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छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म में दोषी रईस अहमद को 20 साल की कैद व 20 हजार का अर्थदंड

सुलतानपुर। छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के मामले में स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है। जिसे स्पेशल जज पवन कुमार शर्मा की अदालत ने 20 वर्ष के कारावास एवं 20 हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। मामले में एफआईआर दर्ज हुए अभी दो वर्ष भी पूरे नहीं हुए थे,लेकिन कोर्ट की सक्रियता से केस में इतनी जल्दी फैसला आया और पीड़ित पक्ष को न्याय मिला।

कोर्ट की इस सक्रियता से पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। मामला पीपरपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जहाँ के रहने वाली एक महिला ने अपनी छह वर्षीय पुत्री के साथ 22 अक्टूबर 2019 को हुई घटना के सम्बंध में पीपरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। आरोप के मुताबिक घटना के दिन अभियोगिनी की पुत्री खेल रही थी, तभी रिश्तेदारी आये धम्मौर थाना क्षेत्र के भांई गांव निवासी आरोपी रईस अहमद अभियोगिनी की मासूम पुत्री को बहला-फुसलाकर उसे सुनसान स्थान पर लेकर चला गया और उसके कपड़े उतार कर उंगली से दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दे डाला,मासूम पीड़िता को जब दर्द हुआ तो उसने यह बात अपनी मां से बताई। जिसके पश्चात उसकी मां ने थाने पर तहरीर दी तो मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में आरोपी रईसअहमद को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजने की कार्यवाही की और तफ्तीश पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया। मामले का विचारण स्पेशल जज पाक्सों एक्ट की अदालत में चला। इस दौरान बचाव पक्ष ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत कर आरोपी को बेकसूर बताया और फर्जी एवं मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर केस दर्ज कराने का तर्क रखा।

वहीं अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता सीएल द्विवेदी ने अभियोजन गवाहों एवं अन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुए आरोपी रईश को ही घटना का जिम्मेदार ठहराया और उसे दोषी ठहराकर इस घिनौनी वारदात के लिए कड़ी से कड़ी सजा से दण्डित किये जाने की मांग की।

उभय पक्षों को सुनने के पश्चात स्पेशल जज पवन कुमार शर्मा ने आरोपी रईस अहमद को रेप व पाक्सो एक्ट की धारा में दोषी ठहराते हुए उसे 20 वर्ष के कारावास एवं 20 हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। इस मामले में 24 अक्टूबर 2019 को घटना की एफआईआर दर्ज हुई और विवेचक ने 27 नवम्बर 2019 को चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में प्रेषित किया। चार्जशीट प्राप्त होने के उपरांत कोर्ट ने आरोप-पत्र पर संज्ञान लिया और केस का ट्रायल शुरू हुआ। ट्रायल के दौरान आने वाली तमाम विधिक बाधाओं के बाद भी कोर्ट की सक्रियता से आरोपी को मामला लम्बित करने का मौका नहीं मिला। सुनवाई में हुई इसी तेजी की वजह से आज कोर्ट का निर्णय आने के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिला,जिससे मासूम के साथ घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले रईश को बीस साल के लिए सलाखों के पीछे जाने की सजा मिली। शीघ्र न्याय मिलने से लोगो का भरोसा भारत की न्याय व्यवस्था के प्रति मजबूत हुआ है और अन्य पीड़ितों को भी समय से न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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