अमृत काल में भी कनेक्टिविटी का 'वनवास': 17 साल से कोयंबतूर-जालोर-जोधपुर ट्रेन का इंतज़ार
अमृत काल में भी कनेक्टिविटी का 'वनवास': 17 साल से कोयंबतूर-जालोर-जोधपुर ट्रेन का इंतज़ार
मोदरान/कोयंबतूर/जोधपुर। देश जहाँ एक ओर 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों का जाल बिछाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दक्षिण भारत में बसे लाखों मारवाड़ी प्रवासी आज भी अपनी जन्मभूमि तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ब्रॉड गेज (बड़ी लाइन) बने 17 साल बीत जाने के बाद भी कोयंबतूर से जालोर, जोधपुर और बाड़मेर के लिए सीधी रेल सेवा एक सपना बनी हुई है।
चेन्नई एक्सप्रेस के विस्तार में क्या है बाधा?
प्रवासियों का सबसे बड़ा सवाल हाल ही में शुरू हुई ट्रेन संख्या 20625/26 (जोधपुर-चेन्नई) को लेकर है। यह ट्रेन चेन्नई में लगभग 21 घंटे तक खड़ी रहती है। रेलवे प्रशासन चाहे तो इस रैक का उपयोग इसे कोयंबतूर तक विस्तारित करने के लिए आसानी से कर सकता है।
प्रवासी संगठनों का कहना है कि कोयंबतूर, तिरुपुर, इरोड और सेलम जैसे मुख्य वाणिज्यिक शहरों की अनदेखी समझ से परे है। इन शहरों में राजस्थान के जालोर, सिरोही और पाली जिले के लाखों लोग निवास करते हैं, जो व्यापार के जरिए तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं।
सफर नहीं, 'अग्निपरीक्षा' है घर वापसी
वर्तमान में कोयंबतूर से मारवाड़ जाने के लिए यात्रियों को 2 से 3 ट्रेनें बदलनी पड़ती हैं। इस "ट्रेन बदलू" सफर में न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कनेक्टिंग ट्रेनों के इंतजार में स्टेशनों पर रुकने के दौरान प्रवासियों के साथ लूटपाट और छीना-झपटी की घटनाएं भी आम हो गई हैं, जिससे सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्य मांगें और आक्रोश के बिंदु:
उपेक्षा का शिकार: कोयंबतूर तमिलनाडु का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, फिर भी इसे सीधी कनेक्टिविटी से वंचित रखना 'सौतेला व्यवहार' प्रतीत होता है।
डबल इंजन की सुस्ती: स्थानीय लोगों का कहना है कि 'डबल इंजन' की सरकार होने के बावजूद मारवाड़ के रेल विकास के पहिये थमे हुए हैं।
रतन सिंह सोढा अध्यक्ष
श्री आशापुरी माताजी संघर्ष समिति मोदरान
मंत्री से गुहार: रेल मंत्री स्वयं राजस्थान (मारवाड़) से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में प्रवासियों को उनसे उम्मीदें ज्यादा थीं, जो अब धीरे-धीरे निराशा में बदल रही हैं।
जगमाल सिंह राजपुरोहित उपाध्यक्ष
श्री आशापुरी माताजी संघर्ष समिति मोदरान
"हम पिछले 17 सालों से सांसद, विधायक और रेल मंत्रियों को पत्र लिख रहे हैं। ज्ञापन दिए गए, मिन्नतें की गईं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। क्या कोयंबतूर के प्रवासियों का वोट और टैक्स की कोई कीमत नहीं है?"
बलवंतसिंह राजपुरोहित प्रवासी कोईम्बटुर
यदि सरकार ट्रेन संख्या 20625/26 का विस्तार कोयंबतूर तक कर देती है, तो इससे न केवल हजारों प्रवासियों को सुविधा होगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। अब देखना यह है कि क्या रेल मंत्रालय प्रवासियों की इस 'चीख' को सुनता है या फिर यह फाइल एक बार फिर धूल फांकती रहेगी।
-कल्याण सिंह राजपुरोहित प्रवासी हैदराबाद