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वाराणसी में अंग्रेजी हुकूमत की निशानी को खत्म करेगी योगी सरकार, 10 लाख की आबादी को मिलेगी 'नर्क' से मुक्ति

वाराणसी में अंग्रेजी हुकूमत की निशानी को खत्म करेगी योगी सरकार, 10 लाख की आबादी को मिलेगी 'नर्क' से मुक्ति

चन्दौली वाराणसी बनारस की पहचान पुराने इलाकों से होती है. इसे गलियों का शहर भी कहा जााता है. यहां बड़ी आबादी रहती है. पुराना इलाका होने के कारण यहां के लोगों को सीवर लाइन से होने वाली परेशानियों से जूझना पड़ता है. अंग्रेजी हुकूमत खत्म होने और मुगलकालीन शासन काल के वक्त बिछाई गई सीवर पाइप लाइन लगभग 200 साल बाद अब बदली जानी है.

इसके लिए 18 वार्ड चयनित किए गए हैं, जिसमें से 13 वार्डों के लिए शासन स्तर से मंजूरी भी मिल गई है. 547 करोड़ रुपए की लागत से बनारस के पक्के महल की बदहाली दूर होने जा रही है, जो बारिश और आम दिनों में भी लोगों के लिए 'नर्क' का सबक बन जाती है.200 किमी नई सीवर लाइन बिछाने को हरी झंडी: वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया, गंगा घाटाें के किनारे कई मोहल्लों में सीवर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. इसके कारण सीवर ओवरफ्लो की स्थायी समस्या बनी हुई है. महापौर अशोक कुमार तिवारी ने प्रथम चरण में 18 पुराने वार्डों में नई पाइप लाइन बिछाने का निर्णय लिया है. शासन ने 527 करोड़ रुपये की लागत से 13 पुराने वार्डों में 200 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाने की हरी झंडी दे दी है.

उन्होंने बताया कि शेष पांच वार्डों में नई सीवर लाइन बिछाने के प्रस्ताव को इसी सप्ताह कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना है. ऐसे में हुकूलगंज, नई बस्ती, प्रहलाद घाट, कृतिवाशेश्वर, शिवपुरवातुलसीपुर, बिरदोपुर, काजीपुरा, शिवाला, नगवां, बागाहाड़ा, जंगमबाड़ी, बंगाली टोला वार्ड के करीब 100 मोहल्लाें की 10 लाख से अधिक आबादी लाभांवित होगी.दो वार्डों में काम शुरू :संदीप श्रीवास्तव ने बताया, शहर के दो वार्डों में विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया है. वार्ड संख्या आठ दीनापुर और वार्ड संख्या 17 संदहा में कुल 3.99 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया जाएगा. शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान महापौर ने वार्ड नंबर आठ दीनापुर में 1.41 करोड़ रुपये तथा वार्ड नंबर 17 संदहा में 2.58 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई है.

इन कार्यों के पूरा होने से स्थानीय निवासियों को जल निकासी, बेहतर सड़कों और अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा. पाइप लाइन ट्रांस लेस विधि से बिछाने का निर्णय लिया गया है. इसके तहत गली के मोड़ाें पर गड्ढा कर पूरी गली में नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी. जलनिकासी के लिए शहर अब भी करीब 200 वर्ष पुराने ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम (शाही नाले) पर निर्भर है. ड्रेनेज व सीवरेज के लिए नगर निगम के पास शाही नाले का कोई विकल्प नहीं है.जल निगम ने कराय था सर्वे: शाही नाला व ब्रिटिश समय में बने ईंट का नाला बनारस का बैक बोन माना जाता है. पुराने मोहल्लों में अंग्रेजों के जमाने की सीवर पाइप लाइन होने के कारण जाम व ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है. खास तौर पर गंगा घाटोें के किनारे के मोहल्लों में अक्सर सीवर जाम रहता है. महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर जल निगम ने इसका सर्वे कराया था.

वहीं नगर निगम के इस प्रयास से पब्लिक बेहद खुश है. बनारस के पुराने माहौल के लोगों का कहना है कि अंग्रेजी हुकूमत के बाद से यह समस्या लगातार बनी हुई थी, आबादी बहुत बढ़ गई है और सीवर पाइप लाइन बहुत छोटी है, लेकिन अब नई पाइप लाइन बिछने के बाद कम से कम पक्के मोहल्ले में यह समस्याएं खत्म होंगी. सीवर ओवरफ्लो और बारिश के दिनों में जल जमाव की समस्या से छुटकारा मिलेगा.

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