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सांग पुरोधाओं में शुमार रहे निहालचंद 'निहाल' भावपक्ष व शिल्पपक्ष की दृष्टि से निहालचंद 'निहाल' का काव्य बेजोड़ है। भारतीय संस्कृति के उदात्त जीवन मूल्य, अध्यात्म, गुरुभक्ति, समाज-सुधार, नीति, नारी-सम्मान, देशभक्ति, युगबोध का चित्रण पग-पग पर अवलोकनीय रहा है।

हमारे बुजुर्ग हमारी संस्कृति के सशक्त स्तंभ हैं। जो पीढ़ी अपने संस्कृति के इन स्तंभों को विस्मृत कर देती है, वह अपने कर्तव्य पालन से चूक जाती है। किंतु जाने-माने साहित्यकार दिनेशशर्मा 'दिनेश' ने सांग-पुरोधा श्री निहालचंद 'निहाल' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को उजागर करके निश्चय ही अपने कर्तव्य बोध का परिचय दिया है। आज प्रातः ही जनप्रिय समाचार-पत्र हरिभूमि में प्रकाशित श्री दिनेश शर्मा 'दिनेश' की कलम से निसृत आलेख को देखकर असीम प्रसन्नता हुई। श्रद्धेय पितामह निहालचंद 'निहाल' के व्यक्तित्व और कृतित्व को उजागर करता *सांग पुराधाओं में शुमार रहे निहालचंद 'निहाल'* नामक शानदार आलेख देखकर मन प्रसन्न हो गया। इस सुकृत के लिए मैं लेखक एवं संपादक दोनों का हृदयतल की गहराइयों से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।


प्रिंसिपल श्री रामबीर सिंह ‘राम’
ब्रह्मशक्ति सी. सै. स्कूल,
थाना कलां, खरखौदा (सोनीपत)

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