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जयकारों के बीच हुई प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा भक्ति के रंग में रंगे शहरवासी, मंत्रों से पावन हुई धरा

जयकारों के बीच हुई प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा

भक्ति के रंग में रगे शहरवासी, मंत्रो से पावन हुई धरा

बेंगलूरु. वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति-भाव से सरोबर वातावरण में होसकोटे में स्थित नव निर्मित श्री आईमाता मंदिर में बुधवार को भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव दिव्यता और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर आध्यात्मिक आभा से आलोकित रहा और श्रद्धालुओं की भीड ने इसे एक पवित्र तीर्थ के रूप में परिवर्तित कर दिया। सीरवी समाज व आईपंथ के धर्मगुरू दीवान माधवसिंह के सानिध्य में आईमाताजी व अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा ,अखण्ड ज्योति, स्थापना विधि-विधान से सम्पन्न हुई। प्रातः धर्मगुरु दीवान माधव सिंह के सानिध्य में माता का पाट और ध्वजा जयकारों के साथ मंदिर में लाया गया, जहां धर्मगुरु दीवान माधव सिह जी ने मंदिर में तोरण वादा। इसके बाद मंदिर में पंडित वी.एच. विनोद दीक्षित के नेतृत्व में तुमकूर से आए पंडितों ने विधान प्रारंभ किया। जैसे ही मूल गंभारे में आईमाता की मूर्ति स्थापित की गई श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। संस्था के अध्यक्ष कानाराम परिहारिया ने बधाई दी। महिलाओं ने मंगलगान करते हुए नृत्य किया। लाबुराम बर्फा परिवार ने आईमाता की मूर्ति को स्थापित किया। प्रतिष्ठा होते ही लाभार्थी गोपाल सिंह राठौड़ परिवार ने मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। कानाराम परिहारिया परिवार ने विधि-विधानपूर्वक मुख्य कलश इंडा स्थापित किया। रमेश राठौड़ परिवार ने अखंड ज्योत स्थापित किया। ध्वजारोहण और कलश स्थापना के दौरान पुष्पवर्षा भी की गई। लोगों ने एक-दूसरे गले लगाकर प्रतिष्ठा की बधाई दी। लाभार्थी परिवारों ने अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित किया एवं श्रृंगार, भोग एवं आरती की। मंदिर का पट्ट खुलते ही प्रथम दर्शन हेतु भक्तों की कतारें लग गई। यज्ञशाला में मंत्रोच्चारों के बीच हवन पूर्णाहुति हुई। दोपहर में समारोह को संबोधित करते हुए आईपंथ के धर्मगुरू दीवान माधवसिंह ने कहा कि माता के स्थापित भैल रथ हमारी पंरपराओ को बचाए रखना जरूरी है। दीवान ने कहा कि इस रथ को अपने यहां दर्शनाथ अवश्य ले जाएं एवं सभी को इसकी महता से अवगत करवाएं। दिवान ने कहा कि यह माता का चलता फिरता मंदिर हैआईपंथ के प्रचार -प्रसार में इसकी भूमिका अहम है। धर्मगुरू ने कहा कि आईपंथ माता के बताए मार्ग पर चल रहा है एवं,माता द्वारा दीवान परंपरा को दिए मार्गदर्शन के अनुसार वे भी समाज में दिखावा न करते हुए सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते है। धर्मगुरू का सीरवी समाज होसकोटे की ओर से
संस्था के अध्यक्ष कानाराम परिहारिया, सचिव विंजाराम पंवार, उपाध्यक्ष विंजाराम आगलेचा, सहसचिव दिलीप गहलोत, कोषाध्यक्ष भीयाराम गहलोत, सह-कोषाध्यक्ष गोपाल राम पंवार, मीडिया प्रभारी रमेश परिहारिया, महामंत्री भूडाराम कालूराम मंत्री लाबुराम, मेघाराम पूर्व अध्यक्ष हापुराम राठौड़, महेंद्र राठौड़ पूर्व सचिव चेनाराम बर्फा, सेराराम आगलेचा, राजू लचेटा सूलीबेले, ओमप्रकाश चोयल, भंवरलाल परिहार, प्रभुराम, गोपालसिंह राठौड़, हीराराम चोयल, रमेश राठौड़ के नेतृत्व में सम्पूर्ण कार्यकारिणी ने धर्मगुरू का माला साफा व नजराना पेश कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय वडेरों के पदाधिकारियों, सीरवी महासभा कर्नाटक के पदाधिकारियों व लाभार्थियों व प्रतिष्ठा में सहयोग देने वाले नवयुवक मंडलों गैर, मडलों, महिला मंडलो का सम्मान किया गया। धर्मगुरू दीवान व कार्यकारिणी ने कथा वाचक संत अमृत महाराज, पंडित वी.एच. विनोद दीक्षित का सम्मान किया गया। इस अवसर पर अतिथि के रूप में सीरवी महासभा तमीलनाडु के अध्यक्ष आर.बी. चौधरी, सीरवी महासभा कर्नाटक प्रांत के अध्यक्ष बाबूलाल परिहार, सचिव अमरचन्द सानपुरा, कोषाध्यक्ष पोकरराम राठौड़, पूर्व सचिव वीरमराम सोलंकी,भाजपा युवा नेता सुनील सीरवी का सम्मान किया गया। मंदिर में सजावट के लिए बलेपेट सास्कृतिक समिति के अध्यक्ष कमल किशोर काग, सुरेश लचेटा , नानकराम परिहार का विशेष सहयोग रहा। मंच संचालन मोहन सीरवी, प्रेम सीरवी सूरत ने किया।

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