नवग्रहों के नाम पर फिर जीवित हों मेरठ के ‘नौ द्वार, रामायणकालीन मयराष्ट्र की पहचान लौटाने की उठी मांग
मेरठ। प्राचीन इतिहास और पौराणिक गौरव को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। रामायणकालीन माने जाने वाले प्राचीन मयराष्ट्र (मेरठ) की ऐतिहासिक पहचान को पुनः स्थापित करने के लिए शहर के नौ प्राचीन द्वारों के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण की मांग उठी है। इन द्वारों को नवग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और केतु—के नाम पर पुनः नामित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
21 मार्च 2026 को साहित्यकार एवं ‘रामायणकाल से अब तक मेरठ का इतिहास’ पुस्तक के संपादक चरण सिंह स्वामी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ-हापुड़ क्षेत्र के सांसद अरुण गोविल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि मेरठ का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है और इसे मय दानव (मयासुर) द्वारा बसाया गया माना जाता है।
नौ द्वारों का गौरवशाली इतिहास
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्राचीन मेरठ एक सुदृढ़ किले के रूप में विकसित था, जिसमें नौ प्रवेश द्वार थे। आजादी के बाद तक ये द्वार—दिल्ली गेट, लिसाड़ी गेट, शाहपीर गेट, सोहराब गेट, जाटव गेट, बागपत गेट, खैरनगर गेट, बुढ़ाना गेट और कम्बोह गेट—के रूप में मौजूद थे, जिनमें से कुछ आज भी दिखाई देते हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार यह नगर नवग्रह आधारित मानचित्र पर बसाया गया था। प्रत्येक द्वार के पास धर्मशाला, कुआं, बाजार और जल निकासी की व्यवस्था भी होती थी—जो उस समय की उन्नत नगर-योजना का प्रमाण है।
पुरातात्विक सर्वे की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि शहर के कोतवाली क्षेत्र को केंद्र मानते हुए आसपास के 500 मीटर क्षेत्र में व्यापक पुरातात्विक खुदाई (आर्कियोलॉजिकल सर्वे) कराई जाए। इस क्षेत्र में जामा मस्जिद, सुभाष बाजार, खंदक बाजार समेत कई पुराने मोहल्ले शामिल हैं, जहां से रामायण, महाभारत और बौद्ध काल से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री मिलने की संभावना जताई गई है।
मयासुर का महल और रहस्यमयी सुरंग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मयासुर का महल वर्तमान जामा मस्जिद क्षेत्र के पास स्थित था। कुछ लोगों का दावा है कि यहां पहले एक प्राचीन मंदिर था। इतना ही नहीं, कुछ दशक पहले यहां एक रहस्यमयी सुरंग मिलने की भी चर्चा है, जिसे बाद में बंद करा दिया गया।
जागरूकता के लिए नाटक का मंचन
इस ऐतिहासिक विषय को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ‘नवग्रह आधारित नौ द्वारी मयराष्ट्र’ नामक नाटक का मंचन अप्रैल के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। इसमें अभिनेता राजीव सक्सेना सहित कई कलाकार भाग लेंगे।
क्या है मांग?
* शेष बचे द्वारों का जीर्णोद्धार
* समाप्त हो चुके द्वारों का पुनर्निर्माण
* सभी द्वारों का नवग्रहों के नाम पर नामकरण
* क्षेत्र का पुरातात्विक सर्वे
प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि यदि यह कार्य किया जाता है, तो मेरठ न केवल अपनी प्राचीन पहचान को पुनः प्राप्त करेगा, बल्कि यह शहर पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभर सकता है।
ज्ञापन देने वालों में अभिनेता राजीव सक्सेना, मेजर राजपाल सिंह तोमर, अशोक कुमार गौड़, डॉ. चुन्नी रस्तोगी और भारत भूषण वर्मा सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
निष्कर्ष:
मेरठ की धरती में छिपा इतिहास आज फिर दस्तक दे रहा है। अगर यह पहल साकार होती है, तो ‘नौ द्वारों का शहर’ एक बार फिर अपनी प्राचीन पहचान और गौरव के साथ विश्व मानचित्र पर उभर सकता है।