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Santosh Kumar
(Journalist)

रांची। अभी राज्य में कोरोना संक्रमण के जारी खतरे के बीच सभी तरह के स्कूलों को बंद रखा गया है।  वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने स्कूलों को खोले जाने की वकालत की है। लोअर चुटिया में एचएम पब्लिक स्कूल में मेगा रक्तदान सह निःशुल्क नेत्र जांच शिविर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में वैज्ञानिक आधार पर स्कूलों को खोलने पर निर्णय होना चाहिए। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि बच्चों की पढ़ाई बर्बाद न हो। विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा ही होती है। वे इस बात के पक्षधर हैं कि उचित समय देख कर स्कूलों को खोलने पर निर्णय लिया जाये।  मौके पर पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे सहित अन्य भी उपस्थित थे।रामेश्वर उरांव ने कहा कि निजी स्कूलों की आलोचना किया जाना ठीक नहीं है। आज देशभर के निजी स्कूलों में लाखों-करोड़ों बच्चों को शिक्षा मिल रही है। लाखों लोगों को रोजगार भी मिला है। लोग अपने बच्चे को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं पर सरकारी स्कूलों में क्या कमियां हैं, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। कमियां दूर होंगी तो लोग खुद ही सरकारी स्कूलों में ही अपने बच्चों को पढ़ाना चाहेंगे।रामेश्वर उरांव ने जानकारी देते हुए कहा कि गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवार को 26 जनवरी से पेट्रोल पर प्रति लीटर 25 रुपये की छूट देने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। इसके लिए एप्प बनाया जा रहा है। समय रहते सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जायेंगी। सरकार राजस्व संसाधनों में बढ़ोतरी पर ध्यान दे रही है। राज्य में कहीं कोई बड़ी घटना होती है तो सवाल उठते हैं।पुलिस-प्रशासन विधि व्यवस्था को बनाये रखने और किसी घटना के घटित होने की स्थिति पर आरोपियों को तुरंत पकड़ कर अदालत के माध्यम से पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने का काम करता है। मौके पर आलोक कुमार दुबे ने कहा कि वित्त मंत्री निजी स्कूलों के संचालकों की परेशानियों को अच्छी तरह से समझते हैं। पासवा सरकार से यह मांग करती है कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल के संचालन की अनुमति दी जाये।वर्ल्ड बैंक के वैज्ञानिकों द्वारा स्कूल खोलने पर सहमति दिये जाने के आधार पर 19 जनवरी को देशभर में पासवा द्वारा मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजा जायेगा।

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रांची। कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में भारतीय कराटे टीम का पहले दिन दो स्वर्ण पदक के साथ खाता खुला। भारतीय टीम में शामिल रांची (झारखंड) की 10 वर्षीय अंजलि कुमारी ने अपने दोनों स्पर्धाओं में 2 मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया। पहले दिन अंजलि के अलावे झारखंड की अन्य महिला खिलाड़ियों ने भी उम्दा प्रदर्शन दिखाया। देवंती कुमारी ने काता में स्वर्ण पदक जीता वहीं कूमिते में प्रियंका हेंब्रम को रजत पदक मिला।आज कुल आठ पदक भारतीय टीम के खाते में आये। सभी विजेता खिलाड़ियों को विश्व कराटे संघ के जज हानशी प्रेमजीत सेन ने पदक देकर सम्मानित किया। झारखंड के सभी विजेता खिलाड़ियों को झारखंड कराटे एसोसिएशन के महासचिव रेंसी सुनील किस्पोट्टा एवं इंटरनेशनल मार्शल आर्ट अकादमी के अध्यक्ष संसाइ अनिल किस्पोट्टा ने भी बधाई दी है।

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रांची। सिमडेगा के बेसरा जारा में 4 जनवरी को मॉब लिंचिंग में मारे गये संजू प्रधान के परिजनों को इंसाफ की मांग लिए प्रदेश भाजपा सोमवार को राजभवन पहुंची। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास, राष्ट्रीय मंत्री और रांची की महापौर आशा लकड़ा, प्रदेश महामंत्री बालमुकुन्द सहाय, एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विधायक अमर कुमार बाउरी ने राज्यपाल से संजू के परिजनों को राहत दिलाये जाने का आग्रह किया।हत्याकांड को बेहद निर्मम बताते हुए इसकी सीबीआइ जांच के अलावे परिजन को 10 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी तथा परिवार की सुरक्षा की मांग की। इसके लिए एक ज्ञापन भी सौंपा।राजभवन के बाहर बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा कि संजू प्रधान की हत्या बेहद जघन्य अपराध है। यह क्रूरतम घटना है। ठेठईटांगर और कोलेबिरा थाना पुलिस की उपस्थिति में संजू को घर से निकाल कर बुरी तरह पीटा गया। सैकड़ों ग्रामीणों ने लकड़ी की चिता सजा कर उस पर संजू को जला दिया। पत्नी और मां पुलिस के पैर पकड़ कर हवाई फायरिंग करने और संजू की जान बचाने की अपील करते रहे पर पुलिस ने एक्शन ही नहीं लिया।उल्टे सादे कागज पर संजू के परिजनों से साइन करा लिया। गोमांस बिक्री, गो हत्या का विरोध करने की कीमत संजू को चुकानी पड़ी। इस मामले में स्थानीय प्रशासन का रोल संदिग्ध है।तुष्टिकरण की राजनीति यहां भी दिखी। अब राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि इस मामले में संजू के परिजन को सहारा दिया जाये। मामले की गहराई से जांच हो।

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रांची। कोविड-19 से बचाव के लिए होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को दिये जानेवाले मुख्यमंत्री कोरोना राहत किट में एक्सपायरी दवा का मामला सामने आया है। इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी है। वहीं संज्ञान में लेते हुए उपायुक्त रांची ने त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी इसके लिए दोषी हैं, उस पर नियम संगत कार्रवाई की जायेगी।बताते चलें कि होम आइसोलेशन में एक मरीज को दी गयी किट में एक्सपायर दवा दे दी गयी थी।कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए होम आइसोलेशन में रहने की इजाजत दी गयी है। उन्हें इंसिडेंट कमांडर की निगरानी में कोरोना किट बांटे जा रहे हैं।दवा के अलावा किट में सैनिटाइजर और मास्क भी दिया गया।लेकिन किट में दी गयी एंटी एलर्जी की दवा लेवोसेल-एम 11 नवंबर 2021 को ही एक्सपायर हो चुकी थी। ये दवाएं मरीजों के हाथों में पहुंचीं तब इसका खुलासा हुआ।मेडिसिन किट में एक्सपायरी दवा के मामले में सदर अस्पताल प्रबंधन भी संबंधित पदाधिकारी पर कार्रवाई करेगा। प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कुछ किट पुराने थे, जिनमें लिवोसेम-एम नाम की दवा थी। ऐसे किट का वितरण होम आइसोलेटेड मरीजों को नहीं किया गया है। आज से जो किट होम आइसोलेटेड मरीजों को वितरित की गयी हैं उसमें यह दवाई नहीं है।भूलवश अगर दवा हो तो मरीज इसका सेवन न करें। एसडीओ बुंडू अजय कुमार ने कहा कि इस मामले में जांच कर दोषी पर कार्रवाई की जायेगी।

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रांची। पूर्व सीएम और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य में कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने का आरोप राज्य सरकार पर लगाया है। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य में नयी सरकार से लोगों को उम्मीदें थीं कि वह कुछ बेहतर करेगी। पर हालात बेहद भयावह होते जा रहे हैं। खासकर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर। जबसे राज्य में यूपीए गठबंधन की सरकार हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी है, लॉ एंड आर्डर बिगड़ता ही गया है। राज्य में उग्रवादी समानांतर सरकार चला रहे हैं। ऐसा लगता ही नहीं कि राज्य में हेमंत और पुलिस प्रशासन का राज है। सरकार माओवादियों के आगे बेबस, लाचार दिख रही। उसके सामने सरेंडर कर दिया है। चक्रधरपुर में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमला इसी का ताजा उदाहरण है।बाबूलाल ने कहा कि पूर्व विधायक के घर से महज एक-डेढ किमी की दूरी पर ही घटनास्थल था जहां माओवादियों ने हमला किया। 4 जनवरी को शाम 5.30-6.00 के बीच हुए इस हमले के दौरान दो जवानों की गला रेतकर नृशंस हत्या कर दी। एक को जख्मी कर दिया। इसके बाद 15 घंटे तक चक्रधरपुर, सोनुआ या आसपास की कोई और पुलिस भय से घटनास्थल पर नहीं पहुंची। अपने ही पुलिस जवान साथी का शव उठाने में पुलिस की पैंट गीली हो गयी. जानकारी मिलने पर वे 5 जनवरी को चक्रधरपुर के लिए निकले। हालांकि स्थानीय प्रशासन सहयोग करने के मुड में नहीं था। यही वजह रही कि उन्हें बीच रास्ते में रोका गया। उन्होंने प्रशासन से कहा कि दिन के उजाले में उन्हें घटनास्थल तक नहीं जाने देने से देशभर में झारखंड को लेकर गलत छवि बनेगी। इसके बाद दो घंटे के इंतजार के बाद डीसी ने एसपी से बात कर उन्हें गुरूचरण के पास उनके गांव जाने दिया। वहां भी पता लगा कि पिछले कुछ माह से माओवादी, नक्सली लगातार भय का माहौल बना रहे हैं। खुलेआम हथियार लेकर दिनदहाड़े सड़कों पर घुमते हैं। सिमडेगा में एक ग्रामीण की हत्या होने के 24 घंटे बाद भी एक की भी गिरफ्तारी नहीं होना सवाल है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह डरपोक पुलिस पदाधिकारियों की पोस्टिंग ऐसे इलाकों में ना करे। हेमंत सरकार भी बताए कि वे नक्सलियों, अपराधियों से घिरे हुए हैं या डरे हुए हैं।पंजाब में पीएम मोदी के काफिले के साथ हुई घटना पर बाबूलाल ने नाराजगी जतायी। इसमें पंजाब सरकार के साथ साथ समुची कांग्रेस को भी दोषी बताया। कहा कि पंजाब सरकार ने छोटा मोटा अपराध नहीं किया है। यह अक्षम्य है। राजनीति में विरोध का महत्व और स्थान है पर देश के पीएम के साथ इस तरह की हरकत कतई स्वीकार्य नहीं। पंजाब सरकार पूरे मामले में दोषियों की पहचान कर सजा दिलाए अन्यथा इसमें उसकी भी भागीदारी मानी जायेगी।

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रांची। प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन्स वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) के प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बुधवार को हुई बैठक में कहा गया कि 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के कोविड-19 टीकाकरण को सफल बनाना है, तो यह अभियान विद्यालय को खोले बगैर संभव नहीं होगा। पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे की अध्यक्षता में हुई पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बैठक में कोविड विरोधी टीकाकरण अभियान को सफल बनाते हुए सुन्दर झारखंड, स्वस्थ झारखंड व शिक्षित झारखंड के सपने को पूरा करने में सरकार को हरसंभव सहयोग करने पर भी चर्चा हुई। इस मौके पर पासवा के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल किशोरनाथ शाहदेव, अरविन्द कुमार, महासचिव डॉ राजेश गुप्ता छोटू भी उपस्थित थे।पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे ने बैठक में कहा कि संगठन राज्य में संचालित 47 हजार प्राइवेट स्कूलों की ओर से टीकाकरण अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जब स्कूली बच्चे शिक्षकों से प्रेरित होकर टीका लेंगे, तो कई भ्रांतियों के कारण या संक्रमण की गंभीरता को अनदेखी करनेवाले उनके अभिभावक भी टीका लेने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रारंभ से ही राज्य में टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों की बड़ी भूमिका रही है।आलोक कुमार दुबे ने कहा कि यह सही है कि देश में संक्रमण की तीसरी लहर और ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ा है, लेकिन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि 50 प्रतिशत की उपस्थिति के साथ क्या क्लास नहीं चलाया जा सकता है, या फिर जिस क्लास रूम में 15 बेंच है, उसमें सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए कक्षा नहीं शुरू की जा सकती है।उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य बिहार समेत कई राज्यों में कक्षा 6 से 12वीं क्लास के बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई चल रही है, इसलिए झारखंड सरकार को भी राहत देनी चाहिए। पासवा के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि नगर निगम निजी स्कूलों से 4 प्रकार का टैक्स वसूलती है, जिसमें कचरा टैक्स, होल्डिंग टैक्स, वाटर टैक्स और ट्रेड लाइसेंस टैक्स शामिल है।इसके अलावा प्राईवेट स्कूलों को भवन किराया, बस का ईएमआई और शिक्षकों-कर्मचारियों का वेतन समेत अन्य खर्च करना पड़ रहा है, ऐसे में पहली और दूसरी लहर में कई स्कूल बंद हो गये, अब यदि तीसरी लहर में भी ज्यादा दिन स्कूलों को बंद रखा जाये, तो इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।बैठक में प्रदेश पासवा के उपाध्यक्ष लाल किशोर नाथ शाहदेव, महासचिव डॉ राजेश गुप्ता छोटू, अरविन्द कुमार, बिपीन कुमार, निशा भगत, डॉ सुषमा केरकेट्टा, आलोक बिपीन टोप्पो, सिस्टर कल्याणी टेटे, सुचिता एक्का, विनीता पाठक नायक, संजय प्रसाद, मोजाहिद इस्लाम, रॉबर्ट कुमार, अंशुमन मिश्रा, संदीप कुमार राणा, उजाला महतो, श्रद्धांजलि चांद, उमेश प्रसाद मेहता, ज्ञानेश्वर दयाल, मो.मुमताज आलम, प्रवीण प्रकाश सिंह, आदित्य प्रसाद गुप्ता, अमीन अंसारी, मजीद आलम, रणधीर कुमार कौशिक, प्रमोद उपाध्याय, मनोज कुमार भट्ट, नीरज कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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रांची। कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर झारखंड में मिनी लॉकडाउन लगाया गया है। सभी तरह के शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया है। अब सारी शिक्षा व्यवस्था ऑनलाइन हो गयी। इस बीच सूबे के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। मुलाकात करने के पीछे वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई में गरीबों के बच्चों को काफी परेशानी होती है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले नौंवी कक्षा के ऊपर के सभी बच्चों को एक लैपटॉप दिया जाये।ताकि उनकी पढ़ाई पर असर नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि उन्हों पूरा भरोसा है कि सीएम उनकी बातों को मान लेंगे। जल्द ही इस विषय में शुभ सामाचार मिलेगा।

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रांची। राज्यभर में साइबर अपराधियों ने नाकों दम कर रखा है। अब प्रधानमंत्री मुद्रा लोन की आड़ में लोगों से लोन लिए जाने का प्रचार वे कर रहे हैं।  लोन के तहत 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख तक का लोन बिना गारंटी के मात्र 24 घंटे में दिये जाने का झांसा दिया जा रहा है। प्रॉपर्टी लोन, पर्सनल लोन, मार्कशीट एवं समस्त प्रकार के लोन वे बांटने की बात कह रहे। महिलाओं और छात्रों को 30 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक विशेष छूट दिये जाने का भी भरोसा दिलाया जा रहा है। इसके अलावा कंपनी के एजेंट बनने और कमाने के लिए दिये गये नंबरों से जुड़ने को कहा जा रहा है। 6262525171 और ऐसे ही अन्य नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है। हजारीबाग पुलिस ने लोगों से ऐसे विज्ञापनों से बचने की अपील की है। इसके फेरे में आने पर जमा पूंजी गंवाने का खतरा बताया है।हजारीबाग पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी कहा है कि राज्यभर में ऐसे पोस्टर देखे जा रहे हैं जिनमें लोगों से पीएम मुद्रा लोन लिए जाने और एजेंट बनने की बात कही जा रही है। हजारीबाग में भी ऐसे पोस्टर दिखे हैं। यह साइबर अपराधियों की एक चाल है। पुलिस अपने स्तर से इन शातिर अपराधियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने में लगी है। कोई भी नागरिक किसी भी स्थिति में ऐसे पोस्टर के आधार पर किसी से संपर्क ना करे। उन्हें आर्थिक तौर पर हानि उठानी पड़ सकती है।

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रांची। 3 जनवरी से शुरू होनेवाले 15-18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के कोविड-19 टीकाकरण को लेकर जिला प्रशासन रांची ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी मामले को लेकर शनिवार को शहरी क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों और उपप्राचार्यों के साथ जिला स्तर पर गठित वैक्सीनेशन सेल की बैठक हुई। बैठक के दौरान अपर समाहर्ता (नक्सल), रांची रामवृक्ष महतो, सामान्य शाखा प्रभारी संजय प्रसाद, डीआरसीएचओ शशि भूषण खलखो और डॉ अनूब ने स्कूलों के प्राचार्य और उप प्राचार्यों से टीकाकरण से संबंधित तैयारियों पर विचार-विमर्श करते हुए आवश्यक जानकारियां साझा की।बैठक में विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों और उप प्राचार्यों को 15-18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के कोविड-19 टीकाकरण की शुरुआत को लेकर अपर समाहर्ता (नक्सल) द्वारा विस्तृत जानकारी दी गयी। डीआरएसीएचओ शशि भूषण खलखो और डॉ अनूब ने सभी को टीकाकरण से संबंधित तकनीकी पहलुओं के बारे में जानकारी दी।साथ ही सभी को शीघ्र से शीघ्र स्कूलों में 15-18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के टीकाकरण का लक्ष्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।बैठक में सामान्य शाखा प्रभारी संजय प्रसाद ने स्कूलों के प्राचार्यों और उप प्राचार्यों से कहा कि 15-18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के शत प्रतिशत टीकाकरण को लेकर वो अपने स्तर से भी अभिभावकों और बच्चों को जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करें, विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप एवं अन्य माध्यम से उन्हें जानकारी दें।

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रांची। 29 दिसंबर को मोरहाबादी मैदान, रांची में राज्य सरकार की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें राज्यपाल रमेश बैस, सीएम हेमंत सोरेन सहित अन्य विशिष्ट और गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। इसी दौरान एक पोर्टल की महिला पत्रकार द्वारा कार्यक्रम में खाली कुर्सियां दिखाये जाने के मसले पर एक कांग्रेसी नेता ने आपत्ति जता दी। पत्रकार के साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। प्रदेश भाजपा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।सांसद और प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने गुरुवार को राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दलों से आग्रह किया कि महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार करनेवाले पर वाजिब एक्शन लिया जाये। कानूनी कार्रवाई हो। प्रदेश कांग्रेस भी इस पर कठोर कार्रवाई करे।दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य की महिला पत्रकार के साथ सरकार के वर्षगांठ कार्यक्रम की रिपोर्टिंग पर कांग्रेस के कार्यकर्ता ने दुर्व्यवहार किया। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करना, अभद्र भाषा का प्रयोग करना, ये सब कांग्रेस पार्टी के चाल चरित्र में शामिल है। इतिहास में ऐसे कृत्यों के अनेक उदारहरण भरे पड़े हैं। राज्य के सत्ताधारी दल अपनी घटती लोकप्रियता से घबरा चुके हैं। सच का सामना वे नहीं कर पा रहे। खाली कुर्सियों की रिपोर्टिंग में आखिर पत्रकार ने कौन सा गुनाह कर दिया था। 2 साल की विफल सरकार ने अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह खर्च किये।बड़े-बड़े झूठे विज्ञापन लगवाये परंतु वावजूद इसके जनता का विश्वास यह सरकार हासिल नहीं कर सकी। मुख्यमंत्री के भाषण के समय भी पंडाल में हजारों कुर्सियां खाली पड़ी थीं।सत्ताधारी दल ने अपने विरोध में बोलनेवालों के साथ दमन की नीति अपना ली है। ये अपनी गलतियों को सुधारने, झूठे वायदों पर पश्चाताप करने के बजाए विरोधियों को लाठी डंडों, केस मुकदमों और दुर्व्यवहारों से दबाना चाहते हैं। पहले तो ये सत्ता में बैठे लोग भाजपा सहित अन्य विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे थे परंतु अब इन लोगों ने पत्रकारों को भी निशाना बना लिया।

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रांची।  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) और नेशनल हेल्थ मिशन झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में सभी जिले से 2-2 योग शिक्षकों को योग सर्टिफिकेट कोर्स के तहत 29 दिसंबर को प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसे लेकर एनआइओएस के रिजनल डायरेक्टर डॉ राजीव प्रसाद ने सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि सभी जिले से 2-2 योग शिक्षकों को सभागार में प्रशिक्षण दिया जाना है। यह प्रशिक्षण डॉ राजीव प्रसाद के अलावा आशा के परामर्शी डॉ पीके चौहान, नितेश सिंह की टीम देगी।वहीं ओमिक्रोन के बढ़ते मामले को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार ने सभी आमजनों से अपील की है कि वे मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि भीड़ भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें।सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि वैक्सीनेशन की दोनों खुराक ले लें। जिससे कोरोना के संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सके।

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रांची। हिंदू धर्म में तुलसी पूजन की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत में आज यानी 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाई जाती है। इस प्रथा की शुरुआत साल 2014 से हुई और इस दौरान देश के कई केंद्रीय मंत्रियों और संतों ने तुलसी पूजा के महत्व का बखान सोशल मीडिया के द्वारा किया, तभी से 25 दिसंबर 2021 को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाने लगा।  हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए हिंदू धर्म के लोग तुलसी को माता का रूप मानकर उसकी पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं।  ऐसी मान्यता है कि जहां तुलसी फलती है, उस घर में रहने वालों को कोई संकट नहीं आते। स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद में तुलसी के अनेक गुण के बारे में बताया गया हैं। यह बात कम लोग जानते हैं कि तुलसी परिवार में आने वाले संकट के बारे में सुखकर पहले संकेत दे देती हैं। शास्त्रों में यह बात भली प्रकार से उल्लेख है कि अगर घर पर कोई संकट आने वाला है तो सबसे पहले उस घर से लक्ष्मी यानि तुलसी चली जाती है और वहां दरिद्रता का वास होने लगता है। तुलसी केवल एक पौधा ही नहीं है बल्कि धरा के लिए वरदान है। जिसके कारण इसे हिंदू धर्म में पूजनीय और औषधि तुल्य माना जाता है। तुलसी पूजन करने से न केवल चमत्कारिक लाभ मिलेगा बल्कि साथ ही लोगों को तुलसी से होने वाले लाभ का ज्ञान भी प्राप्त होता है।कहते हैं कि भगवान श्री राम ने गोमती तट पर और वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसी लगायी थी। अशोक वाटिका में सीता जी ने रामजी की प्राप्ति के लिए तुलसी जी का मानस पूजन ध्यान किया था। हिमालय पर्वत पर पार्वती जी ने शंकर जी की प्राप्ति के लिए तुलसी का वृक्ष लगाया था।एक मान्यता यह भी है कि लंकापति नरेश रावण के भाई विभीषण भी रोजाना तुलसी की पूजा करते थे। यही कारण था कि उनके महल में भी तुलसी का पौधा था। जब लंका दहन के समय हनुमान जी ने ये पौधा विभीषण के महल में देखा तो उन्होंने सिर्फ इस एक जगह को छोड़कर पूरी लंका में आग लगा दी थी। हिंदू धर्म में तुलसी अत्यंत पवित्र पौधों में से एक हैं। इसनकी प्रतिदिन पूजा अनिवार्य है, तुलसी पूजन करने और रोज तुलसी के दर्शन करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा हो वहां त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश विराजते हैं। घर में होने वाली हर पूजा में तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करना चाहिए अन्यथा इससे देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता।  

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रांची। देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की जयंती शनिवार को भाजपा ने पूरे देश में सुशासन दिवस के रूप में मनायी। भाजपा प्रदेश कार्यालय में अटल जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भाजपा नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मुख्य रूप से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्य सभा सदस्य दीपक प्रकाश, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडे, भवनाथपुर विधायक भानु प्रताप शाही, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आरती कुजूर समेत अन्य अन्य कई नेता भी उपस्थित थे।सुशासन दिवस के अवसर पर झारखंड भाजपा युवा मोर्चा ने विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया। दीपक प्रकाश ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेई जी देश की जनता के दिलों पर राज करने वाले राजनेता रहे हैं। वे आज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। आज पीएम मोदी उनके द्वारा सुशासन की खींची गई लकीर को बड़ा करने में लगे हैं।दीपक प्रकाश ने कहा कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उत्थान और देश में सुशासन का सपना वाजपेईजी ने देखा था। कांग्रेस गरीबी हटाते-हटाते देश से गरीबों को ही मिटाने लगी। इसके बाद अटलजी ने देश के लिए जीने और मरने का संकल्प लिया। जो समाज के सभी वर्गों के प्रति उत्तरदायित्व हो, उपयोगी हो, उसी सुशासन की परिकल्पना अटल जी ने की थ। चाणक्य, सम्राट अशोक आदि ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का ढांचा कैसा हो, इस पर विस्तार से उल्लेख और परिभाषित किया है। सुशासन भारतीय संस्कृति की परंपरा रही है। वाजपेई जी के संकल्प पथ पर ही चल कर सपनों का भारत बना सकते हैं।

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रांची। महिला हिंसा को लेकर झारखंड में आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां युवतियों से दुष्कर्म, हत्या से लेकर डायन-बिसाही तक में बेखौफ अपराध दर्ज किये जाते रहे हैं। महिला हमेशा से हिंसा की बलि चढ़ती रहीं हैं। सरकार के आंकड़े भी यही बता रहे हैं। गृह विभाग द्वारा शीतकालीन सत्र में जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में पिछले 23 महिनों में 3209 कांड दर्ज किये गये हैं। जिसमें 228 कांडों में कुल 2946 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किये गये हैं। जबकि, 228 कांडों में जांच के बाद अंतिम प्रतिवेदन समर्पित कर दिये गये हैं। 753 कांडों के खिलाफ जांच लंबित है। शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही द्वारा पूछे सवाल पर सरकार जवाब दे रही थी। गृह विभाग की ओर से बताया गया कि झारखंड में डायन-बिसाही के कुल 58 कांड दर्ज किये गये हैं। इसमें से 40 कांडो में कुल 137 अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है। जबकि, 16 कांडों में कार्रवाई लंबित है।विभाग की ओर से जानकारी दी गयी कि सभी जिलों के पुलिस पदाधिकारियों को हत्या-दुष्कर्म जैसे मामलों में निरोधात्मक कार्रवाई करने तथा कोई घटना होने पर संज्ञान लेते हुये दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। विशेष शाखा को भी सतर्क कर दिया गया है।इधर, भाजपा विधायक ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा है। शाही ने ट्वीट कर कहा है कि ‘ ये कैसी सरकार है?’ दो साल में 3209 बलात्कार ? झारखंड सरकार ने मेरे सवाल का खुद ही आंकड़ा बताया। जरा सोंचे कि किस ओर जा रहा है हमारा झारखंड ? क्या, बिहार का जंगल राज पार्ट-2 बन रहा है झारखंड?

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रांची। झारखंड में मॉब लिंचिंग पर सश्रम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। मंगलवार को विधानसभा से झारखंड भीड़,हिंसा एवम भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 पारित हुआ। विपक्ष के वॉकआउट के बीच सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी। नये कानून के अनुसार, अगर कोई मॉबलिंचिंग का कृत्य करता है और इसके पीड़ित की मृत्यु हो जाती है तो इसके लिए सश्रम आजीवन कारावास के साथ 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के लिंच करने के षड्यंत्र में शामिल होता है या षडयंत्र करता है या लिंचिंग के कृत्य के लिए दुष्प्रेरित या उसमें सहायता या प्रयत्न करता है, तो उसके लिए भी आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। मॉब लिंचिंग की रोकथाम के लिए पुलिस महानिदेशक स्तर के पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा। राज्य स्तर के नोडल पदाधिकारी जिलों में स्थानीय खुफिया इकाइयों के साथ महीने में कम से कम एक बार बैठक करेंगे।  जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक या वरीय पुलिस अधीक्षक जिले के लिए समन्वयक होंगे। विधेयक में दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को मॉब की संज्ञा दी गयी है। इसपर भाजपा विधायक अमित मंडल ने संशोधन लाया था। विधायक मंडल का कहना था कि यह विधेयक हड़बड़ी में लाया गया है। विधेयक में कई त्रुटियां हैं। उन्होंने कहा कि दो व्यक्तियों को यदि मॉब का रूप दिया जाएगा तो घरेलू विवाद को भी मॉब लिंचिंग कहा जायेगा और इस कानून का दुरुपयोग होगा। इससे पुलिस की लालफीताशाही बढ़ जाएगी। उन्होंने संख्या को दो से बढ़कर 10 करने का संशोधन सदन में रखा। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाया गया है।

दो या दो से अधिक व्यक्तियों की बात भी सुप्रीम कोर्ट ने ही कही है। उन्होंने कहा कि झारखंड में 2016 से लेकर अब तक मॉब लिंचिंग से 56 लोग प्रभावित हुए हैं। विधायक केदार हाजरा ने विधेयक से राजनीतिक संबद्धता को विलोपित करने का संशोधन लाया।  इसपर मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि इस शब्द को विलोपित करने से किसी वर्ग विशेष को छूट दी जायेगी। भाजपा विधायक विधेयक को प्रवर समिति में सौपने की मांग कर रहे थे, लेकिन यह मांग खारिज कर दी गयी। विधायक अमर कुमार बाउरी ने कहा कि यह बिल झारखंड विरोधी, आदिवासी विरोधी है और एक विशेष वर्ग को खुश करने के लिए लाया गया है। विधायक प्रदीप यादव और दीपिका पांडेय सिंह ने पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की। विधेयक में विपक्ष की मांग पर दुर्बल व्यक्ति की जगह आम नागरिक को जोड़ा गया। विपक्ष के इस संशोधन को मान लिया गया। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अगर मॉबलिंचिंग में किसी को गंभीर चोट आती है तो दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्र कैद तक की सजा दी जाएगी। साथ ही तीन से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।  दोषियों के विरुद्ध तीन तरह की सजा का प्रावधान किया गया है। उकसाने वालों को भी दोषी माना जाएगा और उन्हें तीन साल की सजा और एक से तीन लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। इतना ही नहीं लिंचिंग के अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करनेवाले को भी अपराधी मानकर एक साल की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। अगर कोई लिंचिग का माहौल तैयार करने में सहयोग करता है तो वैसे व्यक्ति को तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना होगा। दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जांच के जो प्रावधान बताए गए हैं, वही प्रक्रिया यहां भी अपनाई जाएगी। इस विधेयक से जुड़े अपराध गैर जमानतीय होंगे।

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रांची। जेपीएससी मामले पर बार-बार सदन में नेताओं का हंगामा होता रहा। कार्यस्थगन भी लाया गया। 12.30 बजे सदन की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन विधायक जेपीएससी मामले पर हेमंत सोरेन का जवाब मांग रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जवाब में कहा कि पूरे देश में इतने बड़े पैमाने पर किसी पब्लिक सर्विस कमीशन में छात्र हिस्सा ले रहे हैं। पहली बार पीटी में बड़े पैमाने पर आदिवासी, दलित और पिछड़े छात्र चुन कर सामने आये हैं। जेपीएससी की परीक्षा आयोग की तरफ से ली गयी है। इसमें सरकार का कहीं से भी हस्तक्षेप नहीं है। ये कहीं से भी साबित नहीं होता। आदिवासी, दलित और कमजोर बच्चे जेपीएससी के पीटी एग्जाम में चुनकर आए हैं इसलिए मनुवादियों के पेट में दर्द हो रहा है। भाड़े के लोगों से आंदोलन कराया जा रहा है।  विश्व हिंदू परिषद के लोगों को धरने पर बैठाया जा रहा है। बीजेपी ने 20 सालों तक झारखंड में राज्य किया लेकिन एक भी परीक्षा बिना विवाद के नहीं हुई।  इसके आगे सीएम हेमंत ने कहा कि मैं पुरानी बातों को कुरेदना नहीं चाहता, यह मेरा स्वभाव नहीं है।   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि रघुवर दास (पूर्व सीएम) कहते हैं कि जेपीएससी मामला गरमाया हुआ है। लेकिन, उन्हें जेपीएससी का मतलब भी नहीं पता। भाजपा की डबल इंजन की सरकार तो थी लेकिन, इंजन में कहीं कोई बोगी नहीं था।

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रांची। रांची के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल में इलाज करवाने आई युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दुष्कर्म का आरोप अस्पताल के डॉक्टर पर ही लगा है। मामले में पीड़िता के आवेदन पर जगन्नाथपुर थाने में आरोपित डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।रांची के ग्रामीण इलाके की रहने वाली पीड़िता ने थाने में आवेदन दिया था कि तबीयत खराब होने पर पांच दिसंबर को वह डॉक्टर के हटिया स्थित नर्सिंग होम में दिखाने गई थी। उस दौरान वहां महिला डॉक्टर नहीं मिली। ऐसे में नर्सिंग होम में बैठने वाले डॉ. सुबोध कुमार से ही चेकअप करा लिया। आरोप है कि इलाज के दौरान ही डॉक्टर ने युवती को एक इंजेक्शन दिया, जिसके बाद उसे होश नहीं रहा। कुछ देर बाद होश आया तो कुछ गलत होने का एहसास हुआ। लेकिन वह लोक लाज के भय से चुप रह गई।पीड़िता का आरोप है कि 16 दिसंबर को जब उसके पेट में दर्द हुआ तो दिखाने हटिया में नर्सिंग होम गई। यहां अस्पताल की नर्स ने उसे फिर डॉ. सुबोध के पास भेज दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने फिर उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि 16 दिसंबर को उसके साथ उसकी एक दोस्त भी गई थी जब उसने उसे सारी बात बताई तब उसने पीड़िता को हिम्मत बंधाई, जिसके बाद उसने थाने में एफआईआर दर्ज कराया। फिलहाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला थाने में रखा गया है। पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है,शनिवार को ही महिला का बयान भी दर्ज किया जाएगा।

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रांची। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के द्वारा झारखंड को 15 करोड़ रुपये आयुष योजनाओं के संचालन के लिए दिये गये। इन पैसों का उपयोग राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी चीजों को बढ़ावा देने में किया जाना था परंतु राज्य सरकार सिर्फ 4.5 लाख रुपये ही खर्च कर पायी। उक्त आशय की जानकारी केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में सांसद संजय सेठ को दी। तारांकित प्रश्न काल में सांसद संजय सेठ ने केंद्रीय मंत्री से पूछा था कि झारखंड में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार क्या सहयोग कर रही है? किन योजनाओं का संचालन किया जा रहा है? सांसद ने यह भी पूछा था कि बीते 2 वर्षों में केंद्र सरकार ने राज्य को कितनी राशि दी है और उसका क्या उपयोग हुआ है? इन सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने सांसद को सदन में लिखित रूप से बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकार को राष्ट्रीय आयुष मिशन के संचालन के लिए दो साल में 15 करोड़ की राशि दी गयी थी।इसमें आयुष कार्यक्रमों का प्रोत्साहन के साथ-साथ रांची में 50 बेड का आयुष अस्पताल, 100 आयुष स्वास्थ्य केंद्र व वेलनेस सेंटर खोले जाने की योजना पर काम होना था। इसके अतिरिक्त गोड्डा में स्थित होम्योपैथ मेडिकल कॉलेज का भी उन्नयन किया जाना था।राज्य सरकार के द्वारा दिये गये रिपोर्ट के मुताबिक इतनी बड़ी राशि दिये जाने के बावजूद बीते 2 साल में राज्य सरकार सिर्फ 4.5 लाख की राशि ही खर्च कर पायी, शेष राशि यूं ही पड़ी रह गयी। इस जवाब के बाद सांसद संजय सेठ ने बयान देते हुए कहा कि एक तरफ राज्य सरकार के मंत्री केंद्र के असहयोग करने और पैसा नहीं देने का रोना रोते हैं।दूसरी तरफ राज्य सरकार केंद्र के द्वारा दिये गये सहयोग के एवज में भी काम नहीं कर पा रही है। 15 करोड़ रुपये की राशि मिलना और उसमें सिर्फ 4.5 लाख खर्च करना यह बताता है कि सरकार की मानसिकता काम करने की नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ केंद्र सरकार खुले हाथ से राज्य के विकास के लिए पैसे दे रही है और दूसरी तरफ राज्य सरकार उस पर काम नहीं कर पा रही है।

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रांची। जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान, सभी लोग पलायन करते हैं। हमारे झारखंड राज्य से भी रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर श्रमिकों का दूसरे राज्यों एवं देशों में पलायन होता है, परंतु आज तक प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित और जवाबदेह पलायन के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। वर्तमान राज्य सरकार का प्रयास है कि झारखंड से जो भी श्रमिक एवं अन्य लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य अथवा देशों में जाते हैं, उनका हम पूरा डाटा बेस तैयार कर सके और नीति के तहत उन्हें विपत्ति के समय मदद पहुंचा सकें। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में आयोजित Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा। मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि रोजगार के बेहतर साधन के लिए राज्य के लोग देश के अलग-अलग राज्यों एवं विदेशों में भी पलायन करते हैं। अपने जीवन स्तर को सकारात्मक दिशा की ओर ले जाने के लिए स्वाभाविक है कि हमें दूसरे जगहों पर पलायन करना पड़ता है। इन सभी चीजों को मद्देनजर रखते हुए माइग्रेशन पर राज्य सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए ठोस नियम-व्यवस्था बनाने का कार्य प्रतिबद्धता के साथ कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अधिकतर मजदूर एक निश्चित समय-सीमा के लिए पलायन करते हैं, परंतु कुछ ऐसे भी मजदूर हैं जो लंबे समय तक दूसरे जगहों पर बसने भी जाते हैं। जो मजदूर एक निश्चित समय अवधि के लिए रोजगार हेतु बाहर जाते हैं उनके साथ क्या बितता है यह कोरोना काल के समय हम सभी को एहसास हुआ है। मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूरों को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के तहत प्रवासी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है। ताकि विपत्ति के समय राज्य सरकार उन्हें तत्काल मदद पहुंचा सके। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रवासी श्रमिक से अपील की है कि इस पोर्टल में वे अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य कराएं। वैसे प्रवासी श्रमिक जो दूसरे देशों में काम करते हैं उन्हें कैसे संरक्षित कर सके इस निमित्त केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के तहत हुनर एवं रोजगार की बेहतर व्यवस्था तलाशने का काम सरकार निरंतर कर रही है। राज्य में विकास के पैमाने अनेक हैं। उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई ऐसे संसाधन हैं जिससे रोजगार सृजन किए जा सकते हैं। इन संसाधनों को आधुनिक बनाकर अधिक से अधिक रोजगार सृजन सरकार की योजना है। राज्य सरकार स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित किए जाने को लेकर विचार कर रही है। जल्द ही राज्य में स्किल यूनिवर्सिटी की भी स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि पूरे संक्रमण काल में झारखंड ने सबसे बेहतर कार्य कर दिखाया है। राज्य में आज तक प्रवासी श्रमिकों का सही-सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं था, परंतु हमारी सरकार ने वैश्विक महामारी के दौरान एक-एक प्रवासी श्रमिकों का डाटाबेस तैयार करने का काम किया है। श्रम मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने बिना कोई भेदभाव के सभी जाति,धर्म,समुदाय के लोगों के साथ तथा सभी जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर कोरोना संक्रमण से राज्यवासियों को बचाने का काम किया था। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने कहा कि ह्यूमन माइग्रेशन के कई पहलू हैं। माइग्रेशन सिर्फ नकारात्मक ही नहीं बल्कि सकारात्मक भी होता है। माइग्रेशन पुराने जमाने से चला आ रहा है। कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में रह सकता है। लोग जीवन की बेहतरी के लिए पलायन करते हैं। राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को सुरक्षित बनाने हेतु पॉलिसी बनाने का काम किया है। मुझे विश्वास है कि Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) मजदूरों के सुरक्षित पलायन में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो, मनरेगा आयुक्त बी.राजेश्वरी, श्रम आयुक्त ए. मुथुकुमार, SRMI के सहयोगी फिया फाउंडेशन के स्टेट हेड जॉनसन टोपनो, एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस हैदराबाद डॉ अश्विनी, निदेशक सीएमआईडी विनय पीटर, एसोसिएट इन्वेस्टमेंट ओमीदयर नेटवर्क इंडिया एवं पीडीएजी के प्रतिनिधि एवं अन्य उपस्थित थे।

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