logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

आचार्य दक्षता वर्ग के द्वितीय दिवस का सफल आयोजन

मेरठ। शास्त्री नगर स्थित बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मेरठ के प्रांगण में चल रहे दक्षता वर्ग के द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र अत्यंत गरिमापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में राष्ट्र निर्माण हेतु दायित्वबोध एवं भारतीय शिक्षा दर्शन के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।

इस अवसर पर मेरठ प्रांत के प्रांतीय संगठन मंत्री, आदरणीय श्री प्रदीप गुप्ता जी ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में अपना प्रेरणादायी उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को केवल कक्षागत अध्यापन तक सीमित न मानते हुए उसे राष्ट्र निर्माण एवं विश्व कल्याण का आधार बताया।

श्री गुप्ता जी ने अपने उद्बोधन में भारतीय दर्शन से शिक्षा के महत्व को तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित किया:
1. भारत का दर्शनशास्त्र विश्व के लिए कल्याणकारी है: भारतीय चिंतन 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना पर आधारित है, जो समस्त विश्व को एक परिवार मानकर उसके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

2. राष्ट्र का परम वैभव: उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक का लक्ष्य भारत को उसके परम वैभव तक पहुंचाना होना चाहिए। यह तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों से जुड़ें।

3. बालक का सर्वांगीण विकास: शिक्षा का अंतिम लक्ष्य बालक का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास करना है। इसी से व्यक्ति निर्माण, राष्ट्र निर्माण एवं विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक समाज में संस्कार, चरित्र एवं मूल्यों का संवर्धन कर भावी पीढ़ी का निर्माण करता है। एक शिक्षक के प्रयासों से ही राष्ट्र की उन्नति और समाज का विकास संभव है।

श्री प्रदीप गुप्ता जी ने भारत के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत ने विश्व को 'शून्य' का ज्ञान प्रदान किया, जिसने गणित एवं विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी। उन्होंने कविता की पंक्ति "जब जीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई" का उल्लेख करते हुए भारत की ज्ञान परंपरा को नमन किया।

उन्होंने बताया कि भारत को "सोने की चिड़िया" केवल उसके भौतिक धन-वैभव के कारण नहीं कहा जाता था, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था एवं आदर्श सामाजिक व्यवस्था के कारण भी विश्व में उसका विशेष स्थान था। "दूध-दही की नदियाँ बहती थीं" का आशय भारत की कृषि, पशुपालन एवं आर्थिक समृद्धि से था, जिसका आधार हमारी जीवन पद्धति एवं शिक्षा थी।

राष्ट्र के परम वैभव की संकल्पना पर विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करने में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमें अपने महान ग्रंथों की ओर लौटना होगा।

श्रीमद्भगवद्गीता एवं रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं हैं। गीता कर्तव्यबोध, निष्काम कर्म एवं जीवन जीने की कला सिखाती है, जबकि रामायण मर्यादा, आदर्श परिवार एवं चरित्र निर्माण का श्रेष्ठ ग्रंथ है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे कक्षा-कक्ष में पाठ्यक्रम के साथ-साथ विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभक्ति की भावना का बीजारोपण करें।

इस प्रेरणादायी सत्र में विद्यालय परिवार एवं विद्या भारती से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे। मंच पर विद्यालय के अध्यक्ष आदरणीय श्री मनमोहन गुप्ता जी, उपाध्यक्ष डॉ. विनोद अग्रवाल जी, उपप्रबंधक डॉ. सुधांशु अग्रवाल जी, प्रदेश निरीक्षक श्री विशोक जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साथ ही विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात गुप्ता जी, कमला देवी विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता अग्रवाल जी, शिशु वाटिका की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा श्रीवास्तव जी तथा विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य आदरणीय श्री कृष्ण कुमार शर्मा जी सहित दक्षता वर्ग में प्रतिभाग कर रहे समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

सम्पूर्ण सत्र का वातावरण अत्यंत प्रेरणादायी, वैचारिक एवं उत्साहवर्धक रहा। श्री प्रदीप गुप्ता जी के ओजस्वी उद्बोधन से उपस्थित समस्त शिक्षार्थियों ने गहन प्रेरणा प्राप्त की। सभी ने अपने शिक्षकीय दायित्वों के प्रति और अधिक समर्पित भाव से कार्य करने तथा भारत के गौरवशाली अतीत के अनुरूप उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

0
0 views

Comment