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पिहानी(हरदोई)।कार्तिक पूर्णिमा पर गोमती स्नान मेले में शुक्रवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मढ़िया घाट व कुल्लाहवर गोमती घाट में दीपदान कर श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में डुबकी लगाई। 


 गुरुवार को जहां दिन में नवविवाहित जोड़ों ने बैंडबाजों के साथ गोमती पूजन किया। वहीं, शाम के पितरों की शांति के लिए दीपदान एवं पिंडदान किया।

कुल्लाहवर घाट व  मढ़िया घाट पर दीपदान के साथ कार्तिक पूर्णिमा में श्रद्धालुओं ने गोमती नदी में डुबकी लगाई।

कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर गुरुवार की शाम सूर्यास्त के समय दीपदान श्रद्धालुओं  ने गोमती घाट पर किया।

श्रद्धालुओ ने गोमती घाट पहुंचकर पितरों का तर्पण किया। मढ़िया घाट व कुल्लाहवर घाट मेले में करीब दस हजार से  अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मेले में महिलाओं और बच्चों की खासी भीड़ रही। बच्चों ने जमकर चाट पकौड़ी व झूलों का आनंद लिया। सुरक्षा को लेकर व्यवस्था चाक चौबंद रही। कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओ ने गोमती घाट पर बड़ी श्रद्धा के साथ डुबकी लगाई।

पंडित संदीप शुक्ला ने बताया कि मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर घाटो पर लगने वाले ऐतिहासिक मेलो के मुख्य स्नान से एक दिन चतुर्दशी पर अपने पितरों का तर्पण करते हैं।

यह दीपदान वही लोग करते हैं, जिनके सगे संबंधी एक वर्ष के अंदर उन्हें छोड़कर परम पिता परमेश्वर की शरण में चले गए हैं। उन्होंने बताया कि  स्नान करने के बाद सूर्यास्त के समय दीपदान करें। इसके बाद भी स्नान करें। साथ ही खाना और दक्षिणा दान करें। कार्तिक मेले के दौरान दीपदान करने से मृत आत्माओं को शांति मिलती है।

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