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वाराणसी में मठाधिपति पूर्णगुरु करौली शंकर महादेव का त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ

काशी की पावन धरा जो साक्षात शिव एवं मोक्ष के लिए जानी जाती है।ऐसी पवित्र धरा पर पहुंचना और वहां की ऊर्जा में भजन कीर्तन व साधना करना वास्तव में एक अद्भुत अनुभव होता है।पूर्ण गुरू करौली शंकर महादेव के सानिध्य में दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल,काशी में मिश्री मठ,हरिद्वार के तृतीय मठाधिपति पूर्णगुरु करौली शंकर महादेव के सानिध्य में भव्य त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।आयोजन के प्रथम दिवस भगवान शिव व बाबा मां के समक्ष दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। महोत्सव के प्रथम दिवस पर भजन-संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया।भजन-संगीत कार्यक्रम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग से आए कलाकारों,भजन गायकों ने पूर्ण गुरू करौली शंकर महादेव जी के समक्ष सुंदर-सुंदर भजन प्रस्तुत किए...वहीं कार्यक्रम स्थल में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे जो मनमोहक भजनों का आनंद लेते दिखे।चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के कारण इस दिन सामूहिक हवन,अनुष्ठान प्रतिबंधित रहा।भजन -कीर्तन के साथ ध्यान साधना का आयोजन भी किया गया।बता दे की महोत्सव 7 सितंबर से 9 सितंबर को आयोजित हो रहा है।जिसमें देश विदेश से 50,000 से अधिक तंत्र क्रिया योग के दीक्षित साधक सम्मिलित हो रहें है।सभी साधक पूर्णगुरु के सानिध्य में तंत्र साधना,ध्यान एवं तंत्र के विभिन्न चरणों के चयन में भाग लेंगे और लगभग 10000 नए भक्त मंत्र दीक्षा भी प्राप्त करेंगे।साथ ही प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु Naturewithbalance कार्यक्रम के अंतर्गत काशी मंडल में एक वर्ष में एक लाख पौधे लगाने का संकल्प भी पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव द्वारा भक्तों को दिलाया जा रहा है।इस दौरान पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी भक्तों का स्वागत अभिनंदन किया। उन्होंने सभी भक्तों से कहा कि काशी नगरी के कण - कण को प्रणाम करके इन तीन दिवसों में अपने जीवन को सफल बनाइये।उन्होंने कहा कि काशी के बारे में हमारे महापुरुषों के अनुभव ग्रंथो/ पुस्तकों में नहीं समा सकते। अनुभव हमारा ज्ञान है,अनुभव उतर सकता है हृदय में लेकिन अनुभव किताब में नहीं लिखा जा सकता।यह काशी नगरी अनुभव करने वाले लोगों के लिए है।बिना अनुभव करने वाले लोगों के लिए काशी बिल्कुल नहीं है। काशी में रहकर अगर अनुभव नहीं हुआ तो इस धरती का कोई भी स्थान आपके लिए नहीं है जहां पर आपको अनुभव हो सके।उन्होंने कहा कि हम सभी परम सौभाग्यशाली है कि हम सभी 3 दिन के लिए काशी विश्वनाथ जी की शरण में है।आपकी मुक्ति के लिए एक क्षण काफी है लेकिन आपको यहां तीन दिन मिल रहे हैं। हमेशा ध्यान रखो मुक्ति के लिए एक क्षण ही काफी होता है और आपको दरबार ने तीन दिवस दिए आप इसका पूरा उपयोग करना और पूरी ध्यान साधना इस दरबार में रहकर करना। जिससे आपको अति इंद्रिय अनुभव यहां होने वाले हैं।पूर्ण चंद्र ग्रहण को लेकर उन्होंने कहाँ की जो साधना में आगे बढ़ना चाहते हैं उसके लिए यह चंद्र ग्रहण बहुत महत्वपूर्ण है।हमारे अंदर कोई भी नकारात्मकता न आए इसीलिए हमारे पूर्वजों ने सूतक काल से ही भोजन को न करने के लिए मना किया और इस काल में ध्यान भजन को प्राथमिकता दी गई। जब हम ऐसा करते हैं तो नकारात्मकता से दूर हो जाते हैं।और इस चंद्र ग्रहण से अगले चंद्र ग्रहण तक तमाम नकारात्मकताओं से उनकी स्मृतियों से मुक्ति पा लेते हैं।

नारी सम्मान को लेकर पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव द्वारा महा आंदोलन की गई शुरुआत


नारियों के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने वाले कथा वाचकों पर पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव ने कहा ऐसे कथा वाचकों का बहिष्कार करना चाहिए।जो नारियों का सम्मान न कर पाए वह कथा वाचक हो ही नहीं सकता।उन्होंने तमाम नारी शक्ति से आग्रह किया कि ऐसे कथावाचकों से दूर रहे और सतर्क रहें जो नारी जाति का सम्मान न कर सके।उन्होंने कहा की माताओं बहनों के नाम पर कुचक्र चलाना बंद करें,क्षमा मांगे...ध्यान रखना ये मुद्दा सिर्फ कोई भाषण तक सीमीत नहीं है,ये मुद्दा सिर्फ मीडिया चैनल या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है,दरबार इस मुद्दे को अंत तक लेकर जाएगा।

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