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● मुर्दाघर में वेदप्रकाश की नहीं सरकार की लाश पड़ी हुई है : नवीन जयहिंद भिवानी हरियाणा, ( तरुण शर्मा ) AIMA, 19-09-23।

● मुर्दाघर में वेदप्रकाश की नहीं सरकार की लाश पड़ी हुई है : नवीन जयहिंद

भिवानी हरियाणा, ( तरुण शर्मा ) AIMA, 19-09-23।

■ ईमानदारी का मोड़ बाँधने वाले मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों की करवाए जांच - जयहिंद

पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे शहीद गावं रोहनातवासियों ने भिवानी लघु सचिवालय पर महापंचायत का आयोजन किया | इस महापंचायत में नवीन जयहिंद भी पहुंचे | इस मौके पर नवीन जयहिंद सरकार की लेटलतीफी और प्रशासन की फीताशाही पर जम कर बरसे |

जयहिंद ने कहा कि पिछले 22 साल से रोहनात गांव की जमीन के लिए संघर्ष कर रहे वेदप्रकाश ने धरना स्थल पर आत्महत्या कर ली ये पुरे देश के लिए शर्म की बात है । वेदप्रकाश ने मरने से पहले अपने खून से 13 पेज का सुसाइड नोट में अपनी दर्द भरी कहानी इस गावं के संघर्ष को बयान करती है | वही पिछले साल भी एक और बुजुर्ग संत सिंह की ही धरने पर ही मौत हो गई थी | उस वक्त भी वे इस गावं के साथ खड़े थे | आज एक साल से भी ज्यादा हो गया है इस बात को | उस वक्त के डीसी के आश्वासन के बाद भी बलिदान देने वाले संत सिंह के परिवार में से न तो किसी को आर्थिक सहयोग मिला न ही किसी सदस्य को नौकरी मिली |
जयहिंद ने कहा कि आजाद देश में एक गुलाम गावं रोहनात आज भी अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा है | अंग्रेजों से लड़ाई करने और देश के लिए लड़ना रोहनात गावं को इतना महंगा पड़ गया कि आज भी गुलाम ही है | सरकारें सिर्फ राजनीति के लिए इस गावं का इस्तेमाल कर रही है |

जयहिंद ने कहा कि यहाँ बैठने से न्याय नहीं मिलेगा, इतने दिनों से धरने पर बैठे है लेकिन सरकार की तरफ से कोई भी सुध लेने तक नहीं आया | यहाँ तक की सरकार का कोई नेता या मंत्री , विधायक कोई सांत्वना देने तक नहीं आया | ऐसे हर रोज कोई नही आता इसलिए एक बार में इस मामले का फैसला करें | या तो सीधा मुख्यमंत्री के घर आवास पर धरना दे या फिर जहाँ भी उनक उनका जनसंवाद हो वहां पर सभी गावं वासी पहुंचें, वे उनके साथ हर मोर्चे पर खड़े है | चाहे लठ लगे या केस लगे वो पीछे हटने वाले नही

जयहिंद ने कहा कि मुर्दाघर में वेदप्रकाश की लाश नहीं सरकार की लाश ही जिसमे कीड़े पड़े हुए है | ईमानदारी मोड़ बांधे घुमने वाले मुख्यमंत्री अपने अधिकारीयों की जांच क्यों नहीं करवा रहे है | किसने वेदप्रकाश से एक लाख रूपये की मांगे थे |साथ ही एफ आई आर अब दर्ज क्यों नही हुई है | जब पुलिस के पास सुसाइड नोट है तो उसके आधार पर जांच क्यों नहीं की जा रही है | अगर न्याय चाहिए तो सरकार से सीधे टक्कर लेनी होगी | इस तरह यहाँ बैठ कर कोई भी सुनवाई करने नहीं आएगा | बहरों के कानों में गूंजने के लिए सड़कों पर उतरना होगा |

महापंचायत में पहुचे नवीन जयहिन्द ने मुख्यमंत्री खट्टर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खट्टर अपने गांव वालों के सामने किए हुए वादे को पूरे करे ।
सरकार परिवार को मुआवजा दे और उनके परिवार में किसी सदस्य को सरकारी नोकरी दे और साथ ही कहा कि इन गांव वालों ने 1857 की क्रांति में अपना अहम बलिदान किया था और गांव से काफी लोगो ने अपनी शहादत दी थी और साथ ही कहा कि सरकार इस गांव को शहीद गांव का दर्जा दे और वे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए जो एक शहीद गांव को मिलनी चाहिए ।

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