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पंचायत सचिव के प्रभार को लेकर बीडीओ और पंचायती राज पदाधिकारी के पत्र बने चर्चा का विषय

एकंगरसराय(नालंदा)। एकंगरसराय प्रखंड कार्यालय में इन दिनों पदाधिकारियों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी खुलकर सामने आ रही है। हालात ऐसे हैं, कि पंचायत सचिव और मुखिया असमंजस में हैं ,कि आखिर किसके आदेश का पालन किया जाए। मामला पंचायत सचिव सुभाष राय के 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद उनके अधीन रही पंचायतों के प्रभार से जुड़ा है।
बताया जाता है कि सुभाष राय के पास नारायणपुर, अमनार खास, ओप एवं पारथू पंचायत का प्रभार था। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद पंचायत कार्य बाधित न हो, इस उद्देश्य से प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रियंका निधि ने पत्रांक 06/26.12.2025 के तहत तेल्हड़ा के पंचायत सचिव रविकांत कुमार गुप्ता को सुभाष राय के जिम्मे रहे सभी चार पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। इस आदेश की प्रतिलिपि जिला पंचायती राज पदाधिकारी नालंदा, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी एकंगरसराय, संबंधित पंचायत सचिव एवं संबंधित मुखिया को भी भेजी गई।
लेकिन मामला तब तूल पकड़ गया जब 30 दिसंबर 2025 को प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी कुमार गौरव द्वारा पत्रांक 344 के तहत सुभाष राय के अधीन रही पंचायतों का प्रभार तीन अलग-अलग पंचायत सचिवों में बांट दिया गया। इस पत्र के अनुसार ओप पंचायत का प्रभार विजय पासवान को, पारथू एवं नारायणपुर पंचायत का प्रभार राकेश कुमार बैठा को तथा अमनार खास पंचायत का प्रभार रविकांत कुमार गुप्ता को दिया गया। इस आदेश की प्रतिलिपि भी जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी, संबंधित पंचायत सचिव एवं मुखिया को भेजी गई।
एक ही विषय पर दो अलग-अलग तिथियों में दो पदाधिकारियों द्वारा भिन्न-भिन्न आदेश जारी किए जाने से प्रखंड कार्यालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो प्रखंड विकास पदाधिकारी और पंचायती राज पदाधिकारी के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण अंदरखाने विवाद पनप रहा है, मुद्दा ऐसा है , कि उसका जिक्र यहां नहीं किया जा सकता है,क्योंकि इसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है।
सबसे अधिक परेशानी उन पंचायत सचिवों को हो रही है जिन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे किसका आदेश मानें—प्रखंड विकास पदाधिकारी का या प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी का। इस संबंध में जब पंचायती राज पदाधिकारी कुमार गौरव से सवाल किया गया तो उन्होंने विवाद की बात से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें बीडीओ द्वारा जारी पत्र की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने अलग से आदेश जारी कर दिया।
हालांकि 26 दिसंबर को जारी बीडीओ के पत्र की प्रतिलिपि पंचायती राज पदाधिकारी को भी भेजी गई थी, ऐसे में जानकारी न होने की दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है। अब सवाल यह है कि जिले को भेजी गई दोनों अनुशंसाओं में से किसे मान्य माना जाएगा या जिला स्तर पर कोई नया निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल इतना तो साफ है कि एकंगरसराय प्रखंड कार्यालय में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, लेकिन बदनामी के डर से पदाधिकारी खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

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