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111वें ऐतिहासिक स्थापना दिवस पर गुरुकुल मटिण्डू के हवन यज्ञ का आयोजन।

खरखौदा/सोनीपत/सोमपाल सैनी - 7988804545, 8950236002

20 जनवरी को गुरुकुल मटिण्डू के 111 वें स्थापना दिवस पर गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरुकुल की स्थापना 20 जनवरी 1915 को चौ० पीरू सिंह द्वारा गांव मटिण्डू में की गई। इस पुण्य कार्य में उनके भाई शिवकरण की महत्वपूर्ण भूमिका एवं अन्य ग्रामवासियों का भी योगदान रहा।

इस प्रतिष्ठित संस्था की नींव प्रसिद्ध समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी एवं आर्य समाज के महान विचारक स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा रखी गई थी। शिक्षा के क्षेत्र में गुरूकुल मटिण्डू का योगदान सदैव उल्लेखनीय रहा है और यह संस्था संस्कारित, राष्ट्रभक्त तथा चरित्रवान नागरिकों के निर्माण में निरंतर अग्रसर रही है।

कार्यक्रम की शुरूआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत हवन द्वारा की गई। इस अवसर पर बताया गया कि वर्ष 1939 में यहां के 19 विद्यार्थियों ने हैदराबाद आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेकर देशभक्ति का परिचय दिया था, जो गुरूकुल मटिडू की सर्वोपरि राष्ट्रसेवा की परंपरा को दर्शाता है।

मुख्यअतिथि पदम सिंह दहिया (पूर्व विधायक) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि गुरूकुल मटिण्डू जैसी उच्च शिक्षण संस्थाएं केवल शिक्षा प्रदान नही करती, बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण की भावना को भी विकसित करती है। उन्होने गुरूकुल की स्थापना को न केवल हरियाणा राज्य में, बल्कि पूर्ण भारत के शिक्षा इतिहास में एक मजबूत मील का पत्थर बताया। स्कूल के विद्यार्थियों ने चौ. पीरू सिंह के जीवन की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए उनके त्याग, तपस्या, बलिदान और समाज सेवा को भी स्मरण किया गया।

संस्था के चेयरमैन ब्रिगेडियर सत्यदेव ने अपने सम्बोधन में चौ. पीरू सिंह के संघर्ष, साहस और बलिदान की भावना पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनकें पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

प्रधानाचार्या ज्योति मलिक ने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व और स्वतंत्रता सेनानी चौ. पीरू सिंह के आदर्शों तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझाते हुए जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय के पूर्व छात्र अंकित दहिया ने गुरूकुल और इसके संस्थापक चौ. पीरू सिंह के अतुलनीय कार्यों को समाज के लिए दिशा निर्देश बताया। कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति, संस्कार और शिक्षा के प्रेरक संदेश के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

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