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THE INDIVIDUAL PRESS
( Dares to Speak the Truth )

EDITORIAL ANALYSIS

#Parliament Cannot Be Turned Into a Platform for Unverified Documents.

Who Brought Unverified Pages into Parliament?

The “Four Stars Of Destiny” Episode Is No Ordinary Political Dispute.

The controversy surrounding the yet-to-be-released book “Four Stars Of Destiny”, reportedly authored by General Manoj Mukund Naravane and linked to Penguin Random House India, has escalated beyond partisan politics.

It now touches the credibility of Parliament itself.
The book has not been officially released. The publisher has indicated that it remains unpublished. Yet, excerpts — allegedly photocopied pages from this unreleased manuscript — were cited on the floor of Parliament by Rahul Gandhi to level allegations against the Government.

This is not routine opposition politics.
This is a question of documentary authenticity inside the highest legislative institution of the Republic.

The Core Questions That Cannot Be Ignored.
If the book is unreleased, how were the pages obtained?
Were the pages complete, selective, or contextually edited?
Were they officially shared, leaked, or independently sourced?
Did the author authorize the circulation of those excerpts?
Did the publisher verify the authenticity of what was presented?

If the excerpts are genuine — the nation deserves full disclosure.
If they are incomplete or misrepresented — Parliament may have been misled.

Both possibilities demand urgent scrutiny.
Silence Is Not Neutral.

The Government has denied the allegations.
The publisher has clarified that the book has not been released.
No immediate public clarification came from the author during the height of the controversy.

In matters of this magnitude, silence is not neutrality — it deepens suspicion.

When unpublished material is used to create national-level political confrontation, institutional response cannot be casual.

Parliament Is Not a Theatre of Photocopies.
The floor of Parliament is protected by privilege because it is expected to be guided by responsibility.

If unverified documents can be waved inside the House and used as a weapon of accusation without authentication, it sets a precedent that is dangerous for democracy itself.

Tomorrow, any draft manuscript, internal memo, or selectively edited document could be weaponized. That would reduce Parliament from a deliberative body to an arena of document warfare.

That must never be allowed.
Immediate Institutional Steps Required.

The Hon’ble Speaker must initiate a time-bound inquiry into the authenticity and source of the cited documents.

Penguin Random House India must officially clarify whether the circulated pages correspond to the approved manuscript.

General Manoj Mukund Naravane must state clearly whether the cited excerpts reflect his written position in full context.

Rahul Gandhi must submit the documentary source relied upon and confirm its authenticity.

If authenticity is proven — the Government must answer.

If manipulation is proven — parliamentary privilege has been misused.

In either case, accountability is non-negotiable.

This Is Bigger Than Politics
In the digital era, parliamentary proceedings are broadcast instantly across the country. Allegations made inside the House shape public opinion within minutes.
Therefore, the responsibility is heavier than ever before.

This episode is not about ruling party versus opposition.

It is about whether Parliament operates on verified facts or political dramatization.
If institutional discipline is not enforced now, the precedent will echo for years.
The matter is now in the custody of the Speaker.
Authority must be exercised firmly, transparently, and without political hesitation.

Democracy does not fear debate.
But democracy cannot survive manufactured ambiguity.

The nation deserves clarity — not clouds.

Jurisdiction: Kolkata High Court Only

Krishna Chandra Das
Press Member & Chief Editor
The Individual Press





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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षण ड्यूटी कर रहे परिषदीय शिक्षकों के साथ कथित अभद्र व्यवहार पर कड़ा रोष जताया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो शिक्षक बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी का बहिष्कार करने को विवश होंगे।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परीक्षाओं में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की व्यापक तैनाती की जा रही है, जिससे विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिला अध्यक्ष मुनीश कुमार मिश्रा ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गुणवत्ता सुधार के नाम पर शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं शिक्षकों को बोर्ड ड्यूटी में लगाकर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था बाधित की जा रही है।
जिला मंत्री देवेश बाजपेई ने आरोप लगाया कि कई परीक्षा केंद्रों पर परिषद के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। प्रत्येक कक्ष में एक आंतरिक और एक बाह्य निरीक्षक की व्यवस्था के बजाय दोनों ही निरीक्षक परिषदीय विद्यालयों से लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिला शिक्षिकाओं से दोनों पालियों में ड्यूटी कराई जा रही है, जबकि उनके लिए भोजन व जलपान की समुचित व्यवस्था नहीं है।
जिला कोषाध्यक्ष रविंद्र पाल प्रजापति ने बताया कि कुछ केंद्रों पर आवश्यकता से अधिक शिक्षकों को बुलाया जा रहा है, जिससे विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। वहीं, जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी ने एक मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पर महिला शिक्षिकाओं से अभद्र भाषा में बातचीत करने का आरोप लगाया और जिला विद्यालय निरीक्षक से सख्त कार्रवाई की मांग की।
संघ शाखा पुवायां अध्यक्ष अश्विनी अवस्थी ने कहा कि कई खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा आकस्मिक अवकाश आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से अवकाश पर रोक लगाने के आदेश दिए जा रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। संघ ने मांग की है कि यदि अवकाश पर रोक संबंधी कोई आदेश जारी है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

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आज विधानसभा की कार्यवाही अचानक सुनने को मिली। संदर्भ क्या था, यह स्पष्ट नहीं था, लेकिन “ब्राह्मणवाद” शब्द सुनकर मन व्यथित हुआ। लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए, विचारों का मतभेद भी होना चाहिए, पर किसी समाज विशेष को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
विधानसभा में श्री Alok Kumar Mehta का वक्तव्य चर्चा में रहा, और उसके जवाब में भाजपा विधायक श्री मान Mithilesh Tiwari Baikunthpur ने भगवान कृष्ण और सुदामा की कथा का उल्लेख किया। यह कथा केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है — जहां मित्रता, विनम्रता और सम्मान जाति से ऊपर है। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के चरण धोना इस बात का प्रतीक है कि सच्ची महानता सेवा और संस्कार में है।
ब्राह्मण समाज की पहचान केवल जाति से नहीं, बल्कि उसके योगदान और मूल्यों से है। ब्राह्मण समाज का स्थान भारतीय संस्कृति में सदैव ज्ञान, तप, त्याग और मार्गदर्शन के कारण अत्यंत सम्मानित रहा है। यह वह समाज है जो जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्म, संस्कार और आचरण से पहचाना जाता है।
ब्राह्मण विवाह में मंगलाचरण भी कराता है और श्राद्ध में पितरों का तर्पण भी — अर्थात जीवन के प्रारंभ से अंत तक हर संस्कार में उसकी भूमिका जुड़ी रहती है। वह समाज को केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और मर्यादा का बोध कराता है।
इतिहास साक्षी है कि ब्राह्मण समाज ने ज्ञान और संस्कार की परंपरा को जीवित रखा है। उसका सम्मान किसी अन्य समाज के अपमान से नहीं, बल्कि उसके अपने आदर्शों और योगदान से स्थापित होता है।
किसी भी समाज के बारे में कटु भाषा का प्रयोग सामाजिक सौहार्द को कमजोर करता है। हमें यह समझना होगा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और परस्पर सम्मान में है।
श्रेष्ठता का अर्थ दूसरों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि अपने आचरण से उच्च आदर्श स्थापित करना है। ब्राह्मण समाज ने इतिहास में ज्ञान, संस्कार और सेवा के माध्यम से जो भूमिका निभाई है, वह सम्मान के योग्य है — और हर समाज का सम्मान सुरक्षित रहना चाहिए।
समरसता ही भारत की असली ताकत है।
अखिलेश कुमार मिश्रा जिला उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी समस्तीपुर दक्षिणी किसान मोर्चा

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चंदवा के जिलिंग में पुलिस ने ढाई एकड़ में लगी अफीम की खेती को किया नष्ट

लातेहार (झारखंड)। जिले के पुलिस कप्तान कुमार गौरव के निर्देशन में जिले में तेजी से फल फूल रहे मादक पदार्थ अफीम पोस्ता की खेती को नष्ट कर कार्रवाई करने को लेकर निर्देश दिए जाने के बाद पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पुनि सह थाना प्रभारी रणधीर कुमार के नेतृत्व में चंदवा पुलिस की टीम ने थाना क्षेत्र अंतर्गत हुटाप पंचायत के जिलिंग वन क्षेत्र में अभियान चलाया।

इस दौरान पुलिस की टीम ने जिलिंग गांव के समीप वन क्षेत्र में लगभग ढाई एकड़ भूमि पर लगाये गए अफीम (पोस्ता) की खेती को नष्ट किया। विदित हो कि तोरार का जंगली इलाका गत कई वर्षों से अफीम की खेती के लिए चर्चा में रहा है।

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राकेश साहू के नेतृत्व में मानगो नगर निगम चुनाव में साहू समाज का जनसंपर्क अभियान तेज

जमशेदपुर (झारखंड)। अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा के जिला अध्यक्ष राकेश साहू ने मानगो नगर निगम चुनाव के तहत वार्ड संख्या 7 के प्रत्याशी गणेश साहू, वार्ड संख्या 10 के प्रत्याशी जितेंद्र साहू तथा वार्ड संख्या 11 की प्रत्याशी पूजा साहू के समर्थन में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया।

इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के साहू समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान कर समाज के प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की। राकेश साहू ने कहा कि लगभग 40 वर्षों बाद हो रहे इस चुनाव में साहू समाज की बढ़-चढ़कर भागीदारी अपने आप में गर्व का विषय है। उन्होंने 23 अप्रैल को सभी वार्डों में समाज द्वारा खड़े किए गए प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान करने की अपील की।

साथ ही बताया कि चुनाव प्रचार का अंतिम दिन होने के कारण कल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक विभिन्न वार्डों में पदयात्रा कर समाज के प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगे जाएंगे।

इस पदयात्रा कार्यक्रम में समाज के सम्मानित सदस्यगण भी सक्रिय रूप से शामिल रहेंगे।

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Cricket ki duniya mein jab

Australia

ki baat hoti hai, toh dimaag mein dominance aur trophies aati hain. Lekin filhaal scene kuch aur hi hai.

Adam Zampa

ne

Oman

ke khilaaf 4 wickets jhatak kar apni team ko jeet toh dila di, lekin unke chehre par woh khushi nahi thi jo ek match-winner ke paas honi chahiye. Jab poori team hi tournament se bahar ho chuki ho, toh personal milestones kachre ke dher jaisi lagti hain. Zampa ka saaf kehna hai ki yeh unke career ka sabse bura mehsoos hone wala 4-wicket haul hai. Airport ki tickets confirm ho chuki hain aur Mighty Aussies ab ghar ki flight pakadne ki taiyari mein hain.




The Inner Story: Australia ka T20 Downfall aur Zampa ka Dard




Asli maajra yeh hai ki

Australia

ne

Oman

ko 9 wickets se toh hara diya, par yeh jeet sirf ek formality thi.

Adam Zampa

ne match ke baad unfiltered hokar apna dard bayaan kiya. Unhone kaha ki bhale hi unhone wickets liye, par unhe "hollow" mehsoos ho raha hai. Australia ki halat aisi ho gayi hai ki Super Eights mein do matches haarne ke baad unka safar khatam ho gaya. Captain

Mitchell Marsh

pehle hi team ko devastated aur shattered bata chuke hain, lekin Zampa ne thoda gehraai mein jaakar bataya ki 2021 mein champion banne ke baad se

Australia

ka T20 graph lagatar neeche gir raha hai.




Zampa ne ek bahut badi baat kahi jo har Indian fan ka seena garv se chauda kar degi. Unhone maana ki ranking mein woh hamesha

India

ke peeche rahe hain aur jab bhi bilateral series hoti hai,

India vs Australia

ki takkar barabari ki hoti hai. Lekin World Cup jaise bade stage par aisi haar unke liye hazam karna mushkil hai. Australia ka exit isliye bhi chubh raha hai kyunki unhone

Zimbabwe

aur

Sri Lanka

ke saamne ghutne tek diye the. Jab aap aisi teams se haarte hain, toh aap trophy deserve nahi karte.




Analysis & Numbers: Australia ka Reality Check







Adam Zampa

ka spell: 4 wickets for 21 runs, jo stats mein toh kamaal hai par context mein zero.




World Cup Trend: 2021 mein Jeet ke baad, 2022 aur 2024 mein

Australia

semi-finals tak bhi nahi pahunch paayi.




Dominance ka end: Zampa ne maana ki Test cricket mein

Australia

abhi bhi boss hai, par white-ball cricket mein duniya unke kareeb aa chuki hai.




Preparation Failure: Coach

Andrew McDonald

aur staff ne mehnat toh poori ki, par on-field execution bilkul zero rahi.










The Guru Gyan Verdict:





Australia ka T20 World Cup se bahar hona world cricket ke liye ek bada wake-up call hai. Zampa ka statement dikhata hai ki Australian dressing room mein kitna frustration hai. Jab aap

India

ko apna benchmark maante ho, toh aapko unke jaisa consistency bhi dikhani hogi. Australia ko lagta tha ki woh sirf bade tournaments mein aakar jeet jayenge, par

Sri Lanka

aur

Zimbabwe

ne unka ghamand tod diya. Aur rahi baat hamare padosi

Pakistan

ki, toh unhe Zampa se seekhna chahiye—ise kehte hain accountability. Wahan toh haarne ke baad bhi log "dil dil" chillate hain, yahan 4 wickets lene wala banda bhi sharminda hai kyunki team haar gayi.

Australia

ki flight kal ki hai, aur shayad unka T20 dominance bhi usi flight ke saath hamesha ke liye ud gaya hai.








Stay tuned to The Guru Gyan for more unfiltered cricket masala!

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नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर उच्चस्तरीय समीक्षा, ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग और वैज्ञानिक जांच पर दिया गया जोर

रांची (झारखंड)। आज निष्ठा तिवारी, संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा-II), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा तदाशा मिश्र, महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखण्ड की संयुक्त अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय सभागार, रांची में नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों— भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा की गई। साथ ही अनुसंधान में साक्ष्य संकलन हेतु ई-साक्ष्य ऐप के सही एवं प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

संयुक्त सचिव श्रीमती निष्ठा तिवारी ने जिलों द्वारा ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग में आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की तथा निर्देश दिया कि नवीन कानूनों के अनुरूप सभी कांडों का अनुसंधान निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने वैज्ञानिक जांच को प्राथमिकता देते हुए फॉरेंसिक टीम की सहायता लेने पर भी जोर दिया।

बैठक में साइबर क्राइम, काउंटर टेररिज्म, ड्रग कंट्रोल, डिजास्टर मैनेजमेंट, पुलिस मॉडर्नाइजेशन तथा विदेशियों से संबंधित वैधानिक विषयों पर भी व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इन विषयों पर पुलिस की कार्यक्षमता एवं कार्यप्रणाली की समग्र समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में पुलिस एवं गृह विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ-साथ अभियोजन निदेशालय, स्वास्थ्य सेवा विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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जालौन/झांसी। भीड़भाड़ वाले बाजारों में पर्स और जेवरात चोरी करने वाली जालौन की एक शातिर महिला को आखिरकार जनता की सतर्कता ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। झांसी के सर्राफा बाजार क्षेत्र में सक्रिय इस महिला की पहचान सीसीटीवी फुटेज के जरिए हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे घेरकर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
🧕 बुर्के की आड़ में करती थी वारदात
बताया जा रहा है कि आरोपी महिला बुर्का पहनकर बाजारों में घूमती थी और मौका मिलते ही महिलाओं के पर्स से नकदी व जेवरात पार कर देती थी। वारदात को इतनी सफाई से अंजाम देती थी कि पीड़ितों को काफी देर तक चोरी का अहसास ही नहीं होता था।
मंगलवार को जब वह सर्राफा बाजार में नए शिकार की तलाश में थी, तभी एक सजग व्यक्ति ने उसे पहचान लिया। शोर मचने पर आसपास के लोगों ने उसे घेर लिया और पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।
📹 सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, हाल के दिनों में बाजार में हुई कई चोरियों की घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थीं। फुटेज के आधार पर महिला की पहचान की गई थी। पकड़े जाने के बाद पुलिस ने तलाशी ली तो उसके पास से करीब 40 हजार रुपये के चोरी के जेवरात और नकदी बरामद हुई।
🏠 जालौन की रहने वाली है आरोपी
पूछताछ में महिला ने अपना नाम रुखसार पत्नी इरफान, निवासी मोहल्ला मुरली मनोहर, जामा मस्जिद के पास, कस्बा जालौन, जिला जालौन बताया। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
👥 जनता की सतर्कता बनी मिसाल
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जागरूक नागरिक अपराध पर सबसे बड़ी चोट हैं। यदि बाजारों में इसी तरह सतर्कता बरती जाए तो ऐसे शातिर अपराधियों पर जल्द ही लगाम लगाई जा सकती है।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पहले किन-किन वारदातों में शामिल रही है।
रिपोर्ट
राजू पाटकार..

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पटना में सख्ती के बीच चलाए जा रहे वाहन जांच अभियान के दौरान बड़ी रकम बरामद होने का मामला सामने आया है। पटना पुलिस द्वारा जेपी सेतु पर नियमित चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक कार चालक पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने लगा।
पुलिस को संदेह होने पर टीम ने तुरंत कार का पीछा किया और कुछ दूरी पर वाहन को रोक लिया। तलाशी लेने पर कार से कुल 18 लाख 5 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
कार में सवार दो लोगों से जब इतनी बड़ी राशि के बारे में पूछताछ की गई तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मामले की सूचना आयकर विभाग को दे दी है।
फिलहाल आयकर विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद राशि का स्रोत क्या है और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

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जालौन/उरई। जनपद के उरई रेलवे स्टेशन स्थित टीआरडी (ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक) विभाग में देर रात Central Bureau of Investigation (CBI) की टीम ने छापेमारी कर कथित रिश्वतखोरी के मामले का खुलासा किया। संविदा भर्ती के नाम पर पैसे लेने के आरोप में सीनियर सेक्शन इंजीनियर समेत तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने पहले गोपनीय जांच की। आरोपों की पुष्टि होने पर लखनऊ से आई टीम ने जाल बिछाकर एक आरोपी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद उरई रेलवे स्टेशन की कॉलोनी और टीआरडी कार्यालय में छापा मारा गया। कार्रवाई के दौरान अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए गए।
🔎 कार्रवाई की प्रमुख बातें
🔹 एक गिरफ्तारी उरई से
🔹 दो गिरफ्तारियां चित्रकूट से
🔹 संविदा भर्ती प्रक्रिया में पैसों की मांग का आरोप
🔹 रात 12 बजे रेलवे कॉलोनी व टीआरडी दफ्तर में छापेमारी
🔹 करीब ढाई घंटे चली पूछताछ और तलाशी
छापेमारी की खबर से रेलवे कॉलोनी में देर रात तक हलचल बनी रही और विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति देखी गई।
❓ उठे बड़े सवाल
➡ क्या संविदा भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?
➡ क्या और कर्मचारी जांच के दायरे में आएंगे?
➡ क्या भर्ती प्रक्रिया की व्यापक स्तर पर जांच होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती में भ्रष्टाचार सीधे तौर पर बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आधिकारिक प्रेस रिलीज का इंतजार किया जा रहा है।
जालौन और चित्रकूट क्षेत्र में इस कार्रवाई को बड़ा संदेश माना जा रहा है। अब सबकी नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई और आगे होने वाले खुलासों पर टिकी है।
रिपोर्ट
राजू पाटकार...

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