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मिलावटी जूस और लस्सी पर प्रशासन की कार्यवाही राजधानी भोपाल में कई नामी दुकानों का निरीक्षण

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश
राजधानी में सड़क किनारे और प्रमुख बाजारों में बिक रहे घटिय गुणवत्ता वाले जूस और खाद्य पदार्थों को लेकर खाद्य सुरक्षा प्रशासन, जिला भोपाल ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित नामी जूस सेंटर्स और लस्सी कॉर्नर्स पर औचक निरीक्षण कर नमूनों की जब्ती की है। प्रमुख दुकानों पर हुई कार्यवाही जांच टीम ने भोपाल के अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर निम्मनलिखित प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए न्यू फेमस एंड रेस्टोरेंट अशोका गार्डन से मैंगो जूस, लस्सी, मैदा, गुलाब जामुन एवं मठरी के नमूने संग्रहित किये एवं बॉम्बे जूस कॉर्नर, बरखेड़ी, घमंडी लस्सी, एमपी नगर, आदर्श जूस सेंटर इंद्रपुरी, बॉम्बे जूस सेंटर बुधवारा, आगरा समोसा कॉर्नर, रंगमहल चौराहा, फेमस जूस कॉर्नर, इब्राहिमपुरा, श्री कृष्णा लससी कॉर्नर, पीरगेट, गुजरात कोल्डड्रिंक एंड जूस सेंटर, घोड़ा नक्कास, नकली एसेंस और रसायनों का संदेह प्रशासन को शिकायत मिली थी कि कई विकेताओं द्वारा मैंगो शेंक और अन्य जूस में हानिकारक टार्द्राजीन कलर (कृत्रिम रंग), सिंथेटिक एसेंस, थिकनर और भारी मात्रा में सैकरीन का उपयोग किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हो सकते है। "खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत यह कार्यवाही की गई है। सभी संदिग्ध नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।"अभिहित अधिकारी ने बताया कि समाचार पत्र में प्रकाशित सूचना और मानव अधिकार आयोग के संदर्भ के बाद यह विशेष अभियान चलाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब्त नमूनों को तत्काल राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावट पाए जाने पर दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे जनाता से अपील की गई है कि अत्यधिक सस्ते और चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचे, क्योकि ये किडनी और लिवर के लिए घातक हो सकते है। सभी नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल प्रेषित किये गये हैं। जांच परिणामों के आधार पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अन्तर्गत विधि अनुसार कार्यवाही की जायेगी।

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