बुजुर्गों की पेंशन पर संकट: आय का बहाना, सम्मान पर चोट
AIMA Bureau Jagadhri , ( 05/02/26 ) AIMA न्यूज़ से रूबरू हुए कांग्रेस कार्यकर्ता भूपेंद्र सिंह जय रामपुर ने कहा राज्य में 36 बिरादरी व सर्व समाज के बुजुर्गों के सम्मान को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई वृद्धावस्था पेंशन योजना आज सवालों के घेरे में है। इस योजना की शुरुआत महज 100 रुपये मासिक पेंशन से हुई थी, ताकि 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग अपनी दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकें। समय के साथ यह पेंशन बढ़कर लगभग 3000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंची, जो महंगाई के दौर में बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत बनी।
शुरुआत में इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें कोई आय सीमा नहीं थी, केवल 60 वर्ष से अधिक उम्र होना ही पात्रता का आधार था। लेकिन वर्तमान में हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अब सरकार द्वारा अलग-अलग नियम बनाकर बुजुर्गों की पेंशन को उनकी आय में जोड़ा जा रहा है, जिसके कारण बड़ी संख्या में वृद्धों की पेंशन काटी जा रही है।
बुजुर्गों का कहना है कि जिस पेंशन को उनके सम्मान और न्यूनतम जीवनयापन के लिए शुरू किया गया था, वही आज उनसे छीनी जा रही है। विरोधाभास यह है कि दूसरी ओर विधायकों और सांसदों को अच्छी आय और सुविधाएं होने के बावजूद पेंशन दी जा रही है, जबकि आम बुजुर्गों की छोटी-सी पेंशन आय का हवाला देकर बंद की जा रही है।
सामाजिक संगठनों और बुजुर्गों ने सरकार से मांग की है कि वृद्धावस्था पेंशन को फिर से सम्मान आधारित योजना के रूप में लागू किया जाए, न कि आय आधारित। उनका कहना है कि यह पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि बुजुर्गों का हक है, जिसे छीना जाना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।