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*गोवा के एकादश ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ अर्थात कल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए ‘वैश्विक हिन्दू र

*गोवा के एकादश ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ अर्थात कल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’*

पिछले कुछ दिनों से केवल भारत में ही नहीं, अपितु संपूर्ण विश्व में हिन्दू राष्ट्र की चर्चा हो रही है; वहीं कट्टर भारतद्वेषी लोग हिन्दू राष्ट्र के विरुद्ध दुष्प्रचार कर रहे हैं । कुछ लोग भारत यदि धर्माधिष्ठित बना, तो भारत की स्थिति इस्लामी देश पाकिस्तान की भांति हो जाएगी, ऐसा भी बोलते हैं; तो खालिस्तानवादी नेता हिन्दू राष्ट्र की अपेक्षा खालिस्तानवाद की कल्पना अच्छी होने की बात करते हैं । कुछ लोग हिन्दू राष्ट्र के कारण ‘सेक्युलर’ भारत को संकट उत्पन्न होने का, साथ ही उनका आरोप है कि उसके कारण गैर हिन्दुओं के अस्तित्व पर प्रश्न उठाया जा रहा है । परंतु इस दुष्प्रचार में बिल्कुल ही तथ्य नहीं है, इसे हमें समझना होगा । हिन्दू राष्ट्र कोई राजनीतिक संकल्पना नहीं है, अपितु सभी प्राणियों के कल्याण के लिए एक आदर्श व्यवस्था है । यह कोई नया राजतंत्र नहीं है, अपितु अनेक शतकों तक भारत में यह राजतंत्र था । भारत अनादि काल से हिन्दू राष्ट्र ही था । त्रेतायुग के राजा हरिश्चंद्र एवं प्रभु श्रीराम, द्वापरयुग के महाराजा युधिष्ठिर, कलियुग के राजा हर्षवर्धन, अफगानिस्तान के राजा दाहीर, मगध के सम्राट चंद्रगुप्त, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज आदि का राज्य कभी भी ‘सेक्यूलर’ नहीं था, अपितु ‘हिन्दू राष्ट्र’ ही था । आज भी इन सभी राजाओं का उल्लेख गौरवपूर्ण ही होता है । इसके लिए बहुत पीछे जाने की आवश्यकता नहीं है, अपितु वर्ष 1947 में भी 566 संस्थान हिन्दू राज्य थे । अतः हिन्दू राष्ट्र का किया जा रहा विरोध लोगों के उद्धार एवं सुव्यवस्था का विरोध है, यह समझकर हिन्दू राष्ट्र के लिए संगठित होना पडेगा ।

*हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता* : आज हम भारत की स्वतंत्रता का अमृतमहोत्सव मना रहे हैं; परंतु इन 75 वर्षाें में ‘स्व’तंत्र का अर्थात स्वयं के भारतीय तंत्र का कभी-कभी ही अनुभव किया । वेशभूषा, कानून, खाद्य संस्कृति, आचार, शिक्षा, न्याय-व्यवस्था, प्रशासन-व्यवस्था आदि विभिन्न क्षेत्रों में, किंतु भारतीयों के व्यक्तिगत, सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन पर आज भी पाश्चात्य विकृति का बडा प्रभाव है । भले ही लोकतंत्र का वर्णन ‘लोगों के लिए चलाया जानेवाला राज्य’ किया जाता हो; परंतु तब भी नित्य जीवन में सर्वसामान्य नागरिकों के जीवन में निराशा का ही अनुभव होता है । ये सभी ‘सेक्युलर’ व्यवस्था के दुष्परिणाम हैं । उसके कारण ही हिन्दुओं के साथ अन्याय करनेवाली, अल्पसंख्यकों को विशेष छूट देनेवाली, साथ ही बहुसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचानेवाली ‘सेक्युलर’ व्यवस्था के स्थान पर सर्वसम्मति से धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की मांग करनी होगी । वर्ष 1976 में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने देश में आपातकाल लगाकर संविधान में संशोधन कर संविधान में ‘सेक्युलर’ शब्द घुसा दिया । अब पुनः एक बार संविधान में संशोधन कर भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाए, देशप्रेमी भारतीयों की यही जनभावना है ।

*हिन्दुत्व पर हो रहे आघात* : भारत में 28 राज्य तथा 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं; परंतु उनमें से 6 राज्यों एवं 3 केंद्रशासित प्रदेशों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गए हैं । राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या को विचार में लिया जाए, तो आज के समय में 25 प्रतिशत राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में हिन्दुओं की जनसंख्या न्यून हुई है । वीर सावरकर ने बल देकर कहा कि हिन्दू धर्म ही राष्ट्रीयता है । उसके अनुसार किसी प्रदेश से हिन्दुओं का अल्पसंख्यक होने का अर्थ उस प्रदेश में भारतीयता की भावना क्षीण होने जैसा है । वर्ष 1990 में जिहादी आतंकवाद के कारण लाखों कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार हुआ । आज भले ही अनुच्छेद 370 रद्द हुआ हो, किन्तु अभी भी वहां विस्थापित हिन्दुओं का पुनर्वास नहीं हुआ है । इसके विपरीत चुन-चुनकर वहां हिन्दुओं की हत्या की जा रही है । हिन्दू राष्ट्र का ‘टारगेट’ साध्य किए बिना हिन्दुओं का हो रहा ‘टारगेट किलिंग’ नहीं रुकेगा, यही सत्य है । भारत की स्वतंत्रता के शतक महोत्सव वर्ष तक अर्थात 2047 तक भारत को ‘इस्लामिस्तान’ बनाने की धर्मांधों की ‘ब्लू प्रिंट’ सामने आई थी । उससे पूर्व ही ‘गजवा-ए-हिन्द’ के सपने को कब्रिस्तान में दफनाकर हिन्दुत्व अर्थात भारत की रक्षा करने के लिए हमें तैयार होना चाहिए ।

आज के समय में वक्फ कानून के माध्यम से हिन्दुओं की संपत्ति को हडपा जा रहा है । इसमें केवल हिन्दुओं की नहीं, अपितु सरकारी भूमि भी वक्फ की भूमि के रूप में घोषित किए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं । कट्टरतावादी लोग हिन्दुओं की परिश्रम से अर्जित की गई संपत्ति को किसी भी क्षण वक्फ की संपत्ति घोषित कर सकते हैं तथा उसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती । यह हिन्दुओं को नामशेष करने का ही षड्यंत्र है । आज के समय में हिन्दवी स्वराज के साक्षी अनेक गढ-किले इस्लामी अतिक्रमण से घिर गए हैं । इन गढ-किलों पर रातों-रात दरगाह एवं मजारें खडी की जा रही हैं । ‘वक्फ’ जैसे काले कानूनों को नष्ट करने के लिए, साथ ही हिन्दुओं के अधिकारों एवं मानबिंदुओं की रक्षा के लिए हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता है ।

हिन्दुओं को लक्ष्य बनाने के लिए आज विभिन्न प्रकार के ‘टूलकिट’ का उपयोग किया जा रहा है । कभी हिन्दुओं के साथ धोखाधडी तथा लालच देकर उनका धर्मांतरण किया जाता है, तो कभी कला की स्वतंत्रता के नाम पर फिल्मों, वेबसीरिज आदि माध्यमों से हिन्दुओं के देवताओं एवं आस्था के केंद्रों का उपहास उडाया जाता है तथा कभी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए समानांतर ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ खडी कर हिन्दुओं को हलाल प्रमाणित खाद्य पदार्थ खरीदने पर बाध्य किया जाता है । ‘रामचरितमानस’ जैसे पवित्र ग्रंथ को खुलेआम जलाया जाता है, तो कभी मंदिरों में देवताओं की मूर्तियों तथा वहां की प्रथा-परंपराओं को लक्ष्य बनाया जाता है । हिन्दू युवतियों एवं महिलाओं को प्रेम के झूठे जाल में फंसाकर उनका संपूर्ण उपभोग कर ‘लव जिहाद’ किया जाता है । ‘मेरा अब्दुल अलग है’, इस भ्रम में जीनेवाली हिन्दू लडकियों को बुर्का पहनने, गोमांस भक्षण करने, साथ ही ‘इस्लाम कबूल’ करने के लिए कहा जाता है, अन्यथा उनके शरीर के 35 टुकडे किए जाते हैं । यह ‘सेक्युलर’ भारत हिन्दुओं की श्रद्धाओं की रक्षा करने में संपूर्णतया विफल रहा है, इन घटनाओं से यही दिखाई देता है । हिन्दू युवतियों की शीलरक्षा के लिए, हिन्दू परंपराओं की रक्षा के लिए, साथ ही धर्मग्रंथों की प्रतिष्ठा अक्षुण्ण रखने के लिए आज हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता है ।

*केवल आर्थिक विकास अधूरा है* : जनता सुखी होने तथा समृद्ध राष्ट्र के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, अपितु मनुष्य जीवन को व्यापनेवाले सभी अंगों का विकसित होना आवश्यक होता है । धर्म जीवन के सर्वांग को व्यापता है; इसलिए राष्ट्र का धर्मनिरपेक्ष नहीं, अपितु धर्माधिष्ठित होना ही आवश्यक है । अतः हिन्दू राष्ट्र धर्माधिष्ठित ही होगा ! त्यागी एवं राष्ट्रहित का विचार करनेवाला धर्माचरणी समाज, कर्तव्यनिष्ठ सुरक्षातंत्र, सत्यान्वेषी न्यायतंत्र एवं कार्यक्षम प्रशासन इस ‘हिन्दू राष्ट्र’ की विशेषताएं होंगी ।

हमारी वैदिक संस्कृति में कहा गया है कि राष्ट्र का सुख प्रजा के धर्माचरण का आनुषंगिक फल होता है । उस दृष्टि से आज के समय में चल रहे हिन्दू राष्ट्र से संबंधित सभी आंदोलनों को एक ठोस दिशा मिले, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यरत हिन्दुत्वनिष्ठों का संगठन हो, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान हो तथा इसकी वैचारिक दिशा सुस्पष्ट हो; इस उद्देश्य से हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से गोवा, फोंडा के श्रीरामनाथ देवस्थान में 16 से 22 जून 2023 की अवधि में एकादश ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ अर्थात ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’ का आयोजन किया गया है । प्रतिवर्ष की भांति देश-विदेशों के हिन्दुत्वनिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता इस अधिवेशन में उपस्थित रहनेवाले हैं । इस अधिवेशन के माध्यम से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के प्रयासों को बल मिले तथा हमारा भारत देश एक तेजस्वी हिन्दू राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर पुनः स्थानापन्न हो; यह ईश्वर के चरणों में प्रार्थना !

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