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बेंगलुरु में आयोजित उत्तर प्रदेश महोत्सव में मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की उत्साहपूर्ण सहभागिता

बेंगलुरु। आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित प्रथम ‘उत्तर प्रदेश महोत्सव’ का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोक परंपराओं की भव्य प्रस्तुति के साथ हुआ। इस महोत्सव में मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में साधक, स्वयंसेवक एवं कला प्रेमियों ने सहभागिता कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव का भाव प्रकट किया।

प्रख्यात बनारस घराने के शास्त्रीय गायक एवं पद्म पुरस्कार से सम्मानित पंडित साजन मिश्र के सुमधुर गायन तथा पद्मश्री सम्मानित लोक कलाकारों की कजरी प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव संगीत, विरासत, पर्यटन और पारंपरिक उद्योगों को एक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।

अपने संबोधन में पंडित साजन मिश्र ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा, “गुरुदेव की दृष्टि सदैव अत्यंत व्यापक और विराट रही है। वे हर कार्य को इतने भव्य स्तर पर क्रियान्वित करते हैं कि पूरा विश्व उसे सम्मान के साथ देखता है।”

महोत्सव के दौरान पद्मश्री सम्मानित लोक गायिका श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव ने ‘गुरु वंदना’, ‘देवी वंदना’ एवं पारंपरिक कजरी गायन की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति, भक्ति और मिट्टी की सुगंध स्पष्ट रूप से अनुभव की गई।

‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और ‘एक जिला एक व्यंजन’ (ODOC) योजनाओं के अंतर्गत लगाए गए विशेष स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन स्टॉलों पर प्रदेश के 75 जिलों की विशिष्ट कला, हस्तशिल्प, वस्त्र एवं पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा तैयार विशेष दीर्घा में अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे आध्यात्मिक नगरों की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में उपस्थित पुलकित त्यागी ने बताया कि मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में साधक एवं स्वयंसेवक इस भव्य “उत्तर प्रदेश महोत्सव” में सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक अनूठा अवसर है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं कला प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में इस महोत्सव से जुड़ने का आह्वान किया।

22 से 24 मई तक चलने वाला यह त्रिदिवसीय महोत्सव उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, पारंपरिक कला और पर्यटन की विविधता का जीवंत उत्सव बनकर उभर रहा है।

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