
ओशो महापरिनिर्वाण दिवस पर आचार्य श्री ओशो को प्रेम नमन व श्रद्धा सुमन
जगाधरी ( 19/01/26 ) , वर्ष 1990 माह जनवरी तारीख 19 , आज ही के दिन ओशो ने अपने शिष्यों समक्ष अपने प्राण त्यागे । संपूर्ण विश्व में ओशो शिष्य व उनके अनुयाई आज के दिन को ओशो महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। इस मौके पर वर्ष 1990 से ओशो के सानिध्य में रहे स्वामी चैतन्य रिक्तम (तरुण शर्मा ) ने आचार्य श्री रजनीश ओशो जी को नम आंखों से प्रेम नमन किया व श्रद्धा सुमन अर्पित किए और गुरु आचार्य श्री ओशो जी को याद करते हुए उनकी दी गई शिक्षाओं का बखान किया और अपने विचार सांझा करते हुए कहा कि ओशो ने संपूर्ण विश्व को ध्यान की विधियों के बारे में विस्तार से बताया उन विधियों का अभ्यास करवाया । ओशो ने ध्यान की विधियों के जरिए मानवता को जागरूक होने की कला सिखाई। मानव निर्मित सभी समस्याओं का समाधान केवल ध्यान बताया । ओशो के पास संपूर्ण विश्व से लाखों शिष्य पहुंचते थे और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास करते थे। संपूर्ण विश्व के कोने-कोने से आए उनके शिष्य दिन में एक बार कई विषयों पर ओशो से सवाल भी किया करते थे और ओशो उनके सभी सवालों का उत्तर बड़े रोचक व रहस्यमयी ढंग से बिना किसी रोकटोक कहानियों के माध्यम से दिया करते थे।
आचार्य ओशो ने अपने प्रवचनों में धर्म , राजनीति, समाज ,जात-पात, रंगभेद, नस्ल,गणित ,विज्ञान ,भूगोल और शरीर के सातों चक्रों का विज्ञान , रहस्यमय ब्रह्मांड और न जाने अन्य कितने ही विषयों पर अपने विचार प्रवचनों के माध्यम से शिष्यों व अन्य लोगों को दिए और संपूर्ण विश्व ने उनकी खूब सरहाना की। यही वजह थी कि ओशो के शब्द दुनिया की अधिकतम भाषाओं में उनके ग्रंथों में आज भी छपे पड़े हैं और लोगों को उनके मार्ग का दर्शक बनकर जागरूक करने में लगे हैं। संपूर्ण विश्व में आज के दिन ओशो के शिष्य ध्यान व सत्संग कर ओशो को याद करते हैं।