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अध्यात्म की नींव ध्यान है : सिद्धार्थ

श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी के सान्निध्य में समर्थगुरु धाम मुरथल में सभी साधकों ने उमंग उत्साह और आनंद के साथ मुरथल महोत्सव मनाया ।
विशेष 13 मार्च 2026 को बड़े स्तर का सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ । जिसमें गुजरात और दिल्ली टीम के कलाकारों ने बहुत सुंदर प्रस्तुति भगवान राधा कृष्ण ,भगवान शिव और सूफी गीतों पर नृत्य के द्वारा दी । गुजरात की मां श्रद्धा और आचार्य अलोक ने महोत्सव का अच्छा संचालन किया ।
भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष
मोहन लाल बडौली को समर्थगुरू धारा के केंद्रीय संयोजक आचार्य दर्शन जी और प्रबन्धक स्वामी सुशील ने फूलों के गुलदस्ते से स्वागत किया। मोहन लाल ने बताया कि
यह मुरथल महोत्सव मेरे लिए और सभी साधकों के लिए विशेष महत्वपूर्ण रहा क्योंकि प्रतिदिन समर्थगुरु के आशीर्वचन और सत्संग मिले । सत्संग से मानव जीवन सफल होता है। सनातन धर्म में शिष्य के लिए सदगुरु का बहुत महत्त्व है। बिना पूर्ण सदगुरु के साधना नहीं होती है।
आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि
अध्यात्म की नींव ध्यान है। इस पर आप साक्षी, समाधि और सुमिरन की गगनचुंबी इमारत खड़ी कर सकते हैं, लेकिन नींव को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। लेकिन निराकार अंतर्आकाश अर्थात् सहस्रदल कमल को जाने बिना ध्यान घटित नहीं होता।
समर्थगुरू धारा हरियाणा के कोऑर्डिनेटर आचार्य सुभाष, दिल्ली के कोऑर्डिनेटर आचार्या एकांता मां, गुजरात के
कोऑर्डिनेटर आचार्य कार्तिकेय,आचार्य चेतन, सचिव मां मीराबाई सहित सभी साधकों ने अपने परिवार सहित उमंग उत्साह के साथ मुरथल महोत्सव में शामिल हुए।

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