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महिला उद्यमियों की सहायता और उन्हें सशक्त बनाने के लिए देशकाल सोसइटी कर रही है पहल, बौद्ध कला और बोधगया की मूतिर्कला को सिलाई, कढ़ाई और डिजाइनिंग के माध्यम से करेंगे उत्पाद।

बोधगया।

मस्तीपुर गांव के ग्रामीण महिलाओं को घर में बैठकर रोजगार से जोड़ने जैसे कायर्क्रम की शुरुआत को लेकर गुरुवार को देशकला सोसाइटी द्वारा एक कायर्क्रम मस्तीपुर देवी मंदिर के पास व शाम को एक निजी होटल में किया गया। घर बैठे ही बुद्ध के आकृति को कैसे सिलाई, डिजाइनिंग और कढ़ाई के माध्यम से उकेर कर पैसे कमाया जा सकता है। इन सभी बातो की जानकारी देते हुए जमर्नी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रमुख प्रो0 डा0 राहुल मुखर्जी ने कहा कि बोधगया बौद्ध जगत का प्रमुख केंद्र है। इसकी पुष्टि महाबोधि मंदिर परिसर को विश्व धरोहर स्थल के रुप में नामित करने और बौद्ध कला, मूर्तिकला और चित्रों की व्यापक सवोर्त्कृष्टता के स्थल के रुप में इसके पोषित महत्व से होती है। इसी तरह बोधगया में विभिन्न देशों के एक सौ से अधिक मंदिर और मठ हैं, जो अपनी विशिष्ट बौद्ध कला और मूर्तिकला को प्रदर्शित करते हैं। यह सब बोधगया को वैश्विक महत्व के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल के रुप में उत्कृष्ट बनाता है। उल्लेखनीय है कि भारत और विदेशों से लाखों पयर्टक और तीथर्यात्री बुद्ध की विभिन्न छवियों और बोधगया में बिखरे हुए कला और मूर्तिकला के विभिन्न रुपों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए बोधगया आते हैं। बौद्ध सर्किट में बोधगया सबसे उपयुक्त स्थान है, जहां महिलाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई और डिजाइनिंग में प्रशिक्षण और कौशल निमार्ण कायर्क्रम को शुरु करने जा रही है। जो बौद्ध कला और मूतिर्कला की विविधता से जुड़ी हुई हो। चिवर, टी-शटर्, कुतीर्, भिक्षु बैग, पयर्टन बैग, स्लिंग बैग आदि बनाने के लिए महिलाओं की रचनात्मकता और कौशल को सुगम बनाया जाएगा।

संस्था के फाउंडर संजय कुमार ने बताया कि सभी समानों पर बौद्ध कला और बोधगया की चित्रों तथा मूतिर्कला की छाप रहेगी, जो पयर्टकों, तीथर्यात्रियों और प्रबुद्ध लोगों के बीच भी इन उत्पादों की एक नई तरह की वैश्विक मांग पैदा होगी। उन्होने कहा कि प्रारंभिक और अग्रिम पाठ्यक्रमों में कौशल और ज्ञान प्राप्त करने वाले प्रशिक्षुओं को बोधगया ( बिहार ) और राष्ट्रीय स्तर पर भी रोज़गार बाज़ार में रोज़गार के लिए अनुशंसित किया जाएगा । सामाजिक ज़िम्मेदारियों में विश्वास रखने वाली कंपनियों और हितधारकों के ऐसे नवोन्मेषी कार्यक्रमों को अवसर और समर्थन देने के लिए आगे आने की संभावना है । देशकाल सोसाइटी इन कंपनियों और हितधारकों के साथ जुड़ाव और समन्वय विकसित करने के लिए आधार तैयार करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि पाठ्यक्रम के सफल प्रतिभागियों को रोज़गार बाज़ार में अवसरों का लाभ मिले । इस संबंध में , नोएडा और दिल्ली स्थित अफताब इंटरनेशनल, एसएम फैब्रिक्स , एएडीएनई एक्सपोर्ट्स और श्री हरदेव फैशन जैसी गारमेंट कंपनियां सफल कोर्स प्रतिभागियों की कैंपस भर्ती करने का वादा कर चुकी हैं ।

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