
धर्मगुरु, देंगे*एनीमिया से मुक्ति और टीका लगवाने का संदेश स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित की जागरूकता कार्यशाला
रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत आयरन के सेवन के प्रति जागरूकता एवं उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया । जिसमें विभिन्न धर्मगुरू, सोशल इन्फ्लूएंसर्स ,महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे । कार्यशाला में एनीमिया की कमी से होने वाले दुष्प्रभाव एवं एनीमिया रोकथाम की जानकारी दी गई।कार्यशाला में उपस्थित धर्मगुरुओं एवं सोशल इनफ्लुएंस को एनीमिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत दी जा रही निशुल्क सेवाओं के बारे में बताया गया। उपस्थित धर्म गुरुओं द्वारा एनीमिया की रोकथाम के लिए धार्मिक स्थलों और सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता का आश्वासन दिया गया। साथ ही टीका रोधी क्षेत्रों में टीका जागरूकता के लिए भी सहयोग दिया जाएगा। एनीमिया से बचाव के लिए 6 माह से 59 माह के बच्चों को आशा कार्यकर्ताओं द्वारा सप्ताह में दो बार 1 एम एक आयरन ड्रॉप का सेवन करवाया जाता है। इसी प्रकार 5 साल से 10 साल के बच्चों को गुलाबी गोली एवं 11 से 19 साल के किशोर वर्ग को आयरन की नीली गोली स्कूलों के माध्यम से प्रदान की जा रही है। गर्भवती महिलाओं व प्रसव पश्चात और 20 से 49 वर्ष की प्रजनन कालीन उम्र की महिलाओं को भी आयरन की गोलियों का सेवन करवाया जाता है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ रितेश रावत ने बताया कि कमजोरी आना, हाथ पैरों का सुन्न होना, सांस फूलना, चक्कर एवं बेहोशी आना, एकाग्रता में कमी, सर में भारीपन और दर्द एनीमिया के प्रमुख लक्षण हैं। बच्चों के जल्दी थक जाने क्या चिड़चिड़ापन होने का एक प्रमुख कारण एनीमिया है । आयरन की कमी होने पर थकान ,सांस का फूलना, हाथ पैरों का सुन्न होना, सिर में दर्द , बार-बार बीमार पड़ना जैसी समस्याएं होती हैं।आयरन युक्त पदार्थों का सेवन ना करना, पेट में कीड़े होना, मासिक रक्तस्राव ,आईएफए की खुराक ना लेने से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि आयरन की कमी को दूर करने के लिए टेस्ट, ट्रीट और टॉक की रणनीति अपनाई गई है। एनीमिया टेस्टिंग के लिए स्ट्रिप आधारित हिमोग्लोबीनोमीटर मशीन से जांच की जा रही है । इस प्रक्रिया में 1 मिनट से भी कम समय में खून में एचबी की मात्रा का पता चल जाता है । ये अभियान स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग द्वारा समन्वित रूप से कार्य किया जा रहा है । आयरन के सेवन से बच्चों के बीमार होने की दर में कमी आती है और स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी बेहतर होती है। गर्भावस्था के दौरान आईएफए गोली लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं फोलिक एसिड से मस्तिष्क की कार्य क्षमता बेहतर होती है।