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सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में ₹10 और डीजल में ₹12.50 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस खबर ने आम लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी।

लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी साफ किया है कि इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और फिलहाल ईंधन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें।

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव जरूर है और भविष्य में कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ रिपोर्ट्स में कानूनी प्रावधानों का हवाला भी दिया गया है, लेकिन फिलहाल इसका कोई आधिकारिक असर नहीं दिख रहा है।

वर्तमान स्थिति:
अभी देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

प्रमुख शहरों में कीमतें:
• दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
• मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03

👉 निष्कर्ष: अभी के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबर पूरी तरह फर्जी है, इसलिए सतर्क रहें और गलत जानकारी फैलाने से बचें।

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रायपुर में कथित पेपर लीक को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने साफ कहा है कि अब तक पेपर लीक का कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। उनके इस बयान के बाद सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ, तो फिर परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत क्यों पड़ी? उनके मुताबिक, सरकार अपने ही बयानों में उलझी नजर आ रही है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

बैज ने आगे कहा कि एक तरफ सरकार पेपर लीक से इनकार कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी और असमंजस बढ़ रहा है।

कांग्रेस नेता ने इस मामले में राजनीतिक कनेक्शन की आशंका भी जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर सत्ता पक्ष के लोगों की भूमिका सामने आती रही है, इसलिए इस एंगल से भी जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शिक्षा मंत्री किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को फिर से गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह और बड़ा रूप ले सकता है।

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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर देश में सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस महत्वाकांक्षी योजना को “आदिवासी विरासत के खिलाफ अपराध” और “सबसे बड़ा घोटाला” करार दिया है।

राहुल गांधी का आरोप है कि इस परियोजना के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई की जा रही है और स्थानीय आदिवासी समुदायों को नजरअंदाज कर उनके घरों और जीवन पर खतरा पैदा किया जा रहा है। उन्होंने इसे “विकास के नाम पर विनाश” बताया।

वहीं, केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहती है कि करीब ₹81,000 करोड़ की यह योजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। सरकार के अनुसार, इससे समुद्री व्यापार, कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

इस मेगा प्रोजेक्ट में एक आधुनिक बंदरगाह, एकीकृत टाउनशिप, नागरिक और सैन्य उपयोग वाला एयरपोर्ट, और ऊर्जा संयंत्र जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

अब सवाल यह है कि यह प्रोजेक्ट देश के विकास की दिशा में बड़ा कदम है या पर्यावरण और आदिवासी अस्तित्व पर खतरा—इस पर बहस लगातार जारी है।

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ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਮਹਿਲਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਵੱਲੋਂ 30 ਅਪ੍ਰੈਲ ਨੂੰ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿਖੇ ਲੋਕ ਅਦਾਲਤ/ ਖੁੱਲਾ ਦਰਬਾਰ ਲਗਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ

ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ, ( )

ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਮਹਿਲਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਵੱਲੋਂ, ਚੇਅਰਪਰਸਨ ਸ੍ਰੀਮਤੀ ਰਾਜ ਲਾਲੀ ਗਿੱਲ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ, 30 ਅਪ੍ਰੈਲ, 2026 (ਵੀਰਵਾਰ) ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ 10.30 ਵਜੇ ਪੰਚਾਇਤ ਭਵਨ, ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿਖੇ ਲੋਕ ਅਦਾਲਤ ਲਗਾਈ ਜਾਵੇਗੀ।

ਇਸ ਲੋਕ ਅਦਾਲਤ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਅਤੇ ਪੁਲਿਸ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਸੁਗਮ ਮੰਚ ਉਪਲਬਧ ਕਰਵਾਉਣਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਲਗਾਏ ਗਏ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦਾ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਨਿਪਟਾਰਾ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਉੱਚ ਅਧਿਕਾਰੀ ਮੌਜੂਦ ਰਹਿਣਗੇ।

ਚੇਅਰਪਰਸਨ ਰਾਜ ਲਾਲੀ ਗਿੱਲ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੇ ਹੱਕਾਂ ਦੀ ਰਾਖੀ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਗੁੰਝਲਦਾਰ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਤੁਰੰਤ ਹੱਲ ਕਰਵਾਉਣਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕਤਾ ਹੈ। ਇਹ ਖੁੱਲਾ ਦਰਬਾਰ ਪੀੜਤ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਇਨਸਾਫ਼ ਦਿਲਵਾਉਣ ਵੱਲ ਇਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਕਦਮ ਹੋਵੇਗਾ।

ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਮਹਿਲਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਵੱਲੋਂ ਸਮੂਹ ਜਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਲੋਕ ਅਦਾਲਤ ਵਿੱਚ ਹਿੱਸਾ ਲੈ ਕੇ ਆਪਣੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਸਿੱਧਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਅੱਗੇ ਰੱਖਣ ਦਾ ਲਾਭ ਉਠਾਇਆ ਜਾਵੇ।

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April 29, 2026
पुलिस अधीक्षक पन्ना निवेदिता नायडू के निर्देशन में थाना देवेन्द्रनगर क्षेत्रांतर्गत गुमशुदा नाबालिग बालक को पुलिस द्वारा त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करते हुए सकुशल दस्तयाब किया गया है तथा प्रकरण में आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है।

दिनांक 20.04.2026 को फरियादिया सरस्वती कोरी पति सुनील कोरी उम्र 38 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 13 बमरी द्वारा थाना देवेन्द्रनगर में रिपोर्ट की गई कि उनका नाबालिग पुत्र संगम कोरी उम्र 13 वर्ष, दिनांक 19.04.2026 को सुबह घर से बिना बताए कहीं चला गया है। फरियादिया द्वारा आशंका व्यक्त की गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बालक को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना देवेन्द्रनगर में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 185/2026 धारा 137(2) बीएनएस के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर तत्काल बालक की तलाश प्रारंभ की गई। पुलिस टीम द्वारा क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का गहन विश्लेषण किया गया एवं विभिन्न व्यक्तियों से पूछताछ कर जानकारी संकलित की गई। साथ ही संभावित स्थानों पर लगातार सर्चिंग की गई।
सतत प्रयासों के फलस्वरूप दिनांक 28.04.2026 को उक्त नाबालिग बालक संगम कोरी को सगमा सीमेंट फैक्ट्री, मैहर के वाहन पार्किंग स्थल से सकुशल दस्तयाब किया गया। बालक पूर्णतः सुरक्षित है।
प्रकरण में आरोपी गुलजीत दहायत उर्फ राज पिता राघवेन्द्र दहायत, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम दुबहियाँ थाना देवेन्द्रनगर* जिला पन्ना को अभिरक्षा मे लेकर आरोपी से पूछताछ जारी है।
बालक की सकुशल बरामदगी से परिजन अत्यंत प्रसन्न हैं एवं उन्होंने देवेन्द्रनगर पुलिस की तत्परता एवं प्रभावी कार्यवाही के लिए आभार व्यक्त किया है। उक्त संपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी देवेन्द्रनगर उप निरीक्षक संतोष यादव सहित समस्त थाना स्टॉफ का सराहनीय योगदान रहा है।

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👉हरदोई के सनबीम स्कूल का यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है.

👉हरदोई सनबीम स्कूल विवाद:

▪️घटना का कारण: यह विवाद 24 अप्रैल 2026 को हरदोई के कैनाल रोड स्थित सनबीम स्कूल में हुआ। आरोप है कि एक अभिभावक, नीलम वर्मा, ने स्कूल के बजाय बाहर से कॉपियां खरीद ली थीं, जिससे स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा नाराज हो गईं.

▪️प्रिंसिपल का व्यवहार: सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में प्रिंसिपल को अभिभावक पर चिल्लाते हुए और 'शटअप' (Shut Up) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया। उन्होंने बच्चे का नाम स्कूल से काटने की धमकी भी दी।

▪️प्रशासनिक कार्रवाई: मामला बढ़ने पर 27 अप्रैल को बीएसए (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने पुलिस और साइबर टीम के साथ स्कूल में छापेमारी की। प्रशासन ने इसे गंभीर माना और जांच पूरी होने तक प्रिंसिपल के स्कूल आने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, नगर खंड शिक्षा अधिकारी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

▪️प्रिंसिपल का पक्ष: विवाद के बाद प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने एक स्पष्टीकरण वीडियो जारी किया। उन्होंने अपनी भाषा के लिए माफी मांगते हुए कहा कि वह तनाव में थीं क्योंकि अभिभावक लंबे समय से फीस कम करने का दबाव बना रहे थे।

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నంద్యాల (AIMA MEDIA ): సుమారు 23 ఏళ్లపాటు కలిసి కాపురం చేసి, తన సర్వస్వాన్ని ఆమెకే ధారపోస్తే.. ఇప్పుడు కృతజ్ఞత లేకుండా తనపైనే ఎదురుదాడికి దిగుతోందని షేరు బాషా మండిపడ్డారు. బుధవారం జరిగిన మీడియా సమావేశంలో ఆయన సమీరా బేగం వైఖరిని ఎండగట్టారు. పెళ్ళైన నాటి నుండి ఆమెను కంటికి రెప్పలా చూసుకున్నానని, నమ్మకంతో ఆస్తులన్నీ ఆమె పేరు మీదనే పెట్టానని గుర్తు చేశారు. అయితే, గత మూడు సంవత్సరాల క్రితం చిన్నపాటి కారణాలతో తనను వదిలి వెళ్ళిపోయి, హైదరాబాద్‌లో ఉంటూ తనకు తెలియకుండానే అక్రమ సంబంధం పెట్టుకుందని ఆరోపించారు. చట్టబద్ధంగా విడాకులు తీసుకోకుండానే మరో వ్యక్తిని వివాహం చేసుకుందని, ఇప్పుడు ఆ నిజాన్ని కప్పిపుచ్చుకోవడానికి తనపై వేధింపుల ముసుగులో తప్పుడు ఫిర్యాదులు చేస్తోందని ధ్వజమెత్తారు. అసలు బాధితుడిని తానేనని, తన ఆస్తిని కాజేసేందుకు ఆమె ఆడుతున్న నాటకాలను ఎవరూ నమ్మవద్దని కోరారు. తనను మోసం చేసి రెండో పెళ్లి చేసుకున్న సమీరా బేగంపై చట్టపరమైన చర్యలు తీసుకోవాలని, తన పిల్లలకు, తనకు రక్షణ కల్పించాలని ఆయన పోలీసు యంత్రాంగాన్ని డిమాండ్ చేశారు. ఒక పక్క ఆస్తి కాజేసి, మరోపక్క అక్రమ సంబంధాలు పెట్టుకుని సమాజంలో తనను దోషిగా నిలబెట్టాలని చూడటం ఆమె విచక్షణకే వదిలేస్తున్నానని బాషా ఆవేదన వ్యక్తం చేశారు.

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वाराणसी में दबंगई की हद पार — मामूली विवाद में युवक की बेरहमी से हत्या
📍 वाराणसी (घमहापुर) | 26 अप्रैल, रविवार
वाराणसी के घमहापुर क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रधानी के वर्चस्व की लड़ाई में मनीष सिंह नामक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत एक मामूली सड़क हादसे से हुई, जिसमें एक महिला को हल्की चोट लगी थी। लेकिन इस छोटी सी बात को लेकर दबंगों ने अपना रौब दिखाने के लिए मनीष सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
इस निर्मम घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और लोगों में भारी आक्रोश है। एक निर्दोष युवक की इस तरह हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
💔 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मनीष सिंह के परिवार पर इस घटना के बाद गहरा दुख और संकट छा गया है। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। समाज के हर वर्ग में इस घटना को लेकर संवेदना व्यक्त की जा रही है।
⚖️ सख्त कार्रवाई की मांग
मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित सरकारी सहायता और न्याय दिलाने की अपील की है।
🙏 न्याय की उम्मीद
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाई जाए, ताकि समाज में कानून का डर बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
📢 #JusticeForManishSingh #VaranasiNews #CrimeNews #HumanRights #BreakingNews #UPNews #LawAndOrder

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नगांव के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान 'ललन इंटीग्रेटेड एकेडमी' की पहल पर मंगलवार को साल 2026 की उच्चतर माध्यमिक अंतिम परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।संस्थान के अध्यक्ष आशिष पांडे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों को 'गामोछा' और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि 'ललन इंटीग्रेटेड एकेडमी' से पहली बार 6 परीक्षार्थी उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से:चिराग बिहान हुहिन: 85%दीपांशु दत्त: 76.4%डिम्बेश्वर दास: 65.8%रूबी बांठा: 69%माधुर्य भुइयां: 56.2%चादिया अख्तर: 56.8%इन सभी छात्रों ने अच्छे अंक प्राप्त कर संस्थान के लिए 100% उत्तीर्ण परिणाम सुनिश्चित किया और गौरव बढ़ाया।इस समारोह में एकेडमी की प्रबंध निदेशक राजश्री भट्टाचार्य ने भी शिरकत की। उन्होंने सभी उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को बधाई दी और उन्हें भविष्य में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और जीवन पथ पर आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया।

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स्तरीय पर्यटन विकास समिति की बैठक सोमवार को मिनी सचिवालय सभागार में हुई। बैठक में प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास, जीर्णोद्धार, भावी योजनाओं पर चर्चा हुई।
कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि डीएमएफटी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के संरक्षण, विकास, जीर्णोद्धार के लिए प्रस्तावित बजट और कार्य योजनाओं पर कार्य करें। विकास कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता, उपयोगिता का ध्यान रखा जाए। कलेक्टर ने सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आकर्षक सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। बोर्ड पर स्थल का इतिहास, विशेषताएं, सांस्कृतिक महत्व, उपयोगी जानकारी रहेगी।
झालरापाटन के ऐतिहासिक मदन विलास पैलेस के समग्र विकास, संरक्षण, पर्यटन उपयोगिता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों को विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए। खंडिया चौराहा स्थित अश्व प्रतिमा परिसर की चारदीवारी निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए।

प्रसिद्ध रेन बसेरा के पुनर्निर्माण के बाद उसे जल संसाधन विभाग को सुपुर्द करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

बैठक में एडीएम अनुराग भार्गव, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शंभु दयाल मीणा, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सिराज कुरैशी, इंटेक के संयोजक राज्यपाल शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
Aima media jhalawar

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जनगणना कार्य को ध्यान में रख कर ग्वालियर जिले में शासकीय सेवकों के अवकाश पर प्रतिबंध

1 मई से 30 मई तक लागू रहेगा आदेश

भारत की जनगणना-2027 के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर जिले में
शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सभी प्रकार के अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध एक मई से 30 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा।
कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा है कि जनगणना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना है। इसी उद्देश्य से अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया है।उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों, कार्यालय प्रमुखों और प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अवधि में सामान्य परिस्थितियों में अवकाश स्वीकृत न किए जाएं।
विशेष परिस्थितियों में अवकाश की आवश्यकता होने पर कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। अनुमति मिलने के बाद ही अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
कलेक्टर ने सभी विभागों से समन्वय के साथ कार्य करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय-सीमा में मकान सूचीकरण एवं गणना कार्य पूर्ण कराया जाए।
#jangadna2027
#Gwalior
CM Madhya Pradesh

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इस किसान का नाम दत्तात्रय बाबूराव घाडगे है और उन्होंने जो सावता आम उगाया है, वह आजकल पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक आम का वज़न दो किलोग्राम तक होता है, जिससे यह देखने में बहुत सुंदर लगता है।
इस ज़मीन की विरासत को संभालकर रखते हुए, दत्तात्रेय घाडगे जी ने अपनी कड़ी मेहनत और रिसर्च की भावना से आम की एक नई वैरायटी बनाई है। उन्होंने बड़ी लगन से इस वैरायटी का नाम सवाता आम रखा है। इस आम की सबसे बड़ी खासियत इसका साइज़ और वज़न है। आम आमों के मुकाबले यह आम साइज़ में बहुत बड़ा होता है, और एक फल का वज़न डेढ़ से दो किलोग्राम होता है। घाडगे ने सवाता आम की वैरायटी के लिए पेटेंट भी हासिल किया है।
दत्तात्रय घाडगे जी ने यह एक्सपेरिमेंट सिर्फ़ शौक के तौर पर ही नहीं किया है, बल्कि इसके कमर्शियल मैथेमेटिक्स को भी अच्छे तरीके से पेश किया है। उन्होंने अपनी 8 एकड़ ज़मीन में यह सवाता माला आम का बाग लगाया है। सही प्लानिंग, फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट और पेड़ों की देखभाल की वजह से आज यह बाग फलों से लदा हुआ है।
पारंपरिक खेती से हटकर, घाडगे जी ने बाग की खेती पर ध्यान दिया। उनके इस अनोखे प्रयोग से उन्हें अच्छा फाइनेंशियल रिटर्न मिल रहा है। अभी, मार्केट में इस आम की बहुत डिमांड है, और इससे वह हर साल 10 से 12 लाख रुपये की इनकम कर रहे हैं। कम मेहनत और सही टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके मिली यह सफलता दूसरे किसानों को भी इंस्पायर कर रही है।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए कोलकाता समेत कई इलाकों में मतदान जारी है, लेकिन इसी बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए जा रहे हैं।

वहीं, बीजेपी ने कई बूथों पर EVM मशीन से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि ‘कमल’ निशान वाले बटन पर टेप लगाया गया, ताकि मतदाता बीजेपी को वोट न दे सकें।

बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा किए हैं, जिनमें कथित तौर पर गड़बड़ी दिखाई गई है, और इसके लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया गया है।

इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा है कि जहां भी शिकायतें सही पाई जाएंगी, वहां तुरंत दोबारा मतदान कराया जाएगा।

फाल्टा इलाके के प्रभावित बूथों को लेकर पुनर्मतदान की मांग तेज हो गई है। बीजेपी ने सबूतों के साथ कई बूथों की जानकारी आयोग को सौंप दी है।

अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या वाकई इन बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाएगा।

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सीईओ जिला पंचायत ने ग्राम पंचायत रानी विरगवां, सकराया एवं जामपुरा का किया निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले उपयंत्री, पीसीओ को दिया नोटिस

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्ड श्री वीर सिंह चौहान द्वारा आज ग्राम पंचायत रानी विरगवां, ग्राम पंचायत सकराया जनपद पंचायत अटेर, ग्राम पंचायत जामपुरा जनपद पंचायत भिण्ड का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य मांगलिक भवन, शांति धाम, सी.सी. रोड का जायजा लिया तथा समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जल गंगा संवर्धन अभियान के पुराने कार्य सात दिन में पूर्ण कर फोटो अपलोड करने निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित कर कहा कि नरेगा ई-केवाईसी, समग्र ई-केवाईसी एवं 2011 की जनगणना के अनुपात में जिन ग्राम पंचायतों में समग्र आईडी कम बनी उनको बनाना है और जिनमें डुप्लिकेट बन गई उसे हटाना है।
निरीक्षण के दौरान उपयंत्री, पीसीओ को अनुपस्थित पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जल गंगा संवर्धन के तहत तालाब की सफाई एवं गहरीकरण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्कूल एवं आंगनवाड़ी का निरीक्षण कर बच्चों की अपार आईडी बनाने एवं सभी बच्चों को शाला में प्रवेश दिलाने एवं जर्जर भवन को डिस्मेंटल कराने के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।
#CMMadhyaPradesh
#JansamparkMP
Panchayat, Rural Development and Social Welfare Department of Madhya Pradesh
#भिण्ड
#Bhind

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ਮਹਿਲ ਕਲਾਂ (ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ) : ਟੱਲੇਵਾਲ ਪੁਲਸ ਵੱਲੋਂ ਟੱਲੇਵਾਲ ਪੁਲ ਉੱਪਰ ਨਾਕਾ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ। ਐੱਸ. ਐੱਚ. ਓ ਟੱਲੇਵਾਲ ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ ਰੰਗੀਆਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੁਖਬਰੀ ਮਿਲਣ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਏ. ਐੱਸ. ਆਈ ਜਸਮੇਲ ਸਿੰਘ ਨੇ ਹਰਬੰਸ ਸਿੰਘ ਪੁੱਤਰ ਮੱਖਣ ਸਿੰਘ ਵਾਸੀ ਟੱਲੇਵਾਲ ਤੇ ਉਸਦਾ ਸਾਥੀ ਜਸ਼ਨਦੀਪ ਪੁੱਤਰ ਰੇਸ਼ਮ ਵਾਸੀ ਬੀਹਲਾ ਦੋਵਾਂ ਨੂੰ ਪੁਲਸ ਪਾਰਟੀ ਸਮੇਤ ਕਾਬੂ ਕੀਤਾ। ਜਿੰਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਚੋਰੀ ਦਾ ਮੋਟਸਾਈਕਲ ਕਾਬੂ ਕਰਕੇ ਮਾਮਲਾ ਦਰਜ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ।

ਥਾਣਾ ਮੁਖੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਸ਼ਰਾਰਤੀ ਅਨਸਰਾਂ ਨੂੰ ਬਖਸ਼ਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਵੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸ਼ਰਾਰਤੀ ਅਨਸਰਾਂ ਨੂੰ ਤਾੜਨਾ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉਹ ਬਾਜ਼ ਆ ਜਾਣ, ਕਿਸੇ ਵੀ ਅਪਰਾਧੀ ਨਾਲ ਕੋਈ ਢਿੱਲ ਨਹੀਂ ਵਰਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸਖਤੀ ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਆਇਆ ਜਾਵੇਗਾ।

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जिला मुख्यालय पर कलेक्टर ने की जनसुनवाई

जनसुनवाई में 81 आवेदकों के प्रकरणों की हुई सुनवाई

मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित हुई जनसुनवाई में कलेक्टर भिण्ड ने जिले के विभिन्न अंचलों से अपनी समस्याओं का आवेदन लेकर आये 81 आवेदकों की समस्याएं सुनी और उनके निराकरण करने के संबंध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर अपर कलेक्टर द्वारा भी आवेदकों की समस्याओं पर जनसुनवाई की गई।
जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने गंभीर बीमारी से संबंधित इलाज, विद्युत बिलों में सुधार, हैण्डपंपों का संधारण, पेंशन, सड़क दुघर्टना सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं, बीपीएल राशन कार्ड एवं जमीन पर कब्जा से संबंधित आवेदनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके संबंध में आवेदक को भी कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश भी दिए।
#CMMadhyaPradesh
#JansamparkMP
Department Of Revenue, Madhya Pradesh
#भिण्ड
#Bhind

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ਭਵਾਨੀਗੜ੍ਹ (ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ)– ਇੱਥੋਂ ਨੇੜਲੇ ਪਿੰਡ ਘਾਬਦਾਂ ਵਿਚ ਇਕ ਦਿਲ ਦਹਿਲਾ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਘਟਨਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈ ਹੈ, ਜਿੱਥੇ ਪੀ.ਜੀ.ਆਈ. ਵਿਚ ਡਿਊਟੀ ਕਰਦੇ ਇਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਾਰਡ ਵੱਲੋਂ ਜ਼ਹਿਰੀਲੀ ਚੀਜ਼ ਖਾਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਗੰਭੀਰ ਹਾਲਤ ਵਿਚ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਪਟਿਆਲਾ ਦੇ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿਚ ਦਾਖਲ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਜਿੱਥੇ ਉਸ ਦਾ ਇਲਾਜ ਜਾਰੀ ਹੈ।

ਮਿਲੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ ਜਗਸੀਰ ਸਿੰਘ ਜੱਗੀ, ਜੋ ਬੁਢਲਾਡਾ ਨੇੜਲੇ ਇਲਾਕੇ ਦਾ ਵਸਨੀਕ ਹੈ ਅਤੇ ਇਕ ਨਿੱਜੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਏਜੰਸੀ ਰਾਹੀਂ ਡਿਊਟੀ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਨੇ ਕਿਸੇ ਗੱਲਬਾਤ ਦੌਰਾਨ ਇਹ ਕਦਮ ਚੁੱਕਿਆ। ਘਟਨਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਾਥੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਹਸਪਤਾਲ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਗਿਆ, ਜਿੱਥੋਂ ਡਾਕਟਰਾਂ ਨੇ ਉਸ ਦੀ ਨਾਜ਼ੁਕ ਹਾਲਤ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਪਟਿਆਲਾ ਰੈਫਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਕੁਝ ਚਰਚਾਵਾਂ ਵੀ ਸਾਹਮਣੇ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਕਿ ਉਸ ਕੋਲੋਂ ਕੋਈ ਲਿਖਤੀ ਪੱਤਰ ਮਿਲਿਆ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿਚ ਕੁਝ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦਰਜ ਹੋਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਹਾਲਾਂਕਿ ਪੁਲਸ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ।

ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ, ਥਾਣਾ ਸਦਰ ਸੰਗਰੂਰ ਦੇ ਮੁਖੀ ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਜਗਸੀਰ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ ਜਹਿਰੀਲੀ ਚੀਜ਼ ਖਾਣ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਦਰਜ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਇਸ ਸਮੇਂ ਇਲਾਜ ਅਧੀਨ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੁਲਸ ਵੱਲੋਂ ਪੂਰੇ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਗਹਿਰਾਈ ਨਾਲ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਲਦ ਹੀ ਬਿਆਨਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ’ਤੇ ਅਗਲੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਲਿਖਤੀ ਪੱਤਰ ਮਿਲਣ ਦੀ ਗੱਲ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕੀਤਾ ਹੈ।

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धुळे | प्रतिनिधि
महाराष्ट्र राज्य के शिक्षक आंदोलन को सशक्त नेतृत्व प्राप्त हुआ है। महाराष्ट्र राज्य-राष्ट्रीय तथा राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक संगठन में नाशिक विभागीय महिला प्रतिनिधि के रूप में श्रीमती नूतनवर्षा राजेश वळवी (नंदुरबार) का लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्विरोध चयन किया गया है। उनके चयन से नाशिक विभाग सहित पूरे शिक्षक समुदाय, विशेष रूप से महिला शिक्षकों में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है।
श्रीमती वळवी शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय, अध्ययनशील एवं संगठनात्मक कार्यों में समर्पित व्यक्तित्व के रूप में जानी जाती हैं। शिक्षक समस्याओं के समाधान, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, महिला शिक्षकों के सशक्तिकरण तथा संगठन को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता के कारण सहकर्मियों में उनके प्रति विश्वास लगातार बढ़ता गया है।
चयन प्रक्रिया के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सर्वसम्मति से उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें निर्विरोध चुना। यह चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व को मिली बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रीमती वळवी के नेतृत्व में नाशिक विभाग के शिक्षकों के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया जाएगा। महिला शिक्षकों को संगठनात्मक मंच प्रदान करना तथा शैक्षणिक उपक्रमों को गति देना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
उनके चयन पर विभिन्न शिक्षक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षा प्रेमियों एवं सहकर्मी शिक्षकों ने हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की है।
“यह जिम्मेदारी विश्वास की है, और मैं शिक्षक एवं विद्यार्थियों के हित में समर्पित भाव से कार्य करूंगी,” ऐसा विश्वास श्रीमती नूतनवर्षा वळवी ने व्यक्त किया।
नाशिक विभाग में शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है तथा उनके नेतृत्व से संगठनात्मक कार्यों में नई ऊर्जा आने की संभावना जताई जा रही है।

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद स्वीकार किया है कि इस संघर्ष के कारण देश को भारी आर्थिक झटका लग रहा है।

सबसे बड़ा असर तेल आयात पर पड़ा है। पहले जहां पाकिस्तान का तेल आयात बिल करीब 30 करोड़ डॉलर था, वहीं अब यह बढ़कर 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है—यानी ढाई गुना से भी ज्यादा वृद्धि। इससे पहले से ही दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर और बोझ बढ़ गया है।

स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो हालात की निगरानी कर रही है और संकट से निपटने की रणनीति बना रही है। साथ ही, सरकार पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की बात भी कह रही है।

शहबाज शरीफ के अनुसार, इस्लामाबाद ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए हैं। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत को पाकिस्तान एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है। इस प्रक्रिया में आर्मी चीफ असीम मुनीर, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की अहम भूमिका रही।

प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की दिशा में हुई प्रगति इन प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बैठक का भी जिक्र किया।

हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने में अभी भी अड़चनें हैं। पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता शुरू कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान का दौरा तो किया, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया।

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वार्ताकारों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी और कहा कि ईरान सीधे वॉशिंगटन से संपर्क कर सकता है।

इसी बीच, रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को बातचीत के लिए तीन चरणों वाला नया प्रस्ताव भेजा है। इसमें पहले युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई है, जबकि परमाणु मुद्दे पर चर्चा बाद में करने का सुझाव दिया गया है।

कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर भी गहरा असर डाल रहा है।

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कलेक्टर ने गेहूं उपार्जन केन्द्रों का निरीक्षण कर देखी व्यवस्थाएं

किसानों से संवाद कर पूछी समस्या

कलेक्टर भिण्ड ने नवीन कृषि उपज मण्डी भिण्ड एवं उपार्जन केन्द्र ऊमरी पहुंचकर गेहूं उपार्जन केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा शासन के निर्देशानुसार सभी केन्द्रों पर किसानों के लिए आवश्यक मूलभूत प्रबंध सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।
कलेक्टर ने खरीदी केन्द्रों पर गर्मी के मौसम के दृष्टिगत पेयजल एवं छाया संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया तथा आवश्कता अनुसार व्यवस्था के निर्देश भी दिए। इस दौरान केन्द्र पर उपस्थित किसानों से उपार्जन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर अधिकारियों को समय पर तुलाई और भंडारण इत्यादि की समुचित व्यवस्थाओं के निर्देश दिए। इसके अलावा खरीदी केन्द्र प्रभारियों से केन्द्रों पर उपज की आवक, बारदाना, तुलाई और पंखा सहित इत्यादि व्यवस्थाओं की जानकारी ली। अधिकारियों को उपार्जन केन्द्रों पर सतत रूप से बेहतर व्यवस्थाओं के मद्देनजर नियमित मॉनिटरिंग के लिए निर्देशित किया।
कलेक्टर द्वारा स्लॉट बुकिंग अनुसार वरीयता क्रम में किसानों की उपज के तौल और भुगतान कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसानों से पारदर्शी तरीके से गेहूं खरीदी का कार्य संचालित हो तथा कृषकों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।

कलेक्टर ने गेहूं उपार्जन एवं भंडारण व्यवस्था तथा उपार्जन की लक्षित मात्रा अनुसार पूर्व से समुचित व्यवस्थाओं के लिए निर्देशित किया। इसके अलावा उपज के नमूना जांच तथा सर्वर एवं स्लॉट बुकिंग व्यवस्था की जानकारी भी ली। इस दौरान एसडीएम भिण्ड सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का किया निरीक्षण

कलेक्टर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊमरी का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला जनरल वार्ड, आयुष कक्ष, दवा वितरण, जांच सुविधाओं, ओपीडी सहित अन्य व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने चिकित्सा अधिकारी से स्टाफ की उपलब्धता और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी ली तथा मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान किए जाने निर्देश दिए।
#CMMadhyaPradesh
#JansamparkMP
Department Of Revenue, Madhya Pradesh
#भिण्ड
#Bhind

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बीबीएयू में छात्रा की मौत पर बवाल, देर रात तक चला प्रदर्शन

इनसेप्शन डेली न्यूज़/ID News
पत्रकार संदीप शास्त्री

लखनऊ: राजधानी लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में मंगलवार देर रात छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि इंटीग्रेटेड बेसिक साइंस की छात्रा अनामिका की तबीयत दूषित मेस का खाना खाने से बिगड़ी थी, जिसके बाद इलाज के दौरान बुधवार को वाराणसी में उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि अनामिका यशोधरा गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी और कुछ दिन पहले फूड पॉइजनिंग की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय के क्लिनिक से दवा ली थी। इसके बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन उसे घर ले गए, जहां हालत गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

घटना की खबर मिलते ही परिसर में छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया। सैकड़ों छात्र कुलपति राजकुमार मित्तल के आवास के बाहर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए देर रात तक प्रदर्शन जारी रखा। छात्रों ने कुलपति आवास का घेराव भी किया, जिससे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

मामले पर कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने फोन पर बताया कि वह फिलहाल शहर से बाहर हैं और लखनऊ लौटने के बाद ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी दे सकेंगे।

सुरक्षा कड़ी, बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक
हंगामे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। प्रॉक्टर प्रो. रामचंद्र द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, रात 10:30 बजे के बाद गेट नंबर 2 और 3 से प्रवेश केवल वैध हार्ड कॉपी आईडी दिखाने पर ही मिलेगा। बिना पहचान पत्र किसी को भी परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही गैर-छात्र, पूर्व छात्र और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

फिलहाल परिसर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और छात्र संगठन प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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भिंड में जल प्रदाय परियोजना स्थल पर हीट स्ट्रेस अवेयरनेस प्रशिक्षण एवं श्रमिकों हेतु प्रेरक कार्यक्रम आयोजित

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा भिंड में जल प्रदाय परियोजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में परियोजना स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए हीट स्ट्रेस अवेयरनेस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों को गर्मी के मौसम में होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों, बचाव के उपायों तथा कार्य के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, श्रमिकों को गर्मी से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से ग्लूकोज युक्त पानी का वितरण भी किया गया। इसके अतिरिक्त पुरानी गल्ला मंडी ओएचटी साइट पर एक प्रेरणात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें श्रमिकों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों के पालन, टीम भावना को मजबूत करने तथा कार्यस्थल पर सतर्कता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिकों को प्रोत्साहित करने हेतु "बेस्ट सेफ्टी परफॉर्मर ऑफ द मंथ" का सम्मान प्रदान किया गया एवं उन्हें उपहार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समन्वय सामुदायिक विकास अधिकारी सुश्री सोनिका शर्मा द्वारा किया गया।
#CMMadhyaPradesh
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Department of Urban Development & Housing MP
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वैशाख की आग में पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कभी ओले, तो कभी सिर्फ तूफानी हवाएं। ऐसे में बारिश का दूत कहे जाने वाले चातक पक्ष इस साल के मानसून के आने का एक महीने पहले ही ऐलान करने कृष्ण तीर पर आ गए हैं। हर साल रोहिणी नक्षत्र के आखिर में आने वाला चातक इस साल बारिश का अनुमान एक महीने पहले ही लेकर हजारों किलोमीटर का सफर तय करके कृष्ण तीर पर बस गया है। इसे खेती के मौसम के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

मानसून का एक जैसा संकेत देने वाले प्रकृति के दूत के तौर पर मशहूर 'चातक' पक्षी ने इस साल सबको हैरान कर दिया है और रेगुलर समय से डेढ़ से दो महीने पहले कृष्णा नदी पर आ गया है। हर साल 25 मई से रोहिणी नक्षत्र में या 7 जून को मृग नक्षत्र से पहले प्रवेश करने वाला चातक इस साल डेढ़ महीने पहले ही कृष्णा नदी पर डेरा डाल चुका है। अफ्रीका से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आया यह मेहमान इस साल अप्रैल के आखिर में कृष्णा नदी पर पहुंचा है। अम्नापुर के पक्षी प्रेमी और रिसर्चर संदीप नज़ारे ने कृष्णा नदी के किनारे अंबाजीबुवा घाट इलाके में इस पक्षी को रिकॉर्ड किया है और यह पिछले सात सालों में सबसे पहले आने वाला पक्षी है।

चातक को मौसम में बदलाव और बारिश के आने का सही अनुमान लगाने वाले पक्षी के तौर पर देखा जाता है। पक्षी पर्यवेक्षक श्री नज़ारे ने पिछले सात सालों से इस पक्षी के आने का रिकॉर्ड रखा है। उनके ऑब्ज़र्वेशन के अनुसार, चातक 2019 में 1 जून को, 2020 में 5 जून को, 2021 में 15 मई को, 2022 में 13 जून को, 2023 में 11 जून को और 2025 में 7 जून को आया। हालांकि, इस साल 2026 में सिर्फ़ 26 अप्रैल को इसका दिखना बताता है कि कुदरती चक्र में बड़े बदलाव होने वाले हैं। अप्रैल महीने में ही कृष्ण के किनारे चातक के 'पिउ.. पिउ' के नारे गूंजने लगे हैं, जिससे पक्षी प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ गई है।

इस पक्षी को इसके सिर पर सुंदर कलगी, काले और सफेद रंग और पंखों पर सफेद धारियों की वजह से आसानी से पहचाना जा सकता है। चातक एक ऐसे पक्षी के तौर पर जाना जाता है जो सिर्फ़ बारिश की बूंदों से अपनी प्यास बुझाता है, और किसानों का पक्का मानना है कि इसके आने के कुछ ही दिनों में बारिश हो जाती है। अब इस बात पर बहस चल रही है कि क्या मानसून जल्दी एक्टिव होगा क्योंकि इस साल चातक अप्रैल में पड़ता है। यह विदेशी मेहमान अभी अमनापुर की हरी-भरी प्रकृति में रह रहा है, और उसके आने से कृष्णा नदी के किनारे पक्षियों की दुनिया में जान आ गई है।

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पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर टेक्नीशियन के प्रशिक्षण हेतु पंजीयन 04 मई तक

प्राचार्य शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था भिण्ड ने बताया है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर टेक्नीशियन के प्रशिक्षण शासकीय संभागीय आईटीआई भिण्ड में प्रशिक्षण प्रारंभ किये जाना है। जिस हेतु पंजीयन संस्था में दिनांक 04 मई 2026 तक किये जा रहे हैं। पंजीयन हेतु 10वीं अंकसूची, आधारकार्ड, फोटो, आईटीआई इलेक्ट्रीशियन की उत्तीर्ण अंकसूची, लाना अनिवार्य है। यह सूचना जिले की समस्त शासकीय एवं निजी आईटीआई के व्यवसाय - इलेक्ट्रीशियन एवं इलेक्ट्रॉनिक मेकेनिक उत्तीर्ण या द्वतीय वर्ष छात्रों हेतु है। प्रशिक्षण अवधि 7 दिवस है। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी हेतु संस्था के कार्यालयीन समय में श्री महेन्द्र सोनी प्रशिक्षण अधिकारी से संपर्क कर ली जा सकती है। प्रशिक्षण हेतु आवेदकों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जायेगा। प्रथम 30 आवेदकों को किया जायेगा, यह प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है।
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Trump warns Iran blockade could last months, sending oil soaring

Trump contends that the blockade of Iranian ports is more effective than bombing.

USS Rafael Peralta (DDG 115) near what the US Central Command said was a vessel attempting to sail to an Iranian port at an unknown location, in a photo released on Apr 24, 2026. (Photo: US Central Command/Handout via REUTERS)

WASHINGTON: President Donald Trump said that a US naval blockade against Iran could last months, leading oil prices on Wednesday (Apr 29) to spike to their highest in more than four years.

With diplomacy between Iran and the United States at a standstill after false starts, Trump spoke by phone with Russian President Vladimir Putin, who warned him of "damaging consequences" if the United States and Israel resume their war on Iran.

Meeting oil executives, Trump contended that the blockade of Iranian ports - which Tehran has demanded must end before any deal - was more effective than bombing.

Trump, at the meeting that took place Tuesday, discussed his efforts "to alleviate global oil markets and steps we could take to continue the current blockade for months if needed and minimise impact on American consumers", a White House official said on condition of anonymity.

Trump, speaking to Axios, said of the naval action on Iran: "They are choking like a stuffed pig. And it is going to be worse for them."

Brent oil futures soared another 7.6 per cent to US$119.69, the highest price since the early days of the Ukraine war in 2022.

Iran has sought to extract a price for being attacked by exerting control over the Strait of Hormuz, the narrow waterway through which one-fifth of global oil typically transits.

COSTS MOUNT
Trump has faced intense political pressure to end the war, which is unpopular even with much of his base and has increased costs for American consumers paying at the pump.

The Pentagon confirmed to lawmakers on Wednesday that the war has already cost US$25 billion to US taxpayers.

Top US officials including Vice President JD Vance twice aborted trips last week to Pakistan to negotiate with Iran, which has voiced doubts about Trump's sincerity for diplomacy.

Trump again threatened war, posting on social media a mocked-up picture of himself toting a rifle in front of explosions wrecking a desert fortress.

"Iran can't get their act together ...They better get smart soon," Trump wrote. "No more Mr Nice Guy!"

US officials contend they do not know who is speaking for Iran, whether it is the hardline and increasingly empowered Revolutionary Guards or diplomats, after Israeli strikes killed a series of top leaders.

The UN Development Programme warned that the war, which has also seen the price of fertiliser soaring, could plunge more than 30 million people into poverty in 160 countries.

"It's development in reverse," UNDP chief Alexander De Croo told AFP.

Despite the defiance of the cleric-run state, the Iranian rial fell to historic lows against the dollar.

Tehran residents speaking to AFP journalists in Paris reported a sense of despair.

"Every time in recent years that negotiations have taken place, the economic situation of the people has only gotten worse. Sanctions have either started or intensified," a 52-year-old architect told AFP, speaking on condition of anonymity.

"They go to negotiate and come back with even more sanctions, and the issue is always nuclear. There's no talk about people, the economy or freedom. People have the right to not even want to hear the word 'negotiation'," he said.

"NO TRUST"
An Iranian army spokesman said Tuesday that "we do not consider the war to be over", saying Tehran had "no trust in America".

"We have many cards that we have not yet used," Amir Akraminia told state television.

Iran has proposed easing its chokehold over the Strait of Hormuz as Washington lifts its blockade and broader negotiations take place. The Trump administration has viewed the proposal sceptically.

Iran's speaker of parliament Mohammad Bagher Ghalibaf, who has emerged as a key figure since the start of the war, said on Wednesday the US naval blockade of the country aimed to create division and "make us collapse from within".

He said Trump "divides the country into two groups: hardliners and moderates, and then immediately talks about a naval blockade to force Iran into submission through economic pressure and internal discord", state TV reported. He called for unity in response.

"ATTACKS CANNOT CONTINUE"
Violence has continued on the war's Lebanese front, despite a recently extended ceasefire between Israel and Hezbollah, the Iran-backed armed group that drew Lebanon into the war by firing rockets at Israel. Israel responded with strikes and a ground invasion.

For the first time since the ceasefire began, the Lebanese army said on Tuesday that an Israeli strike had targeted its troops, wounding two soldiers in the south. Another strike on Wednesday killed a Lebanese soldier, it said.

"Israel must finally realise that the only path to security is through negotiations, but it must first fully implement the ceasefire in order to move on to negotiations," Lebanese President Joseph Aoun said in a statement.

"Israeli attacks cannot continue as they are," he said. "We are now waiting for the United States to set a date to begin direct negotiations."

A UN-backed report said on Wednesday that more than 1.2 million people in Lebanon were expected to face acute hunger due to the latest war.

*Devashish Govind Tokekar*
*VANDE Bharat live tv news Nagpur*
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
*Indian Council of press,Nagpur*
Journalist Cell
*All India Media Association
Nagpur*
*District President*
*Delhi Crime Press*
RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
*INDIAN PRESS UNION*
District Reporter
Contact no.
9422428110/9146095536
Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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Srikakulam:సింహాచలం నరసింహస్వామిని దర్శించుకుందామని అత్త కోరడంతో సరే అన్న అల్లుడు దైవ దర్శనానికి పయనమయ్యారు. అంతలో 'అమ్మమ్మ, బాబాయ్‌ నేనూ వస్తాను' అని చిన్నారి మారాం చేయడంతో బైక్‌మీద ముగ్గురూ శ్రీకాకుళం నుంచి బయలుదేరారు. సింహాచలంలో స్వామిని దర్శించుకొన్నారు. అనంతరం అదే ద్విచక్రవాహనంపై స్వగ్రామం తిరిగి వస్తున్నారు. జాతీయ రహదారిపై భోగాపురం సచివాలయం సమీపానికి వచ్చేసరికి ముందు వెళ్తూ అకస్మాత్తుగా ఆగిన లారీని ఢీకొన్నారు. రెప్పపాటులో రోడ్డుపై పోడిపోయారు. తలకు బలమైన గాయాలు కావడంతో ముగ్గురూ అక్కడికక్కడే ప్రాణాలు కోల్పోయారు. సంఘటనను చూసిన స్థానికులు చలించిపోయారు. తేరుకొని చూసే సరికి మూడు ప్రాణాలు గాల్లో కలిసిపోవడంతో అయ్యో పాపం అంటూ కన్నీరు పెట్టుకొన్నారు. ప్రమాదంలో శ్రీకాకుళం జిల్లా ఎచ్చెర్ల మండలం ఫరీదుపేటకు చెందిన సంచన సాయికుమార్‌(24), అత్త గార మండలం దీపావళి గ్రామానికి చెందిన లావేటి చిన్నమ్మలు(45) ఈమె మనవరాలు సీహెచ్‌ రుత్విక(4) అక్కడకక్కడే మృతి చెందారు. పోలీసులు, స్థానికులు తెలిపిన వివరాలిలా ఉన్నాయి.

శ్రీకాకుళం జిల్లా ఎచ్చెర్ల మండలం ఫరీదుపేటకు చెందిన సంచన సాయికి గార మండలం దీపావళి గ్రామానికి చెందిన లావేటి తేజతో ఆరు నెలల కిందట వివాహం జరిగింది. తేజ ప్రస్తుతం గర్భిణి. సాయి కుటుంబంతో కలిసి విశాఖనగరంలోని మర్రిపాలెంలో నివాసముంటున్నాడు. డోర్‌ డెలివరీ బోయ్‌గా పనిచేస్తున్నాడు. ఈనెల 28న వారాల పండుగ కోసం సాయికుమార్‌ స్వగ్రామం ఫరీదుపేటకు భార్య, తల్లిదండ్రులతో కలిసి వచ్చాడు. మంగళవారం వరసకు అన్న అయిన ఈశ్వరరావు ఇంట్లో వారాల పండుగలో పాల్గొన్నాడు. బుధవారం ఉదయానే సాయికుమార్‌ తల్లిదండుల్రు బస్సులో మర్రిపాలెం వెళ్లిపోయారు. భార్య తేజను అత్తవారి గ్రామమైన గార మండలం దీపావళికి తీసుకెళ్లాడు. సాయికుమార్‌ అత్త సింహాచలం స్వామిని దర్శించుకోవాలని ఉందని అనడంతో కాదనలేక అత్త లావేటి చిన్నమ్మడును తీసుకొని ద్విచక్రవాహనంపై బయలుదేరడానికి సిద్ధపడ్డారు. అంతలో చిన్నమ్మడు పెద్ద కుమారై కూతురు రుత్విక కూడా తానూ వస్తాను అని అల్లరి చేయడంతో ముగ్గురూ ద్విచక్రవాహనంపై బయలు దేరారు. సింహాచలంలో దైవ దర్శనం చేసుకొని అనంతరం ద్విచక్రవాహనంపై తిరిగి శ్రీకాకుళం వైపు జాతీయ రహదారిపై వస్తున్నారు. భోగాపురం సచివాలయం-2 సమీపానికి వచ్చేసరికి ముందు వెళ్తూ అకస్మాత్తుగా ఆగిన లారీని ఢీకొన్నారు. దీంతో ముందు కూర్చున్న బాలికతో సహా ముగ్గురూ కింద పడిపోయారు. ముగ్గురికీ తలకు బలమైన గాయాలు కావడంతో క్షణాల్లో ప్రాణాలు కోల్పోయారు. సమీపంలో టీ షాపుల్లో ఉన్న పలువురు ఘటనను చూసి దిగ్ర్భాంతికి లోనయ్యారు. క్షణాల్లో తేరుకొని ఘటనా స్థలానికి చేరుకుని సపర్యలు చేసేందుకు ప్రయత్నించారు. కానీ అప్పటికే ముగ్గురూ మృతిచెందారు. అచేతనంగా చిన్నారిని చూసిన స్థానికులు కన్నీరు పెట్టుకొన్నారు. సీఐ కె.దుర్గాప్రసాదరావు, ఎస్‌ఐలు వి.పాపారావు, పి.సూర్యకుమారి పోలీస్‌ సిబ్బందితో ఘటనా స్థలానికి చేరుకొన్నారు. వారి కుటుంబ సభ్యులకు సమాచారం అందించారు. అనంతరం మృతదేహాలను పోస్టుమార్టం కోసం విజయనగరం ప్రభుత్వ ఆసుపత్రికి తరలించారు. ఎడిషనల్‌ ఎస్పీ(అడ్మిన్‌) పి.సౌమ్యలత, ఇన్‌చార్జి డీఎస్పీ రాఘవులు సంఘటనా స్థలానికి చేరుకొని ప్రమాదంపై విచారించారు. కుటుంభ సభ్యులు, స్థానికులతో మాట్లాడారు. మోటర్‌ వెహికల్‌ ఇన్‌స్పెక్టర్‌ వి.వెంకటరావు కూడా సంఘటనా స్థలాన్ని పరిశీలించారు.

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एसडीएम गोहद ने किया वेयरहाउस निरीक्षण, किसानों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री राजन बी. नाड़िया द्वारा गोहद तहसील क्षेत्र में स्थित एमएम वेयरहाउस एवं एमएन वेयरहाउस का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान किसानों द्वारा लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया गया, जिसमें बताया गया कि उनकी उपज की बोली समय पर नहीं लग रही है।
एसडीएम श्री राजन नाड़िया ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और तत्काल लंबित टोकन/तौल की प्रक्रिया शुरू करवाई। साथ ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि उपार्जन कार्य नियमित एवं सुचारू रूप से संचालित किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों की सुविधा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
#CMMadhyaPradesh
#JansamparkMP
Department Of Revenue, Madhya Pradesh
#भिण्ड
#Bhind

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गर्मी को ध्यान में रखते हुए जन अभियान परिषद द्वारा पक्षियों के लिए पेड़ों पर सकोरे लगाए

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा गठित नवांकुर समिति उम्मेदगढ़ बांसी के सहयोग से सेक्टर बागचीनी प्रस्फुटन समिति भैंसरोली में ब्लॉक समन्वयक श्री बीडी शर्मा के मार्गदर्शन में पेड़ पर पक्षियों के लिए पानी के सकोरे लगाऐ गये। इसी प्रकार सेक्टर बैठक का आयोजन भी किया गया। मौके पर श्री विष्णु सिंह तोमर, श्री राकेश सिंह सिकरवार, श्री अरविंद अवस्थी, श्री लवकुश सिकरवार, श्री अवधेश पवैया, श्री कालीचरण सिंह उपस्थित रहे। श्री विष्णु सिंह तोमर ने भीषण गर्मी को देखते हुए पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हेतु जगह - जगह सकोरे लगाए जाने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव में पेड़ों पर सकोरे लगाए गये।
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#JansamparkMP #morena2026 #Morena #MadhyaPradesh

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*१५०० एकरवर श्रीरामपुरात होणार DRDO चा प्रकल्प...*

श्रीरामपूर (*शिवप्रहार न्यूज नेटवर्क*) : याबाबत अधिक माहिती अशी की,सरकारच्या वतीने जिल्ह्यात संरक्षण संशोधन आणि विकास विभागाची (डीआरडीओ) आणखी एक प्रयोगशाळा उभारण्याचे प्रस्तावित आहे. त्यासाठी आपल्या श्रीरामपूर तालूक्यातील शेती महामंडळाची हरेगाव मळ्यातील १५०० एकर जमीन संपादित होणार आहे.
नुकतेच या संपादनास राज्य सरकारने मंजुरी दिली असल्याची माहिती मिळत आहे.हा प्रकल्प उच्च ऊर्जा पदार्थ संशोधन प्रयोगशाळा (हाय एनर्जी मटेरियल रिसर्च लॅबोरेटरी) म्हणून ओळखला जाणार आहे.

*Devashish Govind Tokekar*
*VANDE Bharat live tv news Nagpur*
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
*Indian Council of press,Nagpur*
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*All India Media Association
Nagpur*
*District President*
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RNI NO : DELHIN/2005/15378
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9422428110/9146095536
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ਫਰੀਦਕੋਟ/ਸਾਦਿਕ, 29 ਅਪ੍ਰੈਲ(ਨਾਇਬ ਰਾਜ)

ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਹਦਾਇਤਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਅਤੇ ਸਿਵਲ ਸਰਜਨ, ਫਰੀਦਕੋਟ ਡਾ. ਪਰਵਜੀਤ ਸਿੰਘ ਗੁਲਾਟੀ ਜੀ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਹੇਠ ਅਤੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਟੀਕਾਕਰਨ ਅਫ਼ਸਰ, ਫਰੀਦਕੋਟ ਡਾ. ਹੁਸਨ ਪਾਲ ਅਤੇ ਡਾ. ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫ਼ਸਰ ਇੰਚਾਰਜ ਪੀ. ਐਚ. ਸੀ. ਜੰਡ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਯੋਗ ਅਗਵਾਈ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰੀ ਕੰਨਿਆਂ ਸੀਨੀਅਰ ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਕੂਲ, ਸਾਦਿਕ ਵਿਖੇ ਸਕੂਲ ਦੀਆਂ ਬੱਚੀਆਂ ਨੂੰ ਐਚ.ਪੀ.ਵੀ ਵੈਕਸੀਨ ਸਬੰਧੀ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ l



ਇਸ ਮੌਕੇ ਡਾ. ਹੁਸਨ ਪਾਲ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਨਵੀਂ ਐਚ.ਪੀ.ਵੀ (ਹਿਊਮਨ ਪੈਪੀਲੋਮਾ ਵੈਕਸੀਨ) 14 ਸਾਲ ਦੀ ਲੜਕੀ ਨੂੰ ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਲੱਗਣੀ ਹੈ, ਭਾਵ ਜਿਸ ਲੜਕੀ ਨੇ ਆਪਣਾ 14ਵਾਂ ਜਨਮਦਿਨ ਮਨਾ ਲਿਆ ਹੋਵੇ ਅਤੇ 15ਵਾਂ ਜਨਮਦਿਨ ਨਹੀਂ ਮਨਾਇਆl ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਲੜਕੀ ਦੇ ਖੱਬੇ ਮੋਢੇ ਤੇ ਲਗਾਈ ਜਾਵੇਗੀl ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੇ ਮੂੰਹ ਦੇ ਕੈਂਸਰ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਹਾਈ ਹੋਵੇਗੀl ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਕੈਂਸਰ ਔਰਤਾਂ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈl ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਮੁਫ਼ਤ ਲਗਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈl ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਮਾਪਿਆਂ ਦੀ ਸਹਿਮਤੀ ਨਾਲ ਲਗਾਈ ਜਾਵੇਗੀ l

ਇਸ ਮੌਕੇ ਡਾ. ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਐਚ.ਪੀ.ਵੀ ਵੈਕਸੀਨ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਇਵੇਟ ਤੌਰ ਤੇ ਵੀ ਲਗਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਜਿਸਦੀ ਕੀਮਤ ਹਜਾਰਾਂ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਹੈ, ਪਰ ਇਸਦੇ ਉਲਟ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਇਹ ਵੈਕਸੀਨ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਬਿਲਕੁੱਲ ਮੁਫ਼ਤ ਲਗਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ l

ਇਸ ਮੌਕੇ ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਬਲਾਕ ਅਕਾਊਂਟੰਟ, ਸੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਸਿਹਤ ਵਰਕਰ, ਕਮਲਜੀਤ ਕੌਰ ਐਲ. ਐਚ. ਵੀ., ਅਨੁਰਾਧਾ ਰਾਣੀ ਤੇ ਵੀਰਪਾਲ ਕੌਰ ਏ. ਐਨ. ਐਮ, ਰਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਸੀ. ਐਚ. ਓ. ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਮੂਹ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰ ਅਤੇ ਸਕੂਲ ਦੇ ਮੁੱਖੀ ਸਮੇਤ ਸਮੂਹ ਸਕੂਲ ਸਟਾਫ਼ ਹਾਜ਼ਰ ਸੀl

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*प्रकाशनार्थ*

*बंगाल: मताधिकार पर डाका या जनतंत्र का अपहरण!*
*(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*

पिछले साल के शुरू में जब बिहार से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण उर्फ सर की प्रक्रिया शुरू की गयी थी, तभी जनतंत्र की तथा आम जनता के अधिकारों की चिंता करने वाले अनेक संगठनों तथा व्यक्तियों ने, और इनमें विपक्षी राजनीतिक पार्टियां भी शामिल थीं, देश को आगाह किया था कि जिस तरह से इस प्रक्रिया को गढ़ा गया था और विधानसभाई चुनाव से पहले पूरा करने की जल्दबाजी में और इकतरफा फैसलों के जरिए, जिस तरह संचालित किया जा रहा था, वह बड़ी तादाद में लोगों को मताधिकार से वंचित करने का ही साधन बनेगा। इसमें गरीब-गुरबा, सामाजिक रूप से कमजोर, अशिक्षित या कम शिक्षित लोगों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के मताधिकार के लिए खतरे की ओर खास तौर पर ध्यान खींचा गया था।

उसके करीब एक साल बाद, जबकि देश के बड़े हिस्से में, जिसमें विधानसभा चुनाव के मौजूदा चक्र में शामिल राज्य खासतौर पर शामिल हैं और 2024 के आम चुनाव के बाद, सामान्य रूप से अपडेट की गयी मतदाता सूचियों के अनुसार देश के करीब 60 करोड़ मतदाता आते थे, मतदाता सूचियों के शुद्घीकरण के नाम पर करीब 6 करोड़ यानी कुल 10 फीसदी मतदाताओं की छंटनी कर दी गयी है। इस पूरी कसरत का मकसद ही मतदाता सूचियों के शुद्घीकरण के बजाए, मतदाताओं के खासे बड़े हिस्से का बहिष्करण ही होने और देश के वर्तमान सत्ताधिकारियों के राजनीतिक फायदे के लिए मतदाताओं के चुनिंदा हिस्सा का बहिष्करण होने में अगर किसी को संदेह रहा भी होगा तो, पश्चिम बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया के जरिए जिस तरह से 35 लाख लोगों को कम से कम मौजूदा चुनाव में तो मताधिकार से वंचित कर ही दिया गया है, उससे दूर हो जाना चाहिए। जाहिर है कि एसआईआर (सर) की प्रक्रिया के नाम पर चुनाव आयोग द्वारा लाखों लोगों का मताधिकार छीने जाने की वंचना, सुप्रीम कोर्ट के यह कहने से कम नहीं हो जाती है कि वे अगले चुनावों के लिए मतदाता सूची में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयास जारी रख सकते हैं!

याद रहे कि मतदाताओं के ऐसे ही बहिष्करण की आशंकाओं को लेकर, अनेक संगठनों तथा व्यक्तियों ने, सर की पूरी प्रक्रिया को ही चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इस चुनौती में अन्य चीजों के अलावा सर की प्रक्रिया में ढांचागत रूप से ही, मतदाता सूचियों को अद्यतन बनाने के बजाए, एक प्रकार से नये सिरे से मतदाता रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बना देने और उसके लिए नागरिकता परीक्षण को शर्त बना देेने को चुनौती दी गयी थी, क्योंकि यह सभी संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। यह दूसरी बात है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अब तक इस चुनौती पर तो निर्णय नहीं दिया है, उल्टे अपने अनेक हस्तक्षेपों के जरिए उसने, सर की प्रक्रिया को लागू कराने के लिए सुगमताकारक की ही भूमिका जरूर बड़े उत्साह से संभाली है। प. बंगाल का 34 लाख लोगों का मताधिकार, चुनाव के बाद तक न्यायाधीन बने रहने का भयावह कांड, इसी का नतीजा है।

फिर भी यह कहना पड़ेगा कि बंगाल को यह अनोखा 'तोहफा' सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया था। यह तोहफा दिया था चुनाव आयोग ने, जिसे बंगाल के मामले में एसआइआर के लिए शेष देश में अपनायी गयी प्रक्रिया के जरिए, पचास लाख से ज्यादा नामों के काटे जाने से संतोष नहीं हुआ था। इसका सीधा-सा कारण विभिन्न स्तरों पर केंद्रीय सत्ता की इस शिकायत में छिपा था कि चूंकि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, उसने जरूर राज्य कर्मचारी तंत्र से जुड़े बीएलओ आदि को प्रभाव में लेकर, नाम कटने वाले मतदाताओं की संख्या कम करा दी होगी। याद रहे कि बिहार से सर की प्रक्रिया शुरू होने के समय से ही, संघ-भाजपा और उसकी केंद्रीय सत्ता द्वारा इसका प्रचार किया जा रहा था कि, इस छंटनी का असली मकसद बांग्लादेशी घुसपैठियों को मतदाता सूचियों से निकालना था। यह सत्ताधारी संघ-भाजपा के इस आम प्रचार से बखूबी मेल खाता है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में बहुत भारी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिये आकर जम गए हैं। याद रहे कि पिछले साल अप्रैल में पहलगांव के आतंकवादी हमले के बाद, खासतौर पर उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में, जिसमें राजधानी तथा उसके आस-पास के इलाके खास तौर पर शामिल थे, बांग्लादेशी होने के संदेह के नाम पर, बड़ी संख्या में बंगाली मुसलमानों की पकड़-धकड़ और कहीं-कहीं उन्हें जबरन बांग्लादेश की सीमाओं में धकेलने की मुहिम भी छेड़ी गयी थी। इस पृष्ठभूमि में सर प्रक्रिया से हिंदुत्ववादी ताकतों की कथित घुसपैठिया-विरोधी और वास्तव में मुस्लिम-विरोधी अपेक्षाएं और भी बढ़ गयीं।

बेशक, बिहार में और उसके बाद दूसरे कई राज्यों में भी सर की प्रक्रिया के जरिए, किसी उल्लेखनीय संख्या में घुसपैठियों की पहचान होने की सचाई सामने नहीं आयी। वास्तव में चुनाव आयोग द्वारा सर के नाम पर, 2002-03 की मतदाता सूचियों से संबंध स्थापित करने और विभिन्न दस्तावेजों की मांग के जरिए, एक प्रकार से नागरिकता परीक्षा थोपे जाने के बावजूद, किसी उल्लेखनीय संख्या में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के नाम भी छंटनी में नहीं आ पाए थे। इसके बजाए, गरीबों, अशिक्षितों या कम शिक्षितों तथा महिलाओं के अलावा, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों पर ही इस छंटनी की गाज गिरी थी, जिनमें, कमाई के लिए अस्थायी रूप से बाहर जाने वाले और इसी तरह बाहर से आकर संबंधित क्षेत्र में रहने वाले मजदूर ही ज्यादा थे। बहरहाल, बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठ के सत्ताधारी संघ-भाजपा के नैरेटिव को और वास्तव में उनके चुनावी हितों को आगे बढ़ाने की चुनाव आयोग की तत्परता में, घुसपैठियों के नहीं मिलने की सचाई से कोई कमी नहीं आयी। उल्टे उसकी यह धारणा और पक्की हो गयी कि बंगाल में और जाहिर है कि असम में भी, बहुत बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूचियों में होंगे ही।

लेकिन, चूंकि असम में मतदाता सूची में इस तरह की छंटनी सत्ताधारी पार्टी के हित में नहीं बैठती थी और इस राज्य में परिसीमन के जरिए, विधानसभाई सीटों को सत्तापक्ष के हितों के हिसाब से पहले ही ढाला जा चुका था, असम को वहां एनआरसी का मामला लंबित होने का गोलमोल बहाना बनाकर, विधानसभाई चुनाव से पहले सर कराने के तकाजे से अपवाद बनाकर बाहर कर दिया गया। मतदाता सूचियों की इस तरह की सफाई का सारा नज़ला उतरा बंगाल पर। संघ-भाजपा के वैचारिक आख्यान से संचालित चुनाव आयोग के लिए समीकरण आसान था — बंगलाभाषी+मुसलमान = घुसपैठिया! बंगाल के सीमावर्ती जिलों में, इस समीकरण के हिसाब से बीसियों लाख लोग छंटनी के लिए उपलब्ध थे। सत्ताधारी पार्टी की नजरों में ये वैसे भी, उसके विरोधी मतदाता थे। उनका मताधिकार छीना जाना, उसकी जीत में ही मददगार होता।

इसका नतीजा यह हुआ कि इसके बावजूद कि, सर की सामान्य प्रक्रिया में बंगाल में करीब 5 फीसदी नाम कटे थे, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि अनेक राज्यों से ज्यादा ही था, चुनाव आयोग ने बंगाल के लिए एक खास तजुर्बा करना तय किया। इस सामान्य छंटाई के बाद, संशोधित मतदाता सूचियों का और गहन परीक्षण के लिए, एक पूरी तरह के अपरीक्षित साफ्टवेयर के हवाले कर दिया गया, जिसके एल्गोरिदम की न किसी ने जांच की थी और न उसका किसी ने अध्ययन किया था। इस सॉफ्टवेयर ने 1 करोड़ 35 लाख नामों को तार्किक विसंगति या लॉजीकल डिस्क्रीपेंसी की श्रेणी में डाल दिया। बेशक, बाद में उनमें से आधे नामों को इस श्रेणी से निकाल भी दिया गया, लेकिन अमर्त्य सेन से लेकर, पूर्व-जनरलों तक अनेक नामों के मतदाता के रूप में संदिग्ध सूची में डाले जाने का शोर मचने के बाद।

इसके बाद, लाखों लोगों की दस्तावेजों के साथ अंतहीन दौड़ शुरू हुई। अंतत: 35 लाख मतदाताओं का नाम न्यायाधीन की श्रेणी में डाल दिया गया, जिस पर विचार के काम में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, न्यायाधीशों को लगाया गया। और नतीजा क्या निकला? कुल 35 लाख मतदाताओं में से 0.01 फीसद के मताधिकार पर, मतदान के पहले चरण तक न्यायिक ट्रिब्यूनल का फैसला आ पाया था। अधिकांश फैसले प्रार्थियों के मताधिकार के पक्ष में होने से यह भी साफ हो गया कि इनमें अधिकांश वैध मतदाता थे। लेकिन, चुनाव आयोग ने जिस तरह की समय सूची सर के लिए थोपी थी और जिस तरह सोचे-समझे तरीके से और अकारण, लाखों लोगों के मताधिकार पर सवालिया निशान लगाया था, उसने यह सुनिश्चित किया कि मतदाताओं की यह विशाल संख्या अपने मताधिकार का प्रयोग ही नहीं कर सके। बेशक, सुप्रीम कोर्ट ने भी इन मतदाताओं को वर्तमान चुनाव में मतदान का अधिकार देने के बजाए, इस चुनाव को भूलकर आगे अपने मताधिकार के लिए लड़ाई जारी करने का उपदेश देना ही काफी समझा। सर्वोच्च न्यायालय ने तो अपने दरवाजे पर आए, ऐसे 65 चुनाव अधिकारियों को भी कोई राहत देने से इंकार कर दिया, जिन पर चुनाव कराने का जिम्मा तो है, लेकिन जिनका अपना मताधिकार छीन लिया गया है।

कहने की जरूरत नहीं है कि यह पागलपन भी बिना योजना के नहीं है। न्यायाधीन के नाम पर, मताधिकार से वंचित किए गए कुल मतदाताओं में हिंदुओं की संख्या बेशक ज्यादा है, लेकिन आबादी के अनुपात में मुसलमानों का हिस्सा काफी ज्यादा है। इसके ऊपर से मुसलमानों के नामों की छंटनी टार्गेटेड तरीके से की गयी है। एक उदाहरण से ही बात साफ हो जाएगी। मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में एक विधानसभाई क्षेत्र है —शमशेरगंज। इस विधानसभाई क्षेत्र में कुल 2,35,592 मतदाता हैं। इनमें 82 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं यानी 1, 93,129। यहां कुल 1,07,683 मतदाताओं को न्यायाधीन की श्रेणी में डाल दिया गया। इनमें 98.8 फीसदी यानी 1,06,407 मुसलमान हैं, जबकि हिंदू कुल 964 यानी 0.94 फीसदी हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि चुनाव आयोग का यह फैसला, चुनाव के नतीजों को किस ओर धकेल सकता है।

बंगाल में इस पूरी प्रक्रिया के बीच, छ: लाख नाम मतदाता सूचियों में जोड़े जाने में भी टार्गेटिंग के आरोपों को जोड़ दिया जाए तो, चुनाव प्रक्रिया के ही बनाए जाने की कहानी पूरी हो जाती है। इस सब के बावजूद अगर भाजपा का बंगाल फतेह करने का अभियान नाकाम हो जाता है, तो यह मोदीशाही की जनतंत्र को खोखला करने की वृहत्तर मुहिम के लिए एक बड़ा धक्का होगा और बंगाल की जनता की जीत। लेकिन, इस सब धतकर्म के बाद अगर संघ-भाजपा किसी तरह बंगाल में सत्ता पर काबिज हो जाते हैं, तब भारतीय जनतंत्र के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह और बड़े हो जाएंगे। आखिर, चुनाव आयोग से लेकर न्यायपालिका तक, सब हिंदुत्व की पालकी के कहार बनकर जो खड़े होंगे।

*(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक पत्रिका 'लोकलहर' के संपादक हैं।)*

*Devashish Govind Tokekar*
*VANDE Bharat live tv news Nagpur*
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
*Indian Council of press,Nagpur*
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*All India Media Association
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*District President*
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RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
*INDIAN PRESS UNION*
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गया जी, शेरघाटी प्रखंड के चिलम पंचायत के ग्रामीणों को इन दिनों भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, NH-19 से जुड़ी ग्रामीण सड़क को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्माण के नाम पर जेसीबी द्वारा खोद दिया गया था, लेकिन अब तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है।
सड़क खोदे जाने के बाद स्थिति पहले से भी अधिक खराब हो गई है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन काफी कठिन हो गया है। विशेष रूप से टोटो (ई-रिक्शा) चालकों को इस ऊबड़-खाबड़ सड़क पर चलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण का काम शुरू किया गया था और ठेकेदार द्वारा जल्द निर्माण पूरा करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं दिख रही है।
इधर शादी-विवाह के मौसम में बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है। छोटे वाहनों के टायर पंचर होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त आर्थिक और समय की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है। कुछ ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार और ठेकेदार के इस रवैये से ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है, ताकि उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके।

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पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों हेतु शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना 2026

आवेदन की अंतिम तिथि 11 मई: प्रशिक्षण 12 मई से होगा प्रारंभ

मध्यप्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सैन्य बल एवं अन्य समकक्ष सुरक्षा बलों, पुलिस होमगार्ड एवं निजी सुरक्षा एजेसियों में भर्ती के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय प्रशिक्षण में पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा एक नवीन योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के युवाओं हेतु शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना 2026 तैयार की गई है।
मध्यप्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना, अनुशासन एवं कर्तव्य बोध विकसित करते हुए प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। जिसमें शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ सैद्धांतिक विषयों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण पूर्णतः निशुल्क एवं आवासीय है। योजनांतर्गत मुरैना जिले में पिछड़ा वर्ग के 100 बालक एवं 100 बालिकाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। शिष्यवृत्ति प्रशिक्षण अवधि में चयनित पात्र पुरुष प्रशिक्षणार्थियों को 1000 रूपए प्रतिमाह तथा पात्र महिला प्रशिक्षणार्थियों को 1100 रूपए प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति भी उपलब्ध करायी जाएगी। यह आवासीय प्रशिक्षण है, जिसकी कुल अवधि 45 दिवस निर्धारित है।
पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि योजना में सम्मिलित होने के लिए आवश्यक अर्हताएं जैसे शैक्षणिक योग्यता 12वीं उत्तीर्ण, आवेदक मध्यप्रदेश का मूल निवासी, मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए घोषित अनुसूची में सम्मिलित अन्य पिछड़ा वर्ग का मध्यप्रदेश राज्य का सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी (नॉन क्रीमीलेयर) जाति प्रमाण-पत्र होना आवश्यक है। सैन्य बल एवं अन्य समकक्ष सुरक्षा बलों, पुलिस, होमगार्ड एवं निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती हेतु निर्धारित आयु सीमा निर्धारित है। शारीरिक माप न्यूनतम ऊँचाई पुरुष 168 से.मी. एवं महिला 155 से.मी. (सम्बंधित भर्ती विज्ञापन में प्रदत्त छूट लागू होगी)। आवेदक के पैरो के तलवे फ्लैट फूट श्रेणी में नहीं होना चाहिए। सावधान की मुद्रा में आवेदक के घुटने परस्पर नहीं मिलना चाहिए। अन्य शारीरिक मापदण्ड दृष्टि, जबड़े, निरोगी होना एवं अन्य निर्धारित मापदण्ड संतोषजनक होना चाहिए। सैद्धांतिक प्रशिक्षण योग्य एवं अनुभवी ट्रेनर के निर्देशन में निर्धारित पाठ्यक्रम अनुसार सामान्य ज्ञान, तर्कशक्ति, गणित, कम्प्यूटर, अंग्रेजी एवं अन्य आवश्यक विषयों का प्रतिदिन 04 घण्टे प्रशिक्षण। शारीरिक प्रशिक्षण शारीरिक क्षमता विकास हेतु योग्य एवं अनुभवी ट्रेनर के निर्देशन में प्रतिदिन 03 घण्टे (प्रातः एवं सायंकाल), शारीरिक प्रशिक्षण यथा रनिंग, ऊँची कूद, लंबी कूद, गोला फेक, भाला फेक एवं अन्य समकक्ष खेल-कूद गतिविधियां होगी। निःशुल्क प्रशिक्षण, आवासीय व्यवस्था, भोजन व्यवस्था एवं अध्ययन सामग्री तथा प्रशिक्षण स्थल पर पुरुष अभ्यर्थियों हेतु पिछड़ा वर्ग बालक पोस्ट मैट्रिक छात्रावास ए.बी. रोड मुरैना, महिला अभ्यर्थियों हेतु पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, बडोखर मुरैना, आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 मई 2026 है। प्रशिक्षण 12 मई 2026 से विधिवत प्रारंभ होगा। आवेदन प्रारूप विभागीय वेवसाइट www. bcwelfare.mp.gov.in एवं कार्यालय कलेक्टर पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण, कक्ष क्रमांक 208, द्वित्तीय तल कलेक्ट्रेट परिसर मुरैना से कार्यालयीन समय में प्राप्त किये जा सकते हैं।
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गेहूँ उपार्जन हेतु स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई तक की गई

रबी विपणन वर्ष 2026–27 के अंतर्गत जिले में समर्थन मूल्य पर एफ.ए.क्यू. (मानक गुणवत्ता) गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा अब 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक कर दी गई है।
इस संबंध में बुधवार, 29 अप्रैल को मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि स्लॉट बुकिंग से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु एन.आई.सी. की टीम द्वारा पोर्टल पर निरंतर कार्य किया जा रहा है, जिससे शीघ्र ही समस्या का पूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।
जिले में अब तक 1242 किसानों से कुल 55,538 क्विंटल गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ का भुगतान जेआईटी (जस्ट-इन-टाइम) प्रणाली के माध्यम से सीधे किसानों के आधार से लिंक बैंक खातों में किया जा रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा पंजीकृत कृषकों से अपील की गई है कि वे अपने निकटतम उपार्जन केंद्र पर निर्धारित अवधि में स्लॉट बुकिंग कराकर समर्थन मूल्य पर गेहूँ का विक्रय सुनिश्चित करें। साथ ही सभी खरीदी केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि शासन के नियमों के अनुरूप निर्धारित समयावधि में केवल एफ.ए.क्यू. गुणवत्ता का गेहूँ ही उपार्जित किया जाए।
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ਫ਼ਰੀਦਕੋਟ/ਸਾਦਿਕ 29 ਅਪ੍ਰੈਲ ( ਨਾਇਬ ਰਾਜ)

ਸਿਹਤ ਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਭਲਾਈ ਵਿਭਾਗ, ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਹਦਾਇਤਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਤੇ ਸਿਵਲ ਸਰਜਨ, ਫਰੀਦਕੋਟ ਡਾ. ਪਰਵਜੀਤ ਸਿੰਘ ਗੁਲਾਟੀ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਹੇਠ ਅਤੇ ਡਾ. ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫ਼ਸਰ ਇੰਚਾਰਜ ਪੀ. ਐਚ. ਸੀ. ਜੰਡ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਿੱਚ ਸਿਹਤ ਬਲਾਕ ਜੰਡ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਦਫ਼ਤਰ ਵਿਖੇ ਆਸ਼ਾ ਅਤੇ ਆਸ਼ਾ ਫੈਸਿਲੀਟੇਟਰ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਪੇਂਡੂ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨਿਭਾਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਹਤਰੀਨ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰਾਂ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨ ਚਿੰਨ ਦੇ ਕੇ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।

ਇਸ ਮੌਕੇ ਡਾ. ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਨੇ ਇਸ ਸਮਾਗਮ ਦੌਰਾਨ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰਾਂ ਨੂੰ ‘ਆਸ਼ਾ ਦਿਵਸ’ ਦੀ ਵਧਾਈ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਆਸ਼ਾ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਰੀੜ੍ਹ ਦੀ ਹੱਡੀ ਹਨ, ਜੋ ਪੇਂਡੂ ਅਤੇ ਸ਼ਹਿਰੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨਿਭਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮਾਵਾਂ ਅਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਸੰਭਾਲ, ਮਾਵਾਂ ਦੀ ਮੌਤ ਦਰ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ, ਜੱਚਾ-ਬੱਚਾ ਦਾ ਟੀਕਾਕਰਨ ਅਤੇ ਸੰਸਥਾਗਤ ਜਣੇਪੇ ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰਾਂ ਦਾ ਯੋਗਦਾਨ ਬੇਮਿਸਾਲ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਸਿਹਤ ਯੋਜਨਾ ਕਾਰਡ ਰਜਿਸਟਰੇਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਆਸ਼ਾ ਵੱਲੋਂ ਆਪਣਾ ਅਹਿਮ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈl

ਡਾ. ਬਰਾੜ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਹਾਈ-ਰਿਸਕ ਗਰਭਵਤੀ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰਨ ਅਤੇ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਦੀ 9 ਅਤੇ 23 ਤਾਰੀਖ ਨੂੰ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਮਾਤ੍ਰਿਤਵ ਅਭਿਆਨ ਤਹਿਤ ਚੈੱਕਅਪ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰਾਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਕਾਬਿਲ-ਏ-ਤਾਰੀਫ਼ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਆਸ਼ਾ ਵਰਕਰ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਅਤੇ ਲੋਕਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕੜੀ ਵਜੋਂ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਸਦਕਾ ਹੀ ਸਿਹਤ ਸੇਵਾਵਾਂ ਲੋਕਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਰਹੀਆਂ ਹਨl

ਇਸ ਮੌਕੇ ਰਜਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਬੀ. ਈ. ਈ., ਸੁਖਦੀਪ ਸਿੰਘ ਫਾਰਮੇਸੀ ਅਫ਼ਸਰ, ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਬਲਾਕ ਅਕਾਊਂਟੈਂਟ, ਦਰਸ਼ਨ ਕੌਰ ਸਟੈਨੋ, ਪਰਮਜੀਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਦਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਯੂਨੀਅਰ ਸਹਾਇਕ ਅਤੇ ਲਵਜੀਤ ਸਿੰਘ ਸਮੇਤ ਸਮੂਹ ਸਟਾਫ਼ ਹਾਜ਼ਰ ਸੀl

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नागपुर शहर में भीषण गर्मी के बीच रक्त की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं ।

ब्लड बैंकों में चल रहे रक्त के संकट को देखते हुए सिंधु युवा फोर्स सामाजिक संस्था ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए एक विशाल रक्तदान शिविर का संकल्प लिया है ।
ये केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उन थैलेसिमियां पीड़ित बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए जीवनदान की उम्मीद है जिन्हें समय पर रक्त नहीं मिल पा रहा है ।
रक्तदान शिविर - 10 मई ( रविवार ) ।
समय - सुबह 8 से शाम 7 बजे तक ।
स्थान - संत सतरामदास धर्मशाला, ( समाधि साहिब ) जरीपटका नागपुर ।
इस पुनीत कार्य में श्री जीतू बेलानी जी, श्री राजकुमार पंजवानी जी, श्री जीतू कामनानी जी, श्री शंकर भोजवानी जी व संत सतरामदास साहिब ट्रस्ट का पूर्ण सहयोग प्राप्त है ।
प्रथम सभा में ही जिस तरह युवा साथियों ने 500 से अधिक यूनिट रक्त संकलन का संकल्प लिया है वो नागपुर की जीवंत और सेवाभावी संस्कृति को दर्शाता है ।
तपती गर्मी के कारण जब दानदाता कम हो जाते हैं, तब इस तरह के बड़े शिविर की योजना बनाना साहस और दूरदर्शिता का प्रमाण है ।
सभा में युवा साथियों का उत्साह ये बताता है कि आज की पीढ़ी सामाजिक सरोकारों के प्रति कितनी सजग है ।
रक्त के अभाव में सबसे ज्यादा कष्ट थैलेसमिया से जूझ रहे बच्चों को होता है।
ये शिविर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का एक सशक्त ज़रिया बनेगा, ये विश्वास हमें है ।
आपसे निवेदन है,
जिनकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच है, जिनका वजन 45 किलो से अधिक है और आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हैं तो कृपया इस रक्तदान शिविर में मानवता की खातिर स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए आगे आएं।

*Devashish Govind Tokekar*
*VANDE Bharat live tv news Nagpur*
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
*Indian Council of press,Nagpur*
Journalist Cell
*All India Media Association
Nagpur*
*District President*
*Delhi Crime Press*
RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
*INDIAN PRESS UNION*
District Reporter
Contact no.
9422428110/9146095536
Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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FIFA allows Afghan women to play for their country, defying Taliban

Afghanistan's players prepare to compete in the FIFA Unites Women's Series 2025 match between Afghan Women United and Chad in Berrechid, Morocco, on October 26, 2025. Abdel Majid Bziouat/AFP/Getty Images

For nearly five years, dozens of Afghanistan’s women soccer players have lived in exile — scattered across Australia, the United States and Europe — unable to officially represent their country’s national team. A landmark amendment to the regulations of soccer’s worldwide governing body is set to change that.

The ruling Tuesday by the International Federation of Association Football (FIFA) allows Afghan female players to compete as the Afghanistan women’s national team in official international matches for the first time with full sporting recognition.

The decision, issued at a FIFA Council meeting in Vancouver, British Columbia, rewrites a long-standing rule that required FIFA to recognize a national team through the country’s own soccer federation. Afghanistan’s federation, operating under Taliban influence since the radical Islamist group returned to power in 2021, has refused to acknowledge the women’s program, effectively keeping its female players off the international pitch.

soccer due to situations beyond their control.

“This is a powerful and unprecedented step in world sport,” FIFA President Gianni Infantino said in a statement. “By enabling Afghan women to compete for their country in official matches, we are turning principles into action.”

CNN has reached out to the Taliban-led Afghan government for comment.

A women’s team in exile
The team, which has played under the name Afghan Women United as a FIFA-supported refugee squad, has been pushing for this decision since the Taliban swept back into power and immediately suspended organized women’s sports across the country. Players were forced into hiding, their equipment and medals buried or abandoned, before a coordinated evacuation — led in part by former team captain and activist Khalida Popal — brought dozens of players out of the country.

What followed was years of fighting not just for the right to play but for FIFA to designate the group as Afghanistan’s official women’s national team. CNN reported in October that players had grown frustrated with the “refugee” label that defined their squad.

“We are tired of getting called refugee,” player Zainab Mozaffari told CNN Sports. Tuesday’s ruling directly addresses that grievance.

The team took its first tentative steps back onto the international stage in October, competing in an unofficial FIFA-organized tournament in Morocco.

“For these players, representing Afghanistan is about identity, dignity and hope,” Popal said in a statement Tuesday. “This moment also shows that when we stand united, we can achieve more.”

The change comes too late for Afghanistan to qualify for the 2027 Women’s World Cup in Brazil, but the team could now enter qualifying for the 2028 Olympics in Los Angeles. A training camp is scheduled for the first week of June in New Zealand, where the team will face the Cook Islands. FIFA has committed to providing financial, technical and human support for up to two years through the transition.

The governance amendment is also broader than one country, setting a precedent that could apply to any national federation that discriminates against its own players in the future.

*Devashish Govind Tokekar*
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महाराष्ट्र स्कूल रिजल्ट 2025-26: 1 मई को आएगा परिणाम, उत्तर पुस्तिकाएं दिखाना अब अनिवार्य
​मुंबई:
महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के परीक्षा परिणामों को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसे शिक्षा जगत में 'क्रांतिकारी' माना जा रहा है। अब 1 मई को केवल प्रोग्रेस कार्ड (रिजल्ट) थमा देने से काम नहीं चलेगा; स्कूलों को अब अभिभावकों (Parents) को उनके बच्चों की असली उत्तर पुस्तिकाएं (Answer Sheets) दिखाना अनिवार्य होगा।
​1 मई को नतीजा, 2 मई से मौज!
​शिक्षा विभाग के नए शेड्यूल के अनुसार, राज्य के सभी प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों का रिजल्ट 1 मई 2026 को घोषित किया जाएगा। इसके ठीक अगले दिन, यानी 2 मई 2026 से पूरे महाराष्ट्र के राज्य बोर्ड स्कूलों में आधिकारिक तौर पर गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो जाएंगी।
​सिर्फ नंबर नहीं, अब काबिलियत दिखेगी
​नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। शिक्षा आयुक्त सचिन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जारी आदेशों के अनुसार: ​अभिभावक अब देख सकेंगे कि उनके बच्चे ने परीक्षा में असल में क्या लिखा है। ​शिक्षकों ने पेपर कैसे चेक किए हैं, इसमें अब पूरी पारदर्शिता रहेगी। ​सिर्फ अंकों (Marks) के पीछे भागने के बजाय, बच्चा कहाँ गलती कर रहा है और उसकी लेखन शैली कैसी है, इसका सटीक अंदाजा लगाया जा सकेगा।
​क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
​शिक्षण निदेशालय का मानना है कि इस कदम से पालकों और शिक्षकों के बीच संवाद बढ़ेगा। इसके कई बड़े फायदे गिनाए गए हैं:
​कमी की पहचान: माता-पिता घर पर ही बच्चे की कमजोरियों को सुधारने में मदद कर पाएंगे।
​जिम्मेदारी का अहसास: बच्चे की पढ़ाई और लिखने की आदतों के प्रति अभिभावक अधिक सजग होंगे।
​भरोसा और पारदर्शिता: मूल्यांकन प्रक्रिया (Evaluation) पर पालकों का विश्वास बढ़ेगा।
​सभी स्कूलों को सख्त आदेश
​यह आदेश महाराष्ट्र के सभी मैनेजमेंट और सभी माध्यमों (मराठी, हिंदी, अंग्रेजी आदि) के स्कूलों पर लागू होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता को एक नए स्तर पर ले जाएगा। अब 1 मई का दिन केवल पास या फेल होने का नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य की नई प्लानिंग का दिन होगा।

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FIFA allows Afghan women to play for their country, defying Taliban

Afghanistan's players prepare to compete in the FIFA Unites Women's Series 2025 match between Afghan Women United and Chad in Berrechid, Morocco, on October 26, 2025. Abdel Majid Bziouat/AFP/Getty Images

For nearly five years, dozens of Afghanistan’s women soccer players have lived in exile — scattered across Australia, the United States and Europe — unable to officially represent their country’s national team. A landmark amendment to the regulations of soccer’s worldwide governing body is set to change that.

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The decision, issued at a FIFA Council meeting in Vancouver, British Columbia, rewrites a long-standing rule that required FIFA to recognize a national team through the country’s own soccer federation. Afghanistan’s federation, operating under Taliban influence since the radical Islamist group returned to power in 2021, has refused to acknowledge the women’s program, effectively keeping its female players off the international pitch.

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“This is a powerful and unprecedented step in world sport,” FIFA President Gianni Infantino said in a statement. “By enabling Afghan women to compete for their country in official matches, we are turning principles into action.”

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“We are tired of getting called refugee,” player Zainab Mozaffari told CNN Sports. Tuesday’s ruling directly addresses that grievance.

The team took its first tentative steps back onto the international stage in October, competing in an unofficial FIFA-organized tournament in Morocco.

“For these players, representing Afghanistan is about identity, dignity and hope,” Popal said in a statement Tuesday. “This moment also shows that when we stand united, we can achieve more.”

The change comes too late for Afghanistan to qualify for the 2027 Women’s World Cup in Brazil, but the team could now enter qualifying for the 2028 Olympics in Los Angeles. A training camp is scheduled for the first week of June in New Zealand, where the team will face the Cook Islands. FIFA has committed to providing financial, technical and human support for up to two years through the transition.

The governance amendment is also broader than one country, setting a precedent that could apply to any national federation that discriminates against its own players in the future.
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'மூலப் பெயரிலான மருந்துகளை மட்டுமே, மத்திய அரசு மருத்துவமனைகளில் பரிந்துரைக்க வேண்டும்' என, மத்திய சுகாதார சேவைகளுக்கான தலைமை இயக்குநரகம் அறிவுறுத்தியுள்ளது.
நாட்டில் உள்ள அங்கீகரிக்கப்பட்ட மருத்துவர்களுக்கான, நெறிசார் வழிகாட்டுதல்கள் மற்றும் விதிகளை, தேசிய மருத்துவ ஆணையம், மூன்றாண்டுகளுக்கு முன்பு வெளியிட்டது. அதில், 'ஜெனரிக்' எனப்படும், மூலப் பெயர் கொண்ட மருந்துகளை மட்டுமே டாக்டர்கள் பரிந்துரைக்க வேண்டும் என்பது பிரதான விதியாக இருந்தது. அதை மீறுவோர் மீது, சட்ட நடவடிக்கை எடுக்கப்படும் என்றும் தெரிவிக்கப்பட்டிருந்தது.

இதற்கு பல்வேறு தரப்பிலிருந்தும் ஆட்சேபனைகள் எழுந்தன. மூலப் பெயர் கொண்ட மருந்துகளை பரிந்துரைப்பதில் தவறில்லை என்றாலும், அதன் தரத்தை எவ்வாறு உறுதி செய்வது என, கேள்வி எழுந்தது. பிரபல மருந்து நிறுவனங்களின் உற்பத்தி தரத்துக்கு, சிறிய அளவில் மருந்து உற்பத்தி செய்வோரால், ஈடு கொடுக்க முடியாது என, விமர்சனங்கள் முன் வைக்கப்பட்டன. இதனால், சிகிச்சைக்கு வரும் நோயாளிகள் குணமடைவதில் காலதாமதம் ஏற்படவும், தரமற்ற மருந்துகளால் பக்க விளைவுகள் ஏற்படவும் வாய்ப்புள்ளது என, இந்திய மருத்துவ சங்கம் தெரிவித்தது.

எனவே, நாட்டில் உற்பத்தியாகும் மருந்துகளின் தரத்தை உறுதிப்படுத்துவதை ஒழுங்குமுறைப்படுத்திய பின், இத்தகைய விதிகளை அமல்படுத்த வேண்டும் என வலியுறுத்தப்பட்டது. அதை ஏற்று, தேசிய மருத்துவ ஆணையம், அந்த விதிகளை தற்காலிகமாக ஒத்திவைப்பதாக தெரிவித்தது. இந்நிலையில், 2023 வழிகாட்டுதல்களை பின்பற்றி, மத்திய அரசு மருத்துவமனைகளில், மூலப்பெயர் மருந்துகளை மட்டுமே பரிந்துரைக்க வேண்டும் என, மத்திய சுகாதார சேவைகள் தலைமை இயக்ககம் அறிவுறுத்தியுள்ளது.

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ਫਰੀਦਕੋਟ, 29 ਅਪ੍ਰੈਲ 2026(ਨਾਇਬ ਰਾਜ)

ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਮੈਡਮ ਪੂਨਮਦੀਪ ਕੌਰ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹਦਾਇਤਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਦਾ ਇੱਕ-ਇੱਕ ਦਾਣਾ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਬੀਤੇ ਕੱਲ ਤੱਕ 422023 ਮੀਟਰਕ ਟਨ ਕਣਕ ਦੀ ਮੰਡੀਆਂ ਵਿੱਚ ਆਮਦ ਹੋਈ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚੋਂ 417854 ਮੀਟਰਕ ਟਨ ਦੀ ਖਰੀਦ ਹੋਈ ਹੈ। ਜੋ ਕਿ ਖਰੀਦ ਦੇ ਨਿਰਧਾਰਤ ਸਮੇਂ 24 ਘੰਟੇ ਅੰਦਰ ਕੀਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖਰੀਦ ਦਾ 99.92 ਫੀਸਦੀ ਬਣਦਾ ਹੈ।
ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਬੀਤੇ ਕੱਲ ਪਨਗ੍ਰੇਨ ਕਣਕ ਵੱਲੋਂ 122601.00 ਮੀਟ੍ਰਿ਼ਕ ਟਨ, ਮਾਰਕਫੈੱਡ ਵੱਲੋਂ 106075.50 ਮੀਟ੍ਰਿਕ ਟਨ, ਪਨਸਪ ਵੱਲੋਂ 94304.00 ਪੰਜਾਬ ਵੇਅਰਹਾਊਸ ਵੱਲੋਂ 73373.00 ਮੀਟ੍ਰਿਕ ਟਨ ਅਤੇ ਖਰੀਦ ਏਜੰਸੀਆਂ ਵੱਲੋਂ 21500.00 ਮੀਟ੍ਰਿਕ ਟਨ ਕਣਕ ਦੀ ਖ੍ਰੀਦ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਹੁਣ ਤੱਕ 233085 ਮੀਟ੍ਰਿਕ ਕਣਕ ਦੀ ਲਿਫਟਿੰਗ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ। ਹੁਣ ਤੱਕ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਖਾਤੇ ਵਿੱਚ 910 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਆਨਲਾਈਨ ਅਦਾਇਗੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ।
ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨੇ ਸੰਬੰਧਤ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਲਿਫਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਤੇਜੀ ਲਿਆਉਣ ਦੇ ਹੁਕਮ ਦਿੱਤੇ। ਉਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ , ਖੁਰਾਕ ਤੇ ਸਿਵਲ ਸਪਲਾਈ ਵਿਭਾਗ ਤੇ ਖਰੀਦ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀ ਚੁਕਾਈ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਹੋਰ ਤੇਜ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਨਿੱਜੀ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਨਿਗਰਾਨੀ ਕਰਨ ।

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न्यूज:
हाल के दिनों में पूजा-पाठ के दौरान सिर ढकने की बढ़ती प्रथा को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग पूजन आरंभ होते ही रूमाल या कपड़ा सिर पर रख लेते हैं, जबकि कुछ विद्वानों और आचार्यों का कहना है कि यह शास्त्रसम्मत नहीं है।
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के हवाले से बताया जा रहा है कि जप, ध्यान और देवपूजन के समय सिर ढकना निषेध माना गया है। विशेष रूप से कुर्म पुराण सहित अन्य ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सिर या कण्ठ ढककर, अशुद्ध अवस्था में या अनुचित आचरण के साथ किया गया जप निष्फल हो सकता है।
कुछ विद्वानों का यह भी कहना है कि पूजा के समय शारीरिक और मानसिक शुद्धता अत्यंत आवश्यक है, जिसमें सिर खुला रखना भी एक महत्वपूर्ण नियम बताया गया है। वहीं, समाज के एक वर्ग का मानना है कि यह आस्था और परंपरा का विषय है, जिसे व्यक्ति अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार अपनाता है।
इस मुद्दे पर स्पष्टता के लिए धर्माचार्यों की राय अहम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि किसी भी धार्मिक कर्मकांड को करने से पहले उसके शास्त्रीय नियमों को समझना जरूरी है, ताकि श्रद्धा के साथ-साथ विधि-विधान का भी पालन हो सके।

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न्यूज:
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के मालदेपुर क्षेत्र में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक पीपा पुल टूटने की सूचना सामने आई। घटना की जानकारी मिलते ही आपदा कंट्रोल रूम बलिया तुरंत सक्रिय हो गया और राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से शुरू कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार पुल टूटने के कारण करीब 5 से 6 लोग मौके पर फंस गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीम को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और सदर उप जिलाधिकारी को भी सूचित किया गया।
घटनास्थल पर कोतवाली की पीआरबी 6430 टीम पहले ही पहुंच चुकी थी। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमों ने हालात को नियंत्रित करते हुए एलएनटी की स्टीमर की मदद से बचाव अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद पीपा पुल पर फंसे सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
गनीमत रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। मौके पर मौजूद नाविकों ने भी बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई।
प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खराब मौसम को देखते हुए आपदा कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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स्कूलों का महंगी कॉपी, किताबें और स्टेशनरी पर अपना लोगो/ब्रांड लगाकर बेचना बच्चों के परिवारों के साथ सीधी लूट जैसा है। यह आम बाज़ार की चीज़ों से 2-3 गुना ज़्यादा पैसे लेता है, जबकि लोगो लगाने के अलावा इसमें कुछ खास नहीं होता। ऐसा क्यों होता है? स्कूल ये चीज़ें खुद या अपनी टाई-अप दुकानों के ज़रिए बेचते हैं। वे “यूनिफ़ॉर्मिटी और बच्चे को स्कूल से जोड़ने” का बहाना बनाते हैं। असल में, यह एक तरह की मोनोपॉली है जिससे माता-पिता से ज़्यादा पैसे ऐंठते हैं। सरकार का क्या रुख है? पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों में) और दूसरे राज्यों की सरकारों ने इसके ख़िलाफ़ गाइडलाइंस जारी की हैं: प्राइवेट स्कूल माता-पिता को किसी खास दुकान से खरीदने के लिए मजबूर न करें। स्कूल सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ों की लिस्ट दे सकता है, लेकिन लोगो वाली चीज़ें खरीदना ज़रूरी नहीं कर सकता। कई जगहों पर इसे गैर-कानूनी माना गया है और इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई है। लेकिन असल में, कई स्कूल इसे नज़रअंदाज़ करते हैं और बच्चों पर लोगो वाली कॉपी लाने का दबाव डालते हैं। आप क्या कर सकते हैं? स्कूल प्रिंसिपल से लिखकर पूछें कि बिना लोगो वाली सादी कॉपी लाने पर कोई रोक है या नहीं, तो उसका रेफरेंस मांगें। अपने इलाके के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) या पंजाब स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत करें। ज़्यादातर जगहों पर ऐसी शिकायतों पर एक्शन लिया गया है। दूसरे पेरेंट्स से बात करें। अगर हम सब मिलकर आवाज़ उठाएंगे, तो बदलाव आना आसान है। आम मार्केट से अच्छी क्वालिटी की कॉपी खरीदकर ले जाएं। अगर बच्चा डरता है, तो उसे समझाएं कि यह उसका हक है। यह प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए क्योंकि पढ़ाई महंगी नहीं होनी चाहिए, खासकर मिडिल क्लास और गरीब परिवारों के लिए। पढ़ाई बच्चों के लिए होनी चाहिए, स्कूल अथॉरिटीज़ की जेब भरने के लिए नहीं। 🍳*हरबंस सिंह, एडवाइजर* 🙏🏻 शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

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बेरमो में कुदरत का कहर, भीषण आंधी और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई जगहों पर गिरे पेड़ और पोल, घरों के उड़े एस्बेस्टस सीट

बेरमो
बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और एक चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण बेरमो कोयलांचल क्षेत्र में बुधवार को मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि चारों ओर तबाही के निशान नजर आने लगे। दोपहर के बाद अचानक आए भीषण आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। चक्रवातीय प्रभाव के कारण 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी, ओलावृस्ट बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया। बहुत एज बारिश के साथ बड़े बड़े बर्फ के बारिश ने आम जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। आंधी तूफान और बारिश के वजह से दोपहर के समय पूरा क्षेत्र मे अंधेरा छा गया। जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि क्षेत्र के कई हिस्सों में दशकों पुराने विशाल पेड़ जड़ से उखड़ गए। फुसरो-जैनामोड़ मुख्य मार्ग और बेरमो-गोमिया रोड पर पेड़ों के गिरने से आवाजाही घंटों बाधित रही। राहगीरों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी। फुसरो, जारंगडीह, करगली और कथारा जैसे बड़े इलाकों में बिजली के पोल ताश के पत्तों की तरह गिर गए। हाई-टेंशन तार टूटने के कारण पूरे कोयलांचल में ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। बिजली विभाग के अनुसार, नुकसान काफी अधिक है और बहाली में समय लग सकता है। शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई कच्चे मकानों के एस्बेस्टस और छप्पर उड़ गए। बाजार क्षेत्रों में दुकानों के साइनबोर्ड और होर्डिंग्स उखड़कर सड़कों पर आ गिरे। कुछ स्थानों पर खड़ी गाड़ियों पर पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। फुसरो नगर परिषद कार्यालय परिसर में खड़ी चलंत शौचालय के ऊपर विशाल पेड़ गिरने से चलंत शौचालय क्षतिग्रस्त हो गया।
पिछले कई दिनों से पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा था, जो इस तूफान के बाद गिरकर सीधे 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया है। हालांकि, इस राहत के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में लगी सब्जियों और अन्य फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिससे स्थानीय किसान चिंतित हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, नगर परिषद और बिजली विभाग की टीमें राहत कार्य में जुट गई हैं। गैस कटर की मदद से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाकर रास्ता साफ किया जा रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बोकारो सहित आसपास के जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। अगले 48 घंटों तक इसी तरह के मौसम और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम में घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी:
​वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जब भी जनता अपने संवैधानिक अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए उठ खड़ी होती है, तो सत्ता अक्सर 'कानून-व्यवस्था' का हवाला देकर दमन का मार्ग चुनती है।

​संवैधानिक विरोधाभास:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।
पूर्व सूचना के बावजूद गिरफ्तारी करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े करता है।

​रणनीतिक चूक:
प्रशासन द्वारा की गई गिरफ्तारियां अक्सर आंदोलन को कमजोर करने के बजाय उसे और अधिक जन-समर्थन और धार प्रदान कर देती हैं।

​आंदोलन का स्वरूप:
'संविधान सुरक्षा महारैली' जैसे आयोजन वैचारिक होते हैं। विचार को सलाखों के पीछे कैद करना असंभव है।

​क्या संविधान की रक्षा की बात करना अब 'अपराध' है?

​आज जिला प्रशासन द्वारा अंबेडकर संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार और उनके साथियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या इस देश में असहमति की आवाज़ के लिए कोई जगह बची है?
शांतिपूर्ण धरना और अनशन किसी भी जीवित लोकतंत्र के सबसे बड़े हथियार होते हैं, लेकिन जब प्रशासन इन हथियारों को ही 'अपराध' मान ले, तो समझ लेना चाहिए कि तंत्र लोक से डरने लगा है।

​दमन का दौर और उठते सवाल,
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन और संविधान सुरक्षा महारैली जैसे आयोजन किसी व्यक्ति विशेष के नहीं, बल्कि एक विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण के प्रतीक हैं।

1 मई 2026 की महारैली को रोकने का प्रयास और अनशनकारियों को हिरासत में लेना सीधे तौर पर उन बुनियादी अधिकारों पर प्रहार है,
जिन्हें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें सौंपा था।

​प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिह्न ?
प्रशासन का कार्य व्यवस्था बनाए रखना है, न कि शांतिपूर्ण वैचारिक आंदोलनों का गला घोंटना।
जब आंदोलनकारियों ने पूर्व में विधिवत सूचना दे दी थी,
तो वार्ता के बजाय गिरफ्तारी का मार्ग चुनना प्रशासनिक विफलता और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।

​निष्कर्ष
इतिहास गवाह है कि जब-जब हक़ की आवाज़ को दबाया गया है, वह और अधिक बुलंद होकर गूंजी है।

सत्ता को यह समझना होगा कि संविधान की रक्षा का संकल्प लेने वाले लोग जेल की दीवारों से नहीं डरते।

यदि संविधान सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र की नींव ढह जाएगी।

​आज की यह गिरफ्तारी केवल कुछ नेताओं की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक की आवाज को दबाने की कोशिश है जो न्याय और समानता की बात करता है। लेकिन याद रहे— "संविधान बचेगा, तो ही देश बचेगा!"

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हेडलाइन:
👉 रिश्तों की असली पहचान: जो बिना कहे समझ ले हर एहसास!
📄 डिस्क्रिप्शन:
आज के दौर में रिश्ते शब्दों से नहीं, समझ और भावनाओं से मजबूत बनते हैं।
सच्चा दोस्त, सच्चा प्यार वही होता है जो आपकी मुस्कान के पीछे छुपा दर्द, नाराज़गी के पीछे का प्यार और खामोशी की असली वजह बिना कहे समझ जाए।
मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन का यह संदेश समाज को एक नई दिशा देता है—
👉 रिश्तों में दिखावा नहीं, सच्ची समझ और सम्मान जरूरी है।
आइए, हम सभी अपने रिश्तों को और मजबूत बनाएं, एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और मानवता को आगे बढ़ाएं।
📍 रिपोर्टर: सूर्य प्रकाश पाण्डेय
#Hashtags:
#रिश्ता #दोस्ती #सच्चाप्यार #मानवाधिकार #HumanRights #EmotionalConnect #TrueRelations #Respect #Understanding #SocialMessage #ViralPost #TrendingNow

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​बरेली से आई यह तस्वीर केवल तीन आरोपियों की नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच की है जहाँ सरकारी नौकरी की चाहत को ठगों ने अपना हथियार बना लिया है।
दो सगी बहनें—विप्रा और शिखा—जिन्होंने न केवल कानून की आंखों में धूल झोंकी, बल्कि दर्जनों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
खुद को आईएएस ट्रेनी और एडीएम बताकर इन बहनों ने एक ऐसा मायाजाल बुना, जिसमें पढ़े-लिखे बेरोजगार आसानी से फंस गए।

​धोखाधड़ी का 'सिस्टम':
कैसे बनाया शिकार?
खबरों के मुताबिक, इन बहनों ने बड़ी चतुराई से सरकारी रसूख का दिखावा किया।
किसी को कंप्यूटर ऑपरेटर तो किसी को सचिवालय में नौकरी का झांसा दिया गया।
मामला तब खुला जब ठगी के शिकार युवा फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर लखनऊ पहुंचे और वहां उन्हें पता चला कि उनके साथ लाखों की धोखाधड़ी हुई है।

लगभग 11.5 लाख रुपये की ठगी का यह मामला तो महज एक शुरुआत है; पुलिस को अंदेशा है कि पीड़ितों की संख्या और भी अधिक हो सकती है।

​ सतर्कता ही बचाव है,
यह घटना हमारे सिस्टम और समाज के लिए कई सवाल खड़े करती है:

​अंधविश्वास और जल्दबाजी:
सरकारी नौकरी पाने की होड़ में लोग बुनियादी वेरिफिकेशन करना क्यों भूल जाते हैं?

​पहचान का संकट:
फर्जी आईडी और पद का इस्तेमाल कर अपराधी समाज में खुलेआम घूम रहे हैं।

​डिजिटल साक्षरता की कमी: क्या हम इतने भोले हैं कि व्हाट्सएप पर आए लेटर और मौखिक वादों पर लाखों रुपये लुटा दें?

​निष्कर्ष
बरेली पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है। किसी भी विभाग में नियुक्ति की एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया होती है।
"शॉर्टकट" और "सेटिंग" के नाम पर पैसे मांगने वाला हर व्यक्ति अपराधी हो सकता है।
यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।
​सावधान रहें, जागरूक रहें। नौकरी मेहनत से मिलती है, घूस से नहीं।

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🔥 हेडलाइंस स्टाइल (Viral Headlines) 🔥
🇮🇳 देश की असली ताकत: ईमानदारी!
💥 झूठ से नहीं, सच से बनेगा भारत महान
⚖️ हर दिल में ईमानदारी, तभी मजबूत होगी जिम्मेदारी
🚨 भ्रष्टाचार पर वार—ईमानदारी ही हथियार!
🌟 सच्चाई का रास्ता ही असली जीत का रास्ता
🔔 30 अप्रैल: खुद से वादा—ईमानदार बनना है ज्यादा
✨ शॉर्ट वायरल कैप्शन (Poster/Status के लिए) ✨
👉 “ईमानदारी अपनाओ, देश को आगे बढ़ाओ 🇮🇳”
👉 “सच की राह—सबसे बड़ी चाह”
👉 “निष्ठा + कर्तव्य = मजबूत राष्ट्र”
👉 “ईमानदार बनो, देश का मान बढ़ाओ”
👉 “आज नहीं तो कब? ईमानदारी अब!”
👉 “ईमानदारी ही असली देशभक्ति है”
📢 एक लाइन का सुपर वायरल कैप्शन: “ईमानदारी ही पहचान है—यही सच्चा हिंदुस्तान है 🇮🇳”

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​गया। जब पारा 45 डिग्री को पार करने की जिद पर अड़ा हो, तब बूंद-भर पानी की कीमत उस प्यासे परिवार से पूछिए जो घंटों सूखी टोंटियों को निहारता रहता है।
गया के जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर का पुलिस लाइन और सिंगरा स्थान जलापूर्ति केंद्र पर औचक धावा महज एक 'सरकारी दौरा' नहीं, बल्कि उन लापरवाह अधिकारियों के लिए 'वेक-अप कॉल' है, जो फाइलों में तो जलापूर्ति सुचारू दिखाते हैं, लेकिन धरातल पर वाल्व को जंग खाने के लिए छोड़ देते हैं।

​सिस्टम की 'सुलिस' में फंसी जनता की प्यास,
​यह विडंबना ही है कि एक तरफ सरकार करोड़ों की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करती है, वहीं दूसरी ओर बुडको के जिम्मेवार अभियंताओं की नाक के नीचे मुख्य सड़क पर वाल्व बंद पड़े रहते हैं।
एपी कॉलोनी से लेकर गवालबीघा तक की जनता पिछले चार दिनों से पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही थी, और विभाग सोया रहा।
डीएम की नाराजगी जायज है—वेतन रोकना और स्पष्टीकरण मांगना उन अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश है जो जनता की बुनियादी जरूरतों को 'कैजुअल' लेते हैं।

​समय प्रबंधन और तकनीकी गैप,
​सिंगरा स्थान केंद्र का डेटा डराने वाला है।
8 घंटे की मेहनत (टंकी भरना) का फल सिर्फ 45 मिनट (डिस्चार्ज) में समाप्त हो जाता है।
ऐसे में एक मिनट की भी लापरवाही हजारों घरों को प्यासा रख सकती है।
प्रशासन ने सही पकड़ा है कि यहाँ 'निगरानी' ही एकमात्र समाधान है।
अंतिम छोर (Tail End) तक पानी पहुंचाना केवल पाइपलाइन का काम नहीं, बल्कि उस पर तैनात कर्मी की ईमानदारी का काम है।

​आपदा प्रबंधन: अब कोताही बर्दाश्त नहीं
​भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं है।
डीएम द्वारा 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' के तहत कार्रवाई की चेतावनी देना यह साबित करता है कि अब पानी की चोरी या सप्लाई में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। 24 घंटे का अल्टीमेटम बुडको के लिए 'अग्निपरीक्षा' है।

​हमारा नजरिया:
प्रशासनिक सख्ती स्वागत योग्य है, लेकिन गया जैसे शहर को केवल 'निरीक्षणों' के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
बुडको और नगर निगम को एक 'स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम' विकसित करना होगा ताकि वाल्व बंद होने या सप्लाई रुकने की जानकारी डीएम के पहुंचने से पहले मुख्यालय को मिल जाए। जनता को पानी चाहिए, बहाने नहीं।

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30 अप्रैल | भगवान नृसिंह जयंती विशेष 🔥
आज पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है भगवान नृसिंह जयंती। भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह जी ने अन्याय और अधर्म का अंत कर धर्म और न्याय की स्थापना का संदेश दिया था।
🙏 इस पावन अवसर पर मानवाधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा ऑर्गेनाइजेशन की ओर से सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
✨ संदेश:
जहां अन्याय हो, वहां आवाज उठाना ही सच्चा धर्म है।
न्याय, सत्य और मानवता की रक्षा ही हमारी असली पहचान है।
📢 संस्था के प्रतिनिधि सूर्य प्रकाश पांडेय ने कहा कि आज का दिन हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है।
🌼 भगवान नृसिंह जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे, यही मंगलकामना।
📞 संपर्क: 8999396014
📍 मानवाधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा

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गढ़वा सदर अस्पताल की बदहाली उजागर, स्लाइन स्टैंड तक नसीब नहीं

गढ़वा (झारखंड)। गढ़वा जिले के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल को भले ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बताया जाता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।

ताजा मामले में सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज को इलाज के दौरान स्लाइन चढ़ाने के लिए स्टैंड तक उपलब्ध नहीं हो पाया। मजबूरी में मरीज के परिजनों को खुद हाथ में स्लाइन की बोतल पकड़कर ड्रिप चढ़वानी पड़ी। यह दृश्य अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आए दिन इस तरह की समस्याएं सामने आती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस अस्पताल का उद्देश्य आखिर क्या है।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं और लोगों ने जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

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शाहगंज, जौनपुर। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सामने स्थित एक बिजली का खंभा इन दिनों बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहा है। काफी हद तक झुक चुके इस खंभे पर कई बिजली के तारों का भार है, जिससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है। चिंताजनक बात यह है कि ठीक बगल में दूसरा बिजली का खंभा मौजूद होने के बावजूद अब तक तारों को उस पर स्थानांतरित नहीं किया गया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने होने के कारण इस मार्ग पर दिनभर मरीजों, तीमारदारों, एंबुलेंस तथा आम नागरिकों की आवाजाही बनी रहती है। आसपास मेडिकल स्टोर और अन्य दुकानें होने से यहां हमेशा भीड़भाड़ का माहौल रहता है। ऐसे में झुका हुआ खंभा और उस पर लटकते तार राहगीरों, मरीजों व दुकानदारों के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, खंभा काफी समय से झुका हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी स्थिति और अधिक खराब हो गई है। हल्की बारिश या तेज हवा चलने पर इसके गिरने की आशंका बनी रहती है। यदि खंभा गिरता है तो बिजली के तार टूटकर करंट फैलने से जनहानि हो सकती है। साथ ही यातायात बाधित होने और आसपास की दुकानों को नुकसान पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खंभे के पास से प्रतिदिन मरीजों की एंबुलेंस गुजरती हैं। ऐसे में किसी भी क्षण यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। लोगों ने सवाल उठाया कि पास में दूसरा खंभा लगे होने के बावजूद उस पर तार स्थानांतरित क्यों नहीं किए गए, जबकि इससे समस्या का समाधान आसानी से हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने विद्युत विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर झुके हुए खंभे को सीधा कराने अथवा तारों को दूसरे खंभे पर शिफ्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं। फिलहाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने झुका यह खंभा हर आने-जाने वाले व्यक्ति के लिए चिंता और खतरे का सबब बना हुआ है।

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विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

​मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का एक छोटा सा गांव 'कालादेव', जो कभी दशहरे पर होने वाले हिंसक 'पत्थर युद्ध' के लिए जाना जाता था,
आज सामाजिक चेतना और समरसता की एक नई इबारत लिख रहा है।

इस गांव ने अपनी सदियों पुरानी हिंसक परंपरा को त्यागकर शिक्षा, आध्यात्मिकता और संवैधानिक मूल्यों को अपनाया है।

​हिंसा से शांति का सफर,
कालादेव की पहचान कभी पत्थरों से होने वाली लड़ाई थी, जिसमें अक्सर लोग घायल होते थे।
लेकिन अप्रैल 2020 में हरिशंकर बौद्ध ने अपने घर से बोधगया के के के बौद्ध द्वारा मिली प्रेरणा से शुरू की गई एक छोटी सी पहल ने पूरे गांव की दिशा बदल दी।

आज यहाँ हर बुधवार को ग्रामीण एकत्रित होते हैं, बुद्ध वंदना करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात—सामूहिक रूप से भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ करते हैं।

​संविधान और शिक्षा पर जोर,
इस बदलाव की सबसे खूबसूरत बात यह है कि ग्रामीण अब केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं हैं।

गांव के 70 से अधिक परिवार इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना दिखाया जा रहा है, और "खीर दान" जैसी परंपराओं के माध्यम से आपसी भाईचारे को मजबूत किया जा रहा है।

​निष्कर्ष
यदि समाज पुरानी और हानिकारक परंपराओं को छोड़कर शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों की ओर बढ़ता है, तो कालादेव जैसे गांव पूरे देश के लिए 'मॉडल विलेज' बन सकते हैं।
यह लेख हमें याद दिलाता है कि वैचारिक परिवर्तन ही वास्तविक विकास की नींव है।

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गाजियाबाद। शास्त्री नगर स्थित जवाहरलाल नेहरू गर्ल्स पब्लिक स्कूल में नागरिक सुरक्षा द्वारा पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का किया गया समापन।

उक्त प्रशिक्षण अपर जिलाधिकारी नगर एवं उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा श्री विकास कश्यप के दिशा निर्देशन तथा सहायक उपनियंतक नेम सिंह के नेतृत्व में चलाया गया।

इस प्रशिक्षण में छात्र-छात्राओं एवं अध्यापकों को नागरिक सुरक्षा की बेसिक जानकारी, सहयोगी सेवाएं एवं विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं बाढ़, भूकंप, आग, दुर्घटना से सुरक्षा एवं बचाव तथा उसके उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। आपदा के समय घायलों को बाहर निकालने के लिए उपलब्ध संसाधनों से बनाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के स्टेचर की जानकारी दी गई तथा छात्र-छात्राओं को अभ्यास भी कराया गया। विशेष कर आग एवं उसके प्रकार तथा आग से सुरक्षा एवं बचाव में प्रयोग होने वाले एंक्सटीगयूसर की विस्तार से जानकारी दी गई एवं अभ्यास भी कराया गया।

प्रशिक्षण उपरांत कुछ प्रतिभाशाली बच्चों एवं अध्यापिकाओं को नागरिक सुरक्षा की टाई देकर पुरस्कृत भी किया गया। सभी सफल छात्र छात्रों तथा अध्यापिकाओं को प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए।

प्रशिक्षण सहायक उप नियंत्रक नेम सिंह एवं घटना नियंत्रण अधिकारी संजय शर्मा पोस्ट वार्डन रिजर्व अरुण कुमार श्रीवास्तव द्वारा दिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर डायरेक्टर गौरव सिंह एवं प्रधानाचार्य द्वारा सभी पदाधिकारी को पौधा देकर सम्मानित किया गया।

उक्त प्रशिक्षण में मुख्य रूप से घटना नियंत्रण अधिकारी संजय शर्मा, पोस्ट वार्डन रिजर्व अरुण कुमार श्रीवास्तव, वार्डन मोनिका गोयल अखिल भटनागर तथा स्कूल अध्यापिकाओं में श्रीमती चेतना चौधरी नेहा शर्मा, पिंकी दीक्षित, अभिलाष शर्मा, पूजा पंत, आदि ने सराहनीय सहयोग किया।

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रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर, श्री अयोध्या धाम में प्रतिष्ठित

श्री शंभू महादेव मंदिर के शिखर पर आज भव्य पावन सनातनी धर्म ध्वजारोहण हेतु आयोजित समारोह में सम्मिलित हुआ।

इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव श्री चंपत राय जी व
अन्य सम्मानित पदाधिकारियों तथा पूज्य साधु-संतों एवं धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रभु श्री राम के विराट त्रिकालदर्शी स्वरूप के अनुरूप भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण और

मंदिर परिसर में स्थित भगवान शिव के मंदिर में आज भगवा ध्वज का आरोहण पूर्ण भव्यता और दिव्यता के साथ हुआ है।

दीनू मिश्रा पत्रकार
जिला बहराइच
सभी सनातन धर्मावलंबियों को हार्दिक बधाई।

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रायबरेली। नगर कोतवाली में तैनात एक कॉन्स्टेबल पर युवक ने मारपीट करने और उसकी बहन के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर मामले की शिकायत करते हुए न्याय की मांग की है।
जानकारी के अनुसार भदोखर थाना क्षेत्र के महंगू का पुरवा पोस्ट गोंदवारा निवासी कपिराज मिश्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी बहन और जीजा के बीच आपसी विवाद हो गया था। उसकी बहन की शादी नगर कोतवाली क्षेत्र के निराला नगर में हुई है। विवाद के बाद उसकी बहन ने नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पति-पत्नी दोनों को थाने बुलाया गया था।
पीड़ित कपिराज मिश्रा का आरोप है कि वह अपनी बहन से मिलने नगर कोतवाली पहुंचा था, जहां तैनात कॉन्स्टेबल धीरज गौड़ उसकी बहन से अभद्र भाषा में बात कर रहे थे। जब उसने इसका विरोध करते हुए पूछा कि उसकी बहन को गाली क्यों दी जा रही है, तो कॉन्स्टेबल ने उसकी एक न सुनी और थप्पड़ों से पिटाई कर दी।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि कॉन्स्टेबल द्वारा उसकी बहन के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किया गया। उसने कहा कि जब प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा और महिला सम्मान को लेकर अभियान चला रही है, तब इस प्रकार की घटनाएं सवाल खड़े करती हैं।
मामले को लेकर कपिराज मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में क्षेत्राधिकारी अरुण नौहवार ने बताया कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत करने की बात कही है। फिलहाल अब देखना होगा कि मामले में पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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