कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों को पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने का दिलाया गया संकल्प*
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा के निर्देशन तथा विस्तार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. गौतम के मार्गदर्शन में पशु विज्ञान केंद्र, सोनीपत द्वारा मिशन लाईफ के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण एवं सतत पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन पशु विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर पशुपालक अपनी आय में वृद्धि करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण एवं प्राकृतिक उपचार पद्धति (एथ्नो वेटरिनरी मेडिसिन) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव दूध उत्पादन एवं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है, इसलिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
*जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर दिया गया विशेष बल*
इस दौरान किसानों को पशुओं के गोबर एवं मूत्र के प्रभावी उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) और बायोगैस निर्माण की तकनीकों से अवगत कराया गया, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रख सकें। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खादों का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने में सहायक है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया गया तथा हरी खाद, जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।
*जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता*
कार्यक्रम में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और जल संरक्षण के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की कृषि और पशुपालन गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
*पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का दिलाया संकल्प*
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने सभी प्रतिभागियों को मिशन लाईफ के उद्देश्यों के अनुरूप पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। यदि हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाएं तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि मिशन लाईफ का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और पशुपालकों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण का सक्रिय भागीदार भी बनाते हैं।