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रामपुर गेंदा में स्थापित अरण्य बौद्ध विहार बना आस्था और ध्यान का केंद्र

Aima Media , Vyaspur /Jagadhri ( 25/03/26 ) व्यासपुर क्षेत्र के गांव रामपुर गेंदा में स्थित अरण्य बौद्ध विहार इन दिनों आध्यात्मिक साधना और शांति का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इसी क्रम में संवाददाता तरुण शर्मा ने विहार के स्वामी भंते महापण्यों जी से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने विहार की स्थापना और इसके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की।

भंते महापण्यों जी ने बताया कि रामपुर गेंदा क्षेत्र का बौद्ध धर्म से प्राचीन काल से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व भी इस क्षेत्र में बौद्ध भिक्षुओं का निवास हुआ करता था। विशेष रूप से सोम नदी के तट पर एक विकसित और सुव्यवस्थित बौद्ध विहार स्थित था, जो उस समय की उन्नत स्थापत्य कला और आध्यात्मिक जीवनशैली का प्रतीक था।

उन्होंने आगे बताया कि उसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस स्थान पर अरण्य बौद्ध विहार की स्थापना की गई है। यहां रहने वाले सभी भिक्षु गौतम बुद्ध द्वारा बताए गए 227 नियमों (विनय नियम) का पूर्णतः पालन करते हैं। भंते जी ने कहा कि ये नियम अनुशासन, संयम और साधना का मूल आधार हैं, जो व्यक्ति को एक संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं।

विहार की एक विशेषता यह भी है कि यहां आने के लिए किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। भंते महापण्यों जी ने स्पष्ट कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, रंग या नस्ल से संबंध रखता हो, यहां आ सकता है और ध्यान, मौन साधना तथा बौद्ध जीवनशैली को अपनाकर आंतरिक शांति प्राप्त कर सकता है।

वर्तमान समय में जब समाज तनाव और भागदौड़ से जूझ रहा है, ऐसे में अरण्य बौद्ध विहार जैसे स्थान लोगों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह विहार न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन को सही दिशा देने का एक प्रेरणास्रोत भी बन चुका है।

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