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युवा एनर्जी ड्रिंक्स से स्वास्थ्य संबंधी खतरों को जानते हुए भी एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करते रहते हैं

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भले ही अधिकांश युवा एनर्जी ड्रिंक्स के खतरों के बारे में जानते हैं, फिर भी वे इनका नियमित रूप से सेवन करते रहते हैं। कई छात्र थकान दूर करने, पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित रखने या जिम में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए इन ड्रिंक्स का इस्तेमाल करते हैं। शोध में पाया गया कि मार्केटिंग की अहम भूमिका है, जो एनर्जी ड्रिंक्स को शक्ति और सतर्कता के प्रतीक के रूप में बढ़ावा देती है, जबकि हृदय पर दबाव, नींद की समस्या या लत जैसे इनके नकारात्मक प्रभावों का ज़िक्र बहुत कम करती है। दिलचस्प बात यह है कि अध्ययन से पता चला कि मेडिकल या स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्रों से बाहर के छात्र, पुरुष, अविवाहित व्यक्ति और सक्रिय जीवनशैली वाले लोग एनर्जी ड्रिंक्स का अधिक सेवन करते हैं। यहां तक ​​कि जो छात्र इसके खतरों को पूरी तरह समझते हैं, वे भी तनाव या थकान की स्थिति में इनका सेवन करते हैं। इससे पता चलता है कि जीवनशैली के दबाव और सामाजिक प्रभावों के चलते सिर्फ जागरूकता से व्यवहार में बदलाव नहीं आता। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि युवाओं को सिर्फ खतरों के बारे में शिक्षित करना पर्याप्त नहीं है। वे सख्त मार्केटिंग नियमों, नाबालिगों को बिक्री सीमित करने और कैंपस में एनर्जी ड्रिंक्स की उपलब्धता कम करने की सलाह देते हैं। इन बदलावों को तनाव प्रबंधन कार्यक्रमों और स्वस्थ पेय विकल्पों के साथ मिलाकर युवाओं में इनके अत्यधिक सेवन को कम करने में मदद मिल सकती है।

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