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वैश्विक युद्ध के बीच उत्पन्न गैस संकट में चंद्रपाल ने अपनाया देसी जुगाड़

देशी जुगाड़ बना आत्मनिर्भरता का उदाहरण, गैस संकट के बीच चन्द्रपाल ने दिखाई राह



लखनऊ | गोमती नगर विस्तार

गोमती नगर विस्तार सेक्टर-1 स्थित कावेरी अपार्टमेंट के सामने वर्षों से चाय की दुकान संचालित कर रहे चन्द्रपाल (निवासी: सुलभ आवास कॉलोनी) इन दिनों आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बनकर उभरे हैं।



पहले चन्द्रपाल अपनी दुकान पर गैस सिलेंडर का उपयोग करते थे, लेकिन हाल ही में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर ईरान–इजरायल प्रॉक्सी युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने लगी। इस समस्या के चलते उन्होंने हार मानने के बजाय एक देशी जुगाड़ अपनाया।



चन्द्रपाल ने अपनी दुकान पर मिट्टी और कोयले से बनी देशी बट्टी (चूल्हा) का उपयोग शुरू कर दिया। इस देसी तकनीक से न केवल उनकी दुकान सुचारू रूप से चल रही है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी यह एक प्रेरणा बन गई है।

दुकानदार चन्द्रपाल का कहना है—

“हमें आपदा को अवसर बनाकर राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि मिलजुलकर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।”



चित्र में चन्द्रपाल अपनी चाय की दुकान पर देशी बट्टी के माध्यम से चाय बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो आत्मनिर्भरता और जुगाड़ तकनीक का प्रतीक है।



✍️ समाज के लिए संदेश:

संकट में घबराने के बजाय समाधान खोजें



स्थानीय और देसी तकनीकों को अपनाएं



आत्मनिर्भर भारत की दिशा में छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं



🖊️ रिपोर्टर:

सुमित पाण्डेय

सदस्य, ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन

गोमती नगर, लखनऊ

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