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पारंपरिक दियो का सज बाज़ार।

रांची। रांची में धनतेरस व दिवाली की तैयारी जोरों पर है। इस बार बाजार तरह-तरह डिजाइनर मिट्टी के दीये, घरकुंदा, लाइट व सजावट के सामान से भरे पड़े है। झारखंड के कुम्हारों ने अपने हाथों से रंग-बिरंगे दीये बनाए हैं। घरकुंदा लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। वहीं दीये, ग्वालिन, हाथी-घोड़ा भी अपना अलग रंग बिखेर रहे हैं। दिवाली पर पारंपरिक दीये लोगों को लुभा रहे हैं। कलश वाले दीये, महलनुमा डीजाइन वाले दीये, बालकनी की सजावट वाले दीये, मंदिर का डिजाइन की डिमांड अधिक है। दीपावली पर लोग दीये जलाकर धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। बोकारो जिले के चंदनकियारी के प्रकाश कुंभार दिवाली पर पिछले 15 वर्षों से घरकुंदा बनाते आ रहे हैँ। यह परिवार 150 किलोमीटर दूर से राजधानी रांची पहुंचे है। बापू वाटिका के सामने इनलोगों ने दिवाली के सजावटी समान व दीयों के स्टॉल लगा रखा है। प्रकाश कुंभार ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी धंधा है। वह स्वरोजगार के जरिए अपने पुरखों की परंपरा को बनाए रखे हैं। रांची में उन्होंने पहली बार दीपावली पर अपना स्टॉल लगाया है। उनके स्टॉल पर हाथ से बना मिट्टी के गार्डन आइटम्स उपलब्ध हैं। इनमें डाइनिंग रूम सजाने वाले फ्लावर पॉट,गार्डन मे लगने वाले फाउंटेन आदि शामिल हैं। जो लोगो कि काफी पसंद आ रही है।साथ ही यह पर्यावरण के अनुरूप है।

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