नियोजित शिक्षकों को दो माह से नहीं मिला वेतन
बिहारशरीफ(नालन्दा):- वेतन के अभाव में जिले के नियोजित शिक्षकों की माली हालत खराब हो गई है। मई माह आधा समाप्त हो जाने के बावजूद नालंदा जिला के नियोजित शिक्षकों को मार्च और अप्रैल माह का वेतन अब तक नहीं मिल सका है। उक्त बात की जानकारी परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में कार्यरत नियोजित व कुछ नियमित शिक्षकों को समग्र शिक्षा व राज्य सरकार (जीओबी ) मद से वेतन भुगतान होता है। राज्य सरकार अर्थात जीओबी मद में राज्य से कागजों पर राशि भेज दिया गया है। लेकिन सीएफएमएस पोर्टल पर राशि नहीं दिख रहा है। जिसके कारण इन शिक्षकों को दो माह का वेतन अब तक नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा मद में राशि जिला में रहते हुए शिक्षा विभाग के पदाधिकारी व संबंधित लिपिक रमाकांत की लापरवाही के कारण शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं हो सका है।जिलाध्यक्ष ने कहा कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण शिक्षकों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। समय से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार को इलाज, बच्चों की पढ़ाई के लिए पुस्तक क्रय,बैंक के ईएमआई, घर की राशन सहित अन्य आवश्यकताऐं प्रभावित हो रही है।
संघ के जिलाध्यक्ष रौशन कुमार,महासचिव मो0 इरफान मल्लिक,सचिव सुनील कुमार व कोषाध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि नियोजित शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर संबंधित अधिकारियों से लगातार बातचीत और वेतन भुगतान करवाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब तक शिक्षकों के लंबित वेतन भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ट्रेजरी का कहना है कि उनके स्तर से कोई राशि लंबित नहीं है जबकि शिक्षा विभाग नालंदा के अनुसार यह राज्य स्तरीय तकनीकी समस्या बताई जा रहा है।जिसके कारण किसी भी जिला में शिक्षकों का वेतन शॉर्ट्स नहीं हो सका है।
आखिर स्लो पेमेंट का खामियाजा सिर्फ नियोजित शिक्षकों को ही क्यों भुगतना पड़ रहा है? यह स्थिति राज्य सरकार की शिक्षकों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी से मांग किया है कि इस मामले को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने तथा राज्य स्तर पर पहल कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।