न्याय व्यवस्था मजबूत बने बिना विकसित राष्ट्र संभव नहीं: जस्टिस पंकज मित्तल
मेरठ। विकसित राष्ट्र बनने के लिए न्याय व्यवस्था का मजबूत होना बेहद आवश्यक है। मौजूदा भारतीय न्याय प्रणाली आम लोगों के बजाय धीरे-धीरे कुलीन वर्ग तक सीमित होती जा रही है। ये महत्वपूर्ण विचार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने मेरठ कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन अवसर पर व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा कि देश की अदालतों में मुकदमों का भारी अंबार लगा हुआ है और केवल ट्रिब्यूनल कोर्ट बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इससे मामलों का निपटारा नहीं होता, बल्कि वे एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित हो जाते हैं।
न्यायमूर्ति मित्तल ने भारतीय प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समझौते के आधार पर अदालतों के बाहर विवादों का समाधान न्याय व्यवस्था का बोझ कम करने का प्रभावी तरीका हो सकता है। परिवार न्यायालयों में इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने रामायण, महाभारत और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में संवाद और सहमति के माध्यम से विवाद सुलझाने की समृद्ध परंपरा रही है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार सेवानिवृत्त चिकित्सकों, अभियंताओं और शिक्षाविदों का पैनल बनाकर वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को और मजबूत कर सकती है।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल कानून के विद्यार्थी न बनें, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाले जिम्मेदार नागरिक बनें। मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को कॉलेज स्तर पर ही व्यावहारिक न्यायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने जल संरक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में प्रतिदिन लगभग 68 हजार एमएलडी पेयजल सीवर में बदल जाता है, जबकि केवल 35 से 40 प्रतिशत पानी का ही उपचार हो पाता है। उन्होंने उपचारित जल को कृषि में उपयोग करने पर जोर दिया, जिससे भूजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मेरठ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर युद्धवीर सिंह ने कहा कि मूट कोर्ट का उद्देश्य विद्यार्थियों को विधि की बुनियादी तकनीकों से सशक्त बनाना है। वहीं संरक्षक डॉ रामकुमार गुप्ता ने इसे छात्रों की सफलता की पहली सीढ़ी बताया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को विजेता घोषित किया गया। विजेता टीम को 21 हजार रुपये की धनराशि तथा प्रतिष्ठित सेठ दयानंद गुप्ता ट्रॉफी प्रदान की गई।
उपविजेता के रूप में जगमोहन कॉलेज ऑफ लॉ, बागपत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 हजार रुपये की धनराशि और सेठ अरविंद नाथ ट्रॉफी हासिल की।
राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में जगमोहन कॉलेज, बागपत की श्रुति शर्मा को उनके प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण के लिए बेस्ट म्यूटर घोषित किया गया। उन्हें 7 हजार रुपये की धनराशि और नरेंद्र नाथ मित्तल ट्रॉफी प्रदान की गई।
वहीं बेस्ट रिसर्चर का सम्मान राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, लखनऊ के आर्यन पवार को मिला। उन्हें रघुवर दयाल मित्तल ट्रॉफी के साथ 5 हजार रुपये की धनराशि से सम्मानित किया गया।
इस राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों की विधिक समझ, शोध क्षमता और वकालत कौशल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अंजलि मित्तल, प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ ओपी अग्रवाल सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर हरिशंकर राय ने किया।