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आपकी प्रॉपर्टी के बढ़ने वाले हैं रेट, दिल्‍ली-हरियाणा के बीच आ रहे ये 2 बड़े प्रोजेक्‍ट... 65,000 करोड़ रुपये होंगे खर्च

दिल्‍ली से हरियाणा के बीच सफर को रफ्तार मिलने वाली है, साथ ही प्रॉपर्टी रेट्स को भी. सबसे ज्‍यादा फायदा गुड़गांव, रेवाड़ी, सोनीपत, पानीपत और करनाल को इस बीच आने वाली जगहों को होगा वजह खास जो है। दरअसल, दोनों राज्‍यों को जोड़ने वाले दो नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को केंद्र के इंटर मिनिस्‍ट्रीयल पैनल पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंजूरी जो मिल गई है। इन परियोजनाओं को पूरा करने में करीब 65,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

पिछले हफ्ते प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने दिल्ली एनसीआर में रैपिड रेल परियोजनाओं को लेकर एक अहम मंजूरी दी है। यह फैसला लंबे समय से अटके प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ करता है, जो केंद्र और दिल्ली की पिछली आप सरकार के बीच वित्तीय विवादों के चलते रुके हुए थे। यह अनुमोदन न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगा, बल्कि एनसीआर में यात्रा के समय को भी काफी कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, सराय काले खां–बावल आरआरटीएस कॉरिडोर 93 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर 32,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।सराय काले खां–करनाल कॉरिडोर (सोनीपत, पानीपत होते हुए) 136 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 33,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय व्यय सचिव की अध्यक्षता वाले पैनल ने सुझाव दिया है कि दिल्ली और हरियाणा सरकारें वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग (VCF) मॉडल अपनाएं. इस मॉडल के तहत सरकारें सार्वजनिक परियोजनाओं से बढ़ी भूमि मूल्य वृद्धि से राजस्व अर्जित कर परियोजनाओं का वित्तपोषण कर सकेंगी।


यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर मानेसर और बावल जैसे औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरेगा।पहले चरण में दिल्ली से एसएनबी अर्बन कॉम्प्लेक्स (बावल के निकट) तक लगभग 107 किमी का मार्ग तय किया जाएगा, जिसमें 16 स्टेशन प्रस्तावित हैं। पूरा मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-8 के समानांतर चलेगा और दक्षिण दिशा में विस्तार के बाद कुल 22 स्टेशन तक बढ़ाया जाएगा। यह कॉरिडोर भी सराय काले खां से शुरू होकर सोनीपत और पानीपत से गुजरते हुए करनाल तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 136.3 किमी है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है।


केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों को Transit Oriented Development- TOD अपनाने की सलाह दी है। यह मॉडल परिवहन केंद्रों के आसपास योजनाबद्ध और सघन शहरी विकास को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही राज्यों को अर्बन मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (UMTA) स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है। आवास मंत्रालय वर्तमान में TOD नीति में संशोधन कर रहा है, ताकि परिवहन गलियारों के साथ शहरी विकास का बेहतर एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

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