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मार्च महिन्यातील 1 मार्च “जागतिक नागरी संरक्षण दिन” (World Civil Defence Day) म्हणून साजरा केला जातो.या दिवसाचा उद्देशआपत्ती, अपघात, युद्ध, नैसर्गिक आपत्ती इत्यादी वेळी नागरिकांचे जीव, संपत्ती आणि पर्यावरण यांचे संरक्षण करण्यासाठी जनजागृती वाढवणे हा या दिवसाचा मुख्य उद्देश आहे.नागरी संरक्षण संस्था, आपत्कालीन सेवा (fire, disaster response, medical emergency) यांच्या कामाचे महत्त्व ओळखणे आणि त्यांचा आदर करणे हाही या दिवसाचा भाग आहे.सामान्यतः मोठ्या सार्वजनिक विषयांसाठी (जसे: जमीन, नोकरशाही, न्याय, भ्रष्टाचार विरोध) वापरले जाते.ग्रामीण/शहरी भागात आपत्ती व्यवस्थापनाची कार्यक्षम यंत्रणा उपलब्ध असतानाही आज रोजी भारतीय नागरिक म्हणून वारंवार वरिष्ठ अधिकारी यांना विनंती अर्ज तसेच कॉल वर प्रत्येक्ष भेटून नही न्याय मिळत नाही. 🙏विषशे कायदाचे शिक्षण घेऊन भी आज रोजी माझे वडील एक समाज प्रभोधन कार सन्मानित जेष्ठ नागरिक असून त्यांना न्याय देण्यासाठी सर्व न्याय यंत्रणा निर्णय तर दिला नाही उलट मानसिक ताण देहून आत्महतेस प्रवृत्त करीत आहे. म्हणून मी त्या साठी उद्या दिनांक 1 मार्च 2026 रोजी तहसील कार्यालय माहूर येथे अमरण उपोषण ला बसणार आहे.

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मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। शनिवार देर शाम ईरान के कई शहरों में नए धमाकों की खबरें सामने आईं, जबकि तेहरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। यह कार्रवाई अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद हुई।

अमेरिका–इज़राइल का ईरान पर हमला :
शनिवार तड़के अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के परिसर को भी निशाना बनाया गया। उपग्रह तस्वीरों में परिसर को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने राष्ट्र के नाम संबोधन में “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” की पुष्टि करते हुए कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और नौसेना क्षमताओं को खत्म करना है। उन्होंने ईरानी जनता से अपनी सरकार को “अपने हाथ में लेने” की अपील भी की।

इज़राइल ने दावा किया है कि ईरानी शासन के “कई वरिष्ठ अधिकारियों” को इन हमलों में खत्म कर दिया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, एक गर्ल्स स्कूल पर हमले में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई। ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक शनिवार को पूरे देश में 200 से अधिक लोगों की जान गई।

इस बीच Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने अपने फ़ारसी सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्फहान के एक औद्योगिक क्षेत्र को खाली करने की चेतावनी जारी की। आईडीएफ ने कहा कि कुछ ही मिनटों में वहां सैन्य ढांचे पर हमला किया जाएगा। इस्फहान को ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु और सैन्य-औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई :
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी हवाई और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। ईरानी हमलों की खबरें बहरीन, कुवैत, कतर, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से सामने आईं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं या जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं।

दुबई के एक लग्जरी होटल में हुए एक हमले में कम से कम चार लोग घायल हुए। वहीं अबू धाबी में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल से जुड़े हमले के बाद गिरते मलबे से एक नागरिक की मौत की खबर है। क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी हैं।

वैश्विक चिंता और कूटनीतिक प्रयास :
बढ़ते संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर चिंता जताई जा रही है। United Nations Security Council की आपात बैठक बुलाए जाने की खबर है, जिसमें हालात पर चर्चा होगी।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा कि ब्रिटिश विमान मध्य पूर्व के आसमान में तैनात हैं और क्षेत्रीय समन्वित रक्षा अभियानों का हिस्सा हैं, ताकि अपने नागरिकों, हितों और सहयोगियों की रक्षा की जा सके।

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इस तरह के बड़े सैन्य हमलों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की मांग की है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल को लगता है कि मौजूदा समय में ईरानी शासन कमजोर स्थिति में है और वे इसे एक रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि बढ़ती जनहानि और क्षेत्रीय विस्तार के साथ यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और गहरा सकती है।

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