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भाजपा के दबाव में नियम–कानून ताक पर रखने की कोशिश, कांग्रेस पार्टी की इलेक्शन कमीशन को आपत्ति दर्ज ,अवैध Adhoc Body मीटिंग स्थगित, लोकतंत्र की जीत

यमुनानगर/अंबाला, दिनांक : 02.01.2026:
नगर निगम अंबाला में वार्ड परिसीमन एवं आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर भाजपा एवं प्रशासन की मिलीभगत एक बार फिर उजागर हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि Final Ward Delimitation Notification को सार्वजनिक किए बिना ही, भाजपा के दबाव में प्रशासन ने 31 दिसंबर 2025 को Adhoc Body की एक अवैध बैठक बुलाने का प्रयास किया, जो पूरी तरह नियमों और कानून के विरुद्ध था। कांग्रेस द्वारा समय रहते कानूनी व तकनीकी आपत्तियाँ दर्ज कराए जाने के बाद प्रशासन को यह बैठक स्थगित करनी पड़ी।

श्री वरुण चौधरी, सांसद का बयान,“नगर निगम अंबाला में जो कुछ हो रहा है, वह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। Final ward Delimitation Notification के बिना आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जनता के अधिकारों के साथ भी धोखा है।
भाजपा सरकार हरियाणा में चुनावी संस्थाओं पर दबाव डालकर मनमानी करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी इस साजिश को सफल नहीं होने देगी। यह मुद्दा संसद से लेकर न्यायालय तक उठाया जाएगा।
आने वाली सुनवाई में माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष इन अवैध कृत्यों का जवाब केवल प्रशासन को देना होगा ”

श्री निर्मल सिंह, विधायक अंबाला शहर का बयान,“अंबाला में भाजपा की हड़बड़ी और डर साफ दिखाई दे रहा है। उन्हें पता है कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में यह मामला गंभीरता से विचाराधीन है, इसलिए नियमों को दरकिनार कर जल्दबाज़ी में अवैध बैठक करवाई जा रही थी।
कांग्रेस पार्टी चेतावनी देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि प्रशासन ने फिर से 7 दिन का नोटिस दिए बिना बैठक कराने की कोशिश की, तो यह लोकतंत्र के खिलाफ सीधी चुनौती होगी और उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।”

श्री पवन अग्रवाल, जिला अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी अंबाला शहर का बयान,“अंबाला प्रशासन भाजपा के इशारे पर लोकतंत्र की खुलेआम हत्या करने पर उतारू है। कांग्रेस पार्टी ने लिखित रिप्रेजेंटेशन देकर हर नियम और कानून स्पष्ट कर दिया था, इसके बावजूद अवैध बैठक बुलाने की कोशिश की गई। यह साबित करता है कि भाजपा चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है।
कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करती है कि यदि 7 दिन का वैध नोटिस दिए बिना दोबारा कोई बैठक बुलाई गई, तो उसे अवैध मानते हुए सड़कों से लेकर न्यायालय तक कड़ा संघर्ष किया जाएगा।”

श्री मिथुन वर्मा, एडवोकेट एवं निगम सदस्य/पार्षद का बयान ,“यह पूरी प्रक्रिया भाजपा के दबाव में नियमों, कानूनों और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का प्रयास थी। Final Ward Delimitation Notification बाद में 29 दिसंबर की श्याम को सार्वजनिक की गई, और एडहॉक बॉडी की मीटिंग के पत्र को 24 दिसंबर को नोटीफिकेशन सार्वजनिक होने से पहले ही वार्ड आरक्षण की बैठक घोषित कर दी गई, जो कानूनन शुरू से ही अवैध मीटिंग थी।
31 दिसंबर की बैठक में भाजपा मेयर प्रतिनिधि तो पहुँचे, लेकिन पूर्व विधायक समर्थित पार्षद, जिन्हें Adhoc Body का सदस्य बनाया गया है, वे नहीं पहुँचे। इससे भाजपा की अंदरूनी गुटबाज़ी भी साफ सामने आ गई। दबाव की स्थिति ऐसी थी कि अधिकारी तक बैठक में नहीं पहुँचे।
जब मैंने इस अवैध बैठक के विरुद्ध State Election Commission और Chief Election Commission को तकनीकी शिकायत भेजी, तब प्रशासन और भाजपा को मजबूरन बैठक स्थगित करनी पड़ी।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि Haryana Municipal Corporation Delimitation of Wards Rules, 1994 के Rule 6(1) के तहत Adhoc Body की बैठक से पहले कम से कम 7 दिन का नोटिस सभी सदस्यों को देना अनिवार्य है। बिना 7 दिन का नोटिस दिए बुलाई गई कोई भी बैठक अवैध मानी जाएगी।अब यह मीटिंग टेक्नीकली 7 दिनों के बाद ही करी जा सकती है तो इस स्थिति में उपरोक्त adhoc body की मीटिंग 7 दिनों के बाद ही होनी चाहिए। उससे पहले मीटिंग होती है तो वह अवैध मानी जाएगी। और आने वाले दिनों में जब माननीय उच्चन्यालय में याचिका की तारीख आएगी तब ये सब जवाब प्रशासन को देने होंगे। वहां पर पिछले ओर अगर समय से पूर्व मीटिंग करवाई गई तो सभी अवैध मीटिंग को बुलाने का जवाब केवल प्रशासन को देना होगा उनका जवाब देने कोई भाजपा का नेता नहीं आएगा। देखने वाली बात अब यह रहेगी कि क्या इतना सब जनता के बीच में पता लगाने के बाद भी, ओर सारे कानून और रूल विपक्ष के द्वारा प्रशासन को रिप्रेजेंटेशन के माध्यम से दिए जाने के बाद भी, क्या प्रशासन आंखे बंद करके, लोकतंत्र की सरेआम हत्या करके, भाजपा के दबाव में फिर भी 7 दिनों का एडहॉक बॉडी को नोटिस दिए बिना ही समय से पहले मीटिंग करवाएगा या नहीं ?

*कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांगें:*
1. Final Ward Delimitation Notification एवं वार्ड-वाइज कुल जनसंख्या एवं जनसंख्या (SC, BC-A, BC-B) तुरंत सार्वजनिक की जाए।

2. Rule 6(1) के अनुसार 7 दिन का वैध नोटिस दिए बिना कोई भी Adhoc Body बैठक न बुलाई जाए।

3. माननीय उच्च न्यायालय के आगामी आदेशों तक परिसीमन एवं आरक्षण की पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

4. adhoc body में कांग्रेस पार्टी एवं बीसी जनप्रतिनिधि को लेकर चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से करवाया जाए।

*कांग्रेस पार्टी यह सवाल जनता के सामने रखती है कि —*
क्या सब कुछ उजागर हो जाने के बाद भी प्रशासन भाजपा के दबाव में आँखें बंद कर लोकतंत्र की हत्या करेगा, या फिर कानून और संविधान के अनुसार कार्य करेगा?
कांग्रेस पार्टी हर स्तर पर इस अवैध प्रक्रिया का विरोध जारी रखेगी।

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