वाराणसी। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का 45 घंटे निर्बाध दर्शन होगा। लाखों श्रद्धालु माता पार्वती और महादेव के विवाहोत्सव का साक्षी बनने और आशीर्वाद की लालसा लिए आएंगे। ऐसे में प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। मंडलायुक्त एस राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में बैठक की। इस दौरान तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में नगर निगम, विद्युत विभाग, एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग सहित सभी सुरक्षा एवं सुविधा प्रदायी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों के दायित्वों का स्पष्ट चिन्हांकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए, ताकि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
विद्युत सुरक्षा को लेकर विद्युत विभाग को निर्देश दिया गया कि धाम परिसर और आसपास के सभी विद्युत खंभों की टेपिंग अनिवार्य रूप से कराई जाए तथा संपूर्ण परिसर में विद्युत सुरक्षा ऑडिट समय से पूर्ण किया जाए। अग्निशमन विभाग को अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग को प्रसाद एवं खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच करने को कहा गया।
तहसीलदार के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम परिसर में दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने हेतु बैरिकेडिंग, प्रमुख स्थानों पर खोया-पाया केंद्र, शुद्ध पेयजल व्यवस्था तथा प्रभावी पब्लिक एड्रेस सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही मेडिकल हेल्पडेस्क, ग्लूकोज, ओआरएस और गुड़ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मीडिया के माध्यम से श्रद्धालुओं से अपील की जाएगी कि वे धाम में प्रवेश के समय प्रतिबंधित वस्तुएं जैसे बड़े बैग, मोबाइल फोन, स्मार्ट या डिजिटल घड़ियां, पेन, तंबाकू, पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक सामग्री एवं अन्य निषिद्ध वस्तुएं साथ न लाएं। नगर निगम को पर्व से पूर्व बंदरों एवं आवारा पशुओं के नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
अफसरों ने धाम का किया निरीक्षण
बैठक के उपरांत मंडलायुक्त द्वारा संपूर्ण धाम परिसर का निरीक्षण कर तैयारियों का स्थलीय जायजा लिया गया और सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे खाली पेट दर्शन के लिए न आएं और विशेष अथवा स्पर्श दर्शन का अनुरोध न करें।