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मेरठ सेंट्रल मार्केट विवाद: “सेटबैक” बना सिरदर्द

मेरठ का सेंट्रल मार्केट इन दिनों सिर्फ एक बाजार नहीं… बल्कि एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
करीब **एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट** मंडरा रहा है, और छोटे मकानों पर लागू “सेटबैक” का नियम यहां के लोगों के लिए **गले की फांस** बन गया है।

इसी मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से **स्थानीय महिलाएं सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन** कर रही हैं।
हाथों में तख्तियां, आंखों में उम्मीद… और दिल में अपने घर-रोजगार को बचाने की लड़ाई।

लेकिन आज इस आंदोलन ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब **कांग्रेस नेत्री रीना शर्मा** धरना स्थल पर पहुंचीं।

आरोप है कि मौके पर मौजूद **थाना नौचंदी इंस्पेक्टर** ने उनका विरोध करते हुए कहा—
“ना यहां आपका घर है, ना दुकान… आप यहां नहीं रुक सकतीं।”

इसके बाद मामला और गरमा गया।
कांग्रेसियों का आरोप है कि रीना शर्मा को धरना स्थल से सीधे नौचंदी थाने ले जाया गया,
जबकि पुलिस का कहना है कि उन्हें सम्मानपूर्वक उनके घर छोड़ा गया।

कुछ ही देर में सियासी पारा और चढ़ गया—
कांग्रेस शहर अध्यक्ष रंजन शर्मा और पूर्व जिला अध्यक्ष समेत दर्जनों कार्यकर्ता पहले थाने पहुंचे,
फिर धरना स्थल पर लौटे… जहां पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।

उधर, इस पूरे विवाद के बीच आवास विकास परिषद ने अपना रुख साफ कर दिया है—
“सेटबैक नियम का पालन हर हाल में करना होगा।”

आज इसी मुद्दे पर सीओ सिविल लाइन और एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले ने क्षेत्र के पार्षदों और जिम्मेदार लोगों के साथ बंद कमरे में बैठक की।
अधिकारियों ने साफ कहा—
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आगे कोई विकल्प नहीं है, सभी को नियम मानने होंगे।

प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील की है,
लेकिन सवाल अब भी कायम है

क्या नियमों की सख्ती के बीच रोजगार और आशियाने बच पाएंगे?
या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?

मेरठ का सेंट्रल मार्केट… अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि संघर्ष की कहानी बन चुका है।

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