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बाराबंकी। सिविल जज जूनियर डिवीजन खान जिशान मसूद ने स्थगनादेश की अवमानना मामले की सुनवाई की। दोषी पाए जाने पर नगर कोतवाल और नायब तहसीलदार को अभिरक्षा में ले लिया गया। करीब साढ़े चार बजे जज ने कोतवाल को तीन दिन का कारावास व 66 रुपये का अर्थदंड व नायब तहसीलदार को एक माह कारागार व 120 रुपये के अर्थदंड की सजा सुना दी। इस आदेश के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम नित्यानंद श्रीनेत्र की कोर्ट में अपील की गई, जिस पर उन्होंने स्थगनादेश दे दिया। दोनों को जेल भेजने की तैयारी थी, जिसके तहत कोतवाल के स्टार, बेल्ट, बैच व सर्विस रिवाल्वर उतरवा लिया गया था।
करीब पौने एक बजे कोर्ट पहुंचे कोतवाल को जज ने अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया और उनके मोबाइल जमा करा लिए गए। इसके बाद वह करीब चार घंटे तक अकेले कटघरे में रहे। इसके बाद न्यायालय पहुंचे नायब तहसीलदार केशव प्रसाद सिंह को भी हिरासत में लिया गया। कोतवाली नगर के आलापुर गांव के मोहम्मद आलम व मुसम्मात मुबीन आदि में गांव की ही एक जमीन पर कब्जेदारी का विवाद था। मोहम्मद आलम व उनके भाई शकील की ओर से अधिवक्ता संदीप सिंह ने सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट संख्या-13 में वाद दायर किया था। एक जुलाई को न्यायालय ने मो. आलम के पक्ष में स्थगनादेश दे दिया था। जानकारी के बावजूद पांच अगस्त को विपक्षी मुबीन, मोहसिना, सलमान, रिजवान, गुफरान, मुख्तार अहमद, दाउद के साथ नगर कोतवाल अमर सिंह ने विवादित जमीन पर पहुंचकर दखल किया। छह अगस्त को विपक्षियों ने बिना पैमाइश के खूंटे गड़वा दिए और नौ अगस्त की रात दीवार गिरा दी थी।
एसडीएम के आदेश पर रोका काम : कोर्ट को भेजी आख्या में कोतवाल ने एसडीएम नवाबगंज के मौखिक आदेश पर विवादित जमीन पर वादीजन का निर्माण कार्य रोकने की बात लिखी है। अवमानना के तहत दायर किए गए वाद में नगर कोतवाल अमर सिंह, एसडीएम नवाबगंज, लेखपाल प्रह्लाद नरायन तिवारी और नायब तहसीलदार केशव प्रसाद सिंह को भी आरोपित बनाया गया था। न्यायालय ने नायब तहसीलदार व कोतवाल को तलब किया था।

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