विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार अब धरातल पर उतरकर समीक्षा और सुधार में जुट गई है।
हाल ही में माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभाग के कार्यों की जो व्यापक समीक्षा की गई, वह राज्य की शैक्षणिक दशा और दिशा बदलने के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है।
सात निश्चय 3.0: भविष्य के 'मॉडल विद्यालय':
इस बैठक का सबसे अहम बिंदु 'सात निश्चय 3.0' के तहत निर्माणाधीन मॉडल स्कूल रहे। मंत्री जी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन विद्यालयों के निर्माण में न केवल एकरूपता हो, बल्कि गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। उद्देश्य साफ है—सरकारी स्कूल अब सिर्फ इमारतों के नाम से नहीं, बल्कि अपनी आधुनिक सुविधाओं और बेहतर परिवेश से पहचाने जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं पर 'लेजर फोकस':
अक्सर चर्चा का विषय रहने वाले स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर इस बार कड़ा रुख अपनाया गया है। बैठक में जिन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया, वे सीधे तौर पर छात्र-छात्राओं के दैनिक अनुभव से जुड़े हैं:
स्वच्छता एवं पेयजल: स्वच्छ परिसर और शुद्ध पानी को विलासिता नहीं, बल्कि अनिवार्यता माना गया है।
वृक्षारोपण: स्कूलों को केवल 'कंक्रीट का ढांचा' नहीं, बल्कि हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की पहल।
आधार सीडिंग: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सुदृढ़ीकरण।
गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन (MDM): बच्चों के पोषण को प्राथमिकता देते हुए भोजन की गुणवत्ता पर कड़े निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण ही है सुधार की कुंजी:
बैठक का एक बड़ा संदेश यह था कि नीतियां कागजों पर चाहे कितनी भी अच्छी हों, उनकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन और सटीक निरीक्षण पर टिकी है। मंत्री जी ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए केवल स्कूल खोलना काफी नहीं है, बल्कि एक सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण तैयार करना अनिवार्य है।
"शिक्षा विभाग का लक्ष्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं, बल्कि एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक सुविधाएं मिलें।"
प्रशासनिक मुस्तैदी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री बी. राजेन्दर के साथ प्राथमिक शिक्षा, मध्याह्न भोजन और प्रशासन के निदेशकों सहित सभी क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशकों (RDD) एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की उपस्थिति यह बताती है कि आने वाले दिनों में जिला स्तर पर शिक्षा विभाग की सक्रियता और बढ़ने वाली है।
निष्कर्ष:
शिक्षा मंत्री का यह 'रिव्यू मोड' बताता है कि बिहार की शिक्षा नीति अब 'इनपुट' से बढ़कर 'आउटकम' पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यदि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर अक्षरशः पालन होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब सरकारी विद्यालय अपनी प्रतिष्ठा को फिर से हासिल कर लेंगे।