్త్ కార్డులు: ప్రైవేట్ ఆసుపత్రులలో కూడా వర్తించేలా హెల్త్ కార్డుల జారీ.
కుటుంబానికి అండ: ప్రమాదానికి గురైన డ్రైవర్ కుటుంబానికి విద్య, వైద్యం మరియు ఆర్థిక సహాయం.
బీమా & పెన్షన్: ఉచిత బీమా సౌకర్యం, క్లెయిమ్‌ల త్వరితగతిన పరిష్కారం మరియు పదవీ విరమణ తర్వాత పెన్షన్.
నివాసం: ఇల్లు లేని డ్రైవర్లకు గృహ నిర్మాణ పథకాల ద్వారా సహాయం.
చట్టపరమైన రక్షణ మరియు భద్రత
హిట్ అండ్ రన్: తప్పు లేని అమాయక డ్రైవర్లు శిక్షకు గురికాకుండా పారదర్శకమైన విచారణ.
దాడి నివారణ: విధుల్లో ఉన్న డ్రైవర్లపై దాడులు చేసే వారిపై కఠిన చర్యలు.
దొంగతలాల నివారణ: విశ్రాంతి సమయంలో (నిద్రపోతున్నప్పుడు) డ్రైవర్ల వద్ద జరిగే దొంగతనాలను అరికట్టడానికి తగిన రక్షణ చర్యలు. ఆర్థిక మరియు పన్ను సంస్కరణలు
ఫైనాన్స్ సడలింపు: లారీ యజమానులకు ఏడాదిలో 9 నెలలు మాత్రమే వాయిదాలు (EMI), మిగిలిన 3 నెలలు వడ్డీ లేకుండా చెల్లించే వెసులుబాటు.
GST తగ్గింపు: ఆటోమొబైల్ విడిభాగాలపై పన్ను భారం తగ్గించడం.
ధరల నియంత్రణ: డీజిల్ మరియు ఇంజిన్ ఆయిల్ ధరల తగ్గింపు.
అంతర్రాష్ట్ర రవాణా సౌలభ్యం
కామన్ పర్మిట్: ఆంధ్రప్రదేశ్ మరియు తెలంగాణ రాష్ట్రాల మధ్య లారీలకు ఒకే పర్మిట్ విధానం.
గ్రీన్ టాక్స్: గ్రీన్ టాక్స్ (Green Tax) భారాన్ని రద్దు చేయడం.
ముఖ్య గమనిక: ఈ డిమాండ్లు నెరవేరాలంటే సంబంధిత రవాణా శాఖ మంత్రులు మరియు ప్రభుత్వ అధికారులకు అధికారికంగా వినతి పత్రాలు సమర్పించడం, అలాగే డ్రైవర్ల సంఘాలన్నీ ఐక్యంగా పోరాడటం ఎంతో అవసరం.

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रांची: रांची स्थित प्रसिद्ध विनायका ईको रिसॉर्ट में ब्रिलियंस अवॉर्ड 2026 सीजन 1 का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस गरिमामय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लोकप्रिय अभिनेत्री एवं सेलिब्रिटी मलाइका अरोड़ा उपस्थित रहीं, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 50 से अधिक विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सभी पुरस्कार मुख्य अतिथि मलाइका अरोड़ा द्वारा कार्यक्रम के प्रायोजकों के साथ संयुक्त रूप से प्रदान किए गए। इस आयोजन के टाइटल स्पॉन्सर के रूप में पंचरत्ना स्काईलाइन के मालिक पियूष मोरे का विशेष योगदान रहा। वहीं एसोसिएट स्पॉन्सर्स के रूप में निलेश छावनिका, उत्तम गोल्डार, पल्लवी कुमार, डॉ. आस्था बौल एवं सुजीत कुमार ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम की मुख्य आयोजक हर्षप्रीत कौर एवं कविता डैम ने बताया कि ब्रिलियंस अवॉर्ड के माध्यम से ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को पहचान और सम्मान देना उनका उद्देश्य है, जो अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर समाज के लिए मिसाल बन रहे हैं। गरिमामय वातावरण, भव्य मंच सज्जा और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति के बीच यह आयोजन अत्यंत सफल और यादगार रहा। आयोजकों ने सभी अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं, प्रायोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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ଖୋର୍ଦ୍ଧା,୧.୨.୨୬(ଏ.ଆଇ.ଏମ.ଏ) :ଖୋର୍ଦ୍ଧା ଜ଼ିଲ୍ଲା ଡିଆ ପଞ୍ଚାୟତ ଅଧିନସ୍ଥ କାଶୀପୁର ଖେଳ ପଡିଆରେ  ମା'ଭୈରବୀ ଯୁବ ସଂସଦ ଆନୁକୂଲ୍ୟରେ  ଚାଲିଥିବା ୪୩ ତମ ରାଜ୍ୟ ସ୍ତରୀୟ ଫୁଟବଲ ଟୁର୍ଣ୍ଣାମେଣ୍ଟର ଆଜି ଥିଲା ଉଦଯାପନୀ ଦିବସ l ଆଜିର ଫାଇନାଲ ମ୍ୟାଚଟି ୟୁନାଇଟେଡ଼  କ୍ଲବ ଭଦ୍ରକ ଓ ସାନ ଏକାଦଶ କ୍ଲବ ଭୁବନେଶ୍ୱର ମଧ୍ୟରେ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହୋଇଥିଲା। ଉଭୟ ଦଳର ଖେଳ ଅତି ସଂଘର୍ଷପୁର୍ଣ ହୋଇଥିଲା। ନିର୍ଧାରିତ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ୟୁନାଇଟେଡ଼ କ୍ଲବ ଭଦ୍ରକକୁ ୧-୦ ଗୋଲରେ ହରାଇ ସାନ ଏକାଦଶ କ୍ଲବ ଭୁବନେଶ୍ୱର  ବିଜୟୀ ହୋଇ ଚଳିତ ବର୍ଷର ଚାମ୍ପିଅନ ହୋଇଛି। ଆଜିର ଖେଳକୁ ଶିବଶଙ୍କର ପଣ୍ଡା ଓ ଲାଇନରେ ସୁଜିତ ପାତ୍ର ଓ ଶିବ ଦେହୁରୀ ଓ ଚତୁର୍ଥ ରେଫରୀଭାବେ ହୃଦାନନ୍ଦ ମହତରାୟ, ଓମ ପ୍ରକାଶ ମିଶ୍ର, ଭୀମସେନ ବିଶ୍ୱାଳ ଓ ମ୍ୟାଚ କମିଶନର ଭାବେ ପ୍ରମୋଦ କୁମାର ଦାସ ପରିଚାଳନା କରିଥିଲେ। ଗୋଲ ଜଜ ଭାବେ ଗଙ୍ଗାଧର ପଟ୍ଟନାୟକ,ଗଙ୍ଗାଧର ପାଇକରାୟ ସହଯୋଗ କରିଥିଲେ।ଅନୁଷ୍ଠାନର  ସଭାପତି ପ୍ରଦୀପ୍ତ କୁମାର ଷଡଙ୍ଗୀ ପୌରାହିତ୍ୟ ରେ ଆୟୋଜିତ ଉଦଯାପନୀ ସଭାରେ ମୁଖ୍ୟ ଅତିଥିଭାବେ ଖୋର୍ଦ୍ଧା ବିଧାୟକ ପ୍ରଶାନ୍ତ କୁମାର ଜଗଦେବ,ସମ୍ମାନିତ ଅତିଥିଭାବେ ନୂଆଗଡ ସରପଞ୍ଚ ରଘୁନାଥ ମାଝି, ପ୍ରାକ୍ତନ ବିଜେପି ମଣ୍ଡଳ ସଭାପତି ସନାତନ ବାରିକ, ସମାଜସେବୀ ରଣଜିତ ଜଗଦେବ, ସରପଞ୍ଚ ପ୍ରଶାନ୍ତ କୁମାର ବେହେରା, ଅବସର ପ୍ରାପ୍ତ ବରିଷ୍ଠ କ୍ରୀଡା ଶିକ୍ଷକ ଚକ୍ରଧର ମିଶ୍ର,ସମାଜସେବୀ ସନ୍ତୋଷ ଦଳେଇ, ସମାଜସେବୀ ସିପିଏମ ନେତା ବିଧୁଭୂଷଣ ମହାରଣା,ୱାର୍ଡସଭ୍ୟା ସଂଯୁକ୍ତା ମିଶ୍ର,ଅନୁଷ୍ଠାନର  ପ୍ରାକ୍ତନ ସଭାପତି ପ୍ରଦୀପ କୁମାର ପଟ୍ଟନାୟକ, ସାମାଜିକ କର୍ମୀ ହେମନ୍ତ ସାମନ୍ତରାୟ ଓ ବିଶ୍ବଜିତ ହରିଚନ୍ଦନ, ପୁଲିସ ଅଧିକାରୀ ଗୁପ୍ତ ପ୍ରସାଦ ମହାନ୍ତି, ପ୍ରମୁଖ ଯୋଗ ଦେଇ ଖେଳାଳି ମାନଙ୍କୁ ଉତ୍ସାହିତ କରିବା ସହ ବିଜେତା ଓ ଉପ ବିଜେତା ଦଳକୁ ଟ୍ରଫି ସହ ନଗଦ ଅର୍ଥରାଶି ପ୍ରଦାନ କରିଥିଲେ l ମ୍ୟାଚର ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଖେଳାଳିଭାବେ ସାନ ଦଳର ଚନ୍ଦନ ଦାଶଙ୍କୁ ଟ୍ରଫି ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଥିଲା l ଶିକ୍ଷାବିତ କମଳ ଲୋଚନ ପ୍ରଧାନ ମଞ୍ଚ ପରିଚାଳନା କରିଥିଲେ।ଅନୁଷ୍ଠାନର ସମ୍ପାଦକ ନୃସିହ କୁମାର ଦଳେଇ ବାର୍ଷିକ ବିବରଣୀ ପାଠ ସହ ଧନ୍ୟବାଦ ଅର୍ପଣ କରିଥିଲେ।ଅନୁଷ୍ଠାନର ସମସ୍ତ କର୍ମକର୍ତ୍ତା ଉପସ୍ଥିତ ରହି ସହଯୋଗ କରିଥିଲେ।

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चंडीगढ़ -01-02-2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा पंकज राजपूत प्रस्तुति---
आज संतश्री गुरु रविदास जी महाराज के प्रकट दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई!इस पावन अवसर पर रामदरबार फेज-2, चंडीगढ़ में श्री गुरु रविदास महाराज का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। मुझे भी वहां शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री गुरु रविदास कमेटी ने हर वर्ष की तरह इस बार भी शानदार आयोजन किया। 15 दिनों से उनकी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार निरंतर चल रहा था कमेटी का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने यह आयोजन किया ।गुरु रविदास जी महाराज ने दलित होने के कारण भारी अत्याचार और जातिगत भेदभाव झेला, फिर भी उन्होंने कर्म को प्रधानता दी। उन्होंने जाति-पाति का विरोध किया और अपनी लगन-भक्ति से सत्य और चमत्कार रचे। उनका प्रसिद्ध कथन है: "मन चंगा तो कठौती में गंगा"।ब्राह्मणों ने उस समय के4 राजा से शिकायत करी कहा था कि जब वे गंगा स्नान करते हैं, तो रविदास जी की चमड़े वाली कठौती धोते है इससे गंगा नाराज हो जाती है। रवि दास जी कहते थे मन चंगा होना चाहिए इस कुछ नहीं होता तो आखिर में फैसला हुआ—गंगा में सभी ब्राह्मण अपने अपने ठाकुरों लाये डुबोएं, ओर रविदास अपना चमड़े घिसने वाला पत्थर लाये जो तर जाए, वही पता चल जाएगा गंगा किससे नाराज होती है सब बोले पत्थर तो तैरता नहीं तो रविदास पहले अपना पत्थर डुबाए लेकिन रविदास जी का पत्थर तैर गया!ओर ब्राह्मणों का डूब गया तब से यह प्रथा चली कि पवित्रता मन की होती है, भेदभाव से ऊपर उठकर कर्म करो।
रविदास महाराज जी चमार जाति से होते हुए भी समाज को नई दिशा दी। सोचने वाली बात यह है कि 1388 में जन्मे रविदास जी के इतने वर्षों के बाद भी आज 2026 तक दलितों पर अत्याचार जारी हैं।आज जहां गरीब और दलित बच्चे स्कूल जाते हैं, वहां शिक्षक ही नहीं होते। सेंट्रलाइज्ड एडमिशन नहीं मिलती। जो जिनको मिल भी जाती है, वहां शिक्षक उपलब्ध नहीं—यह प्रशासन की सोची-समझी चाल है ताकि वे आगे न बढ़ें, न वकील बनें, न डॉक्टर, न इंजीनियर।हाल ही UGC गाइडलाइन में दलित-दिव्यांगों के अत्याचार रोकने के लिए कमेटियां बनाने का प्रावधान था, जिसमें सदस्य दलित समुदाय से हों। लेकिन उच्च जातियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर रोक लगवा दी ।हमें अपने बच्चों का भविष्य संवारना है। स्कूलों में शिक्षक हैं या नहीं, यह जांचना होगा। अपने अधिकारों के लिए लड़ें, अन्यथा कोई फायदा नहीं। हमारे बच्चों के सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो देखना होगा ओर अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी हम किसी के विरोध में नहीं परंतु अपने अधिकारों के लिये जागृत रहना है
सच्चा मानव धर्म यही है—भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ!

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