गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर हिंदू श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने से रोकना सिख सिद्धांतों और साझा आध्यात्मिक विरासत का अपमान : जोगिंदर सिंह
■ पाकिस्तान का यह धार्मिक भेदभाव सिख–हिंदू एकता पर सीधा प्रहार है: डॉ. सलारिया
पठानकोट, 5 नवंबर:
अंतरराष्ट्रीय संस्था पीसीटी ह्यूमैनिटी के संस्थापक डॉ. जोगिंदर सिंह सलारिया ने पाकिस्तान द्वारा गुरु नानक देव जी महाराज के 556वें प्रकाश पर्व के अवसर पर सिख श्रद्धालुओं के साथ यात्रा कर रहे हिंदू तीर्थयात्रियों को प्रवेश से वंचित करने की कड़ी निंदा की है। डॉ. सलारिया ने कहा कि वाघा बॉर्डर पर हिंदू श्रद्धालुओं को सिख यात्रियों के साथ सीमा पार करने से रोकना न केवल धार्मिक भेदभाव का मामला है, बल्कि मौलिक मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। उन्होंने बताया कि जिन हिंदू श्रद्धालुओं के पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से धर्म का उल्लेख था और जिन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों ने वैध वीजा जारी किया था, उन्हें अंतिम क्षण में बॉर्डर पर रोक दिया गया जो कि शर्मनाक और भेदभावपूर्ण कृत्य है।
डॉ. सलारिया ने कहा, “यह घटना केवल कुछ हिंदू श्रद्धालुओं का अपमान नहीं है, बल्कि यह सिख और हिंदू समुदायों के बीच गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर प्रहार करने की एक सुनियोजित कोशिश है।” उन्होंने आगे कहा कि इन हिंदू श्रद्धालुओं का एकमात्र उद्देश्य गुरु नानक देव जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति था, और पाकिस्तान का यह कदम इस्लामाबाद की राजनीतिक चाल को उजागर करता है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आए उसके सांप्रदायिक एजेंडे को और स्पष्ट करता है। डॉ. सलारिया ने जोर देकर कहा कि गुरु नानक देव जी किसी एक धर्म या समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के गुरु हैं। गुरु नानक साहिब के अमर संदेश “मानवता को एक मानो” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक पक्षपात या भेदभाव का कोई भी रूप गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और मर्यादा के विपरीत है। उन्होंने कहा, “हिंदू श्रद्धालु गुरु नानक साहिब के प्रति वही श्रद्धा और प्रेम रखते हैं, जो सिख समुदाय रखता है। पाकिस्तान सिख और हिंदू समुदायों के बीच की इस अनंत एकता और भाईचारे को कमजोर नहीं कर सकता।” जोगिंदर सिंह सलारिया ने भारत सरकार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय से इस मामले का गंभीर संज्ञान लेने और पाकिस्तान के धार्मिक असहिष्णुता और भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ कड़े राजनयिक कदम उठाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में करतारपुर कॉरिडोर यात्रा या अन्य सिख धार्मिक अवसरों पर ऐसी भेदभावपूर्ण घटनाएं दोहराई गईं, तो यह पाकिस्तान के बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद और विभाजनकारी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण होगा। अंत में अंतरराष्ट्रीय संस्था पीसीटी ह्यूमैनिटी के संस्थापक जोगिंदर सिंह सलारिया ने कहा “गुरु नानक देव जी के पवित्र प्रकाश पर्व पर हिंदू श्रद्धालुओं को नमन करने से रोकना केवल हिंदुओं के साथ अन्याय नहीं, बल्कि सिख धर्म की सार्वभौमिक शिक्षाओं और मानव एकता की भावना का अपमान है।”
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