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अररिया :(बिहार) मीडिया सीमांचल भारत न्यूज़ चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत 2083) का पावन पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को शुरू होता है, जो नई शुरुआत, शक्ति उपासना ( नौ देवियों की पूजा) और प्रकृति मैं बदलाव का प्रतीक है। इस दिन कलश स्थापना के साथ नौ दोनों का उत्सव शुरू होगा। मुख्य विवरण: या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। समस्त देशवासियों को चैत्र नवरात्रि एवं हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां जगदंबा आपके जीवन में सुख, और समृद्धि लाए।

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England क्रिकेट टीम में इन दिनों काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। Ashes सीरीज़ में Australia के हाथों मिली 4-1 की करारी हार के बाद अब England and Wales Cricket Board (ECB) कड़े फैसले लेने के मूड में नजर आ रहा है। इसी कड़ी में बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर पुरुषों की राष्ट्रीय टीम के लिए एक नए National Selector की तलाश शुरू कर दी है। यह कदम टीम के भविष्य की रणनीति और चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उठाया गया है।

यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब ECB के मुख्य कार्यकारी Richard Gould और मैनेजिंग डायरेक्टर Rob Key मीडिया के सामने Ashes की हार और टीम के प्रदर्शन की समीक्षा पेश करने वाले हैं। पिछले चयनकर्ता Luke Wright ने व्यक्तिगत कारणों और परिवार को समय देने की बात कहकर अपना पद छोड़ दिया था। अब बोर्ड की कोशिश है कि June में New Zealand के खिलाफ होने वाली घरेलू टेस्ट सीरीज़ से पहले एक योग्य उत्तराधिकारी का चयन कर लिया जाए।

इस बार ECB ने पद के नाम में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इसे अब 'National Selector' कहा जा रहा है, जो पहले की तुलना में अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही की ओर इशारा करता है। नए चयनकर्ता का मुख्य कार्य न केवल टीम का चुनाव करना होगा, बल्कि राष्ट्रीय टीम और First Class Counties के बीच बेहतर तालमेल बिठाना भी होगा। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए 17 April तक का समय दिया गया है।

हाल के दिनों में England की चयन नीति पर काउंटी सर्किट से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। Surrey के हेड कोच Gareth Batty ने हाल ही में कहा था कि काउंटी क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता अब काफी धुंधला हो गया है। टीम मैनेजमेंट पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वे पारंपरिक प्रदर्शन के बजाय कुछ अलग तरह के चयन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे घरेलू स्तर के खिलाड़ियों में असुरक्षा का भाव है।

मैदान पर खराब प्रदर्शन के साथ-साथ मैदान के बाहर खिलाड़ियों के अनुशासन को लेकर भी कई विवाद सामने आए हैं। Harry Brook का नाइट क्लब में हुआ वाकया और Liam Livingstone द्वारा खुलेआम कोचों के रवैये की आलोचना करना इस बात का संकेत है कि टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। इन विवादों ने बोर्ड पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह एक ऐसा नेतृत्व तैयार करे जो अनुशासन और प्रदर्शन दोनों को प्राथमिकता दे।

हालांकि टीम के मुख्य कोच Brendon McCullum, जिन्हें 'Bazball' शैली के लिए जाना जाता है, अपने पद पर बने रहेंगे क्योंकि उनका अनुबंध अगले साल के अंत तक है। लेकिन नए चयनकर्ता की नियुक्ति यह तय करेगी कि England की टेस्ट क्रिकेट रणनीति में क्या कोई बुनियादी बदलाव होगा या नहीं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Richard Gould और Rob Key आने वाले समय में टीम की मजबूती के लिए क्या नया रोडमैप तैयार करते हैं।

पूरी खबर पढ़ें: https://thegurugyan.com/todaymatchprediction/england-cricket-mein-bawaal-naya-selector-dhoondh-rahe-ya-bazzball-ka-future/

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
विशेष रिपोर्ट:

भारत में शिक्षा को “राष्ट्र निर्माण की नींव” कहा जाता है।
लेकिन अगर उसी नींव को खोखला करने वाले लोग सिस्टम के भीतर बैठ जाएं,
तो सवाल केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का हो जाता है।

गया का जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय आज इसी सड़े हुए तंत्र का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां शिक्षा नहीं, बल्कि फाइलों की दलाली, रिश्वतखोरी और अमानवीय संवेदनहीनता का कारोबार चलता रहा।
फाइलों का कब्रिस्तान या भ्रष्टाचार का अड्डा?

13 जनवरी 2026 को जब जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने डीईओ कार्यालय परिसर में लगाए गए जनता दरबार में लगभग दो सौ शिक्षको की खुद शिकायतें सुनीं,
तो जो सामने आया वह किसी एक दिन की गड़बड़ी नहीं थी—
यह वर्षों से पनपते एक “सिस्टमेटिक करप्शन” का खुला दस्तावेज था।
फाइलें महीनों नहीं, सालों तक दबाकर रखी गईं।
लोग न्याय के लिए भटकते रहे, लेकिन दफ्तर के अंदर “फाइल चलाने” की असली शर्त थी—रिश्वत।
सबसे बड़ा कलंक: शिक्षक ही शिकार
गया की एक महिला शिक्षक—शांति कुमारी—का मामला इस सड़े हुए तंत्र की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है।
19 वर्षों से वेतन नहीं
बार-बार अपमान, उत्पीड़न
वेतन बिल बनाने के लिए रिश्वत की मांग
यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बेशर्मी है।

यह सीधा-सीधा उल्लंघन है:
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर)
अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार)
प्रश्न यह है—क्या एक शिक्षक का जीवन, उसकी गरिमा, उसका अधिकार—इस सिस्टम के लिए कोई मायने नहीं रखता?

डीएम की कार्रवाई: एक उम्मीद या अस्थायी इलाज?
जिलाधिकारी ने वेतन रोकने, स्थानांतरण करने और जांच बैठाने जैसे कदम उठाए—यह सराहनीय है।

लेकिन क्या यह पर्याप्त है?

क्या सिर्फ कुछ लिपिकों पर कार्रवाई से यह सड़ा हुआ ढांचा सुधर जाएगा?
या फिर यह केवल “ऊपरी मरहम” है, जबकि बीमारी अंदर तक फैली हुई है?

सवाल जो जवाब मांगते हैं
19 साल तक वेतन क्यों नहीं मिला?
जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक आपराधिक मामला क्यों नहीं?
शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका क्या रही?
क्या यह अकेला मामला है या एक बड़े घोटाले की झलक?
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह राष्ट्र के खिलाफ अपराध है।

जब एक शिक्षक को ही न्याय नहीं मिलता, तो वह बच्चों को क्या सिखाएगा?
जब शिक्षा तंत्र ही भ्रष्ट हो जाए, तो अगली पीढ़ी का चरित्र कैसे बनेगा?

यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं
यह नैतिक पतन है।
यह संवैधानिक मूल्यों की हत्या है।

निष्कर्ष: अब चुप रहना अपराध है
यह समय है जब:
दोषियों पर FIR और कड़ी कानूनी कार्रवाई हो,
पूरे शिक्षा विभाग की स्वतंत्र जांच (CBI/न्यायिक जांच) हो
पीड़ित शिक्षक को तत्काल न्याय और मुआवजा मिले
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हार होगा।

“जब शिक्षक रो रहा हो, तो समझिए—देश का भविष्य खतरे में है।”

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England क्रिकेट टीम में इन दिनों काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। Ashes सीरीज़ में Australia के हाथों मिली 4-1 की करारी हार के बाद अब England and Wales Cricket Board (ECB) कड़े फैसले लेने के मूड में नजर आ रहा है। इसी कड़ी में बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर पुरुषों की राष्ट्रीय टीम के लिए एक नए National Selector की तलाश शुरू कर दी है। यह कदम टीम के भविष्य की रणनीति और चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उठाया गया है।

यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब ECB के मुख्य कार्यकारी Richard Gould और मैनेजिंग डायरेक्टर Rob Key मीडिया के सामने Ashes की हार और टीम के प्रदर्शन की समीक्षा पेश करने वाले हैं। पिछले चयनकर्ता Luke Wright ने व्यक्तिगत कारणों और परिवार को समय देने की बात कहकर अपना पद छोड़ दिया था। अब बोर्ड की कोशिश है कि June में New Zealand के खिलाफ होने वाली घरेलू टेस्ट सीरीज़ से पहले एक योग्य उत्तराधिकारी का चयन कर लिया जाए।

इस बार ECB ने पद के नाम में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इसे अब 'National Selector' कहा जा रहा है, जो पहले की तुलना में अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही की ओर इशारा करता है। नए चयनकर्ता का मुख्य कार्य न केवल टीम का चुनाव करना होगा, बल्कि राष्ट्रीय टीम और First Class Counties के बीच बेहतर तालमेल बिठाना भी होगा। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए 17 April तक का समय दिया गया है।

हाल के दिनों में England की चयन नीति पर काउंटी सर्किट से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। Surrey के हेड कोच Gareth Batty ने हाल ही में कहा था कि काउंटी क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता अब काफी धुंधला हो गया है। टीम मैनेजमेंट पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वे पारंपरिक प्रदर्शन के बजाय कुछ अलग तरह के चयन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे घरेलू स्तर के खिलाड़ियों में असुरक्षा का भाव है।

मैदान पर खराब प्रदर्शन के साथ-साथ मैदान के बाहर खिलाड़ियों के अनुशासन को लेकर भी कई विवाद सामने आए हैं। Harry Brook का नाइट क्लब में हुआ वाकया और Liam Livingstone द्वारा खुलेआम कोचों के रवैये की आलोचना करना इस बात का संकेत है कि टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। इन विवादों ने बोर्ड पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह एक ऐसा नेतृत्व तैयार करे जो अनुशासन और प्रदर्शन दोनों को प्राथमिकता दे।

हालांकि टीम के मुख्य कोच Brendon McCullum, जिन्हें 'Bazball' शैली के लिए जाना जाता है, अपने पद पर बने रहेंगे क्योंकि उनका अनुबंध अगले साल के अंत तक है। लेकिन नए चयनकर्ता की नियुक्ति यह तय करेगी कि England की टेस्ट क्रिकेट रणनीति में क्या कोई बुनियादी बदलाव होगा या नहीं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Richard Gould और Rob Key आने वाले समय में टीम की मजबूती के लिए क्या नया रोडमैप तैयार करते हैं।

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विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
विशेष रिपोर्ट:

भारत में शिक्षा को “राष्ट्र निर्माण की नींव” कहा जाता है।
लेकिन अगर उसी नींव को खोखला करने वाले लोग सिस्टम के भीतर बैठ जाएं,
तो सवाल केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का हो जाता है।

गया का जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय आज इसी सड़े हुए तंत्र का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां शिक्षा नहीं, बल्कि फाइलों की दलाली, रिश्वतखोरी और अमानवीय संवेदनहीनता का कारोबार चलता रहा।

'फाइलों का कब्रिस्तान"
या
भ्रष्टाचार का अड्डा?

विगत 13 जनवरी 2026 को जब जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने डीईओ कार्यालय परिसर में लगाए गए जनता दरबार में लगभग दो सौ शिक्षको की खुद शिकायतें सुनीं,
तो जो सामने आया वह किसी एक दिन की गड़बड़ी नहीं थी—
यह वर्षों से पनपते एक “सिस्टमेटिक करप्शन” का खुला दस्तावेज था।
फाइलें महीनों नहीं, सालों तक दबाकर रखी गई थी।
लोग न्याय के लिए भटकते रहे, लेकिन दफ्तर के अंदर “फाइल चलाने” की असली शर्त थी—रिश्वत।

सबसे बड़ा कलंक:
"शिक्षक ही शिकार"
गया की एक महिला शिक्षक—शांति कुमारी—का मामला इस सड़े हुए तंत्र की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है।
19 वर्षों से वेतन नहीं
बार-बार अपमान, उत्पीड़न
वेतन बिल बनाने के लिए रिश्वत की मांग
यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बेशर्मी है।

यह सीधा-सीधा सविधान का उल्लंघन है:
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर)
अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार)
प्रश्न यह है—क्या एक शिक्षक का जीवन, उसकी गरिमा, उसका अधिकार—इस सिस्टम के लिए कोई मायने नहीं रखता?

डीएम की कार्रवाई: एक उम्मीद या अस्थायी इलाज?
जिलाधिकारी ने वेतन रोकने, स्थानांतरण करने और जांच बैठाने जैसे कदम उठाए—यह सराहनीय है।

लेकिन क्या यह पर्याप्त है?

क्या सिर्फ कुछ लिपिकों पर कार्रवाई से यह सड़ा हुआ ढांचा सुधर जाएगा?
या फिर यह केवल “ऊपरी मरहम” है, जबकि बीमारी अंदर तक फैली हुई है?

सवाल जो जवाब मांगते हैं
19 साल तक वेतन क्यों नहीं मिला?
जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक आपराधिक मामला क्यों नहीं?
शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका क्या रही?
क्या यह अकेला मामला है या एक बड़े घोटाले की झलक?
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह राष्ट्र के खिलाफ अपराध है।

जब एक शिक्षक को ही न्याय नहीं मिलता, तो वह बच्चों को क्या सिखाएगा?
जब शिक्षा तंत्र ही भ्रष्ट हो जाए, तो अगली पीढ़ी का चरित्र कैसे बनेगा?

यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं
यह नैतिक पतन है।
यह संवैधानिक मूल्यों की हत्या है।

निष्कर्ष: अब चुप रहना अपराध है
यह समय है जब:
दोषियों पर FIR और कड़ी कानूनी कार्रवाई हो,
पूरे शिक्षा विभाग की स्वतंत्र जांच (CBI/न्यायिक जांच) हो
पीड़ित शिक्षक को तत्काल न्याय और मुआवजा मिले
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हार होगा।

“जब शिक्षक रो रहा हो, तो समझिए—देश का भविष्य खतरे में है।”

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