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श्री आदर्श रामलीला कमेटी के द्वारा राम वनवास-प्रजा विद्रोह,केवट-राम संवाद आदि का किया गया मंचन


शाहाबाद(हरदोई)।  श्री आदर्श रामलीला कमेटी, नस्योली गोपाल (मुगलापुर) में चल रहे रामोत्सव-2021 के पांचवे दिवस रविवार को राम वनवास-प्रजा विद्रोह, राम-निषादराज मिलन, केवट राम संवाद, चित्रकूट गमन, सुमन्त का अयोध्या प्रस्थान ,श्री राम का चित्रकूट निवास का सजीव मंचन किया गया। गाँव के कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

कोविड नियमों का पालन करते हुए 36वें रामलीला का मंचन हो रहा है। दर्शक रामलीला का भरपूर आनंद ले रहे हैं। कलाकारों ने रामलीला मंचन की शुरुआत राम वनवास-प्रजा विद्रोह लीला से हुई।

इस प्रसंग में राम, दशरथ जी का आशीर्वाद लेकर वनवास के लिए प्रस्थान करते हैं, तो उनके साथ सीता जी और लक्ष्मण भी जाने को तैयार हो जाते हैं और तीनों जब अयोध्या से वन की ओर निकलते हैं, तो राज्य की प्रजा को यह बात बहुत अखरती है और वह राज्य के विरुद्ध विद्रोह कर देते हैं।  निषाद राज मिलन, श्री राम केवट संवाद का सजीव मंचन किया। जब निषादराज ने केवट को कहा कि वह अपनी नाव में भगवान राम को माता सीता व लक्ष्मण सहित गंगा के उस पार लगा दे तो केवट ने मना कर दिया। केवट ने कहा कि उसने सुना हैं कि श्री राम के चरण अद्भुत है व उनके चरणों की धुल किसी चमत्कारी जड़ी बूटी से कम नही हैं। लोग इनके चरणों की धूल पाने को लालायित रहते है। इसलिये मैं पहले इनके चरण धोऊंगा फिर इन्हें गंगा पार करवाऊंगा।

केवट के द्वारा यह हठ किये जाने पर निषादराज व लक्ष्मण क्रोधित हो गए किंतु भगवान श्रीराम केवट का आशय समझ गए थे। दोनों का क्रोध देखकर केवट ने स्वयं ही भगवान श्रीराम से कहा की कि वह उनके द्वारा माता अहिल्या को पत्थर से महिला बना देने की कथा को जानता हैं। जब वे एक कठोर पत्थर को एक नारी में परिवर्तित कर सकते हैं तो मेरी नाव तो एक लकड़ी की बनी हैं।केवट ने कहा कि यदि मेरी नाव भी आपके पैर पड़ते ही किसी और रूप में परिवर्तित हो गयी तो मेरी आजीविका का साधन चला जायेगा। उसने कहा कि वह अपना व अपने परिवार का भरण पोषण इसी नाव के सहारे करता हैं। यदि यही नाव नही रहेगी तो उसके जीवन का सहारा छीन जायेगा। इस तरह केवट ने प्रभु के बिना चरण धुलायें उन्हें गंगा पार करवाने से मना कर दिया।भगवान राम को केवट के हठ के आगे झुकना पड़ा तब उन्होंने हां कह दिया। इतना कहते ही केवट ने अपनी पत्नी से एक जल का पात्र मंगवाया व गंगा के पानी से प्रभु श्रीराम के चरण धोये व उस जल को ग्रहण किया। इस तरह केवट ने ना केवल भगवान के प्रति अपनी भक्ति सिद्ध की अपितु भगवान के चरणकमलों का जल ग्रहण कर स्वयं का उद्धार किया। इस दौरान दर्शकों की आखें नम हो गयी। केवट ने श्री राम से उस लोक में पार लगाने की प्रार्थना की। श्री राम, माता सीता व लक्ष्मण ऋषि भारद्वाज जी से मिले और उनके पास कई दिनों तक सत्संग किया उसके बाद उन्होंने भरद्वाज से आज्ञा लेकर आगे बड़े तथा महाऋषि वाल्मीकि से मिले तथ्य उनसे वन में रहने के लिए उचित स्थान पूंछा तब उन्होंने राम जी को चित्रकूट में निवास करने की लीला की प्रस्तुति की गई। इससे पहले आरती हुई और आज की अतिथि क्षेत्रीय विधायका रजनी तिवारी ने राम जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला उन्होंने अपने जीवन के उद्धार के लिए भगवान श्री राम के पद चिह्नों पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर श्री रामलीला कमेटी संचालन समिति के प्रबंधक अनिल सिंह, अध्यक्ष महेश्वर सिंह, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष दिनेश सिंह भदौरिया, सहकोषाध्यक्ष शिशुपाल सिंह, महामंत्री संजय सिंह चौहान, मंत्री देवेश कश्यप, राहुल सिंह तथा कमेटी के समस्त पदाधिकारीगणों सहित राजपाल सिंह, सुधीर सिंह, गंगाराम सिंह, उमेश सिंह, जितेन्द्र सिंह, शैलेन्द्र सिंह, विनीत सिंह सहित काफी संख्या में गणमान्य जन व दर्शकगण मौजूद रहे।

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