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UGC के नए इक्विटी नियमों पर बढ़ा विवाद, राजस्थान सहित कई राज्यों में विरोध तेज

नई दिल्ली/जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए इक्विटी (समानता) नियमों को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। विशेष रूप से राजस्थान सहित कई राज्यों में सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और कुछ शिक्षाविदों ने इन नियमों के खिलाफ खुलकर विरोध जताया है और इन्हें वापस लेने की मांग तेज कर दी है।

UGC ने वर्ष 2026 के लिए जो नए इक्विटी रेगुलेशंस लागू किए हैं, उनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करना, समान अवसर सुनिश्चित करना और समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना बताया गया है। इन नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equal Opportunity Cell (EOC) का गठन अनिवार्य किया गया है, साथ ही शिकायत निवारण व्यवस्था को भी सख्त बनाया गया है।

हालांकि, विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि ये नियम व्यवहारिक नहीं हैं और इससे शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। राजस्थान में कई सामाजिक संगठनों ने संयुक्त मंच बनाकर आरोप लगाया है कि UGC के नए नियम कुछ वर्गों के खिलाफ पक्षपात को बढ़ावा दे सकते हैं और इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ने की आशंका है।

प्रदर्शनकारियों ने जयपुर सहित कई शहरों में ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार और UGC से मांग की है कि इन नियमों पर पुनर्विचार किया जाए और सभी पक्षों से संवाद के बाद ही इन्हें लागू किया जाए। कुछ छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग UGC के इन नियमों को सकारात्मक पहल बता रहा है। उनका कहना है कि इससे कैंपस में समानता, पारदर्शिता और सुरक्षा का माहौल बनेगा तथा भेदभाव से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

UGC की ओर से फिलहाल यही कहा गया है कि नए नियम छात्र हित और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और इनका उद्देश्य किसी भी वर्ग को नुकसान पहुंचाना नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और UGC विरोध कर रहे संगठनों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर की बहस का रूप लेता जा रहा है, जिसमें शिक्षा, समाज और नीति—तीनों पहलुओं पर गंभीर चर्चा हो रही है।

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