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मोदरान रेलवे स्टेशन पर चैन्नई एक्सप्रेस के ठहराव को मिली मंजूरी, संघर्ष समितियों और सांसद के प्रयासों की बड़ी जीत

मोदरान रेलवे स्टेशन पर चैन्नई एक्सप्रेस के ठहराव को मिली मंजूरी, संघर्ष समितियों और सांसद के प्रयासों की बड़ी जीत

जगमलसिंह राजपुरोहित
मोदरान (जालोर): क्षेत्रीय यात्रियों और प्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हो गई है। रेलवे बोर्ड ने ट्रेन संख्या 20625/20626 चेन्नई-भगत की कोठी-चेन्नई श्री आशापुरी एक्सप्रेस के मोदरान रेलवे स्टेशन पर आधिकारिक ठहराव (Stoppage) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस निर्णय से क्षेत्र के प्रवासियों और स्थानीय जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है।
सामूहिक प्रयासों से मिली सफलता:
यह बड़ी उपलब्धि विभिन्न संघर्ष समितियों और जन प्रतिनिधियों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। जालोर-सिरोही सांसद श्री लुम्बाराम जी चौधरी द्वारा दिल्ली स्तर पर की गई प्रभावी पैरवी और रेल मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय ने इस ठहराव को मुमकिन बनाया है।
इस मुहिम में निम्नलिखित समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही:
श्री आशापुरी माताजी रेल संघर्ष समिति, मोदरान
श्री सुंधा रेल संघर्ष समिति, चेन्नई
श्री पैसेंजर यात्री गाड़ी समदड़ी-भीलड़ी रेल संघर्ष समिति, जालोर
राजस्थान (जालोर-सिरोही-बाड़मेर) किसान संघर्ष समिति, नरपुरा-जालोर
और भी कई राजनेता व कार्यकर्ता की मेहनत के लिए बहुत बहुत धन्यवाद व आभार व्यक्त किया गया है।
प्रवासियों और श्रद्धालुओं के लिए वरदान:
चेन्नई से सीधा जुड़ाव होने के कारण दक्षिण भारत में व्यापार और रोजगार के लिए रह रहे हजारों प्रवासियों को अब अपने पैतृक गाँव आने-जाने में सुगमता होगी। इसके साथ ही, प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री आशापुरी माताजी और श्री सुंधा माताजी के दर्शनार्थ आने वाले यात्रियों के लिए भी यह ठहराव एक बड़ा उपहार साबित होगा।
जनता और कार्यकर्ताओं में हर्ष:
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। संघर्ष समितियों के पदाधिकारियों ने इसे जनशक्ति और एकता की जीत बताया है। रेलवे बोर्ड के इस निर्णय से मोदरान स्टेशन के राजस्व और महत्व में भी वृद्धि होगी।
"जब जनशक्ति और संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो विकास के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं। यह ठहराव क्षेत्र की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।"

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Comment
  • Hamraj Singh Chouhan

    माननीय महोदय ये क्या हो रहा है 543 से बढ़ाकर 850 लोकसभा सीट करने का संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत* देश की जनता पर नया बोझ है ओर कुछ नहीं इनके पेंशन और भत्ते आपसे एक सवाल है में नियमित कर्मी की बात नहीं कर रहा उस कर्मी की जिसके लिए किसी ने कुछ नहीं किया केवल चिकित्सा विभाग का एक कैडर ANM GNM LT LA and pharmacist को छोड़कर बाकी शायद किसी को नियमित किया हो किसी भी विभाग में खुद इसी विभाग के प्रबंधकीय संविदा कार्मिक NHM को आज तक लटका कर रख दिया है उपरोक्त कैडर की किस्मत देखो बिना एग्जाम के परमानेंट नौकरी मिल जाती है क्या ये बेरोजगार के मुंह पर तमाचा नहीं जो दिन रात एक करके नौकरी लगता ओर इनमें से एक कैडर बिना एग्जाम के 4200 ग्रेड की नौकरी कैसा संविधान है भारत का एक संविदा कर्मी वह कभी नहीं चाहेगा कि वो सरकार की किसी फ्री योजना का लाभ ले लेकिन मजबूर है क्या करे यदि सरकार इनकी भी अच्छी सैलरी दे ओर समय से नियमित करे तो तो इनका भी भला हो जाएगा ये केवल अच्छी नौकरी की बात कर रहे है किसी सुख सुविधा की नहीं जैसे हवाई जहाज का टिकिट किसी फाइव स्टार होटल में फ्री रुकने का टिकिट किसी इंसेंटिव की बात नहीं कर रहे विडंबना ये है सरकार ये कहती हे कि परमानेंट कर्मी काम नहीं करता इसलिए इनकी सेवा के काम के लिए संविदा कर्मी रखती है में कहता हु सरकार तो आपके हाथ में है आपके अधिकारी से रिपोर्ट मांगे कौन समय से ड्यूटी कर रहा कौन ड्यूटी पर होने के बावजूद ड्यूटी पर नहीं है कौन गांव में काम नहीं करना चाहता उसकी पूरी जानकारी सबके पास होती है लेकिन किसी पर कोई एक्शन नहीं होता यहां तक कि अब सरकार govt department में योजना लाती ओर जिस परमानेंट कर्मी की सैलरी ऑलरेडी अच्छी है उसको सरकार मोबाइल का रिचार्ज वर्दी सिलवाने धुलवाने और भी बहुत से इंसेंटिव होते है क्या इन कर्मी के पास इन काम के पैसे नहीं बचते जो सरकार अलग से काम करवाने के लिए खर्चा देती है ओर एक तरफ संविदा कर्मी जिससे सारे काम करवा लेंगे लेकिन न तो सैलरी टाइम पर आती है न किसी प्रकार से कोई इंसेंटिव ये नहीं चाहते इंसेंटिव ये केवल इतना चाहते है समय से नियमित नियुक्ति जैसे चिकित्सा विभाग के anm gnm LT LA pharmacist को किया जाता है न तो इनकी फ्यूचर की सिक्योरिटी न वर्तमान की न पेंशन न सैलरी किसी की कोई गारंटी नहीं अगर सभी संविदा कर्मी ओर बेरोजगार भाई मेरी बात से सहमत है तो इसको हर जगह पहुंचा दो