logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

झारखण्ड में पुलिस की बिना नंबर प्लेट की गाड़ी।

(झारखंड)। पुलिस हमेशा आये दिन चर्चा में रहती है। हाल ही में 9 पुलिस वाले को जब फाँसी की सजा सुनाई गई,तो किसी ने उनके सपोर्ट में कुछ भी नही बोला। आखिर क्यों पुलिस से इतनी नफरत करती है, जनता? पुलिस जिसे कानून व्यवस्था के लिए रखा गया है,लेकिन जब वो खुद इस व्यवस्था को चौपट करने में लग जाये तो फिर पब्लिक फ्रेंडली कैसी हो सकती है। तस्वीर में आप देख सकते है ,कैसे बिना नंबर प्लेट के पुलिस की गाड़ी सड़को में चल रही है। वहीं किसी आम आदमी का होता तो किस प्रकार परेशान किया जाता सभी जानते है। कार्यवाई तो होनी चाहिए बिना नम्बर प्लेट की गाड़ी से कुछ भी अनहोनी हो जाये,तो इसके लिए भी हमलोग पुलिस वाले को ही बुरा -भला कहेंगे,इसलिए बिना नम्बर प्लेट का सड़क में गाड़ी लेकर निकलना अपराध को बढ़ाना देना है। लेकिन डिसिप्लिन के लिए पुलिस की गाड़ी में भी नम्बर प्लेट होनी चाहिए या नही ? बड़ा सवाल है। इस गाड़ी की तस्वीर मैंने खुद लिया है,क्योंकि इस गाड़ी को चला रहा चालक जो कि बिना यूनिफार्म का था हो सकता हो कि प्राइवेट होगा,उसका तेवर डीआईजी से कम नही लग रहा था। पुलिस वालों से भरा ये गाड़ी साइड से सड़क में आने का प्रयास कर रहा था,मैं भी सीधी अपने साइड से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,क्योकि गाड़ियों की एक लंबी कतार थी इसलिए सभी गाड़ी लगभग एक दूसरे से करीब 10 फ़ीट की ही दूरी में होगी। पुलिस गाड़ी जिसकी तस्वीर है,जब साइड से रोड में चढ़ता है,तो इसका ड्राइवर काफी तेवर से रुकने को बोलता है और बीच भी गाड़ी घुसा देता है। जबकि इसका दायित्व वहाँ ये होना चाहिए था कि कुछ देर खुद रुककर ट्रैफिक को क्लियर करवाता या फिर आम जनता को जाने देता। फिर यदि इसे खुद जाने की हड़बड़ी भी थी ,तो अच्छे से जिस तरह आम पब्लिक साधारण हॉर्न,इंडिकेटर देना,हाथ देना इत्यादि करती है,ताकि लाइन में आ सके। इस तरह का व्यवहार पुलिस की छवि को अ जनता के बीच कतई सरकार को बर्दाश्त नही होनी चाहिए। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट होने के नाते सरकार से आग्रह करता हूं,कि पुलिस वालों की प्रशिक्षण में आम जनता के प्रति व्यवहार कुशलता को भी शामिल किया जाए।

5
258 views

Comment