“जल गंगा संवर्धन अभियान”पुराने तालाब, बावड़ियों और कुओं का होगा जीर्णोद्धार
रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश
प्रदेश सहित भोपाल जिले में जल संरचनाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ किया गया है। यह अभियान 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं तथा अन्य जल स्रोतों की साफ-सफाई, गहरीकरण और जीर्णोद्धार के साथ-साथ जल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि अभियान के अंतर्गत जिले में तालाबों का गहरीकरण, नदियों और नालों की सफाई, कुओं-बावड़ियों का पुनर्जीवन तथा रिचार्ज पिट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई जा रही है।उन्होंने बताया कि इस अभियान को जन आंदोलन के रूप में नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। अभियान की शुरुआत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्रोतों तथा देवालयों के आसपास जल संरक्षण कार्यों से की जा रही है। इन गतिविधियों में जनप्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय, नागरिकों और विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नर्मदा घाटी विकास, वन, पर्यावरण, कृषि, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, जन अभियान परिषद तथा उद्योग एवं एमएसएमई विभाग सहित अनेक विभाग सहभागिता कर रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा खेत-तालाब, अमृत सरोवर एवं भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे, जबकि नगरीय क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और नालों के शोधन की व्यवस्था की जाएगी। वहीं वन विभाग द्वारा भूजल संवर्धन के कार्यों के साथ वर्षा ऋतु में व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा।महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केंद्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्थापित कर उन्हें जल एवं पोषण मॉडल केंद्र के रूप में विकसित करेगा, ताकि समुदाय को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके।जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे इस महत्त्वपूर्ण अभियान में सक्रिय सहभागिता कर “जल की हर बूंद बचाने” के संकल्प को जन आंदोलन का रूप दें और जल संरक्षण की दिशा में अपना योगदान सुनिश्चित करें।