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शामली में वक्फ बोर्ड पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल शामली। की लेटेस्ट खबर

शामली में वक्फ बोर्ड पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
शामली।
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही हो, लेकिन जनपद शामली में सामने आया एक मामला इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि शामली में वक्फ बोर्ड द्वारा करीब 16 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर न सिर्फ निर्माण कराया गया, बल्कि दुकानों और भवनों को किराए पर देकर लाखों रुपये प्रति माह की कमाई की जा रही है।
16 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप
मामला शामली सदर कोतवाली क्षेत्र के सिटी स्थित तैमूर शाह कॉलोनी से जुड़ा है। कॉलोनी निवासी हारून ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि दिल्ली रोड स्थित यह कॉलोनी सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि पर विकसित की गई है। इसके बावजूद वर्षों से यहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
शिकायत पर जांच सौंपी, लेकिन कार्रवाई शून्य
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच एसडीएम शामली को सौंपी थी, लेकिन दो हफ्ते से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को लेकर उदासीन रवैया अपनाए हुए है।
संभल में बुलडोजर, शामली में सन्नाटा क्यों?
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शामली से सटे संभल जनपद में हाल ही में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब संभल में तुरंत कार्रवाई हो सकती है, तो शामली में वक्फ बोर्ड पर लगे आरोपों पर अब तक सख्ती क्यों नहीं?
जमीन की कीमत करीब 200 करोड़ रुपये
शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस भूमि पर कब्जे का आरोप है, उसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर कथित अवैध कब्जा और उससे हो रही आर्थिक कमाई प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासनिक लापरवाही या दबाव?
मामले में कार्रवाई न होने से लोग प्रशासनिक लापरवाही या किसी तरह के दबाव की आशंका जता रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शामली में भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर बुलडोजर चलेगा, या यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
रिपोर्टर
सुमित कुमारउपाध्याय

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